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🌱 जीवन व इसकी विविधता (Life and its Diversity)
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Table of Contents

🌱 जीवन व इसकी विविधता (Life and its Diversity)

🏫 Class 9 Life Science (West Bengal Board)

“जीवन व इसकी विविधता” अध्याय में पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विविधता के बारे में बताया गया है। इसमें जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता और ह्विटेकर द्वारा प्रस्तावित पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली को समझाया गया है। यह अध्याय पादप, जन्तु, कवक, प्रोटिस्टा और मोनेरा जगत के मुख्य लक्षणों के साथ-साथ कशेरुक, उभयचर, स्तनधारी और अकशेरुक जीवों की विशेषताओं को भी दर्शाता है।

प्रस्तावना

हमारे आसपास अनेक प्रकार के जीव पाए जाते हैं। पेड़-पौधे, पशु, पक्षी, कीट, सूक्ष्मजीव और मनुष्य—सभी में जीवन के अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। किसी जीव का आकार बहुत छोटा हो सकता है, जबकि कोई जीव बहुत बड़ा हो सकता है। कुछ जीव जल में रहते हैं, कुछ भूमि पर और कुछ हवा में भी अपना जीवन व्यतीत करते हैं।

जीवों में इतनी अधिक भिन्नता होने के बावजूद उनमें कुछ सामान्य विशेषताएँ भी होती हैं। इसी विविधता को समझने और जीवों को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करने के लिए जीवों का वर्गीकरण किया जाता है।

इस अध्याय में हम जीवन की प्रमुख विशेषताओं, जैव विविधता, वर्गीकरण और जीव-जगत के प्रमुख समूहों के बारे में जानेंगे।


1. जीवन क्या है?

जीवन को केवल यह देखकर निर्धारित नहीं किया जा सकता कि कोई वस्तु चल रही है या नहीं।

उदाहरण के लिए, कार चलती है लेकिन वह जीवित नहीं है। दूसरी ओर पौधे एक स्थान पर स्थिर रहते हैं, फिर भी वे जीवित हैं।

जीवों में कुछ विशेष जैविक क्रियाएँ होती हैं, जिनके आधार पर हम उन्हें जीवित मानते हैं।

जीवन की प्रमुख विशेषताएँ

  • पोषण
  • श्वसन
  • वृद्धि
  • प्रजनन
  • उत्सर्जन
  • उत्तेजना के प्रति प्रतिक्रिया
  • उपापचय

2. पोषण

जीवों को अपनी जीवन-क्रियाओं के लिए ऊर्जा और पोषक पदार्थों की आवश्यकता होती है। भोजन प्राप्त करने और उसका उपयोग करने की प्रक्रिया को पोषण कहते हैं।

पौधों में पोषण

हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसे स्वपोषी पोषण कहा जाता है।

इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

जन्तुओं में पोषण

मनुष्य और अधिकांश जन्तु अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। वे पौधों या अन्य जीवों से भोजन प्राप्त करते हैं। इसे परपोषी पोषण कहा जाता है।


3. श्वसन

भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए जीवों में होने वाली जैविक प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं।

श्वसन के दौरान भोजन से ऊर्जा मुक्त होती है और जीव इस ऊर्जा का उपयोग अपनी विभिन्न गतिविधियों में करते हैं।

मनुष्य ऑक्सीजन का उपयोग करके भोजन से ऊर्जा प्राप्त करता है।


4. वृद्धि

जीवों में समय के साथ आकार और शरीर के द्रव्यमान में वृद्धि होती है। इसे वृद्धि कहते हैं।

उदाहरण:

  • बच्चे का बड़ा होकर वयस्क बनना।
  • पौधे का बीज से बड़ा पौधा बनना।

जीवों में वृद्धि कोशिकाओं की संख्या या आकार में वृद्धि के कारण हो सकती है।


5. प्रजनन

अपने समान नए जीवों को उत्पन्न करने की प्रक्रिया को प्रजनन कहते हैं।

प्रजनन किसी एक जीव के व्यक्तिगत जीवन के लिए आवश्यक नहीं होता, लेकिन यह जीवों की प्रजाति को बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रजनन के प्रमुख प्रकार

  1. लैंगिक प्रजनन
  2. अलैंगिक प्रजनन

प्रजनन के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जीवन का क्रम जारी रहता है।


6. उत्सर्जन

जीवों के शरीर में जीवन-क्रियाओं के दौरान कुछ अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं। इन अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।

मनुष्य में मुख्य उत्सर्जी अंग गुर्दे हैं।

पौधे भी अपने कुछ अपशिष्ट पदार्थों को विभिन्न तरीकों से बाहर निकालते या संग्रहित करते हैं।


7. उत्तेजना के प्रति प्रतिक्रिया

जीव अपने आसपास के वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को महसूस करते हैं और उनके प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।

उदाहरण:

जब हम किसी गर्म वस्तु को छूते हैं तो तुरंत हाथ पीछे खींच लेते हैं।

इसी प्रकार पौधे भी बाहरी उत्तेजनाओं के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।

उदाहरण:

सूरजमुखी का प्रकाश की दिशा में मुड़ना।


8. उपापचय

जीवों के शरीर में लगातार अनेक रासायनिक क्रियाएँ होती रहती हैं। इन सभी रासायनिक क्रियाओं के समुच्चय को उपापचय (Metabolism) कहते हैं।

उपापचय को दो भागों में समझा जा सकता है—

उपचय

सरल पदार्थों से जटिल पदार्थों का निर्माण।

अपचय

जटिल पदार्थों का सरल पदार्थों में टूटना और ऊर्जा का निकलना।

जीवित रहने के लिए उपापचय आवश्यक है।


9. जैव विविधता क्या है?

पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विभिन्नता को जैव विविधता (Biodiversity) कहते हैं।

पृथ्वी पर लाखों प्रकार के जीव पाए जाते हैं। इनमें आकार, रंग, संरचना, निवास स्थान, भोजन और जीवन-शैली में अंतर हो सकता है।

उदाहरण:

  • पेड़
  • घास
  • मछली
  • पक्षी
  • कीट
  • मनुष्य
  • बैक्टीरिया
  • कवक

इन सभी में अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं।


10. वर्गीकरण की आवश्यकता

यदि पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवों का अध्ययन बिना किसी व्यवस्था के किया जाए तो यह बहुत कठिन होगा।

इसलिए समान विशेषताओं वाले जीवों को एक समूह में रखा जाता है। इस प्रक्रिया को वर्गीकरण (Classification) कहते हैं।

वर्गीकरण के लाभ

  • जीवों का अध्ययन आसान हो जाता है।
  • समान और अलग विशेषताओं की पहचान होती है।
  • जीवों की पहचान करने में सहायता मिलती है।
  • जीवों के विकासात्मक संबंधों को समझने में मदद मिलती है।
  • वैज्ञानिक जानकारी को व्यवस्थित किया जा सकता है।

11. वर्गीकरण का आधार

जीवों का वर्गीकरण करते समय उनकी अनेक विशेषताओं को ध्यान में रखा जाता है।

जैसे—

  • कोशिका का प्रकार
  • कोशिकाओं की संख्या
  • शरीर की संरचना
  • पोषण का तरीका
  • प्रजनन की विधि
  • शरीर में ऊतकों का संगठन
  • विकासात्मक संबंध

12. कोशिका के आधार पर वर्गीकरण

जीवों की कोशिकाओं के आधार पर उन्हें मुख्य रूप से दो समूहों में समझा जा सकता है।

प्रोकैरियोटिक कोशिका

इन कोशिकाओं में स्पष्ट और झिल्ली से घिरा हुआ केंद्रक नहीं होता।

उदाहरण:

बैक्टीरिया

यूकैरियोटिक कोशिका

इन कोशिकाओं में स्पष्ट, झिल्ली से घिरा हुआ केंद्रक पाया जाता है।

उदाहरण:

  • पौधे
  • जन्तु
  • कवक
  • प्रोटिस्ट

13. एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीव

एककोशिकीय जीव

जिन जीवों का शरीर केवल एक कोशिका से बना होता है, उन्हें एककोशिकीय जीव कहते हैं।

उदाहरण:

  • अमीबा
  • पैरामीशियम
  • कुछ बैक्टीरिया

एक ही कोशिका जीवन की आवश्यक क्रियाएँ करती है।

बहुकोशिकीय जीव

जिन जीवों का शरीर अनेक कोशिकाओं से बना होता है, उन्हें बहुकोशिकीय जीव कहते हैं।

उदाहरण:

  • मनुष्य
  • पेड़
  • पक्षी
  • मछली

इनमें अलग-अलग कोशिकाएँ अलग-अलग कार्य कर सकती हैं।


14. पाँच-जगत वर्गीकरण

जीवों को समझने के लिए वैज्ञानिक आर. एच. व्हिटेकर (R. H. Whittaker) ने पाँच-जगत वर्गीकरण प्रस्तुत किया।

इसके अनुसार जीव-जगत को पाँच प्रमुख समूहों में बाँटा गया—

  1. मोनेरा
  2. प्रोटिस्टा
  3. कवक
  4. पादप
  5. जन्तु

अब इन समूहों को सरलता से समझते हैं।


15. मोनेरा जगत

मोनेरा में मुख्य रूप से प्रोकैरियोटिक और एककोशिकीय जीव शामिल किए जाते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • सामान्यतः एककोशिकीय
  • स्पष्ट केंद्रक का अभाव
  • झिल्ली-बद्ध कोशिकांग नहीं होते
  • कुछ स्वपोषी तथा कुछ परपोषी होते हैं।

उदाहरण

  • बैक्टीरिया
  • सायनोबैक्टीरिया
  • माइकोप्लाज्मा

16. प्रोटिस्टा जगत

प्रोटिस्टा में मुख्य रूप से एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव शामिल होते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • यूकैरियोटिक कोशिका
  • सामान्यतः एककोशिकीय
  • कुछ स्वपोषी और कुछ परपोषी
  • अधिकांश जल या नम स्थानों में पाए जाते हैं।

उदाहरण

  • अमीबा
  • पैरामीशियम
  • यूग्लीना

17. कवक जगत

कवक ऐसे जीव हैं जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। वे मृत या जीवित पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • यूकैरियोटिक
  • अधिकांश बहुकोशिकीय
  • कोशिका भित्ति सामान्यतः काइटिन की बनी होती है।
  • इनमें क्लोरोफिल नहीं होता।
  • ये परपोषी होते हैं।

उदाहरण

  • यीस्ट
  • मशरूम
  • ब्रेड मोल्ड

कवक प्रकृति में मृत पदार्थों के अपघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


18. पादप जगत

पादप जगत में पेड़-पौधे और अन्य पादप शामिल होते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • यूकैरियोटिक
  • सामान्यतः बहुकोशिकीय
  • कोशिका भित्ति उपस्थित
  • क्लोरोफिल पाया जाता है।
  • अधिकांश पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं।

उदाहरण

  • शैवाल
  • मॉस
  • फर्न
  • चीड़
  • आम
  • गुलाब

19. जन्तु जगत

जन्तु जगत में मनुष्य सहित विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी और अन्य जन्तु शामिल होते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • यूकैरियोटिक
  • बहुकोशिकीय
  • कोशिका भित्ति नहीं होती।
  • परपोषी
  • अधिकांश जन्तु चलने-फिरने में सक्षम होते हैं।
  • बाहरी उत्तेजनाओं के प्रति प्रतिक्रिया करने की क्षमता विकसित होती है।

उदाहरण

  • मनुष्य
  • गाय
  • कुत्ता
  • मछली
  • पक्षी
  • हाथी

20. पौधों का वर्गीकरण

पौधों को उनकी संरचना और प्रजनन की विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में रखा जाता है।

प्रमुख समूह हैं—

  1. थैलोफाइटा
  2. ब्रायोफाइटा
  3. टेरिडोफाइटा
  4. जिम्नोस्पर्म
  5. एंजियोस्पर्म

21. थैलोफाइटा

इन पौधों का शरीर जड़, तना और पत्तियों में स्पष्ट रूप से विभाजित नहीं होता।

उदाहरण

शैवाल (Algae)

ये सामान्यतः जल में पाए जाते हैं।


22. ब्रायोफाइटा

ब्रायोफाइटा को पौधों का ऐसा समूह माना जाता है जिसमें वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ विकसित नहीं होतीं।

ये प्रायः नम स्थानों पर पाए जाते हैं।

उदाहरण

मॉस


23. टेरिडोफाइटा

इन पौधों में जड़, तना और पत्तियाँ विकसित होती हैं। इनमें संवहनी ऊतक भी पाए जाते हैं।

ये बीज के बजाय बीजाणुओं द्वारा प्रजनन करते हैं।

उदाहरण

फर्न


24. जिम्नोस्पर्म

जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न होते हैं, अर्थात बीज किसी फल के अंदर बंद नहीं होते।

उदाहरण

  • चीड़
  • देवदार

25. एंजियोस्पर्म

एंजियोस्पर्म फूल वाले पौधे हैं। इनके बीज फल के अंदर सुरक्षित रहते हैं।

इनमें फूल और फल प्रमुख विशेषताएँ हैं।

एंजियोस्पर्म को आगे दो समूहों में बाँटा जाता है—

एकबीजपत्री

इनके बीज में एक बीजपत्र होता है।

उदाहरण:

  • गेहूँ
  • मक्का
  • घास

द्विबीजपत्री

इनके बीज में दो बीजपत्र होते हैं।

उदाहरण:

  • मटर
  • चना
  • आम

26. जन्तुओं का वर्गीकरण

जन्तुओं को उनकी शरीर संरचना और अन्य विशेषताओं के आधार पर विभिन्न समूहों में बाँटा जाता है।

दो प्रमुख समूह हैं—

अकशेरुकी

जिन जन्तुओं में रीढ़ की हड्डी नहीं होती, उन्हें अकशेरुकी कहते हैं।

उदाहरण:

  • केंचुआ
  • तिलचट्टा
  • मकड़ी
  • घोंघा

कशेरुकी

जिन जन्तुओं में रीढ़ की हड्डी और आंतरिक कंकाल पाया जाता है, उन्हें कशेरुकी कहते हैं।

उदाहरण:

  • मछली
  • मेंढक
  • साँप
  • पक्षी
  • मनुष्य

27. कशेरुकी जन्तुओं के प्रमुख वर्ग

कशेरुकी जन्तुओं को सामान्यतः पाँच प्रमुख वर्गों में समझा जाता है—

1. मछलियाँ

  • जल में रहती हैं।
  • गलफड़ों से श्वसन करती हैं।
  • सामान्यतः पंखों की सहायता से तैरती हैं।

उदाहरण: रोहू, शार्क

2. उभयचर

  • जल और भूमि दोनों स्थानों पर जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
  • त्वचा नम रहती है।

उदाहरण: मेंढक

3. सरीसृप

  • अधिकांश भूमि पर रहते हैं।
  • शरीर पर शल्क पाए जा सकते हैं।
  • अधिकांश अंडे देते हैं।

उदाहरण: साँप, छिपकली, मगरमच्छ

4. पक्षी

  • शरीर पंखों से ढका होता है।
  • आगे के पैर पंखों में परिवर्तित होते हैं।
  • अंडे देते हैं।

उदाहरण: कबूतर, कौआ, तोता

5. स्तनधारी

  • अधिकांश बच्चे को जन्म देते हैं।
  • मादा में दुग्ध ग्रंथियाँ होती हैं।
  • शरीर पर बाल पाए जाते हैं।

उदाहरण: मनुष्य, गाय, कुत्ता, हाथी


28. जैव विविधता का महत्व

जैव विविधता पृथ्वी के पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विभिन्न जीव—

  • खाद्य श्रृंखला को बनाए रखते हैं।
  • परागण में सहायता करते हैं।
  • मृत पदार्थों के अपघटन में मदद करते हैं।
  • मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में योगदान देते हैं।
  • मनुष्य को भोजन, औषधि और अन्य संसाधन प्रदान करते हैं।

इसलिए जैव विविधता का संरक्षण आवश्यक है।


29. जैव विविधता को खतरे

मानवीय गतिविधियों के कारण अनेक जीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं।

प्रमुख कारण हैं—

  • वनों की कटाई
  • प्रदूषण
  • अत्यधिक शिकार
  • जलवायु परिवर्तन
  • प्राकृतिक आवासों का विनाश
  • प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग

इन कारणों से कई प्रजातियाँ संकट में पहुँच सकती हैं।


30. जैव विविधता का संरक्षण

जीव-जगत की विविधता को बचाने के लिए हमें प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए।

संरक्षण के उपाय

  • वनों की रक्षा करना।
  • अधिक पेड़ लगाना।
  • वन्यजीवों का संरक्षण करना।
  • प्रदूषण कम करना।
  • प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना।
  • अवैध शिकार रोकना।
  • जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना।

अध्याय का सारांश

जीवन व इसकी विविधता अध्याय हमें जीवित जगत की विशेषताओं और पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न जीवों के बारे में जानकारी देता है।

जीवों में पोषण, श्वसन, वृद्धि, प्रजनन, उत्सर्जन और उत्तेजना के प्रति प्रतिक्रिया जैसी विशेषताएँ पाई जाती हैं। पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विभिन्नता को जैव विविधता कहा जाता है।

जीवों की विशाल संख्या और विविधता को समझने के लिए वर्गीकरण किया जाता है। व्हिटेकर के पाँच-जगत वर्गीकरण में मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जन्तु शामिल हैं।

पौधों और जन्तुओं को भी उनकी विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया जाता है। जैव विविधता पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसका संरक्षण करना आवश्यक है।


परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1. जैव विविधता क्या है?

उत्तर: पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।

प्रश्न 2. जीवों की तीन प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: जीवों की प्रमुख विशेषताओं में पोषण, श्वसन, वृद्धि, प्रजनन, उत्सर्जन तथा उत्तेजना के प्रति प्रतिक्रिया शामिल हैं।

प्रश्न 3. वर्गीकरण किसे कहते हैं?

उत्तर: समान विशेषताओं वाले जीवों को अलग-अलग समूहों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 4. पाँच-जगत वर्गीकरण किसने दिया था?

उत्तर: पाँच-जगत वर्गीकरण वैज्ञानिक आर. एच. व्हिटेकर ने प्रस्तुत किया था।

प्रश्न 5. पाँच-जगत के नाम लिखिए।

उत्तर:

  1. मोनेरा
  2. प्रोटिस्टा
  3. कवक
  4. पादप
  5. जन्तु

प्रश्न 6. एककोशिकीय जीव क्या होते हैं?

उत्तर: जिन जीवों का शरीर केवल एक कोशिका से बना होता है, उन्हें एककोशिकीय जीव कहते हैं। उदाहरण—अमीबा।

प्रश्न 7. बहुकोशिकीय जीव क्या होते हैं?

उत्तर: जिन जीवों का शरीर अनेक कोशिकाओं से बना होता है, उन्हें बहुकोशिकीय जीव कहते हैं। उदाहरण—मनुष्य और पेड़।

प्रश्न 8. कशेरुकी और अकशेरुकी में क्या अंतर है?

उत्तर: जिन जन्तुओं में रीढ़ की हड्डी होती है, वे कशेरुकी कहलाते हैं, जबकि जिनमें रीढ़ की हड्डी नहीं होती, वे अकशेरुकी कहलाते हैं।

प्रश्न 9. जिम्नोस्पर्म क्या हैं?

उत्तर: ऐसे पौधे जिनके बीज नग्न होते हैं और फल के अंदर बंद नहीं होते, जिम्नोस्पर्म कहलाते हैं। उदाहरण—चीड़ और देवदार।

प्रश्न 10. जैव विविधता का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर: जैव विविधता पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। यह खाद्य श्रृंखला, परागण, अपघटन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायता करती है। इसलिए इसका संरक्षण आवश्यक है।


एक नजर में याद रखें

जीवन → पोषण + श्वसन + वृद्धि + प्रजनन + उत्सर्जन + प्रतिक्रिया

जैव विविधता → जीवों की विभिन्नता

वर्गीकरण → जीवों को समान विशेषताओं के आधार पर समूहों में बाँटना

पाँच-जगत → मोनेरा + प्रोटिस्टा + कवक + पादप + जन्तु

पौधे → थैलोफाइटा + ब्रायोफाइटा + टेरिडोफाइटा + जिम्नोस्पर्म + एंजियोस्पर्म

जन्तु → अकशेरुकी + कशेरुकी

कशेरुकी → मछली + उभयचर + सरीसृप + पक्षी + स्तनधारी


निष्कर्ष

पृथ्वी पर जीवन अनेक रूपों में मौजूद है। छोटे सूक्ष्मजीवों से लेकर विशाल पेड़ों और बड़े जन्तुओं तक, प्रत्येक जीव प्रकृति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जीवों की इस विशाल विविधता को समझने के लिए वैज्ञानिक वर्गीकरण आवश्यक है।

जीवन की विविधता प्रकृति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है और इसका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है।

 

 

🧠 Group-A: सही उत्तर चुनिए (MCQs with Answers)

  1. जीवों को पाँच जगतों में विभक्त किया
    (a) ह्विटेकर ने

  2. वर्गीकरण की इकाई है
    (a) प्रजाति

  3. द्विनाम पद्धति के प्रस्तावक हैं
    (a) लिने

  4. यूग्लीना है
    (d) प्रोटिस्टा का

  5. कवक में नहीं मिलता है
    (c) क्लोरोफिल

  6. मशरूम है
    (b) कवक

  7. बहुकोशिकीय जीव है
    (a) स्पाइरोगाइरा

  8. स्वपोषी तथा परपोषी दोनों प्रकार के पोषण वाला जीव है
    (a) जीवाणु

  9. पादप वर्ग का उभयचर कहलाता है
    (d) ब्रायोफाइटा

  10. शीतरक्त वाला प्राणी है
    (b) मेढ़क

  11. पाश्वरेखा उपस्थित है
    (a) मछली में

  12. स्पंजी अस्थियों वाला प्राणी है
    (b) कछुआ

  13. शिरा-हृदय उपस्थित होता है
    (b) मछली में

  14. हृदय में तीन कक्ष होते हैं
    (c) मेढ़क के

  15. होमोसेपिएन्स वैज्ञानिक नाम है
    (d) इनमें से कोई नहीं
    (सही उत्तर होता: मनुष्य का, लेकिन विकल्पों में नहीं है)


✍️ Group-B: रिक्त स्थान की पूर्ति करें

  1. टैक्सोनॉमी शब्द का प्रयोग डे-कैंडोल ने किया।

  2. पादप स्वपोषी तथा जन्तु परपोषी होते हैं।

  3. लाइकेन का उदाहरण शैवाल और कवक के सहजीवन का है।

  4. मनुष्य के हृदय में चार कक्ष होते हैं।

  5. साइकस को जीवित जीवाश्म माना जाता है।

  6. मूंगा का निर्माण नीडेरिया संघ के जन्तुओं द्वारा होता है।

  7. प्रोटोप्टेरस में फेफड़ों द्वारा श्वसन होता है।

  8. मछलियों में त्वचा से श्वसन होता है।

  9. अंडे देने वाले स्तनधारी हैं प्लैटीपस और एकिड्ना

  10. कशेरुकी में पृष्ठ रज्जु मेरुदंड में प्रतिस्थापित हो जाती है।


 सही या गलत लिखिए (True/False)

  1. द्विपद नामकरण तैमार्क ने दिया था।(गलत)

  2. साइकन पोरीफेरा संघ का जीव है।(सही)

  3. पादप वायुमण्डल से ऑक्सीजन लेते हैं।(गलत)

  4. पाँच जगत वर्गीकरण लीनियस ने दिया था।(गलत)

  5. मेंटल (mantle) आर्थोपोडा वर्ग की विशेषता है।(गलत)


🔗  स्तम्भ मिलान करें

स्तम्भ Aस्तम्भ Bसही युग्म
(i) मोलस्का(d) मैटलi – d
(ii) उभयचर(c) तीन कक्षीय हृदयii – c
(iii) प्रोटोयेरिया(a) प्रारंभिक स्तनपायीiii – a
(iv) मोनेरा(f) प्रोकैरियोटिक कोशिकायेंiv – f

Group-C: संक्षिप्त उत्तर (2–3 वाक्यों में)

1.वर्गीकरण किसे कहते हैं?
जीवों को उनके लक्षणों के आधार पर समूहों में बाँटना वर्गीकरण कहलाता है। यह अध्ययन को आसान बनाता है।

2.जीव विविधता से क्या समझते हो?
पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीवों की विभिन्नता को जीव विविधता कहते हैं।

3.पाँच जगत वर्गीकरण का आधार क्या है?
कोशिकीय संगठन, पोषण का तरीका, कोशिका की संरचना आदि इसके आधार हैं।

4.कवकों को अलग जगत फंजाई में क्यों रखा गया?
कवकों में क्लोरोफिल नहीं होता और ये परपोषी होते हैं, इसलिए इन्हें अलग जगत में रखा गया।

5.पादप जगत के प्रमुख वर्ग:
शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म), आवृतबीजी (एन्जियोस्पर्म)

6.प्रोटिस्टा में किस प्रकार के जीव आते हैं?
एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव जैसे अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना।

7.ब्रायोफाइटा के तीन लक्षण व उदाहरण:
जल में प्रजनन, जड़ का अभाव, नालिका तंत्र नहीं होता; उदाहरण: मॉस।

8.एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री में अंतर:
एकबीजपत्री में एक बीजपत्र (जैसे धान), द्विबीजपत्री में दो (जैसे चना) होते हैं।

9.द्विपार्श्व सममिति किसे कहते हैं?
जब शरीर को दो बराबर भागों में बाँटा जा सके; जैसे – मनुष्य।

10.आर्थोपोडा के तीन लक्षण:
खंडित शरीर, जोड़दार पैर, कठोर बाह्य कंकाल।

11.पृथ्वी पर जीवों की उत्पत्ति कब हुई?
लगभग 3.5 अरब वर्ष पूर्व।

12.बीज रहित पौधों को किस उपजगत में रखा गया?
ब्रायोफाइटा एवं टेरिडोफाइटा।

13.गमन में अक्षम प्राणी का नाम:
स्पंज (साइकन)

14.स्तनधारी वर्ग की विशेषताएं:
स्तन ग्रंथियाँ होती हैं, बाल होते हैं, जीव जन्म देते हैं।

15.पृष्ठ रज्जु क्या है?
यह रज्जुकीय जीवों की एक नालीनुमा संरचना है जो मेरुदंड में विकसित होती है।

🧠 Group D – विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (Long Answers)

1. वर्गीकरण का जनक कौन था? आवश्यकता क्यों है?

उत्तर :- कार्ल लीनियस को वर्गीकरण का जनक कहा जाता है। वर्गीकरण आवश्यक है क्योंकि इससे जीवों को पहचानना और उनका अध्ययन करना सरल हो जाता है। यह वैज्ञानिकों को पूरी दुनिया में एक समान भाषा में जीवों की जानकारी साझा करने में मदद करता है।

2. पादप जगत का वर्गीकरण:

  •  शैवाल (Algae)
  • ब्रायोफाइटा (Bryophyta)
  • टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)
  • जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms)
  • एन्जियोस्पर्म (Angiosperms)

3. शैवाल और कवक में अंतर:

  • शैवाल: इनमें क्लोरोफिल होता है, ये प्रकाश संश्लेषण करते हैं। (जैसे – स्पाइरोगाइरा)

  • कवक: इनमें क्लोरोफिल नहीं होता, ये परपोषी होते हैं। (जैसे – म्यूकर)

4. जन्तु-जगत की प्रमुख विशेषताएं:

बहुकोशिकीय, उपापचयी, गतिशील, विशेषीकृत ऊतकों वाले जीव होते हैं।

5. जीवन की उत्पत्ति:

जीवन की उत्पत्ति लगभग 3.5 अरब वर्ष पूर्व जल में रासायनिक विकास की प्रक्रिया से हुई। सर्वप्रथम सरल एककोशिकीय जीव उत्पन्न हुए।

6. उभयचर जीवों की विशेषताएं:

  • जल व थल दोनों में रह सकते हैं।

  • तीन कक्षीय हृदय होता है।
    उदाहरण: मेढ़क

7. पक्षियों की विशेषताएं:

  • शरीर पर पंख,

  • उड़ने योग्य शरीर,

  • चार-कक्षीय हृदय
    सबसे बड़ा जन्तु संघ: आर्थोपोडा

8. वर्गीकरण के सोपान व सजीव-निर्जीव में अंतर:

वर्गीकरण के सोपान: जगत > संघ > वर्ग > गण > कुल > वंश > प्रजाति
सजीव और निर्जीव में अंतर:

  • सजीव में चयापचय होता है, गति होती है, प्रजनन करते हैं

  • निर्जीव में यह सब नहीं होता

9. पाँच जगत का परिचय:

  1. मोनेरा : मोनेरा जगत में सभी एककोशिकीय और सूक्ष्मजीव शामिल होते हैं जिनके कोशिका में स्पष्ट नाभिक (nucleus) नहीं होता है। इन्हें प्रोकैरियोटिक जीव कहा जाता है। उदाहरण: बैक्टीरिया, साइनोबैक्टीरिया

  2. प्रोटिस्टा : प्रोटिस्टा जगत में एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव शामिल होते हैं। इनमें नाभिक स्पष्ट रूप से पाया जाता है। इनमें कुछ पौधों जैसे, कुछ जानवरों जैसे और कुछ फंजाई जैसे गुण होते हैं। उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम, युग्लीना

  3. फंजाई : फंजाई जगत में वे यूकैरियोटिक जीव शामिल होते हैं जो अपघटक (decomposers) होते हैं और मृत कार्बनिक पदार्थों पर जीवनयापन करते हैं। इनकी कोशिका भित्ति काइटिन से बनी होती है। उदाहरण: कवक, यीस्ट, ब्रेड मोल्ड

  4. प्लांटी : प्लांटी जगत में सभी हरित पौधे आते हैं जो प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। ये बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और स्थायी होते हैं। उदाहरण: पेड़-पौधे, शैवाल, फर्न, ब्रायोफाइट्स

  5. एनिमेलिया : एनिमेलिया जगत में सभी बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और सजीव जन्तु शामिल होते हैं जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते (हेटरोट्रॉफ्स)। ये चलायमान होते हैं और तंत्रिका तंत्र से युक्त होते हैं। उदाहरण: मनुष्य, कुत्ता, मछली, पक्षी


🎨 चित्र बनाएं – नाम सहितजीवन व इसकी विविधता

  • म्यूकर

  • अमीबा

  • फर्न

  • एकबीजपत्री बीज

  • साइकस

  • मॉस

  • फीता कृमि

  • कबूतर

  • केंचुआ

  • मेढ़क

  • तारा मछली

notice : इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के “नव जीवन विज्ञान एंव पर्यावरण ” class – की  पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।

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