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.क्षेत्रपाल शर्मा

फूलों जैसे उठो खाट से, बछड़ों जैसी भरो कुलाँचे।
अलसाये मत रहो कभी भी, थिरको ऐसे जग भी नाचे ।
नेक भावना रखो हमेशा, जियो कि जैसे चन्दा तारे।
ऐसे रहो कि तुम सब के हो,और सभी है सगे तुम्हारे ।
फूलो फलो गाछ हो जैसे, बोलो बहता नीर।
काँटे बनकर मत जीना तुम, हरो परायी पीर।
कहना जो है सो तुम कहना, संकट से भी मत घबराना।
उजियारे के लिये सलोने, ज्ञान-ज्योति का दीप जलाना।
मत पड़ना तुम हेर फेर में,जीना जीवन सादा प्यारा।
दीप सत्य है एक शस्त्र है,होगा तब हीरक उजियारा।
कविता की सरल व्याख्या
यह कविता बच्चों को अच्छे संस्कार, मेहनत, सच्चाई और दूसरों के प्रति प्रेम रखने की सीख देती है। कवि बच्चों को प्रेरित करता है कि वे अपने जीवन को सुंदर, सरल और उपयोगी बनाएं।
कविता की शुरुआत में कवि कहता है कि बच्चों को सुबह जल्दी उठना चाहिए। उन्हें फूलों की तरह ताजगी और सुंदरता के साथ बिस्तर से उठना चाहिए। जैसे बछड़े (छोटे बछड़े) खुशी-खुशी कूदते-फाँदते हैं, वैसे ही बच्चों को भी उत्साह और ऊर्जा के साथ अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए। इसका अर्थ है कि हमें आलस नहीं करना चाहिए, बल्कि हमेशा सक्रिय और प्रसन्न रहना चाहिए।
कवि आगे कहता है कि हमें कभी भी आलसी नहीं बनना चाहिए। हमें हमेशा खुश और उत्साही रहना चाहिए। जब हम उत्साह से काम करते हैं, तो हमारे आसपास के लोग भी खुश हो जाते हैं। यानी हमारे अच्छे व्यवहार से दुनिया भी प्रसन्न हो सकती है।
इसके बाद कवि बच्चों को सिखाता है कि उनके मन में हमेशा अच्छी और नेक भावनाएँ होनी चाहिए। हमें ऐसा जीवन जीना चाहिए जैसे चाँद और तारे आकाश में चमकते हैं और सबको प्रकाश देते हैं। इसका मतलब है कि हमें भी अपने अच्छे कामों से समाज को रोशनी और खुशी देनी चाहिए।
कवि यह भी कहता है कि हमें ऐसा जीवन जीना चाहिए कि हम सबके अपने बन जाएँ और सब लोग हमें अपना समझें। जब हम दूसरों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करते हैं, तो हमारे रिश्ते मजबूत होते हैं और समाज में भाईचारा बढ़ता है।
अगली पंक्तियों में कवि एक बहुत सुंदर उदाहरण देता है। वह कहता है कि हमें पेड़ की तरह जीवन जीना चाहिए। जैसे पेड़ फल और फूल देकर दूसरों का भला करते हैं, वैसे ही हमें भी दूसरों के लिए उपयोगी बनना चाहिए। हमें बहते हुए पानी की तरह मधुर और शांत भाषा में बोलना चाहिए।
कवि हमें यह भी चेतावनी देता है कि हमें कभी भी काँटे की तरह नहीं बनना चाहिए। काँटे दूसरों को चोट पहुँचाते हैं। इसलिए हमें ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जिससे किसी को दुख पहुँचे। इसके बजाय हमें दूसरों के दुख को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए।
कवि आगे कहता है कि हमें हमेशा सच्चाई और साहस के साथ अपनी बात कहनी चाहिए। अगर कोई कठिनाई या संकट आए तो हमें डरना नहीं चाहिए। जीवन में समस्याएँ आती रहती हैं, लेकिन हमें उनका सामना हिम्मत और धैर्य से करना चाहिए।
कवि ज्ञान के महत्व को भी बताता है। वह कहता है कि हमें अपने जीवन में ज्ञान का दीपक जलाना चाहिए। ज्ञान हमें अंधकार से निकालकर उजाले की ओर ले जाता है। शिक्षा और ज्ञान से ही हम सही और गलत में अंतर समझ सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
इसके बाद कवि बच्चों को सादा और सरल जीवन जीने की सलाह देता है। वह कहता है कि हमें धोखा, छल और गलत रास्तों से दूर रहना चाहिए। हमें ईमानदारी और सच्चाई के साथ जीवन जीना चाहिए।
कविता की अंतिम पंक्तियों में कवि कहता है कि सत्य एक दीपक और एक शक्ति है। जब हम सच्चाई के रास्ते पर चलते हैं, तो हमारा जीवन हीरे की तरह चमकने लगता है। सच्चाई और ईमानदारी ही मनुष्य को महान बनाती है।
कविता का सार
इस कविता में कवि बच्चों को प्रेरित करता है कि वे आलस छोड़कर मेहनती, सच्चे और दयालु बनें। उन्हें दूसरों की मदद करनी चाहिए, ज्ञान प्राप्त करना चाहिए और सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए। ऐसा करने से उनका जीवन उज्ज्वल और सफल बन सकता है।
१.फूलों से तुम सीखो कविता का question /ans
१.१. फूल कहाँ से उठने के लिए कह रहा है?
उत्तर :फूल खाट से उठने के लिए कह रहा है ।
१.२. बछड़े किस तरह कुलाँचे भरते हैं?
उत्तर : बछड़े उछलकर कुलाँचे भरते हैं ।
१.३. फूलों से तुम सीखो कविता में हमें कैसी भावना रखनी के लिए कहा गया है।
उत्तर :फूलों से तुम सीखो हमें नेक भावना रखने के लिए कहा गया है ।
१.४. हमारी बोली कैसी होनी चाहिए?
उत्तर : हमारे बोली बहता नीर की तरह होनी चाहिए ।
१.५. हमें दूसरों का क्या हरना चाहिए ?
उत्तर : हमें दूसरों की पीड़ा हरना चाहिए ।
१.६. सकंट के समय क्या करना चाहिए?
उत्तर :संकट के समय कभी घबराना नहीं चाहिए ।
१.७. हमें किसका दीप जलाना है?
उत्तर :हमें ज्ञान का दीप जलाना चाहिए ।
१.८. हमें कैसा जीवन जीना चाहिए ?
उत्तर : हमें सदा प्यार से जीवन जीना चाहिए ।
२.फूलों से तुम सीखो कविता का question /ans
२.१. आलस का फल क्या होगा ?
उत्तर : आलस हमारे जीवन की सारी खुशियां छीन लगा।
२.२. नेक भावना कहने का अर्थ क्या है?
उत्तर :नेक भावनाकहने का अर्थ है अच्छा विचार।
२.३. चन्दा और तारे की तरह जीने के लिए क्यों कहा गया है?
उत्तर :क्योंकि चांद तारे सबके प्यारे हैं।
२.४. परायी पीर अर्थात दूसरों का दुःख दर्द किस तरह दूर कर सकते हैं?
उत्तर : दूसरों के दर्द को खुद का दर्द समझ कर दूर करना चाहिए ।
२.५. हमें अपनी बात को किस तरह कहना चाहिए?
उत्तर : बिना घबराए अपनी बात को कहना चाहिए।
२.६. संकटों का सामना किस तरह करेंगे ?
उत्तर : बिना घबराए संकट का सामना करना चाहिए।
२.७. ज्ञान ज्योति जलाने का क्या अर्थ है?
उत्तर : ज्ञान ज्योति जलाने का अर्थ है उच्च शिक्षा प्राप्त करना।
२.८. हमें हमेशा किसके पथ पर चलना चाहिए?
उत्तर : हमें हमेशा सच्चाई के पथ पर चलना चाहिए।
२.९. अपनी पसंद के फूलों एवं उनके रंगों का नाम लिखो।
उत्तर :गुलाब – लाल रंग ,कमल -गुलाबी रंग ।
३.फूलों से तुम सीखो कविता का सही /गलत
• हमें आलसी बनने के लिए कह रहा है। गलत
• हमें दूसरों के प्रति अच्छी भावना का संदेश देता है। सही
• दूसरों के दुःख-दर्द को और बढ़ाने की बात कह रहा है। गलत
• हमें संकतों का सामना करने की बात बता रहा है। सही
• हमें ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर रहा है। सही
• हमें सच्चाई की राह पर नहीं चलने की बात कह रहा है। गलत
***फूलों से तुम सीखो कविता का importance question
उत्तर :फूल खाट से उठने के लिए कह रहा है।
उत्तर :हमें नेक भावना रखनी चाहिए।
उत्तर : हमारे बोली बहता नीर की तरह होनी चाहिए ।
उत्तर :हमें दूसरों का पीड़ा हरना चाहिए।
उत्तर :संकट के समय कभी घबराना नहीं चाहिए ।
उत्तर :हमें ज्ञान का दीप जलाना चाहिए ।
उत्तर :हमें सदा प्यार से जीवन जीना चाहिए ।
उत्तर :नेक भावना कहने का अर्थ है अच्छा विचार।
उत्तर :दूसरों के दर्द को खुद का दर्द समझ कर दूर करना चाहिए ।
उत्तर :बिना घबराए अपनी बात को कहना चाहिए।
notice :-फूलों से तुम सीखो कविता क्षेत्रपाल शर्मा ने लिखा है। इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के पाठबहार पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।




