कारतूस
— हबीब तनवीर
1. लेखक परिचय — हबीब तनवीर
हबीब तनवीर हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार, रंगकर्मी, अभिनेता और निर्देशक थे। उनका जन्म 1 सितंबर 1923 को रायपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उनका मूल नाम हबीब अहमद था। उन्होंने उच्च शिक्षा नागपुर और अलीगढ़ में प्राप्त की तथा आगे चलकर लंदन में रंगमंच का अध्ययन किया।
हबीब तनवीर ने हिंदी रंगमंच को लोकजीवन और लोकभाषा से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने ग्रामीण कलाकारों और लोक कलाकारों को अपने नाटकों में विशेष स्थान दिया। उनकी रचनाओं में भारतीय समाज, आम आदमी का जीवन, सामाजिक विषमता और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं।
उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘आगरा बाजार’, ‘चरणदास चोर’, ‘मिट्टी की गाड़ी’ आदि प्रमुख हैं। उनके नाटकों में लोकगीत, लोकभाषा, हास्य और व्यंग्य का सुंदर प्रयोग मिलता है।
हबीब तनवीर को भारतीय रंगमंच में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए अनेक पुरस्कार और सम्मान मिले। उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।
‘कारतूस’ एक ऐतिहासिक एकांकी है। इसमें अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले वजीर अली के साहस, वीरता और बुद्धिमत्ता का प्रभावशाली चित्रण किया गया है।
2. पाठ की विधा
‘कारतूस’ एक ऐतिहासिक एकांकी/नाटक है।
इसमें अवध के नवाब वजीर अली और अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है।
3. पूरी कहानी का सारांश
‘कारतूस’ हबीब तनवीर का प्रसिद्ध ऐतिहासिक एकांकी है। इसकी कहानी उस समय की है जब भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी अपना प्रभाव बढ़ा रही थी और भारतीय शासकों को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास कर रही थी।
कहानी का मुख्य पात्र वजीर अली है। वह अवध का नवाब था और अंग्रेजों का कट्टर विरोधी था। अंग्रेजों को वजीर अली से बहुत डर लगता था, क्योंकि वह साहसी, बुद्धिमान और जाँबाज था। वह अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना चाहता था।
अंग्रेजों ने वजीर अली को अवध के नवाब के पद से हटा दिया और उसकी जगह सआदत अली को अवध के तख्त पर बैठा दिया। अंग्रेजों का उद्देश्य था कि सआदत अली उनके नियंत्रण में रहे और अंग्रेजों को उससे कोई खतरा न हो।
वजीर अली को यह अपमान स्वीकार नहीं था। उसके दिल में अंग्रेजों के प्रति बहुत गहरी नफरत थी। उसने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और जंगलों में अपने साथियों के साथ रहने लगा।
अंग्रेज अधिकारी कर्नल वजीर अली को गिरफ्तार करना चाहता था। वह अपनी सेना के साथ जंगल में डेरा डाले हुए था। कर्नल को उम्मीद थी कि किसी न किसी प्रकार वजीर अली को पकड़ लिया जाएगा।
इसी बीच एक रहस्यमय सवार कर्नल के शिविर में आता है। वह कर्नल से मिलने की इच्छा प्रकट करता है। कर्नल को लगता है कि शायद वह वजीर अली का कोई आदमी है और वजीर अली को पकड़वाने के लिए कोई सूचना देने आया है।
सवार कर्नल के सामने पहुँचकर बताता है कि वह वजीर अली के बारे में जानता है। बातचीत के दौरान वह कर्नल से दस कारतूस माँगता है। कर्नल उसे कारतूस दे देता है।
इसके बाद सवार अचानक अपना असली परिचय बताता है। वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि स्वयं वजीर अली होता है। कर्नल यह जानकर हक्का-बक्का रह जाता है कि जिस व्यक्ति को वह पकड़ना चाहता था, वही उसके सामने बैठकर उससे कारतूस लेकर चला गया।
वजीर अली की इस चालाकी और साहस से कर्नल अत्यंत प्रभावित होता है। वह समझ जाता है कि वजीर अली को पकड़ना वास्तव में बहुत कठिन है।
कहानी के अंत में वजीर अली की बहादुरी और बुद्धिमत्ता सामने आती है। वह अंग्रेजों के बीच पहुँचकर भी बिना पकड़े निकल जाता है और उनके ही कारतूस लेकर चला जाता है।
इस प्रकार ‘कारतूस’ में वजीर अली को एक ऐसे जाँबाज योद्धा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो कम साधनों के बावजूद अंग्रेजों जैसी शक्तिशाली कंपनी को चुनौती देने का साहस रखता है।
4. वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) खेमा कहाँ के जंगल में लगाया गया?
उत्तर: (ii) बनारस के जंगल में।
(ख) यहाँ किस जमाने की कहानी कही गई है?
उत्तर: (ii) सन् 1799 के समय की।
(ग) किसके अफसाने सुनकर रॉबिन हुड की याद आ जाती थी?
उत्तर: (iii) वजीर अली के।
(घ) वजीर अली के दिल में किसके प्रति नफरत कूट-कूटकर भरी थी?
उत्तर: (ii) अंग्रेजों के प्रति।
5. लघुत्तरीय प्रश्न-उत्तर
(1) कर्नल ने सवार पर नजर रखने के लिए क्यों कहा?
उत्तर: कर्नल को संदेह था कि सवार वजीर अली का कोई आदमी हो सकता है। इसलिए उसने सवार पर नजर रखने के लिए कहा, ताकि उसकी गतिविधियों का पता लगाया जा सके और जरूरत पड़ने पर उसे गिरफ्तार किया जा सके।
(2) सवार ने क्यों कहा कि वजीर अली की गिरफ्तारी बहुत मुश्किल है?
उत्तर: सवार ने कहा कि वजीर अली बहुत बहादुर, चालाक और साहसी है। वह अंग्रेजों की आँखों में धूल झोंककर आसानी से निकल जाता है। इसलिए उसकी गिरफ्तारी बहुत मुश्किल है।
(3) सआदत अली कौन था? उसने वजीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों कहा?
उत्तर: सआदत अली अवध के नवाब आसिफउद्दौला का भाई था। वह वजीर अली का चाचा था। वजीर अली के जन्म को उसने अपनी मौत इसलिए कहा क्योंकि उसे डर था कि वजीर अली के जीवित रहते उसे अवध का तख्त कभी नहीं मिलेगा।
(4) सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?
उत्तर: सवार के जाने के बाद कर्नल को पता चला कि वह कोई सामान्य सवार नहीं बल्कि स्वयं वजीर अली था। वह उसके सामने आकर दस कारतूस लेकर चला गया और कर्नल उसे पहचान भी नहीं पाया। इस घटना से कर्नल हक्का-बक्का रह गया।
(5) जाँबाज सिपाही किसे कहा गया और क्यों?
उत्तर: वजीर अली को जाँबाज सिपाही कहा गया। वह अत्यंत साहसी, निडर और बुद्धिमान था। उसने अंग्रेजों के शिविर में अकेले जाकर कर्नल से मुलाकात की, उससे कारतूस लिए और बिना पकड़े वापस चला गया।
6. बोधमूलक प्रश्न-उत्तर
(1) सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?
उत्तर: कर्नल का मकसद था कि अवध की सत्ता पर ऐसा व्यक्ति बैठे जो अंग्रेजों का विरोध न करे और कंपनी के नियंत्रण में रहे। सआदत अली अंग्रेजों का समर्थक था। इसलिए अंग्रेजों ने उसे अवध के तख्त पर बैठाकर अपना प्रभाव मजबूत किया और वजीर अली जैसे विद्रोही से छुटकारा पाने की कोशिश की।
(2) कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वजीर अली ने अपने को कैसे बचाया?
उत्तर: कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वजीर अली ने अंग्रेजों से बचने के लिए जंगलों में शरण ली। वह अपने साथियों के साथ जंगल में रहने लगा और अपनी पहचान तथा गतिविधियों को गुप्त रखा। उसकी चालाकी के कारण अंग्रेज लंबे समय तक उसे पकड़ नहीं सके।
(3) वजीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?
उत्तर: वजीर अली को अंग्रेजों के प्रति बहुत गुस्सा और नफरत थी। कंपनी के वकील ने उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया था। इसी कारण क्रोध में आकर वजीर अली ने कंपनी के वकील की हत्या कर दी।
(4) वजीर अली एक जाँबाज सिपाही था—कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: वजीर अली अत्यंत साहसी और निडर था। अंग्रेज उसे पकड़ने के लिए जंगल में डेरा डाले हुए थे, फिर भी वह अकेला उनके शिविर में पहुँच गया। उसने अपनी पहचान छिपाकर कर्नल से बातचीत की और उससे दस कारतूस माँग लिए। कारतूस लेने के बाद उसने अपना असली परिचय बताया और वहाँ से निकल गया। अंग्रेज उसे पकड़ नहीं सके। इससे उसकी वीरता, साहस और बुद्धिमानी सिद्ध होती है।
(5) “मुट्ठीभर आदमी और ये दमखम” का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस कथन का अर्थ है कि वजीर अली के साथ बहुत कम लोग थे, लेकिन उनमें बहुत अधिक साहस, उत्साह और लड़ने की शक्ति थी। संख्या में कम होने के बावजूद वे अंग्रेजों जैसी शक्तिशाली कंपनी को चुनौती देने का साहस रखते थे।
7. भाषा-बोध
1. कारक पहचानिए
(क) जंगल की जिंदगी बड़ी खतरनाक होती है।
‘जंगल की’ — संबंध कारक
(ख) कंपनी के खिलाफ सारे हिन्दुस्तान में एक लहर दौड़ गई।
‘कंपनी के खिलाफ’ — संबंध/विरोध सूचक प्रयोग
‘हिन्दुस्तान में’ — अधिकरण कारक
(ग) वजीर को उसके पद से हटा दिया गया।
‘वजीर को’ — कर्म कारक
‘पद से’ — अपादान कारक
(घ) फौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।
‘फौज के लिए’ — सम्प्रदान कारक
‘कारतूस की’ — संबंध कारक
(ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था।
‘घोड़े पर’ — अधिकरण कारक
8. ‘ने’ लगाकर वाक्य दोबारा लिखिए
(क) घोड़ा पानी पी रहा था।
घोड़े ने पानी पिया।
(ख) बच्चे दशहरे का मेला देखने गये।
बच्चों ने दशहरे का मेला देखने के लिए गए।
(ग) रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।
रॉबिनहुड ने गरीबों की मदद की।
(घ) देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।
देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।
9. पर्यायवाची शब्द
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| खिलाफ | विरुद्ध |
| उम्मीद | आशा |
| हासिल | प्राप्त |
| कामयाब | सफल |
| नफरत | घृणा |
| इंतजार | प्रतीक्षा |
10. मुहावरों का वाक्य-प्रयोग
आँखों में धूल झोंकना
वजीर अली ने अंग्रेजों की आँखों में धूल झोंककर उनके शिविर से कारतूस ले लिए।
काम तमाम कर देना
वीर सैनिक ने शत्रु का काम तमाम कर दिया।
जान बख्श देना
सैनिक ने शत्रु की विनती सुनकर उसकी जान बख्श दी।
हक्का-बक्का रह जाना
वजीर अली का असली परिचय जानकर कर्नल हक्का-बक्का रह गया।
कूट-कूटकर भरना
वजीर अली के दिल में अंग्रेजों के प्रति नफरत कूट-कूटकर भरी थी।
11. संवाद को अनुच्छेद रूप में
सवार ने बाहर से कहा कि उसे कर्नल से मिलना है। गोरा सिपाही चिल्लाकर बोला कि बहुत खूब। सवार ने फिर कहा कि उसे कर्नल से मिलना है। गोरा अंदर जाकर कर्नल से बोला कि हुजूर, एक सवार आपसे मिलना चाहता है। कर्नल ने उसे अंदर भेजने के लिए कहा। लेफ्टिनेंट ने कहा कि वह जरूर वजीर अली का कोई आदमी होगा और हमसे मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा। कर्नल ने उसे खामोश रहने के लिए कहा। तभी सवार सिपाही के साथ अंदर आया और आते ही बोला कि तन्हाई-तन्हाई, यहाँ कोई गैर आदमी नहीं है। सवार ने दीवारों के भी कान होने की बात कहते हुए सावधानी बरतने का संकेत दिया।
12. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- पाठ: कारतूस
- लेखक: हबीब तनवीर
- विधा: ऐतिहासिक एकांकी/नाटक
- मुख्य पात्र: वजीर अली
- अन्य पात्र: कर्नल, सआदत अली, लेफ्टिनेंट, सवार/वजीर अली, गोरा सिपाही
- समय: लगभग सन् 1799
- स्थान: बनारस के जंगल
- वजीर अली: अंग्रेजों का कट्टर विरोधी
- सआदत अली: वजीर अली का चाचा
- कर्नल का उद्देश्य: वजीर अली को गिरफ्तार करना
- वजीर अली की विशेषताएँ: साहसी, निडर, बुद्धिमान, चालाक और जाँबाज
- मुख्य संदेश: कम साधनों के बावजूद साहस, बुद्धि और आत्मविश्वास से बड़ी शक्ति का सामना किया जा सकता है।
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