सखि वे मुझसे कह कर जाते
By मैथिलीशरण गुप्त
. कवि परिचय (सारांश)
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1866 ई. को उत्तर प्रदेश के झाँसी जनपद के चिरगाँव में हुआ। वे हिंदी साहित्य के प्रमुख आधार-स्तंभ और खड़ी बोली के प्रथम सुविख्यात कवि माने जाते हैं। उनके काव्य में पवित्रता, नैतिकता, देशभक्ति और मानवीय मूल्यों की स्पष्ट झलक मिलती है। महात्मा गांधी ने उनकी राष्ट्रवादी रचनाओं से प्रभावित होकर उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि दी।
उनकी प्रमुख कृतियाँ— साकेत, यशोधरा, रंग में भंग, पंचवटी, किसान, जयद्रथ-वध आदि हैं।
गुप्त जी का देहावसान 12 दिसंबर 1964 को चिरगाँव में ही हुआ। हिंदी साहित्य को हुई यह क्षति अपूरणीय है।
‘सखि, वे मुझसे कहकर जाते’ का सारांश
यह कविता साकेत काव्य का एक अत्यंत मार्मिक अंश है, जिसमें उर्मिला के हृदय की व्यथा चित्रित है। लक्ष्मण जब श्रीराम के साथ वनवास को जाते हैं, तो वे उर्मिला से बिना बताए चले जाते हैं। उर्मिला अपनी सखी से कहती है कि यदि वे उसे अपने निर्णय की सूचना देते, तो वह उन्हें किसी प्रकार नहीं रोकती।
वह कहती है कि वह स्वयं लक्ष्मण को क्षात्र-धर्म निभाने के लिए रणभूमि या धर्म-मार्ग में भेजने को सदैव तत्पर रहती। वह उनके निष्ठुर व्यवहार का दुःख नहीं करती; उसे अपने प्रेम पर गर्व है और विश्वास है कि लक्ष्मण अवश्य लौटेंगे। अंतिम पदों में उर्मिला का विरह, समर्पण, प्रेम और धैर्य अत्यंत हृदयस्पर्शी बन जाता है।
‘सखि, वे मुझसे कहकर जाते’ कविता की व्याख्या (भावार्थ)
कविता में उर्मिला अपनी सखी से कहती है कि लक्ष्मण यदि उसे बता जाते, तो वह उनके लिए किसी भी प्रकार की बाधा न बनती। वह उन्हें हृदय से मानती और उनके मन की हर इच्छा को समझती थी।
उर्मिला का हृदय दुख से भरा है, पर उसमें शिकायत कम, समर्पण और कर्तव्य-भावना अधिक है। वह लक्ष्मण के निर्णय का सम्मान करती है।
हालाँकि आँखें आँसू बहाती हैं, पर हृदय प्रेम और विश्वास से भरा है कि वे एक दिन अवश्य लौटेंगे।
यह कविता पत्नी के त्याग, प्रेम, प्रतीक्षा, धैर्य और भारतीय नारी की उच्च आदर्शपरायणता का प्रतीक है।
(1 Line Questions – Exam Focus)
1. ‘सखि, वे मुझसे कहकर जाते’ कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: इस कविता के कवि मैथिलीशरण गुप्त हैं।
2. यह कविता किस ग्रंथ से ली गई है?
उत्तर: यह कविता ‘साकेत’ काव्य-ग्रंथ से ली गई है।
3. कविता की मुख्य नायिका कौन है?
उत्तर: कविता की मुख्य नायिका उर्मिला है।
4. उर्मिला किसके साथ के जाने की बात करती है?
उत्तर: उर्मिला अपने पति लक्ष्मण के श्रीराम के साथ वनवास को जाने की बात करती है।
5. कवि मैथिलीशरण गुप्त को कौन-सी उपाधि मिली?
उत्तर: कवि मैथिलीशरण गुप्त को ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि मिली।
6. ‘साकेत’ काव्य किसकी कथा पर आधारित है?
उत्तर: ‘साकेत’ काव्य रामायण की कथा, विशेषकर उर्मिला और लक्ष्मण के प्रसंग पर आधारित है।
7. उर्मिला अपने प्रिय को किस धर्म के नाते भेजने की बात करती है?
उत्तर: उर्मिला अपने प्रिय को क्षात्र-धर्म (योद्धा-धर्म) के नाते भेजने की बात करती है।
8. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1866 को चिरगाँव, झाँसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ।
9. महात्मा गांधी ने गुप्त जी को कौन-सी उपाधि दी?
उत्तर: महात्मा गांधी ने गुप्त जी को ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि दी।
10. गुप्त जी की प्रमुख राष्ट्रवादी कृति का नाम बताइए।
उत्तर: गुप्त जी की प्रमुख राष्ट्रवादी कृति ‘भारत-भारती’ है।
दो अंक (2 Marks) वाले प्रश्न-उत्तर
प्र.1. ‘सखि, वे मुझसे कहकर जाते’ कविता में उर्मिला का मुख्य दुःख क्या है?
उ: उर्मिला का मुख्य दुःख यह है कि लक्ष्मण बिना बताए वनवास पर चले गए। यदि वे बताते तो उर्मिला उन्हें कभी न रोकती, बल्कि स्वयं उन्हें कर्तव्य-पालन के लिए भेज देती।
प्र.2. कवि मैथिलीशरण गुप्त को ‘राष्ट्रकवि’ क्यों कहा जाता है?
उ: उनकी रचनाएँ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में लोगों को प्रेरित करती थीं और उनमें प्रबल देशभक्ति थी। इसी कारण महात्मा गांधी ने उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि दी।
प्र.3. कविता में नायिका अपने प्रिय के लिए कैसा भाव रखती है?
उ: नायिका के मन में प्रेम, समर्पण, त्याग और धैर्य है। वह शिकायत नहीं करती, बल्कि उनके लौट आने की आशा रखती है।
प्र.4. ‘साकेत’ काव्य का मुख्य विषय क्या है?
उ: यह काव्य रामायण की कथा पर आधारित है और विशेष रूप से उर्मिला के चरित्र और उसके त्याग को केंद्र में रखता है।
पाँच अंक (5 Marks) वाला प्रश्न-उत्तर
प्र. ‘सखि, वे मुझसे कहकर जाते’ कविता में उर्मिला के चरित्र-चित्रण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर (5 Marks):
उर्मिला भारतीय नारी की आदर्श प्रतिमा है। वह प्रेममयी होने के साथ-साथ धैर्यवान, कर्तव्यनिष्ठ और त्यागमूर्ति है।
लक्ष्मण के बिना बताए जाने के कारण उसे दुख है, पर वह उन्हें दोष नहीं देती। वह कहती है कि यदि वे बताते, तो वह स्वयं उन्हें कर्तव्य-युक्त मार्ग पर भेजती।
उसके आँसू उसके हृदय के प्रेम का प्रमाण हैं, परन्तु उसके मन में कोई विद्रोह या शिकायत नहीं।
वह अपने पति के लौटने की दृढ़ आशा रखती है।
इस प्रकार उर्मिला का चरित्र विरह, करुणा, समर्पण और उच्च आदर्शों का अद्भुत संगम है।
दस अंक (10 Marks) वाला प्रश्न-उत्तर
❖ प्र. ‘सखि, वे मुझसे कहकर जाते’ कविता का भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य (विस्तृत — 10 Marks)
उत्तर :- मैथिलीशरण गुप्त की यह कविता ‘साकेत’ की एक अत्यंत हृदयस्पर्शी और संवेदनशील रचना है, जिसमें उर्मिला के अंतर के वेदनामय भावों का सुंदर चित्रण मिलता है। लक्ष्मण के वनवास पर श्रीराम के साथ चले जाने से उत्पन्न विछोह, पीड़ा, भावुकता और त्याग को कवि ने अत्यंत कोमलता के साथ प्रस्तुत किया है।
उर्मिला सखी से कहती है कि यदि लक्ष्मण उसे बता कर जाते तो वह उन्हें रोकती नहीं, बल्कि स्वयं अपने हाथों से सुसज्जित कर क्षात्र-धर्म निभाने हेतु भेजती। यही उसकी महानता और त्याग की चरम सीमा है। वह आंसू बहाती है, पर उसके मन में कोई शिकायत नहीं है। वह पति के धर्म के मार्ग में स्वयं को समर्पित कर देती है।
● कविता के मुख्य भाव: विषयानुसार विस्तृत व्याख्या
1. विरह का दर्द (VIRAH)
उर्मिला के हृदय में लक्ष्मण के बिना एक गहरा रिक्त स्थान उत्पन्न हो गया है।
वह कहती है कि लक्ष्मण यदि बताकर जाते तो उसका यह विरह थोड़ा सहज हो जाता।
पति के बिना जीवन एक लंबी रात जैसा प्रतीत होता है।
लक्ष्मण चले गए और उर्मिला को केवल स्मृतियाँ ही मिलीं—यह विरह का चरम बिंदु है।
कवि ने इस दर्द को अत्यंत सरल शब्दों में, पर गहन अनुभूति के साथ व्यक्त किया है।
2. करुणा और व्यथा (KARUNA-VYATHA)
उर्मिला के शब्दों से करुणा टपकती है।
उसकी आँखों से बहते आँसू उसके हृदय की व्यथा को प्रकट करते हैं।
वह सखी से बात करते समय भी अपनी पीड़ा छिपाने का प्रयास करती है, परंतु उस करुणा की गहराई पाठक को भी विह्वल कर देती है।
उसका हृदय पति- वियोग से द्रवित है, पर वह संयमित होकर करुणा को मर्यादा में सँभालती है।
3. अटूट प्रेम (TRUE LOVE)
उर्मिला का प्रेम केवल भावनाओं का नहीं, बल्कि समर्पण, समझ और श्रद्धा का प्रेम है।
वह रोती है, पर पति से कोई शिकायत नहीं करती।
प्रेम में अधिकार की जगह त्याग और सम्मान को स्थान देती है।
वह मानती है कि लक्ष्मण का धर्म और आदर्श उसके व्यक्तिगत सुख से ऊपर है।
यह प्रेम भारतीय नारी के शुद्ध प्रेम का प्रतीक है—जो अपने प्रिय के लिए अपने सुखों का त्याग कर देती है।
4. नारी-सुलभ धैर्य (WOMANLY PATIENCE)
उर्मिला धैर्य की मूर्ति है।
वह अपने दर्द को भी कर्तव्य की आंच में तपाकर धैर्य में बदल देती है।
पति के जाने के बाद भी उनके निर्णय को आदर देती है।
आंसू बहते हैं, पर वह स्वयं को टूटने नहीं देती।
उसका धैर्य यह दर्शाता है कि भारतीय नारी दुःख को सहकर भी जीवन के आदर्शों को नहीं छोड़ती।
5. कर्तव्य-निष्ठा (DUTY/ DHARMA)
उर्मिला के चरित्र का सबसे ऊँचा पक्ष है उसकी कर्तव्य-निष्ठा।
वह लक्ष्मण को क्षात्र-धर्म निभाने हेतु स्वयं भेजने की बात करती है।
उसे पता है कि वनवास में राम के साथ जाना लक्ष्मण का धर्म है।
वह अपने भावों से ऊपर उठकर धर्म के पक्ष में स्वयं को समर्पित कर देती है।
यह कर्तव्य-निष्ठा उर्मिला को एक महान नारी के रूप में स्थापित करती है।
6. विश्वास (FAITH)
उर्मिला का विश्वास अडिग है।
उसे विश्वास है कि लक्ष्मण अवश्य लौटकर आएंगे।
वह मानती है कि उनका संबंध केवल शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा का है।
उसका विश्वास ही उसे कठिन समय में शक्ति देता है।
यह विश्वास प्रेम, त्याग और आदर्शों का सबसे बड़ा आधार है।
● काव्य-सौंदर्य
भाषा सरल, सहज और भावप्रधान है।
‘सखि’ संबोधन कविता में आत्मीयता भरता है।
विरह की करुणा और त्याग का अद्भुत संगम है।
उर्मिला का चरित्र भारतीय नारी के आदर्शों का प्रतीक बनकर उभरता है।
कवि ने मनोभावों को अत्यंत सूक्ष्मता से अभिव्यक्त किया है।
निष्कर्ष
यह कविता उर्मिला की वेदना, कर्तव्य और प्रेम का अनोखा चित्रण प्रस्तुत करती है। कविता पढ़कर पाठक उर्मिला के उच्च आदर्श और त्याग से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। यही इस रचना का सबसे बड़ा काव्य- सौंदर्य है।
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