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कवि — अरुण कमल
1. कवि परिचय — अरुण कमल
अरुण कमल समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख और सशक्त कवियों में गिने जाते हैं। उनका वास्तविक नाम अरुण कुमार उपाध्याय है। उनका जन्म 15 फरवरी 1954 को बिहार के रोहतास जिले के नासरीगंज में हुआ था। उनके पिता हाई स्कूल में शिक्षक थे और बाद में शिक्षा विभाग में अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे। पिता के स्थानांतरण के कारण अरुण कमल का बचपन बिहार के विभिन्न छोटे-छोटे स्थानों में बीता।
अरुण कमल की कविताओं में आम आदमी, मजदूर, किसान और समाज के उपेक्षित वर्गों के जीवन-संघर्ष को विशेष स्थान मिला है। वे उन लोगों की पीड़ा, कठिनाइयों और आशाओं को अपनी कविता का विषय बनाते हैं, जिनकी आवाज़ अक्सर समाज में दब जाती है।
उनका पहला कविता-संग्रह ‘अपनी केवल धार’ वर्ष 1980 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद ‘सबूत’ (1989), ‘नए इलाके में’ (1996) और ‘पुतली में संसार’ (2004) जैसे काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए। उनकी आलोचनात्मक पुस्तक ‘कविता और समय’ भी उल्लेखनीय है।
अरुण कमल की कविता में सामाजिक यथार्थ के साथ-साथ मानवीय संवेदना और संघर्ष के बीच छिपी आशा दिखाई देती है। उनकी भाषा सहज, प्रभावशाली और आम जीवन से जुड़ी हुई है। वे निराशा के बीच भी मनुष्य के जीवित रहने की इच्छा और बेहतर भविष्य की उम्मीद को पहचानते हैं।
‘उम्मीद’ कविता में कवि बाढ़, तूफान और अकाल जैसी प्राकृतिक विपदाओं के बावजूद मनुष्य और पक्षियों के अपने स्थान पर लौटने के रहस्य को देखता है। अंततः यही लौटना मनुष्य की जीवन-शक्ति, जिजीविषा और उम्मीद का प्रतीक बन जाता है।
2. कविता का परिचय
‘उम्मीद’ अरुण कमल की महत्वपूर्ण कविता है। इसमें कवि ने प्राकृतिक आपदाओं के बीच मनुष्य के जीवन-संघर्ष और उसकी अदम्य आशा को प्रस्तुत किया है।
कवि बार-बार स्वयं से प्रश्न करता है कि बाढ़ में सब कुछ नष्ट हो जाने के बाद भी लोग अपना गाँव क्यों नहीं छोड़ते? तूफान के बाद लोग फिर उसी स्थान पर क्यों बस जाते हैं? अकाल के बावजूद मनुष्य अपने घर के दरवाजे पर किसकी प्रतीक्षा करता रहता है?
इसी प्रकार जब वृक्ष पर एक भी पत्ता नहीं बचता, तब भी पक्षी उसी सूखे वृक्ष के पुराने घोंसलों में वापस क्यों लौटते हैं?
इन प्रश्नों के माध्यम से कवि यह बताना चाहता है कि मनुष्य के भीतर भविष्य के प्रति एक ऐसी उम्मीद होती है जो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उसे जीने और लौटकर फिर से शुरुआत करने की शक्ति देती है।
3. पूरी कविता की व्याख्या
प्रथम अंश
कविता की पंक्तियाँ
“आज तक मैं यह समझ नहीं पाया कि हर साल
बाढ़ में पड़ने के बाद भी लोग दियारा छोड़कर
कोई दूसरी जगह क्यों नहीं जाते?”
व्याख्या
कवि के मन में एक प्रश्न उठता है। वह समझ नहीं पाता कि हर वर्ष बाढ़ आने से जिन लोगों के घर और जीवन प्रभावित होते हैं, वे उस स्थान को छोड़कर किसी सुरक्षित जगह क्यों नहीं चले जाते।
‘दियारा’ नदी के किनारे का वह क्षेत्र है जहाँ बार-बार बाढ़ आने की संभावना रहती है। इसके बावजूद वहाँ रहने वाले लोग अपनी जमीन और घर से जुड़े रहते हैं।
कवि के इस प्रश्न के पीछे मनुष्य की जमीन से जुड़ाव और अपने स्थान के प्रति लगाव को समझने की कोशिश दिखाई देती है।
भाव
मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मिट्टी और घर से संबंध नहीं छोड़ता।
द्वितीय अंश
कविता की पंक्तियाँ
“समुद्र में आता है तूफान
तटवर्ती सारी बस्तियों को पोंछता वापस लौट जाता है
और दूसरे ही दिन तट पर फिर बस जाते हैं गाँव—
क्यों नहीं चले जाते ये लोग कहीं और?”
व्याख्या
कवि समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों का उदाहरण देता है। जब समुद्र में तूफान आता है तो वह तटवर्ती बस्तियों को पूरी तरह उजाड़ देता है। लेकिन तूफान के समाप्त होते ही लोग फिर उसी स्थान पर अपने गाँव बसाने लगते हैं।
कवि को आश्चर्य होता है कि ये लोग किसी दूसरी सुरक्षित जगह क्यों नहीं चले जाते।
लेकिन इस प्रश्न के भीतर ही कविता का उत्तर छिपा है। मनुष्य अपने घर, जमीन, गाँव और जीवन की स्मृतियों से इतना जुड़ा होता है कि विनाश के बाद भी वह उसी जगह को फिर से अपना घर बनाता है।
भाव
विनाश के बाद भी फिर से बसने की इच्छा मनुष्य की अदम्य जीवन-शक्ति को दर्शाती है।
तृतीय अंश
कविता की पंक्तियाँ
“हर साल पड़ता है मुआर
हरियरी की खोज में चलते हुए गौवों के खुर
धरती की फाँट में फँस-फँस जाते हैं
फिर भी कौन इंतजार में आदमी बैठा रहता है द्वार पर?”
व्याख्या
इस अंश में कवि अकाल और सूखे की भयावह स्थिति का चित्रण करता है। हर वर्ष अकाल पड़ता है। हरी घास की तलाश में घूमते हुए पशुओं के पैर सूखी और फटी हुई धरती की दरारों में फँस जाते हैं।
यह दृश्य अत्यंत कठिन और पीड़ादायक है। इसके बावजूद मनुष्य अपने घर के दरवाजे पर बैठकर किसी के आने की प्रतीक्षा करता रहता है।
यहाँ प्रतीक्षा केवल किसी व्यक्ति के आने की प्रतीक्षा नहीं है, बल्कि बेहतर समय, वर्षा, हरियाली और जीवन के लौटने की उम्मीद का प्रतीक है।
भाव
अकाल जैसी भयानक परिस्थिति में भी मनुष्य उम्मीद नहीं छोड़ता।
चतुर्थ अंश
कविता की पंक्तियाँ
“कल भी आयेगी बाढ़
कल भी आयेगा तूफान
कल भी पड़ेगा अकाल
आज तक मैं समझ नहीं पाया…”
व्याख्या
कवि जानता है कि बाढ़, तूफान और अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाएँ भविष्य में भी आ सकती हैं। फिर भी मनुष्य अपने स्थान को छोड़कर नहीं जाता।
यहाँ कवि का प्रश्न धीरे-धीरे एक गहरे जीवन-दर्शन में बदल जाता है। मनुष्य जानता है कि संकट आएगा, लेकिन वह संकट के डर से जीवन जीना बंद नहीं करता।
वह बार-बार टूटता है और फिर अपने जीवन को दोबारा खड़ा करता है।
भाव
मनुष्य संकटों को जानते हुए भी जीवन और भविष्य की आशा नहीं छोड़ता।
पंचम अंश
कविता की पंक्तियाँ
“जब वृक्ष पर एक भी पत्ता नहीं होता
झड़ चुके होते हैं सारे पत्ते
तो सूर्य डूबते-डूबते बहुत दूर से
चीत्कार करता पंख पटकता लौटता है पक्षियों का एक दल
उसी दूँठ वृक्ष के घोंसलों में क्यों?”
व्याख्या
कवि अब पक्षियों का उदाहरण देता है। जिस वृक्ष के सारे पत्ते झड़ चुके हैं और जो केवल सूखा ठूँठ बनकर रह गया है, उस वृक्ष पर भी पक्षियों का दल शाम होते ही लौट आता है।
कवि को आश्चर्य होता है कि पक्षी उस सूखे वृक्ष को क्यों नहीं छोड़ देते।
इसका उत्तर है—वह वृक्ष उनके घर और स्मृतियों से जुड़ा है। उनके घोंसले वहीं हैं। इसलिए वृक्ष सूख जाने के बाद भी वे उसी स्थान पर लौटते हैं।
यह पक्षियों का लौटना मनुष्य की तरह आशा, लगाव और जीवन के प्रति विश्वास का प्रतीक है।
भाव
विनाश और कठिनाइयों के बीच भी जीव अपने घर और जीवन से जुड़ा रहता है तथा नए जीवन की उम्मीद बनाए रखता है।
4. कविता का केंद्रीय भाव
‘उम्मीद’ कविता का मूल भाव है—कठिन परिस्थितियों में भी जीवन के प्रति विश्वास बनाए रखना।
कवि बाढ़, तूफान और अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाओं का चित्रण करता है। इन आपदाओं से मनुष्य का जीवन बार-बार उजड़ता है, लेकिन वह अपने घर और मिट्टी को छोड़ता नहीं। वह फिर से उसी जगह अपना जीवन शुरू करता है।
इसी तरह सूखे और पत्तों से रहित वृक्ष पर पक्षी अपने घोंसलों में लौटते हैं।
इस प्रकार कविता बताती है कि मनुष्य के भीतर जिजीविषा और उम्मीद इतनी मजबूत होती है कि विनाश भी उसे जीवन से पूरी तरह अलग नहीं कर सकता।
कविता का संदेश
जहाँ जीवन है, वहाँ उम्मीद है।
संकट कितना भी बड़ा हो, मनुष्य को फिर से शुरुआत करने की शक्ति उम्मीद से ही मिलती है।
5. Short Questions with Answers
प्रश्न 1. ‘उम्मीद’ कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: ‘उम्मीद’ कविता के कवि अरुण कमल हैं।
प्रश्न 2. अरुण कमल का वास्तविक नाम क्या है?
उत्तर: अरुण कमल का वास्तविक नाम अरुण कुमार उपाध्याय है।
प्रश्न 3. ‘दियारा’ से क्या आशय है?
उत्तर: नदी के किनारे का वह क्षेत्र जहाँ प्रायः बाढ़ आती है, दियारा कहलाता है।
प्रश्न 4. कविता में किन प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख है?
उत्तर: कविता में बाढ़, तूफान और अकाल का उल्लेख है।
प्रश्न 5. लोग बाढ़ के बाद भी दियारा क्यों नहीं छोड़ते?
उत्तर: वे अपनी मिट्टी, घर, जमीन और जीवन से गहरे जुड़े होने के कारण दियारा नहीं छोड़ते।
प्रश्न 6. तूफान के बाद तटवर्ती लोग क्या करते हैं?
उत्तर: तूफान के बाद वे फिर से उसी तट पर अपने गाँव बसा लेते हैं।
प्रश्न 7. अकाल में गायों के साथ क्या होता है?
उत्तर: हरियाली की खोज में चलते हुए गायों के खुर सूखी और फटी हुई धरती की दरारों में फँस जाते हैं।
प्रश्न 8. कविता में ‘हरियरी’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: ‘हरियरी’ जीवन, समृद्धि और आशा का प्रतीक है।
प्रश्न 9. पक्षी सूखे वृक्ष पर क्यों लौटते हैं?
उत्तर: पक्षी अपने पुराने घोंसलों और घर से जुड़े होने के कारण सूखे वृक्ष पर लौटते हैं।
प्रश्न 10. ‘ठूँठ वृक्ष’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: ‘ठूँठ वृक्ष’ विनाश, सूखेपन और कठिन परिस्थितियों का प्रतीक है।
प्रश्न 11. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: कविता का मुख्य संदेश है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
प्रश्न 12. कविता में ‘प्रतीक्षा’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: ‘प्रतीक्षा’ बेहतर समय और जीवन के लौटने की आशा का प्रतीक है।
प्रश्न 13. कविता का शीर्षक ‘उम्मीद’ क्यों सार्थक है?
उत्तर: क्योंकि पूरी कविता में विनाश और संकट के बावजूद मनुष्य तथा पक्षियों के जीवन और भविष्य के प्रति विश्वास को दिखाया गया है।
प्रश्न 14. अरुण कमल की कविताओं में किन लोगों को प्रमुखता मिलती है?
उत्तर: उनकी कविताओं में आम आदमी, मजदूर, किसान और उपेक्षित वर्ग को प्रमुखता मिलती है।
प्रश्न 15. ‘उम्मीद’ कविता हमें क्या प्रेरणा देती है?
उत्तर: यह कविता हमें मुश्किल परिस्थितियों में भी हिम्मत बनाए रखने और नए जीवन की उम्मीद रखने की प्रेरणा देती है।
6. Long Questions with Answers
प्रश्न 1. ‘उम्मीद’ कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
अरुण कमल की कविता ‘उम्मीद’ मनुष्य की अदम्य जीवन-इच्छा और आशावादी दृष्टिकोण को व्यक्त करती है। कवि यह देखकर आश्चर्य करता है कि हर साल बाढ़ से प्रभावित होने के बावजूद लोग दियारा छोड़कर किसी दूसरी जगह नहीं जाते।
इसी प्रकार समुद्री तूफान तटवर्ती बस्तियों को नष्ट कर देता है, लेकिन तूफान के समाप्त होते ही लोग फिर उसी स्थान पर अपना गाँव बसा लेते हैं। अकाल में धरती फट जाती है और पशुओं को हरियाली नहीं मिलती, फिर भी मनुष्य अपने घर के दरवाजे पर किसी के आने की प्रतीक्षा करता रहता है।
कवि आगे सूखे ठूँठ वृक्ष का उदाहरण देता है। जब वृक्ष पर एक भी पत्ता नहीं रहता, तब भी पक्षियों का दल शाम को अपने पुराने घोंसलों में लौट आता है।
इन घटनाओं के माध्यम से कवि बताता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, मनुष्य और जीव उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते। यही उम्मीद उन्हें फिर से जीवन शुरू करने की शक्ति देती है।
प्रश्न 2. ‘उम्मीद’ कविता में मनुष्य की जिजीविषा किस प्रकार व्यक्त हुई है?
उत्तर:
‘उम्मीद’ कविता में मनुष्य की जिजीविषा अर्थात जीने की प्रबल इच्छा को प्राकृतिक आपदाओं के उदाहरणों के माध्यम से व्यक्त किया गया है।
बाढ़ हर वर्ष लोगों के जीवन को प्रभावित करती है, फिर भी वे अपना दियारा नहीं छोड़ते। समुद्री तूफान बस्तियों को उजाड़ देता है, फिर भी लोग अगले दिन उसी स्थान पर लौटकर गाँव बसाते हैं।
अकाल के कारण धरती फट जाती है और हरियाली समाप्त हो जाती है, फिर भी मनुष्य अपने घर के द्वार पर प्रतीक्षा करता रहता है।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि मनुष्य विनाश को अंतिम सत्य नहीं मानता। वह जानता है कि संकट फिर आएगा, फिर भी उसे विश्वास रहता है कि जीवन दोबारा सँवरेगा।
इस प्रकार उम्मीद ही मनुष्य को संघर्ष करने, लौटने और फिर से जीवन शुरू करने की शक्ति देती है।
प्रश्न 3. कविता में पक्षियों के माध्यम से कवि ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर:
कवि ने कविता के अंत में सूखे और पत्तों से रहित वृक्ष का चित्र प्रस्तुत किया है। वह वृक्ष अब केवल ठूँठ रह गया है। फिर भी सूर्य के डूबते समय पक्षियों का एक दल उसी वृक्ष के घोंसलों में वापस लौटता है।
पक्षियों का यह व्यवहार बहुत महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि जीवन केवल वर्तमान परिस्थितियों से संचालित नहीं होता, बल्कि स्मृति, लगाव और भविष्य की उम्मीद भी जीव को अपने स्थान से जोड़ती है।
पक्षियों का सूखे वृक्ष पर लौटना मनुष्य के उस व्यवहार के समान है जिसमें वह बाढ़ या तूफान से उजड़ने के बाद भी अपने घर लौट आता है।
इस प्रकार पक्षियों के माध्यम से कवि संदेश देता है कि विनाश के बाद भी जीवन लौटता है और उम्मीद मनुष्य तथा जीव-जगत की सबसे बड़ी शक्ति है।
प्रश्न 4. ‘उम्मीद’ कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘उम्मीद’ शीर्षक पूरी कविता के भाव को अत्यंत सटीक रूप से व्यक्त करता है। कविता में कवि बार-बार ऐसी परिस्थितियों का वर्णन करता है जहाँ जीवन पूरी तरह समाप्त होता हुआ दिखाई देता है।
बाढ़ आती है, गाँव उजड़ते हैं। तूफान बस्तियों को नष्ट कर देता है। अकाल में धरती फट जाती है और हरियाली समाप्त हो जाती है। फिर भी लोग अपनी जगह छोड़कर नहीं जाते।
इसी प्रकार सूखे ठूँठ वृक्ष पर पक्षी अपने घोंसलों में लौटते हैं। यह लौटना इस बात का संकेत है कि उनके भीतर अभी भी जीवन के प्रति विश्वास बना हुआ है।
इसलिए कविता का शीर्षक ‘उम्मीद’ पूरी तरह सार्थक है। कविता का मूल संदेश ही यह है कि विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन और भविष्य के प्रति आशा बनी रहती है।
7. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दियारा | नदी के किनारे का बाढ़ प्रभावित क्षेत्र |
| तटवर्ती | तट के पास रहने वाला |
| पोंछता | मिटा देता / नष्ट कर देता |
| मुआर | अकाल / सूखे की स्थिति |
| हरियरी | हरियाली |
| फाँट | दरार |
| दूँठ / ठूँठ | पत्तों से रहित सूखा वृक्ष |
| चीत्कार | तीव्र पुकार / करुण आवाज |
| जिजीविषा | जीने की प्रबल इच्छा |
| प्रतीक्षा | इंतजार |
| उम्मीद | आशा / विश्वास |
8. कविता के प्रमुख प्रतीक
बाढ़ → जीवन की कठिन परिस्थितियाँ
तूफान → अचानक आने वाला संकट
अकाल → अभाव और विपत्ति
हरियरी → जीवन और समृद्धि
दियारा → अपनी मिट्टी और घर से जुड़ाव
ठूँठ वृक्ष → विनाश और कठिन परिस्थिति
घोंसला → घर और अपनापन
पक्षियों का लौटना → उम्मीद और जीवन की वापसी
द्वार पर प्रतीक्षा → अच्छे समय की आशा






