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मोहनदास करमचंद गांधी के बारे में
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गांधी की कलम से( मोहनदास करमचंद गांधी )

.गाँधी की कलम से कहानी के लेखक -मोहनदास करमचंद गांधी

गाँधी के कलम का सारांश

(अपने शब्दों में)

१. मोहनदास करमचंद गांधी का परिचय :

मोहनदास करमचंद गांधी भारत के महान नेता और स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी थे। उन्हें पूरा देश प्रेम से महात्मा गांधी और बापू के नाम से जानता है। गांधी जी का जीवन सत्य, अहिंसा और सादगी का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को बहुत सरल शब्दों में लिखा है, जिससे हमें उनके विचारों और उनके बचपन के बारे में जानने का अवसर मिलता है।

गांधी जी बताते हैं कि उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था। वे राजकोट रियासत के दीवान थे। करमचंद गांधी बहुत ही ईमानदार, न्यायप्रिय और साहसी व्यक्ति थे। वे हमेशा सत्य और न्याय का साथ देते थे। किसी भी मामले में वे पक्षपात नहीं करते थे और हर व्यक्ति के साथ बराबरी का व्यवहार करते थे।

गांधी जी की माता का नाम पुतली बाई था। वे बहुत ही धार्मिक और दयालु स्वभाव की महिला थीं। वे भगवान में गहरा विश्वास रखती थीं और रोज पूजा-पाठ किया करती थीं। वे बिना पूजा किए कभी भोजन नहीं करती थीं। उनका जीवन बहुत सरल और अनुशासित था। उनकी धार्मिकता और अच्छे संस्कारों का गांधी जी के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।


२. मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म और शिक्षा :

गांधी जी का जन्म २ अक्टूबर १८६९ ई० को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। उनका बचपन बहुत साधारण वातावरण में बीता। जब गांधी जी लगभग सात वर्ष के थे, तब उनके पिता का स्थानांतरण पोरबंदर से राजकोट हो गया। इसके बाद उनका परिवार राजकोट में रहने लगा।

राजकोट में गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा शुरू हुई। पहले वे पाठशाला में पढ़ने लगे, फिर धीरे-धीरे आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल और बाद में हाईस्कूल में गए। वे पढ़ाई में बहुत तेज तो नहीं थे, लेकिन वे मेहनती और अनुशासित छात्र थे।

गांधी जी स्वभाव से बहुत संकोची और शांत थे। वे अपने काम से काम रखते थे और अनावश्यक बातों से दूर रहते थे। उन्हें झूठ बोलना बिल्कुल पसंद नहीं था। वे हमेशा सच बोलने का प्रयास करते थे।

गांधी जी बताते हैं कि उन्हें याद नहीं कि उन्होंने कभी अपने शिक्षक या किसी सहपाठी से झूठ बोला हो। बचपन से ही उनमें सच्चाई और ईमानदारी की भावना थी।


३. मोहनदास करमचंद गांधी के मूल्य और शिक्षा :

gandhi ji

गांधी जी के जीवन में कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं जिनसे उनके विचार और भी मजबूत हुए। एक बार उनके पिता एक पुस्तक लेकर आए जिसका नाम था “श्रवण-पितृभक्ति”। गांधी जी ने इस पुस्तक को बहुत ध्यान से पढ़ा।

इस पुस्तक में श्रवण कुमार की कहानी थी, जो अपने अंधे माता-पिता की बहुत सेवा करता था। वह अपने माता-पिता को एक बहँगी में बैठाकर तीर्थयात्रा पर ले जा रहा था। उस समय बाइस्कोप में तस्वीर दिखाने वाले लोग भी गाँव-गाँव घूमते थे। एक दिन गांधी जी ने बाइस्कोप में श्रवण कुमार का चित्र देखा।

इस चित्र को देखकर गांधी जी के मन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने मन ही मन निश्चय किया कि वे भी श्रवण कुमार की तरह अपने माता-पिता की सेवा करेंगे और हमेशा उनका सम्मान करेंगे।

इसी तरह गांधी जी ने एक नाटक भी देखा जिसका नाम था “सत्य हरिश्चंद्र”। इस नाटक में राजा हरिश्चंद्र की कहानी दिखाई गई थी, जो हमेशा सत्य का पालन करते थे। चाहे उन्हें कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी झूठ नहीं बोला।

यह नाटक गांधी जी के मन पर बहुत गहरा असर छोड़ गया। वे बार-बार इस नाटक को देखने की इच्छा करते थे। उन्हें सपनों में भी हरिश्चंद्र दिखाई देते थे।

इससे गांधी जी के मन में यह विचार बैठ गया कि सत्य ही सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने तय कर लिया कि चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, वे हमेशा सत्य का मार्ग ही अपनाएँगे।


४. मोहनदास करमचंद गांधी का स्वास्थ्य और बाहरी गतिविधियाँ :

गांधी जी केवल पढ़ाई और नैतिक शिक्षा पर ही ध्यान नहीं देते थे, बल्कि अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखते थे। उन्होंने पुस्तकों में पढ़ा था कि खुली हवा में घूमना और सैर करना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है

यह बात उन्हें बहुत अच्छी लगी। इसलिए उन्होंने रोज़ सुबह और शाम सैर करने की आदत बना ली। वे नियमित रूप से बाहर टहलने जाते थे।

इस आदत से उनका शरीर मजबूत और स्वस्थ हो गया। इसके साथ ही उन्हें प्रकृति के करीब रहने का भी अवसर मिला। वे मानते थे कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास होता है।

गांधी जी का जीवन बहुत सरल और अनुशासित था। वे समय का सही उपयोग करते थे और हमेशा अच्छे कार्य करने का प्रयास करते थे।


५. गांधी जी के बचपन की विशेषताएँ :

गांधी जी बचपन से ही बहुत ईमानदार, सच्चे और विनम्र थे। वे किसी से झगड़ा नहीं करते थे और सभी के साथ अच्छा व्यवहार करते थे।

उनके जीवन में माता-पिता के संस्कारों का बहुत बड़ा प्रभाव था। उनकी माता की धार्मिकता और पिता की न्यायप्रियता ने उनके चरित्र को मजबूत बनाया।

गांधी जी हमेशा यह मानते थे कि मनुष्य को अपने जीवन में सत्य, अहिंसा और सादगी को अपनाना चाहिए। यही विचार आगे चलकर उनके पूरे जीवन का आधार बन गए।


६. पाठ से मिलने वाली शिक्षा :

गाँधी के कलम” पाठ हमें कईमोहनदास करमचंद गांधी महत्वपूर्ण शिक्षाएँ देता है। इस पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए और हमेशा सत्य बोलना चाहिए।

यह पाठ हमें यह भी सिखाता है कि अच्छे विचार और अच्छी किताबें हमारे जीवन को बदल सकती हैं। अगर हम महान लोगों के जीवन से प्रेरणा लें, तो हम भी अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

महात्मा गांधी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चाई, ईमानदारी और अनुशासन के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य महान बन सकता है।

इस प्रकार गांधी जी का जीवन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

 
 

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१. संक्षेप में उत्तर दो।

१.१. गांधी जी के पिता कैसे व्यक्ति थे ?

उत्तर:गाँधी के पिता सत्यप्रिय, साहसी और उदार व्यक्ति थे। 

 

१.२. गांधी जी की माता कैसे विचारों वाली महिला थीं ?

उत्तर:गांधी जी की माता धार्मिक विचारों की महिला थीं। पूजा- पाठ किए बिना भोजन नहीं करती थीं।

 १.३. गांधी जी का पूरा नाम क्या है?

उत्तर:गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधीहै। 

१.४. बचपन में गांधी जी के मन में किसके जैसा बनने की बात आई ?

उत्तर: बचपन में गांधी जी के मन में  श्रवण कुमार जैसा बनने की बात आई। 

 

.मोहनदास करमचंद गांधी के बारे में importance question /ans

उत्तर :मोहनदास करमचंद गाँधी के  मन में बैठ गई कि चाहे हरिश्चंद्र की भाँति कष्ट उठाना पड़े, पर सत्य को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

उत्तर :पढ़ाई में अक्षर अच्छे होने की जरूरत नहीं, यह गलत विचार गाँधी जी के  मन में इंग्लैंड जाने तक रहा। आगे चलकर दूसरों के मोती जैसे अक्षर देखकर मैं बहुत पछताया। 

उत्तर :सुलेख शिक्षा का एक जरूरी अंग है।

उत्तर :बालक जब चित्रकला सीखकर चित्र बनाना जान जाता है, तब यदि अक्षर लिखना सीखे तो उसके अक्षर मोती जैसे हो जाते हैं।

उत्तर :‘श्रवण-पितृभक्ति’  पुस्तक पढ़कर  गांधी जी के मन में घेहरा प्रभाव पड़ा  और उन्हों तय कर  लिया   कि   श्रवण कुमार के जैसे बनकर रहेंगे। 

उत्तर : ‘सत्य हरिश्चन्द्र’ नाटक देखने के बाद गांधी जी ने  तय किया  कि चाहे हरिश्चंद्र की भाँति कष्ट उठाना पड़े, पर सत्य को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

उत्तर :“पके घड़े पर कहीं मिट्टी चढ़ सकती है”- आशय यहाँ है ,की जिस प्रकार घड़े  कच्चा हो तो उसमे मिट्टी  चढ़  परन्तु पके घड़े में नहीं। ठीक उसी प्रकार छोटा बालक आपमें लेख को सुंदर बना लेता है। बड़े होने के बाद ये मुंकिन नहीं है। 

notice :गांधी  की कलम से निबंध मोहनदास करमचंद  गांधी ने खुद लिखा है । इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के पाठबहार पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।

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