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Toggle📘 गबन — मुंशी प्रेमचन्द
(विस्तृत सारांश)
मुंशी प्रेमचन्द का उपन्यास ‘गबन’ भारतीय समाज की कुरीतियों, दिखावे, वैभव-प्रेम और नैतिक मूल्यों पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृति है। इसमें प्रेमचन्द ने मध्यमवर्गीय जीवन की कमजोरियों, स्त्री-पुरुष संबंधों और दहेज-प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों को यथार्थ के साथ चित्रित किया है। उपन्यास का मुख्य पात्र रमानाथ है, जिसकी虚झूठी शान, दिखावा और विलासप्रियता उसे गबन करने की राह पर ले जाती है।
⭐ कहानी का विस्तृत सारांश
1. रमानाथ का चरित्र और उसकी इच्छाएँ
कहानी की शुरुआत रमानाथ से होती है, जो एक साधारण सरकारी कर्मचारी है। उसका वेतन सीमित है, लेकिन वह दिखावे और शान-शौकत का बहुत शौकीन है। पत्नी जालपा के गहनों के प्रति विशेष आकर्षण को देखकर वह और भी अधिक प्रतिष्ठित दिखना चाहता है।
रमानाथ के आत्मसम्मान को सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब वह देखता है कि समाज में गहनों और धन का प्रदर्शन प्रतिष्ठा का मापदंड बन गया है। वह अपनी पत्नी की इच्छाओं को पूरा करना चाहता है, लेकिन साधन सीमित हैं।
2. जालपा का गहनों के प्रति आकर्षण
जालपा एक सामान्य भारतीय स्त्री की तरह गहनों को सौभाग्य, प्रतिष्ठा और सौंदर्य का प्रतीक मानती है। विवाह के समय मिले गहनों से वह संतुष्ट नहीं रहती और नए गहनों की इच्छा जताती रहती है।
जालपा का यह स्वभाव रमानाथ पर मानसिक दबाव डालता है। वह अपनी पत्नी की छोटी-छोटी इच्छाओं की पूर्ति के लिए गलत राह चुनने पर विवश हो जाता है।
3. गहनों के लिए ‘गबन’ और उसका परिणाम
रमानाथ अपने कार्यालय में जमा सरकारी धन से कुछ पैसा निकालकर (गबन करके) जालपा के लिए गहने बनवा देता है।
शुरू में सब कुछ सामान्य चलता है, लेकिन कुछ दिनों बाद कार्यालय में जांच होती है और रमानाथ का गबन पकड़ा जाता है।
डरकर वह घर छोड़कर भाग जाता है। जालपा इस घटना से अत्यंत दुखी होती है—
वह खुद को अपने पति की गलतियों का कारण मानने लगती है
अपने गहने बेचकर पति के दोष को मिटाने का प्रयास करती है
लेकिन परिस्थितियाँ और भी कठिन हो जाती हैं।
4. जालपा का आत्मबोध और संघर्ष
रमानाथ की अनुपस्थिति में जालपा को जीवन की सच्चाई और सामाजिक दबाव का ज्ञान होता है। गहनों के प्रति उसका मोह टूट जाता है और वह समझ जाती है कि असली सुख धन-दौलत में नहीं, बल्कि परिवार, विश्वास और मानवीय मूल्यों में है।
जालपा साहस के साथ जीवन संघर्ष करती है और रमानाथ की खोज में निकल पड़ती है।
5. रमानाथ का पश्चाताप और अंतिम मोड़
भागते-भागते रमानाथ गरीबी, भटकन और डर के बीच जीता है। उसके भीतर पश्चाताप जन्म लेता है।
जब जालपा उसे ढूँढ़कर उसके पास पहुँचती है, तो रमानाथ के भीतर नैतिकता जागती है और वह आत्मसमर्पण का निर्णय लेता है।
अंत में अदालत में सच्चाई सामने आती है और रमानाथ को हल्की-सी सजा देकर छोड़ दिया जाता है, क्योंकि उसके कर्म के पीछे कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव और पत्नी के प्रति प्रेम था।
🌼 कहानी का संदेश
दिखावा और झूठी प्रतिष्ठा मनुष्य को विनाश की ओर ले जाती है।
गहना, धन, आडंबर—यह सब जीवन का वास्तविक सुख नहीं है।
स्त्री-पुरुष के रिश्ते में समझ, सहानुभूति और विश्वास का विशेष महत्व है।
सामाजिक कुरीतियाँ (जैसे दहेज, गहनों का आकर्षण) साधारण परिवारों को विनाश की ओर धकेल देती हैं।
✨ निष्कर्ष
‘गबन’ मुंशी प्रेमचन्द की ऐसी उत्कृष्ट रचना है जो मानव-जीवन की गहराइयों, सामाजिक कुरीतियों और नैतिक मूल्यों को बड़े ही सहज और यथार्थ रूप में प्रस्तुत करती है।
यह उपन्यास बताता है कि दिखावे की संस्कृति कैसे एक सुखी परिवार को भी बिखेर सकती है, और सच्चा जीवन वही है जिसमें सत्य, प्रेम और नैतिकता को सर्वोपरि स्थान दिया जाए।
⭐ ‘गबन’ — मुंशी प्रेमचन्द : सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
📌 लेखक परिचय — मुंशी प्रेमचन्द (संक्षेप में)
हिन्दी साहित्य के महान उपन्यासकार और कथाशिल्पी मुंशी प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।
उन्होंने समाज की वास्तविक समस्याओं—गरीबी, शोषण, दहेज, कुरीतियाँ, नैतिक मूल्यों—को अपनी कहानियों व उपन्यासों में प्रमुखता दी।
उनकी प्रमुख रचनाएँ—
गोदान, गबन, कर्मभूमि, सेवासदन, रंगभूमि, प्रेमाश्रम आदि हैं।
8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हो गया।
⭐ ‘गबन’ का छोटा सारांश (Short Summary)
मुंशी प्रेमचन्द के उपन्यास ‘गबन’ का नायक रमानाथ अपनी पत्नी जालपा की गहनों की इच्छा और सामाजिक दिखावे को पूरा करने के लिए गलत मार्ग चुनता है। वह कार्यालय का सरकारी धन चुराकर (गबन करके) पत्नी के लिए गहने बनवा देता है।
जब गबन का पर्दाफाश होता है तो रमानाथ घर छोड़कर भाग जाता है।
जालपा पश्चाताप करती है और रमानाथ को खोजकर राह दिखाती है।
अंत में रमानाथ अपने अपराध को स्वीकार करता है और दंड पाकर सुधर जाता है।
कहानी का संदेश यह है कि दिखावा, आडंबर और भौतिक आकर्षण मनुष्य को विनाश की ओर ले जाते हैं, जबकि प्रेम, विश्वास और सत्य ही जीवन के असली मूल्य हैं।
⭐ रमानाथ का चरित्र-चित्रण (100% यूनिक)
रमानाथ मध्यमवर्गीय परिवार का एक महत्वाकांक्षी युवक है, जो समाज में सम्मान पाने के लिए आडंबरपूर्ण जीवन जीना चाहता है। वह पत्नी की इच्छाओं को पूरा करने के लिए गलत रास्ता अपनाता है, लेकिन उसका मन स्वभाव से बुरा नहीं है।
उसके भीतर आत्मसम्मान भी है और प्रेम भी।
गलती का अहसास होने पर वह बदल जाता है और अंत में सत्य को स्वीकार करता है।
रमानाथ का चरित्र यह संदेश देता है कि भ्रम, दिखावा और गलत सामाजिक प्रतिस्पर्धा एक अच्छे मनुष्य को भी अपराधी बना देती है।
⭐ जालपा का चरित्र-चित्रण (100% यूनिक)
जालपा एक आदर्श भारतीय नारी का प्रतीक है, जो गहनों को सौंदर्य और प्रतिष्ठा का प्रतीक मानती है।
उसके गहनों के प्रति आकर्षण के कारण रमानाथ अपराध करता है, लेकिन जालपा स्वयं भी परिस्थितियों से संघर्ष करती है।
रमानाथ के चले जाने के बाद जालपा गहनों का मोह त्याग देती है और अपने परिवार को बचाने के लिए दृढ़निश्चयी बनती है।
जालपा का चरित्र त्याग, संघर्ष और आत्मबोध का प्रतीक है।
⭐ ‘गबन’ की व्याख्या (Vyakya – परीक्षा में काम आने वाली)
पंक्ति:
“दिखावे की ज़िंदगी मनुष्य को भीतर से खोखला बना देती है।”
व्याख्या:
यह पंक्ति ‘गबन’ की मूल भावना को प्रकट करती है। कहानी का नायक रमानाथ अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और पत्नी की इच्छाओं को पूरा करने के लिए दिखावे का मार्ग चुनता है। दिखावे की यह जीवनशैली उसे अपराध की ओर धकेल देती है।
इस प्रकार प्रेमचन्द यह संदेश देते हैं कि आडंबर और झूठी प्रतिष्ठा मनुष्य को नैतिक पतन की ओर ले जाती है।
⭐ एक-लाइनिंग प्रश्न (One Liner Question) — 1 अंक
गबन उपन्यास के लेखक कौन हैं?
उत्तर: मुंशी प्रेमचन्दगबन का नायक कौन है?
उत्तर: रमानाथजालपा किस चीज़ के प्रति आकर्षित रहती है?
उत्तर: गहनों के प्रतिरमानाथ किस अपराध का दोषी बनता है?
उत्तर: सरकारी धन का गबनउपन्यास का प्रमुख संदेश क्या है?
उत्तर: दिखावा जीवन को पतन की ओर ले जाता है।
⭐ 2 अंकों के प्रश्न-उत्तर
प्र.1. ‘गबन’ नाम की उपयुक्तता बताइए।
उत्तर:
उपन्यास की पूरी घटनाएँ रमानाथ द्वारा किए गए गबन (सरकारी धन की चोरी) के इर्द-गिर्द घूमती हैं। यही अपराध उसकी मानसिक स्थिति, सामाजिक सम्मान, पारिवारिक जीवन और संबंधों को प्रभावित करता है। इसलिए उपन्यास का नाम ‘गबन’ अत्यंत उपयुक्त है।
प्र.2. जालपा के गहनों का आकर्षण कहानी में क्या भूमिका निभाता है?
उत्तर:
जालपा के गहनों के प्रति आकर्षण के कारण ही रमानाथ पर दबाव बनता है और वह गबन करने जैसा गलत कदम उठाता है। इसी आकर्षण से कहानी आगे बढ़ती है और अंत में जालपा आत्मबोध करती है। अतः गहने कहानी का मुख्य केंद्र बन जाते हैं।
⭐ 5 अंकों के प्रश्न-उत्तर
प्र.1. रमानाथ के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रमानाथ एक महत्वाकांक्षी, भावुक और दिखावे का शौकीन युवक है। वह मध्यमवर्गीय परिवार से होने के बावजूद उच्च status की चाह रखता है। पत्नी जालपा से अत्यधिक प्रेम करता है और उसकी इच्छाएँ पूरी करने के लिए सरकारी धन का गबन कर लेता है।
उसके भीतर दया, आत्मग्लानि और नैतिक मूल्यों की चेतना भी है।
भागते-भागते वह समझ जाता है कि धन और दिखावा जीवन का अंतिम उद्देश्य नहीं है। अंत में अपराध स्वीकार कर वह अपने जीवन को सुधार लेता है।
इस प्रकार रमानाथ का चरित्र सामाजिक दबाव, मानव मनोविज्ञान और नैतिक संघर्ष का प्रतीक है।
⭐ 10 अंकों का प्रश्न-उत्तर
प्र.1. ‘गबन’ उपन्यास सामाजिक कुरीतियों और मध्यमवर्गीय जीवन का यथार्थ चित्रण कैसे प्रस्तुत करता है? विस्तार से लिखिए।
उत्तर (100% यूनिक, परीक्षा उपयुक्त):
मुंशी प्रेमचन्द का उपन्यास ‘गबन’ भारतीय मध्यमवर्गीय समाज की वास्तविकताओं का मार्मिक चित्रण करता है। इसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार दिखावा, आडंबर और दहेज जैसी कुरीतियाँ एक सामान्य परिवार को विनाश की ओर धकेल सकती हैं।
उपन्यास का नायक रमानाथ समाज में प्रतिष्ठित दिखने की लालसा में सरकारी धन का गबन कर बैठता है। उसकी पत्नी जालपा गहनों को जीवन की अनिवार्यता मानती है, जिसका दवाब रमानाथ को अपराध की ओर ले जाता है।
यह उपन्यास दर्शाता है कि मध्यमवर्गीय परिवार सामाजिक मूल्यांकन के दबाव में अपने वास्तविक सुख को खो देता है। कहानी में स्त्री-पुरुष संबंध, आर्थिक असमानता, दहेज-प्रथा, गहनों का मोह, सामाजिक मान-सम्मान—इन सभी का यथार्थवादी चित्रण है।
अंत में जालपा और रमानाथ दोनों यह समझ जाते हैं कि जीवन का वास्तविक सुख सत्य, प्रेम, विश्वास और नैतिकता में है।
इस प्रकार ‘गबन’ समाज की उन कुरीतियों पर करारा व्यंग्य है जो मनुष्य को गलत मार्ग पर ले जाती हैं।
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