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विष्णु प्रभाकर
लेखक परिचय (विष्णु प्रभाकर):
विष्णु प्रभाकर हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककार, एकांकीकार और गांधीवादी विचारक थे। उनका जन्म सन् 1912 में हुआ था। उन्होंने हिन्दी साहित्य को अनेक महत्वपूर्ण नाटक, एकांकी, कहानी और उपन्यास दिए। उनकी रचनाओं में सामाजिक समस्याओं, मानवीय मूल्यों और नैतिकता का सुंदर चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘प्रभात’, ‘समीप’, ‘होरी’ आदि नाटक तथा ‘अशोक’, ‘प्रकाश और परछाईं’ जैसे एकांकी संग्रह शामिल हैं। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और संवादात्मक है।
एकांकी का सारांश (ऐसे-ऐसे):
“ऐसे-ऐसे” एक हास्य-प्रधान एकांकी है, जिसमें एक छोटे बच्चे की मनोवैज्ञानिक स्थिति और उसके डर को बहुत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इस एकांकी का मुख्य पात्र मोहन है, जो लगभग आठ-नौ वर्ष का एक विद्यार्थी है। एक दिन वह घर में पेट दर्द का बहाना बनाकर लेटा रहता है। वह बार-बार कहता है कि उसके पेट में “ऐसे-ऐसे” हो रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर पाता कि दर्द कैसा है। उसके माता-पिता बहुत चिंतित हो जाते हैं। माँ उसे तरह-तरह के घरेलू उपाय देती है, जैसे हींग, चूरन और गरम पानी से सेंक, लेकिन कोई फायदा नहीं होता।
पिता भी उसकी हालत देखकर घबरा जाते हैं और डॉक्टर को बुलाते हैं। डॉक्टर से फोन पर भी वे “ऐसे-ऐसे” का सही मतलब नहीं समझा पाते। इसी बीच पड़ोसी दीनानाथ और एक वैद्य जी भी आ जाते हैं। वैद्य जी अपने अनुभव के आधार पर कहते हैं कि मोहन को कब्ज और वात का रोग है और वे दवा दे देते हैं। इसके बाद डॉक्टर भी आता है और वह भी अलग तरह की बीमारी बताकर दवा लिख देता है।
मोहन की हालत देखकर सभी लोग अलग-अलग अंदाज़े लगाते हैं और तरह-तरह की बातें करते हैं। माँ बहुत घबरा जाती है और उसे लगता है कि शायद कोई गंभीर बीमारी हो गई है। पड़ोसिन भी आकर नई-नई बीमारियों का डर दिखाने लगती है।
इसी बीच मोहन के स्कूल के मास्टर जी आते हैं। वे मोहन से बातचीत करते हैं और उसकी समस्या को समझने की कोशिश करते हैं। जब वे उससे पूछते हैं कि क्या उसने स्कूल का काम पूरा कर लिया है, तो मोहन चुप हो जाता है और सिर हिलाकर मना कर देता है। तब मास्टर जी तुरंत समझ जाते हैं कि असली समस्या क्या है।
दरअसल, मोहन ने अपना स्कूल का काम पूरा नहीं किया था और उसे डर था कि अगले दिन स्कूल में उसे डाँट पड़ेगी। इसी डर के कारण उसने पेट दर्द का बहाना बनाया और “ऐसे-ऐसे” कहकर अपनी स्थिति व्यक्त करने लगा।
मास्टर जी हँसते हुए बताते हैं कि यह कोई शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि मानसिक डर है। वे उसे समझाते हैं कि वह दो दिन की छुट्टी लेकर अपना काम पूरा कर ले, तो उसका “ऐसे-ऐसे” अपने आप ठीक हो जाएगा।
यह सुनकर सब लोग हैरान रह जाते हैं। माँ को अपनी गलती का एहसास होता है कि उसने बिना कारण इतना घबरा कर पैसे और समय खर्च कर दिया। पिता भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। अंत में सभी लोग मोहन की चालाकी पर हँस पड़ते हैं।
मुख्य संदेश:
यह एकांकी हमें सिखाती है कि कई बार बच्चों की समस्याएँ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक होती हैं। डर और चिंता के कारण वे बीमार होने का बहाना बना लेते हैं। इसलिए बच्चों को समझने और उनके मनोभावों को जानने की आवश्यकता होती है। साथ ही यह भी संदेश मिलता है कि हमें किसी समस्या को बिना समझे उस पर अधिक प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए।
ऐसे-ऐसे का वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
(क) किसके पेट में “ऐसे-ऐसे” होता है?
(i) मोहन के
(ii) सोहन के
(iii) रोहन के
उत्तर: (i) मोहन के
(ख) “क्या हो गया? दोपहर को भला चंगा गया था?” यह वाक्य किसने कहा?
(i) माँ
(ii) पिताजी
(iii) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (i) माँ
(ग) सबसे पहले मोहन का इलाज किसने किया?
(i) वैद्यजी
(ii) डॉक्टर जी
(iii) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (i) वैद्यजी
(घ) “डॉ० साहब, कुछ समझ में नहीं आता।” यहाँ वक्ता कौन है?
(i) पिता
(ii) माता
(iii) वैद्य
उत्तर: (i) पिता
(ङ) “हूँ, शायद सवाल रह गए हैं।” यहाँ वक्ता कौन है?
(i) मास्टर जी
(ii) वैद्यनी
(iii) पिताजी
उत्तर: (i) मास्टर जी
ऐसे-ऐसे का लघुउत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
(क) बीमार विद्यार्थी का क्या नाम है?
उत्तर: बीमार विद्यार्थी का नाम मोहन है।
(ख) मोहन के पिताजी के अनुसार मोहन ने क्या खाया था?
उत्तर: मोहन के पिताजी के अनुसार मोहन ने सिर्फ एक केला और एक संतरा खाया था ।
(ग) मोहन के पिताजी किस नंबर पर फोन मिलाते हैं?
उत्तर: मोहन के पिताजी डॉक्टर के ४३३३२ पर फोन मिलाते हैं।
(घ) डॉक्टर के अनुसार मोहन को कौन-सी बीमारी है?
उत्तर: डॉक्टर के अनुसार मोहन को कब्ज हुई थी।
(ङ) मोहन ने महीना भर क्या किया?
उत्तर: मोहन ने महीने भर मोज की ।
ऐसे-ऐसे का बोधमूलक प्रश्न (Analytical Questions)
(क) मोहन बीमारी का बहाना क्यों बनाता है?
उत्तर: मोहन बीमारी का बहाना इसलिए बनाता है क्योंकि उसे स्कूल नहीं जाना होता था और पढ़ाई से बचना चाहता था।
(ख) वैद्य जी ने मोहन को कौन-कौन सी बीमारी बताई?
उत्तर: वैद्य जी ने मोहन को कब्ज की बताई।
(ग) मोहन की बीमारी को मास्टर साहब कैसे पकड़ लेते हैं?
उत्तर: मास्टर साहब मोहन के झूठे बहानों को पहले से जानते थे और उन्होंने मोहन की हरकतों से समझ लिया कि वह नाटक कर रहा है।
(घ) माँ मोहन के “ऐसे-ऐसे” कहने पर क्यों घबरा रही थी?
उत्तर: माँ को लगा कि मोहन को सच में कोई गंभीर बीमारी हो गई है, इसलिए वह घबरा गई।
(ङ) ऐसे कौन-कौन से बहाने होते हैं जिन्हें मास्टर जी एक ही बार में सुनकर समझ जाते हैं? ऐसे कुछ बहानों के बारे में लिखो।
उत्तर: मास्टर जी को निम्नलिखित बहाने सुनकर समझ में आ जाता है कि कोई विद्यार्थी झूठ बोल रहा है:
- सिर में दर्द हो रहा है।
- पेट में दर्द हो रहा है।
- हाथ-पैर दुख रहे हैं।
- बुखार आ गया है।
- ठंड लग रही है।
(च) “वाह बेटा जी, वाह! तुमने तो खूब छकाया।” कहने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका तात्पर्य यह है कि मोहन ने बीमारी का झूठा नाटक करके सभी को बेवकूफ बनाया और अंत में पकड़ा गया।
विचार और कल्पना :
(क)यदि सचमुच मोहन के पेट में दर्द होता और पहले के झूठे बहानों के कारण कोई उसकी बात पर विश्वास न करता, तो उसकी स्थिति बहुत कठिन हो जाती। वह दर्द से परेशान होता, लेकिन उसे समय पर इलाज नहीं मिल पाता। उसे अकेलापन और पछतावा महसूस होता कि पहले झूठ बोलने के कारण अब उसकी सच्ची बात भी कोई नहीं मान रहा। इससे उसे यह सीख मिलती कि झूठ बोलने से विश्वास टूट जाता है और भविष्य में परेशानी उठानी पड़ती है।
(ख)लेखक ने संवादों को रोचक और जीवंत बनाने के लिए बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है। इन पंक्तियों को साधारण भाषा में इस प्रकार लिखा जा सकता है—
- “लोचा-लोचा फिरे हैं” → “बहुत परेशान हो रहा है” या “अजीब-सी हालत में है”
- “तेरे पेट में तो बहुत बड़ी दाढ़ी है” → “तुझे कोई बड़ी बीमारी नहीं है, तुम नाटक कर रहे हो”
- “ऐसे-ऐसे होता है” → “पेट में अजीब तरह का दर्द हो रहा है”
- “नाचता फिरता है” → “बेचैनी से इधर-उधर घूम रहा है”
(ग)संकट के समय कुछ जरूरी फोन नंबर याद रखने चाहिए, जैसे—
- पुलिस – 112
- फायर ब्रिगेड – 101
- एम्बुलेंस/डॉक्टर – 108 या 999 (यूके में)
बात करने का तरीका:
- सबसे पहले अपना नाम और स्थान स्पष्ट बताना चाहिए।
- समस्या को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए।
- घबराना नहीं चाहिए और शांत रहकर जानकारी देनी चाहिए।
- जो भी निर्देश दिए जाएँ, उन्हें ध्यान से सुनकर पालन करना चाहिए।
भाषा बोध :
(क) पाँच-पाँच उदाहरण—
संज्ञा (Noun):
- मोहन
- माँ
- पिता
- डॉक्टर
- स्कूल
सर्वनाम (Pronoun):
- वह
- यह
- मैं
- तुम
- हम
विशेषण (Adjective):
- बीमार
- छोटा
- परेशान
- नटखट
- कमजोर
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