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दीवार का चित्र कहानी का सार अपने शब्दों में
“दीवार का चित्र” एक रोचक और शिक्षाप्रद कहानी है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हर व्यक्ति अपने दृष्टिकोण से चीजों को देखता और समझता है। जो व्यक्ति कहानी सुनाता है या चित्र बनाता है, वह अक्सर अपने पक्ष को बड़ा और सही दिखाने की कोशिश करता है। इस कहानी के माध्यम से यह समझाया गया है कि किसी भी घटना को केवल एक ही पक्ष से देखकर पूरी सच्चाई नहीं समझी जा सकती।
नीचे इस कहानी का सरल और विस्तृत सारांश दिया गया है ताकि विद्यार्थी इसे आसानी से समझ सकें।
१. दीवार का चित्र कहानी में देश की दशा :
बहुत पुराने समय की बात है। उस समय देश में चारों ओर घने जंगल हुआ करते थे। जंगल इतने बड़े और गहरे थे कि उनमें अनेक प्रकार के जानवर रहते थे। गाँव छोटे-छोटे होते थे और लोग प्रकृति के बहुत करीब रहते थे।
उस समय लोगों का जीवन बहुत सरल था। लोग खेती करते थे और जंगलों से फल-फूल इकट्ठा करके अपना जीवन चलाते थे। कुछ लोग शिकार करके भी अपना भोजन प्राप्त करते थे। गाँव के लोग मेहनती और साहसी होते थे। वे जंगल से डरते नहीं थे बल्कि उसे अपने जीवन का हिस्सा मानते थे।
उसी गाँव में एक शिकारी भी रहता था। वह शिकार करने में बहुत निपुण था। जंगल के जानवर उससे बहुत डरते थे क्योंकि वह तीर-धनुष से शिकार करता था। वह अक्सर जंगल में जाता, पक्षियों और जानवरों का शिकार करता और उनसे अपना जीवन चलाता था।
शिकारी का जीवन बहुत आराम से गुजर रहा था। वह जंगल से फल खाता, शिकार करता और अपने दोस्तों के साथ हँसी-खुशी रहता था।
२. दीवार का चित्र कहानी में शिकारी और बाघ की मुलाकात :
एक दिन जंगल में एक अनोखी घटना हुई। जंगल में घूमते समय उस शिकारी की मुलाकात एक बड़े बाघ से हो गई। सामान्य रूप से यदि कोई आदमी और बाघ आमने-सामने आ जाएँ तो दोनों में डर या लड़ाई की स्थिति हो सकती है। लेकिन यहाँ कुछ अलग ही हुआ।
शिकारी और बाघ दोनों ने एक-दूसरे को देखा और धीरे-धीरे बात करने लगे। बातों-बातों में दोनों के बीच मित्रता हो गई। वे दोनों काफी देर तक बातें करते रहे।
उस दिन के बाद से वे अक्सर जंगल में मिलते और बातचीत करते। धीरे-धीरे उनकी मित्रता और गहरी हो गई। वे एक-दूसरे की बातें सुनते और साथ समय बिताते।
एक दिन शिकारी ने बाघ से कहा कि उसे अपने घर आने का निमंत्रण स्वीकार करना चाहिए। उसने कहा, “अगर तुम मेरे घर चलोगे तो मुझे बहुत खुशी होगी।”
बाघ ने कुछ देर सोचा और फिर अपने मित्र की बात मान ली। उसने तय किया कि वह शिकारी के घर जरूर जाएगा।
३. दीवार का चित्र कहानी में बाघ शिकारी के घर जाता है :
कुछ समय बाद दोनों साथ-साथ शिकारी के घर की ओर चल पड़े। वे पहले जंगल के रास्ते से निकले और फिर खुले मैदान में पहुँचे।
मैदान के आसपास सुंदर खेत थे जिनमें फसलें लहलहा रही थीं। खेतों के पास ही शिकारी का छोटा सा घर था। घर बहुत साधारण था लेकिन साफ-सुथरा था।
बाघ धीरे-धीरे घर के अंदर गया और मिट्टी की फर्श पर बैठ गया। उसे वहाँ बैठकर बहुत आराम महसूस हुआ।
शिकारी ने अपने अतिथि का अच्छे से स्वागत किया। वह तालाब से ठंडा पानी लाया और लोटे में भरकर बाघ के सामने रखा। बाघ ने अपनी जीभ से धीरे-धीरे पानी पी लिया।
पानी पीने के बाद बाघ अपने मित्र की ओर देखने लगा। उसे अपने मित्र के घर का वातावरण अच्छा लग रहा था।
४. बाघ की नजर दीवार के चित्र पर जाती है :
तभी अचानक बाघ की नजर दीवार पर टंगे एक चित्र पर पड़ी। वह चित्र हाथ से बनाया गया था। चित्र में एक आदमी तीर-धनुष लिए खड़ा था और उसके पैरों के पास एक मरा हुआ बाघ पड़ा था।
चित्र में ऐसा लग रहा था कि आदमी ने बाघ को मार दिया है और वह बहुत गर्व महसूस कर रहा है। उस चित्र को देखकर ऐसा लगता था कि वह आदमी बहुत बड़ा वीर और बहादुर है।
शिकारी ने जब देखा कि बाघ चित्र को ध्यान से देख रहा है, तो वह बहुत खुश हुआ। उसने गर्व से कहा कि यह चित्र उसके दादाजी का है।
उसने कहा, “मेरे दादाजी बहुत बड़े शिकारी थे। उन्होंने कई बाघों और अन्य जानवरों का शिकार किया था। वे बहुत बहादुर थे। मेरे पिताजी भी बड़े शिकारी थे और मैं भी शिकारी हूँ।”
शिकारी अपने परिवार की बहादुरी की बातें बड़े गर्व से बता रहा था।
५. बाघ दीवार के चित्र को देखकर कहता है :
बाघ ने धीरे से जम्हाई ली और शांत स्वर में पूछा, “यह चित्र किसने बनाया है?”
शिकारी ने उत्तर दिया, “इसे मेरे पिताजी ने बनाया है। वे बहुत अच्छे चित्रकार भी थे।”
बाघ ने फिर मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा, तो यह चित्र मनुष्य ने बनाया है?”
शिकारी ने कहा, “हाँ, मेरे पिताजी मनुष्य ही थे।”
तब बाघ ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “अगर यह चित्र किसी बाघ ने बनाया होता, तो इसका दृश्य कुछ और ही होता।”
बाघ का मतलब यह था कि अगर बाघ चित्र बनाता तो वह दिखाता कि बाघ ने मनुष्य को हरा दिया है।
बाघ की यह बात बहुत गहरी थी। इससे यह समझ में आता है कि हर व्यक्ति अपनी कहानी में खुद को मजबूत और विजयी दिखाने की कोशिश करता है।
कहानी से मिलने वाली शिक्षा
इस कहानी से हमें कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं—
हर व्यक्ति अपने नजरिए से चीजों को देखता है।
जो कहानी सुनाता है, अक्सर वही खुद को सही साबित करने की कोशिश करता है।
हमें किसी भी घटना को समझने के लिए दोनों पक्षों को देखना चाहिए।
सच्चाई को समझने के लिए खुले मन से सोचने की आवश्यकता होती है।
१. एक वाक्य में उत्तर दो।
१.१. दीवार पर बनाए गए चित्र तुमने कहाँ-कहाँ देखे हैं?
उत्तर:दीवार पर बनाए गए चित्र हमने किताबों पर देखा है ।
१.२. बहुत दिनों पहले आदमी / मनुष्य कहाँ रहता था ?
उत्तर:उन दिनों लोग जंगल के किनारे गाँव में रहते थे।
१.३. उस समय उसके दिन कैसे कटते थे ?
उत्तर:खेती-बारी करते, जंगलों में शिकार करते।
.सही उत्तर पर टिक लगाओ
४.१. दीवार पर टंगे चित्र को (शिकारी/ शिकारी के पिता/ शिकारी के दादा / बाघ) ने बनाया था।
४.२. बहुत दिनों पहले हमारे देश में बहुत (घने जंगल / मरुभूमि / बड़े-बड़े पहाड़ / विशाल समुद्र) थे।
४.३. जंगल के पशु-पक्षी शिकारी से (प्रेम करते / घृणा करते / डरते / उपहास करते) थे।
४.४. कहानी का बाघ (गाना गाता / कहानी कहता / चित्र बनाता / बातें करता) था।
४.५. शिकारी ने बाघ को (गरम दूध / शरबत / ठंडा पानी / चाय) पीने के लिए दिया।
दीवार का चित्र importance question /ans
उत्तर :उन दिनों लोग जंगल के किनारे गाँव में रहते थे।
उत्तर :शिकारी जंगल के किनारे गॉँव में रेहता था।
उत्तर :जंगल के जानवर शिकारी से डरते थे।
उत्तर :शिकारी की मुलाकात बाघ से होती है।
उत्तर :दिवार का चित्र शिकारी के पिता जी ने बनाया था।
notice :-दिवार का चित्र क्लास 3 की कहानी है। इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के पाठबहार पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।





