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टोबा टेक सिंह — सआदत हसन मंटो
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टोबा टेक सिंह

 

— सआदत हसन मंटो

लेखक परिचय — सआदत हसन मंटो

सआदत हसन मंटो उर्दू साहित्य के प्रसिद्ध कहानीकार थे। उनका जन्म 11 मई 1912 को पंजाब के लुधियाना जिले के समराला क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने अपनी कहानियों में समाज की वास्तविक परिस्थितियों, मानवीय संवेदनाओं, गरीबी, शोषण, साम्प्रदायिकता और देश-विभाजन की त्रासदी को बहुत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

मंटो की कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे जीवन की सच्चाइयों को बिना किसी बनावट के सामने रखते हैं। उनकी भाषा सरल, व्यंग्यपूर्ण और प्रभावशाली है। उन्होंने समाज की उन विसंगतियों पर भी प्रहार किया जिन्हें सामान्यतः लोग देखने से बचते हैं।

भारत के विभाजन ने मंटो के जीवन और साहित्य पर गहरा प्रभाव डाला। ‘टोबा टेक सिंह’ उनकी प्रसिद्ध कहानी है, जिसमें 1947 के भारत-विभाजन के बाद हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच पागलों की अदला-बदली के माध्यम से विभाजन की त्रासदी और साम्प्रदायिक राजनीति की विडंबना को दिखाया गया है।

मंटो की प्रमुख कहानियों में टोबा टेक सिंह, खोल दो, ठंडा गोश्त, काली सलवार, बू, हटकर और लाइसेंस आदि प्रसिद्ध हैं।

जन्म: 11 मई 1912
मृत्यु: 18 जनवरी 1955
भाषा: उर्दू
प्रमुख विधा: कहानी
प्रमुख विषय: विभाजन, साम्प्रदायिकता, मानवता और सामाजिक यथार्थ


कहानी का सारांश

‘टोबा टेक सिंह’ सआदत हसन मंटो की प्रसिद्ध कहानी है। यह कहानी भारत-पाकिस्तान के विभाजन की त्रासदी और उसके कारण उत्पन्न मानवीय संकट को व्यंग्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है।

भारत के विभाजन के बाद हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की सरकारों ने निर्णय लिया कि दोनों देशों के पागलखानों में रहने वाले हिन्दू, सिख और मुसलमान पागलों की भी अदला-बदली की जाएगी। इसी निर्णय के कारण लाहौर के पागलखाने में रहने वाले लोगों में बेचैनी फैल जाती है।

पागलखाने के अनेक लोगों को यह समझ में नहीं आता कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान आखिर क्या हैं और वे किस देश में रहते हैं। कोई अपने आपको मोहम्मद अली जिन्ना बताता है, तो कोई मास्टर तारा सिंह। एक व्यक्ति पेड़ पर चढ़ जाता है और हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के प्रश्न पर उलझा रहता है। इस प्रकार मंटो पागलों की बातों के माध्यम से उस समय की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर तीखा व्यंग्य करते हैं।

इसी पागलखाने में बिशन सिंह नाम का एक सिख पागल था। वह पहले एक संपन्न जमींदार था और उसका संबंध टोबा टेक सिंह नामक स्थान से था। इसी कारण लोग उसे टोबा टेक सिंह कहने लगे थे।

बिशन सिंह पिछले पंद्रह वर्षों से पागलखाने में था। वह लगभग हमेशा खड़ा रहता था और कभी ठीक से सोता नहीं था। उसके पैरों में सूजन आ गई थी, लेकिन फिर भी वह अपने स्थान से हटना नहीं चाहता था।

जब हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच पागलों की अदला-बदली की बात शुरू हुई, तब बिशन सिंह की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में। वह बार-बार लोगों से यही पूछता था, लेकिन उसे संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता था।

उसका एक मुसलमान मित्र फजलदीन उससे मिलने आया। उसने बताया कि बिशन सिंह के परिवार के लोग हिन्दुस्तान चले गए हैं और उसकी बेटी रूप कौर भी उनके साथ चली गई है। फजलदीन ने उसे यह भी बताया कि टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में ही है।

अदला-बदली के दिन पागलों को सीमा की ओर ले जाया गया। बिशन सिंह को जब बताया गया कि उसे हिन्दुस्तान जाना है, तो उसने जाने से साफ इनकार कर दिया। उसका मानना था कि उसकी जमीनें टोबा टेक सिंह में हैं और टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में है।

सिपाहियों ने उसे जबरदस्ती दूसरी ओर ले जाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी सूजी हुई टाँगों पर मजबूती से खड़ा हो गया। वह किसी भी कीमत पर अपने स्थान से हटने को तैयार नहीं था।

अंत में वह भारत और पाकिस्तान की सीमा के बीच की जगह पर गिर पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई। इस प्रकार बिशन सिंह की मृत्यु केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी, बल्कि यह विभाजन के कारण टूटे हुए मनुष्य और उसकी पहचान की त्रासदी का प्रतीक बन जाती है।


कहानी का मुख्य संदेश

‘टोबा टेक सिंह’ कहानी बताती है कि राजनीतिक सीमाएँ मनुष्यों के हृदय और भावनाओं को नहीं बाँट सकतीं।

बिशन सिंह के लिए उसकी जन्मभूमि और उसकी जमीन सबसे महत्वपूर्ण थी। उसे यह समझ नहीं आया कि अचानक जमीन और लोगों को अलग-अलग देशों में कैसे बाँटा जा सकता है।

मंटो ने पागलों की स्थिति के माध्यम से यह प्रश्न उठाया है कि यदि सामान्य मनुष्य भी धर्म और राजनीति के नाम पर अपनी बुद्धि खो दें, तो वास्तविक पागल कौन है—पागलखाने में रहने वाला व्यक्ति या सत्ता और राजनीति के पीछे चलने वाला समाज?


वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(1) ‘टोबा टेक सिंह’ कहानी आधारित है—

(क) देश विभाजन पर
(ख) स्वाधीनता आंदोलन पर
(ग) पागलों की हरकत पर
(घ) उपरोक्त में कोई नहीं

उत्तर: (क) देश विभाजन पर।

(2) ‘टोबा टेक सिंह’ स्थित है—

(क) बंगलादेश में
(ख) हिन्दुस्तान में
(ग) पाकिस्तान में
(घ) श्रीलंका में

उत्तर: (ग) पाकिस्तान में।

(3) ‘कायदे आजम’ की उपाधि मिली थी—

(क) खान अब्दुल गफ्फार खाँ को
(ख) लियाकत अली को
(ग) याहिया खान को
(घ) मोहम्मद अली जिन्ना को

उत्तर: (घ) मोहम्मद अली जिन्ना को।

(4) बिशन सिंह की बेटी का नाम था—

(क) हरप्रीत कौर
(ख) रूपमती
(ग) रूप कौर
(घ) हरमीत कौर

उत्तर: (ग) रूप कौर।

(5) बिशन सिंह किस शहर के पागलखाने में था?

(क) सियालकोट
(ख) अमृतसर
(ग) चियौट
(घ) लाहौर

उत्तर: (घ) लाहौर।


लघुत्तरीय प्रश्न

1. मुसलमानों के लिए अलग देश किसने बनाया?

उत्तर: मुसलमानों के लिए अलग देश बनाने में मोहम्मद अली जिन्ना की प्रमुख भूमिका थी। पाकिस्तान का निर्माण 1947 में हुआ।

2. एक पागल दरख्त पर क्यों चढ़ गया था?

उत्तर: वह पागल हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के विभाजन को लेकर इतना उलझन में था कि पेड़ पर चढ़ गया। वह हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के प्रश्न पर बहस करता रहा और नीचे उतरने से इनकार करता रहा।

3. पागल हिन्दू वकील लीडरों को गालियाँ क्यों देने लगा?

उत्तर: हिन्दू वकील अमृतसर की एक लड़की से प्रेम करता था। लड़की के हिन्दुस्तान में चले जाने की बात सुनकर उसे बहुत दुःख हुआ। उसे लगा कि विभाजन के कारण वह लड़की उससे हमेशा के लिए दूर हो गई है। इसी कारण वह नेताओं को गालियाँ देने लगा।

4. बिशन सिंह कैसे परिवार का सदस्य था?

उत्तर: बिशन सिंह एक संपन्न जमींदार परिवार का सदस्य था। टोबा टेक सिंह में उसकी जमीनें थीं।

5. बिशन सिंह ने हिन्दुस्तान जाने से इनकार क्यों किया?

उत्तर: बिशन सिंह की जमीनें और उसकी पहचान टोबा टेक सिंह से जुड़ी थीं। वह जानता था कि टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में है। इसलिए वह पाकिस्तान छोड़कर हिन्दुस्तान जाने के लिए तैयार नहीं हुआ।


बोधमूलक प्रश्न

1. “…और यह भी कौन सीने पर हाथ रखकर कह सकता है कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, दोनों किसी दिन सिरे से गायब ही हो जाएँ…।”

उद्धृत पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इन पंक्तियों में लेखक ने भारत और पाकिस्तान के विभाजन की अनिश्चितता और विडंबना को व्यक्त किया है। विभाजन के बाद लोगों को यह भी स्पष्ट नहीं था कि कौन-सी जगह किस देश में है। भविष्य में राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल सकती हैं और देशों की सीमाएँ भी बदल सकती हैं। इसलिए कोई निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि वर्तमान राजनीतिक सीमाएँ हमेशा ऐसी ही रहेंगी। लेखक इन पंक्तियों के माध्यम से विभाजन की कृत्रिमता पर व्यंग्य करता है।


2. अधिकांश पागल अदला-बदली के पक्ष में क्यों नहीं थे और इस अदला-बदली से उनकी क्या दशा थी?

उत्तर: अधिकांश पागल समझ ही नहीं पा रहे थे कि उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर क्यों भेजा जा रहा है। उन्हें यह भी पता नहीं था कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान क्या हैं और उनका अपना देश कौन-सा है।

अदला-बदली के कारण पागलों में भय, बेचैनी और असुरक्षा उत्पन्न हो गई। कुछ रोने लगे, कुछ चिल्लाने लगे, कुछ आपस में लड़ने लगे और कुछ नारे लगाने लगे। कई लोग अपने कपड़े उतारने लगे तथा कुछ को संभालना अधिकारियों के लिए बहुत कठिन हो गया।


3. टोबा टेक सिंह उर्फ बिशन सिंह का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: बिशन सिंह कहानी का मुख्य पात्र है। वह पहले एक संपन्न जमींदार था, लेकिन मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण उसे पागलखाने में भर्ती कर दिया गया।

बिशन सिंह शारीरिक रूप से मजबूत और मानसिक रूप से दृढ़ व्यक्ति था। वह पंद्रह वर्षों तक लगभग लगातार खड़ा रहा। उसके पैरों में सूजन आ गई थी, फिर भी उसने हार नहीं मानी।

वह अपने जन्मस्थान टोबा टेक सिंह से बहुत गहरा लगाव रखता था। विभाजन के बाद उसकी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में।

बिशन सिंह अपने मित्र फजलदीन के प्रति भी भावनात्मक जुड़ाव रखता था। वह अपनी जमीन और जन्मभूमि को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ। अंत में वह भारत-पाकिस्तान की सीमा के बीच खड़ा रह गया और वहीं उसकी मृत्यु हो गई।

इस प्रकार बिशन सिंह दृढ़ निश्चयी, स्वाभिमानी, भावुक, अपनी जन्मभूमि से प्रेम करने वाला और परिस्थितियों के सामने न झुकने वाला व्यक्ति है। उसका चरित्र विभाजन की त्रासदी और विस्थापन के दर्द का प्रतीक है।


विचार और कल्पना

1. सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के उपाय

सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के लिए हमें निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए—

  1. सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए।
  2. धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं करना चाहिए।
  3. सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलना चाहिए।
  4. अफवाहों और नफरत फैलाने वाली बातों से बचना चाहिए।
  5. बच्चों को बचपन से ही भाईचारे की शिक्षा देनी चाहिए।
  6. सभी धर्मों के त्योहारों का सम्मान करना चाहिए।
  7. सोशल मीडिया पर भ्रामक और साम्प्रदायिक संदेशों को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।
  8. विवाद होने पर बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करना चाहिए।
  9. देश की एकता और अखंडता को सर्वोच्च महत्व देना चाहिए।
  10. हमें पहले स्वयं को भारतीय और उसके बाद किसी धर्म या समुदाय का सदस्य समझना चाहिए।

2. भारत और पाकिस्तान के प्रमुख शहर तथा प्रमुख त्योहार

देशप्रमुख शहरप्रमुख त्योहार
भारतदिल्लीदीपावली
भारतमुंबईहोली
भारतकोलकातादुर्गापूजा
भारतचेन्नईपोंगल
भारतवाराणसीमहाशिवरात्रि
भारतअमृतसरबैसाखी
पाकिस्तानइस्लामाबादईद-उल-फितर
पाकिस्तानलाहौरईद-उल-अजहा
पाकिस्तानकराचीईद-मिलाद-उन-नबी
पाकिस्तानपेशावररमज़ान
पाकिस्तानमुल्तानमुहर्रम

भाषा-बोध

1. अंग्रेजी शब्दों के हिन्दी रूप

अंग्रेजी शब्दहिन्दी शब्द
कान्फ्रेंससम्मेलन
इंजीनियरअभियंता / यंत्रकार
प्रैक्टिसअभ्यास
ब्रेक-फास्टनाश्ता
गवर्नमेंटसरकार
एनेक्सपरिशिष्ट / पूरक अंश
सुपरिंटेंडेंटअधीक्षक

2. साधारण, संयुक्त और मिश्र वाक्य

(i) एक सिक्ख था जिसे पागलखाने में दाखिल हुए पंद्रह वर्ष हो चुके थे।

उत्तर: मिश्र वाक्य।

(ii) महीने में एक बार मुलाकात के लिए ये लोग आते थे और उसकी खैर-खैरियत दरयाफ्त करके चले जाते थे।

उत्तर: संयुक्त वाक्य।

(iii) यूरोपियन वार्ड में दो एंग्लो-इंडियन पागल थे।

उत्तर: साधारण वाक्य।

(iv) पागलों की लारियों में निकलना और उनको दूसरे अफसरों के हवाले करना बड़ा कठिन काम था।

उत्तर: संयुक्त वाक्य।


3. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय पृथक कीजिए

(i) हुकूमतों

मूल शब्द: हुकूमत
प्रत्यय: ओं

(ii) गिरफ्तारी

मूल शब्द: गिरफ्तार
प्रत्यय:

(iii) तब्दीली

मूल शब्द: तब्दील
प्रत्यय:

(iv) जमीनें

मूल शब्द: जमीन
प्रत्यय: एँ

(v) मिठाइयाँ

मूल शब्द: मिठाई
प्रत्यय: याँ / इयाँ

(vi) हमदर्दी

मूल शब्द: हमदर्द
प्रत्यय:

(vii) मुसलमानों

मूल शब्द: मुसलमान
प्रत्यय: ओं

इन प्रत्यय-विभाजनों को पाठ के उपलब्ध भाषा-बोध समाधान से भी मिलाया गया है।


महत्वपूर्ण परीक्षा-बिंदु

  • कहानी: टोबा टेक सिंह
  • लेखक: सआदत हसन मंटो
  • मूल भाषा: उर्दू
  • मुख्य विषय: भारत-पाकिस्तान विभाजन
  • मुख्य पात्र: बिशन सिंह
  • बिशन सिंह का दूसरा नाम: टोबा टेक सिंह
  • बिशन सिंह का पेशा: जमींदार
  • बिशन सिंह कहाँ था: लाहौर के पागलखाने में
  • पागलखाने में रहने की अवधि: 15 वर्ष
  • बिशन सिंह की बेटी: रूप कौर
  • बिशन सिंह का मुसलमान मित्र: फजलदीन
  • बिशन सिंह की जमीन: टोबा टेक सिंह
  • टोबा टेक सिंह: पाकिस्तान में स्थित
  • कायदे आजम: मोहम्मद अली जिन्ना
  • कहानी का आधार: भारत-पाकिस्तान का विभाजन
  • मुख्य समस्या: पागलों की अदला-बदली
  • मुख्य संदेश: राजनीतिक सीमाओं से मानवता और भावनाओं को बाँटा नहीं जा सकता।
  • अंत: बिशन सिंह सीमा पर गिरकर मर जाता है।

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