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सुकुमार राय
तोते की चालाकी – कहानी का सारांश
लेखक – सुकुमार राय
“तोते की चालाकी” एक मजेदार और रोचक कहानी है। इस कहानी में एक तोते की बुद्धिमानी और चालाकी को दिखाया गया है। कहानी पढ़कर हमें यह समझ में आता है कि जानवर भी बहुत समझदार होते हैं और कभी-कभी अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके मजेदार काम कर लेते हैं।
. तोते की चालाकी कहानी में तोता, कुत्ता और रवि राय परिचय :
यह कहानी सुकुमार राय ने लिखी है। कहानी की शुरुआत एक बड़े और सुंदर बरामदे से होती है। उस बरामदे में एक तोता बैठा हुआ है। उसका नाम मिट्टू है। पास ही एक कुत्ता भी बैठा है, जिसका नाम पप्पू है। कुत्ता अपनी आँखें बंद करके आराम कर रहा है।
यह घर रवि राय नाम के एक व्यक्ति का है। तोता और कुत्ता दोनों उसी के पालतू जानवर हैं। रवि राय अपने जानवरों से बहुत प्यार करते हैं। उन्होंने दोनों को कई तरह के करतब सिखाए हुए हैं। कुत्ता समझदार है और मालिक की बात जल्दी समझ जाता है। वहीं तोता भी बहुत होशियार और बोलने में तेज है।
. तोते की चालाकी कहानी में रवि राय की आवाज सुनकर कुत्ता टोकरी लेकर जाता है :
एक दिन रवि राय कुत्ते को बुलाते हैं और कहते हैं,
“पप्पू, इधर आओ। दुकान पर जाओ और खाना लेकर आओ।”
मालिक की बात सुनकर कुत्ता तुरंत उठ जाता है। वह अपने मुँह से एक टोकरी उठाता है और पास की बेकरी की दुकान पर चला जाता है।
जब दुकानदार कुत्ते को टोकरी के साथ खड़ा देखता है, तो वह समझ जाता है कि रवि राय ने उसे भेजा है। इसलिए वह टोकरी में केक और डबल रोटी के कुछ टुकड़े डाल देता है।
कुत्ता टोकरी लेकर वापस घर आ जाता है। दुकानदार अपने नौकर से बही-खाता मँगाता है और उसमें रवि राय के नाम के सामने तीस रुपये लिख देता है।
. तोते की चालाकी कहानी में रवि राय कुत्ते से कहते हैं – ले आए रोटी अब खाओ :
जब कुत्ता घर लौटता है, तो रवि राय टोकरी से डबल रोटी निकालते हैं। वे एक टुकड़ा कुत्ते को देते हैं और एक टुकड़ा तोते को भी दे देते हैं। दोनों जानवर खुशी-खुशी खाने लगते हैं।
थोड़ी देर बाद रवि राय अपने काम पर जाने लगते हैं। जाते-जाते वे कहते हैं,
“अच्छा, अब मैं जा रहा हूँ। शाम को मिलूँगा।”
तोता अपनी आवाज में बोलता है,
“राम-राम! राम-राम!”
और कुत्ता भौंक कर जैसे मालिक को विदा करता है।
. तोते की चालाकी कहानी में तोते ने चालाकी दिखाई :
रवि राय के जाने के कुछ समय बाद कुत्ता सो जाता है। तभी तोता धीरे-धीरे बोलना शुरू करता है।
वह रवि राय की आवाज की नकल करते हुए कहता है,
“पप्पू, इधर आओ। जाओ, दुकान पर जाओ। खाना लेकर आओ।”
कुत्ता हड़बड़ा कर उठ जाता है। उसे लगता है कि मालिक ने ही उसे बुलाया है। वह तुरंत टोकरी उठाकर दुकान की ओर चल पड़ता है।
दुकानदार फिर से कुत्ते को देखकर उसकी टोकरी में केक और डबल रोटी डाल देता है और फिर से तीस रुपये रवि राय के खाते में लिख देता है।
कुत्ता जब घर लौटता है, तो तोता चालाकी से डबल रोटी का एक छोटा टुकड़ा कुत्ते को दे देता है और बाकी खुद खा लेता है। कुत्ता खुशी-खुशी अपना हिस्सा खाकर दुम हिलाने लगता है।
. तोते की चालाकी कहानी में दुकानदार रवि राय को बिल देता है :
कुछ दिनों तक यही सिलसिला चलता रहता है। हर बार तोता कुत्ते को भेज देता है और दुकानदार रवि राय के नाम पर पैसे लिखता जाता है।
एक दिन जब रवि राय दुकान पर जाते हैं और हिसाब पूछते हैं, तो दुकानदार उन्हें एक सौ पचास रुपये का बिल दे देता है।
रवि राय को थोड़ा आश्चर्य होता है, लेकिन वे पैसे दे देते हैं और घर लौट आते हैं।
घर आकर जब वे अपना हिसाब देखते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि उन्होंने तो केवल नब्बे रुपये का सामान लिया था।
. तोते की चालाकी कहानी में रवि राय तोते की चालाकी पकड़ लेते हैं :
अब रवि राय को शक होने लगता है। वे चुपचाप कमरे में बैठकर अखबार पढ़ने लगते हैं और ध्यान से सब देखते रहते हैं।
थोड़ी देर बाद वे सुनते हैं कि तोता फिर से कह रहा है,
“पप्पू, जाओ, दुकान पर जाओ। खाना लेकर आओ।”
कुत्ता फिर टोकरी उठाकर दुकान चला जाता है। दुकानदार फिर से टोकरी में रोटी डाल देता है। कुत्ता घर लौट आता है और टोकरी तोते के सामने रख देता है।
तोता थोड़ा-सा रोटी कुत्ते को देता है और बाकी खुद खाने लगता है।
रवि राय यह सब चुपचाप देख लेते हैं। अब उन्हें समझ में आ जाता है कि दुकानदार का हिसाब ज्यादा क्यों हो रहा था।
. रवि राय ने तोते की चालाकी की सराहना की :
अब रवि राय मुस्कुराते हुए तोते के पास जाते हैं और कहते हैं,
“मिट्टू, तुम तो बड़े चंट निकले।”
तोता अपनी आदत के अनुसार बोलता है,
“राम-राम! राम-राम!”
रवि राय को तोते की इस चालाकी पर गुस्सा नहीं आता, बल्कि उन्हें हँसी आ जाती है।
कहानी से मिलने वाली शिक्षा
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जानवर भी बहुत बुद्धिमान होते हैं। साथ ही यह भी समझ में आता है कि हमें किसी भी बात को बिना जाँच किए स्वीकार नहीं करना चाहिए।

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Buy Now१.तोते की चालाकी कहानी का नीचे दिए गए वाक्यों को पढ़ो और प्रश्नों के उत्तर दो।
१.१. रविराय की आवाज पर कुत्ता टोकरी उठाकर जाता है और बेकरी की दुकान में घुसता है।
(क) कुत्ता किसका है?
उत्तर :कुत्ता रवि राय का है ।
(ख) आवाज सुनकर कुत्ता क्या उठाता है?
उत्तर : आवाज सुनकर कुत्ता टोकरी उठाता है ।
(ग) कुत्ता किस दुकान पर जाता है?
उत्तर :बेकरी की दुकान में घुसता है।
१.२. वे घर लौटकर अपना हिसाब देखते हैं जो कि नब्बे रुपये का है।
(क) इन पंक्तियों में ‘वे’ शब्द किसके लिए आया है?
उत्तर :तीन पंक्तियों में वे शब्द रवि राय के लिए है ।
(ख) ‘वे’ कहाँ लौट आए ?
उत्तर :वह घर लौट आया ।
(ग) ‘वे’ का हिसाब कितने का है?
उत्तर :वे का हिसाब ₹90 का है ।
१.३. कुत्ता टोकरी उठाकर चल पड़ता है और दुकान में पहुँचता है। दुकानदार टोकरी में डबल रोटी रख देता है। कुत्ता वापस आकर दुकानदार टोकरी में डबल रोटी रख देता है।कुत्ता वापस आकर टोकरी तोते के सामने रख देता है ।
(क) कुत्ता कहाँ पहुँचता है ?
उत्तर :कुत्ता दुकान में पहुँचता है।
(ख) दुकानदार टोकरी में क्या रखता है?
उत्तर : दुकानदार टोकरी में डबल रोटी रख देता है।
(ग) कुत्ता टोकरी किसके सामने रख देता है?
उत्तर :कुत्ता वापस आकर टोकरी तोते के सामने रख देता है ।
. तोते की चालाकी कहानी का importance question /ans
उत्तर :पप्पू रवि राय का कुत्ता था ।
उत्तर :रवि राय पप्पू को डबल रोटी लाने के लिए भेजता है ।
उत्तर :जब कुत्ता दोबारा टोकरी लेकर दुकान पर आता है तो दुकानदार इसलिए हैरान हो जाता है क्योंकि कुत्ता पहले रोटी ले जा चुका था ।
उत्तर :दुकानदार रवि राय को ₹90 का बिल देता है ।
उत्तर :घर लौट कर अपना हिसाब देखने पर रवि राय को ₹90 का हिसाब मिलता है।
उत्तर :तोता रवि राय की आवाज में कुत्ते को रोटी लाने को कहता है और रोटी खुद ही खा जाता है ।
notice :तोते की चालाकी सुकुमार राय ने लिखा है। इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के पाठबहार पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।






