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कवि परिचय – गोस्वामी तुलसीदास
गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के महान कवि, संत और भक्तिकाल के प्रमुख रचनाकार हैं। वे रामभक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, मर्यादा, प्रेम, भक्ति और मानवता का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। तुलसीदास की रचनाएँ केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
तुलसीदास का जन्म संवत् 1568 (1511 ई.) में श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन सोरों (उत्तर प्रदेश) में हुआ माना जाता है। उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। जन्म के कुछ समय बाद ही उनकी माता का निधन हो गया और उनका पालन-पोषण चुनिया (झुनिया) नामक सेविका ने किया। बाद में स्वामी नरहरिदास ने उन्हें आश्रय दिया तथा शिक्षा प्रदान की। उनके बचपन का नाम रामबोला था, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि जन्म लेते ही उन्होंने सबसे पहले “राम” नाम का उच्चारण किया।
तुलसीदास ने काशी में रहकर वेद, वेदांग, पुराण, दर्शन और संस्कृत साहित्य का गहन अध्ययन किया। उनका विवाह रत्नावली से हुआ था। एक दिन पत्नी की सीख ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर भगवान श्रीराम की भक्ति को अपना जीवन-लक्ष्य बना लिया। इसके बाद उन्होंने अनेक महान ग्रंथों की रचना की, जिनमें रामचरितमानस सबसे प्रसिद्ध है।
तुलसीदास ने अपनी रचनाओं में सरल भाषा का प्रयोग किया, जिससे सामान्य लोग भी भगवान राम के आदर्शों को आसानी से समझ सकें। उन्होंने प्रेम, दया, सत्य, सेवा, धर्म, सदाचार और भक्ति का संदेश दिया। उनकी रचनाएँ आज भी पूरे भारत में श्रद्धा और सम्मान के साथ पढ़ी जाती हैं।
तुलसीदास का निधन लगभग 1623 ई. में वाराणसी (काशी) में हुआ। वे हिंदी साहित्य के अमर कवि हैं और भारतीय संस्कृति के महान प्रतीक माने जाते हैं।
साहित्यिक परिचय
गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल के ऐसे कवि हैं जिन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन को अत्यंत सरल, प्रभावशाली और प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ-साथ आदर्श जीवन, कर्तव्य, मर्यादा, पारिवारिक मूल्य, मानवता और समाज सुधार का सुंदर समन्वय मिलता है।
तुलसीदास ने यह सिद्ध किया कि सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, सेवा और सदाचार का पालन करना है। उनके साहित्य में भारतीय संस्कृति और जीवन-दर्शन का अद्भुत चित्रण मिलता है।
प्रमुख रचनाएँ
गोस्वामी तुलसीदास की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं—
- रामचरितमानस
- दोहावली
- विनय पत्रिका
- कवितावली
- गीतावली
- हनुमान चालीसा
- जानकी मंगल
- पार्वती मंगल
- रामलला नहछू
- बरवै रामायण
- वैराग्य संदीपनी
- कृष्ण गीतावली
भाषा-शैली
तुलसीदास की भाषा अत्यंत सरल, मधुर और प्रभावशाली है।
- मुख्य भाषा – अवधी
- अन्य भाषाओं का प्रयोग – ब्रजभाषा, संस्कृत और लोकभाषा
- शैली – सरल, भावपूर्ण, भक्तिपूर्ण और उपदेशात्मक
- भाषा में सहजता, मधुरता और प्रवाह मिलता है।
- अलंकारों तथा लोकप्रचलित शब्दों का सुंदर प्रयोग किया गया है।
काव्य की विशेषताएँ
- श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति।
- आदर्श जीवन और मर्यादा का चित्रण।
- सरल एवं लोकग्राह्य भाषा।
- नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा।
- मानवता, दया और सेवा का संदेश।
- उपदेशात्मक तथा प्रेरणादायक शैली।
- भाव और भाषा का उत्कृष्ट समन्वय।
- भारतीय संस्कृति और आदर्शों का सुंदर चित्रण।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | गोस्वामी तुलसीदास |
| जन्म | 1511 ई. (संवत् 1568) |
| जन्म स्थान | सोरों, उत्तर प्रदेश (प्रचलित मत) |
| पिता | आत्माराम दुबे |
| माता | हुलसी |
| बचपन का नाम | रामबोला |
| गुरु | स्वामी नरहरिदास |
| पत्नी | रत्नावली |
| साहित्यिक काल | भक्तिकाल |
| भक्ति धारा | रामभक्ति शाखा |
| मुख्य भाषा | अवधी |
| प्रमुख ग्रंथ | रामचरितमानस |
| अन्य रचनाएँ | दोहावली, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली, हनुमान चालीसा आदि |
| निधन | लगभग 1623 ई., वाराणसी |
दोहा – 1
मूल दोहा
राम-नाम-मणि-दीप धरु, जीह देहरी द्वार।
तुलसी भीतर बाहिरौ, जौ चाहसि उजियार।।
शब्दार्थ
- मणि-दीप – रत्न के समान प्रकाश देने वाला दीपक
- जीह – जीभ
- देहरी – चौखट
- उजियार – प्रकाश
सरल व्याख्या
गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि यदि मनुष्य अपने जीवन में ज्ञान, सुख और शांति का प्रकाश चाहता है, तो उसे अपनी जीभ रूपी द्वार पर राम-नाम रूपी दीपक जलाना चाहिए। अर्थात् उसे सदैव भगवान श्रीराम का नाम स्मरण करना चाहिए।
जिस प्रकार घर के द्वार पर रखा दीपक घर के भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार राम-नाम मनुष्य के मन को भी प्रकाशित करता है और उसके आचरण को भी श्रेष्ठ बनाता है।
मुख्य संदेश
- राम-नाम जीवन का प्रकाश है।
- भगवान का स्मरण मनुष्य को सही मार्ग दिखाता है।
- भक्ति से अज्ञान का अंधकार दूर होता है।
दोहा – 2
मूल दोहा
राम नाम कलि कामतरु, राम भगति सुरधेनु।
सकल सुमंगल मूल जग, गुरुपद पंकज रेनु।।
शब्दार्थ
- कलि – कलियुग
- कामतरु – कल्पवृक्ष
- सुरधेनु – कामधेनु
- गुरुपद पंकज – गुरु के चरण-कमल
- रेनु – धूल
सरल व्याख्या
तुलसीदास कहते हैं कि कलियुग में राम-नाम कल्पवृक्ष के समान है, जो मनुष्य की सभी शुभ इच्छाओं को पूर्ण करता है। उसी प्रकार रामभक्ति कामधेनु के समान है, जो जीवन में सुख, शांति और कल्याण प्रदान करती है।
वे आगे कहते हैं कि संसार के सभी शुभ कार्यों का आधार गुरु के चरणों की धूल है। अर्थात् गुरु का सम्मान और उनके उपदेशों का पालन किए बिना सच्चा ज्ञान और भक्ति प्राप्त नहीं हो सकती।
मुख्य संदेश
- राम-नाम और रामभक्ति जीवन का सबसे बड़ा सहारा हैं।
- गुरु का स्थान अत्यंत महान है।
- भक्ति से जीवन मंगलमय बनता है।
दोहा – 3
मूल दोहा
हरे चरहिं तापहिं बरे, फरें पसारहिं हाथ।
तुलसी स्वारथ मीत सब, परमारथ रघुनाथ।।
शब्दार्थ
- स्वारथ – स्वार्थ
- मीत – मित्र
- परमारथ – निःस्वार्थ भलाई
- रघुनाथ – भगवान श्रीराम
सरल व्याख्या
इस दोहे में तुलसीदास कहते हैं कि संसार में अधिकांश लोग केवल अपने स्वार्थ के लिए मित्रता करते हैं। जब तक उनसे कोई लाभ मिलता है, तब तक वे साथ रहते हैं; लेकिन कठिन समय आने पर साथ छोड़ देते हैं।
इसके विपरीत भगवान श्रीराम ही ऐसे सच्चे हितैषी हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। इसलिए मनुष्य को भगवान पर विश्वास रखना चाहिए।
मुख्य संदेश
- संसार के अधिकांश संबंध स्वार्थ पर आधारित होते हैं।
- भगवान ही सच्चे और निःस्वार्थ मित्र हैं।
- ईश्वर कभी अपने भक्तों का साथ नहीं छोड़ते।
दोहा – 4
मूल दोहा
वेष विसद बोलनि मधुर, मन कटु करम मलीन।
तुलसी राम न पाइऐ, भएँ विषय-जल मीन।।
शब्दार्थ
- वेष विसद – सुंदर वस्त्र
- कटु – कठोर
- मलीन – अशुद्ध
- विषय-जल – सांसारिक मोह
- मीन – मछली
सरल व्याख्या
तुलसीदास कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति बाहर से सुंदर वस्त्र पहनता है, मीठी बातें करता है, लेकिन उसके मन में बुरे विचार भरे हों और उसके कर्म अशुद्ध हों, तो वह भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता।
जो मनुष्य सांसारिक मोह-माया में उसी प्रकार डूबा रहता है जैसे मछली पानी में रहती है, वह सच्ची भक्ति का आनंद नहीं पा सकता।
मुख्य संदेश
- बाहरी दिखावा व्यर्थ है।
- भगवान केवल शुद्ध मन और अच्छे कर्मों से प्रसन्न होते हैं।
- मन की पवित्रता सबसे आवश्यक है।
दोहा – 5
मूल दोहा
कहा बिभीषण लै मिल्यो, कहा दियो रघुनाथ।
तुलसी यह जानें बिना, मूढ़ मीजि हैं हाथ।।
शब्दार्थ
- बिभीषण – रावण का भाई
- रघुनाथ – भगवान श्रीराम
- मूढ़ – अज्ञानी
- मीजि हैं हाथ – पछताना
सरल व्याख्या
तुलसीदास कहते हैं कि जब विभीषण ने भगवान श्रीराम की शरण ली, तब श्रीराम ने उन्हें लंका का राजा बना दिया। भगवान अपने भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं।
जो लोग भगवान की इस करुणा और कृपा को नहीं समझते, वे जीवन भर अज्ञान में रहते हैं और अंत में पछताते हैं।
मुख्य संदेश
- भगवान अपने भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं।
- ईश्वर की शरण में जाने वाला कभी निराश नहीं होता।
- भगवान भक्तों का सम्मान बढ़ाते हैं।
दोहा – 6
मूल दोहा
केवट निसिचर बिहग मृग किए साधु सनमानि।
तुलसी रघुबर की कृपा सकल सुमंगल खानि।।
शब्दार्थ
- केवट – नाविक
- निसिचर – राक्षस
- बिहग – पक्षी
- मृग – पशु
- रघुबर – भगवान श्रीराम
- सुमंगल खानि – सभी शुभ कार्यों का स्रोत
सरल व्याख्या
तुलसीदास कहते हैं कि भगवान श्रीराम ने केवल मनुष्यों को ही नहीं, बल्कि केवट, निषाद, जटायु (पक्षी), वानरों, भालुओं और विभीषण जैसे राक्षसों को भी सम्मान दिया।
इससे स्पष्ट होता है कि भगवान किसी के जन्म, जाति या रूप को नहीं देखते। वे केवल प्रेम, भक्ति और सच्चे हृदय को महत्व देते हैं।
भगवान श्रीराम की कृपा सभी प्रकार के सुख, शांति और कल्याण का मूल स्रोत है।
मुख्य संदेश
- भगवान सभी के प्रति समान भाव रखते हैं।
- सच्ची भक्ति में जाति और ऊँच-नीच का कोई स्थान नहीं है।
- ईश्वर की कृपा से जीवन मंगलमय बन जाता है।
दोहा – 7
मूल दोहा
ग्यान कहै अग्यान बिनु, तम बिनु कहै प्रकास।
निरगुन कहै जो सगुन बिनु, सो गुरु तुलसीदास।।
शब्दार्थ
- ग्यान – ज्ञान
- अग्यान – अज्ञान
- तम – अंधकार
- प्रकास – प्रकाश
- निरगुण – निराकार ईश्वर
- सगुण – साकार ईश्वर
सरल व्याख्या
तुलसीदास कहते हैं कि जैसे अंधकार के बिना प्रकाश का महत्व समझ में नहीं आता, वैसे ही अज्ञान के बिना ज्ञान का मूल्य नहीं जाना जा सकता। इसी प्रकार जो व्यक्ति सगुण और निर्गुण दोनों रूपों को समझे बिना केवल एक की बात करता है, वह पूर्ण ज्ञान नहीं रखता।
कवि के अनुसार सच्चा गुरु वही है जो ईश्वर के दोनों स्वरूपों—सगुण और निर्गुण—का सही ज्ञान कराए और मनुष्य को सत्य के मार्ग पर चलना सिखाए।
मुख्य संदेश
- ज्ञान का महत्व अज्ञान से समझ में आता है।
- सच्चा गुरु समग्र ज्ञान देता है।
- ईश्वर के सभी स्वरूपों का सम्मान करना चाहिए।
दोहा – 8
मूल दोहा
नहिं जाचत नहिं संग्रही, सीस नाइ नहिं लेइ।
ऐसे मानी मागनेहि को, बारिद बिन देइ।।
शब्दार्थ
- जाचत – माँगना
- संग्रही – संग्रह करने वाला
- बारिद – बादल
- मानी – स्वाभिमानी
सरल व्याख्या
इस दोहे में तुलसीदास स्वाभिमानी व्यक्ति का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि सच्चा स्वाभिमानी व्यक्ति किसी से कुछ नहीं माँगता, अनावश्यक वस्तुओं का संग्रह नहीं करता और सम्मान के लिए भी किसी के सामने सिर नहीं झुकाता।
जैसे बादल बिना किसी अपेक्षा के सभी पर समान रूप से वर्षा करता है, वैसे ही महान व्यक्ति भी बिना स्वार्थ के दूसरों की सहायता करते हैं।
मुख्य संदेश
- स्वाभिमान मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है।
- बिना स्वार्थ दूसरों की सहायता करनी चाहिए।
- अनावश्यक लालच और संग्रह से बचना चाहिए।
दोहा – 9
मूल दोहा
चातक जीवन दायकहि, जीवन समय सुरीति।
तुलसी अलख न लखि परै, चातक प्रीति प्रतीति।।
शब्दार्थ
- चातक – एक पक्षी जो केवल वर्षा की बूंदें पीता है।
- जीवन दायक – जीवन देने वाला
- अलख – जिसे देखा न जा सके
- प्रतीति – विश्वास
सरल व्याख्या
तुलसीदास कहते हैं कि चातक पक्षी केवल वर्षा के जल की प्रतीक्षा करता है। वह किसी नदी, तालाब या कुएँ का जल ग्रहण नहीं करता। उसका यह अटूट विश्वास और धैर्य उसकी सच्ची निष्ठा को दर्शाता है।
इसी प्रकार मनुष्य को भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए और कठिन परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों से नहीं डिगना चाहिए।
मुख्य संदेश
- सच्ची भक्ति में धैर्य आवश्यक है।
- ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
- लक्ष्य के प्रति निष्ठा सफलता दिलाती है।
दोहा – 10
मूल दोहा
बध्यो बधिक पर्यो पुन्य जल, उलटि उठाई चोंच।
तुलसी चातक प्रेमपट, मरतहुँ लगी न खाँच।।
शब्दार्थ
- बधिक – शिकारी
- पुण्य जल – वर्षा का जल
- चोंच – पक्षी की चोंच
- प्रेमपट – प्रेम का वस्त्र
सरल व्याख्या
तुलसीदास बताते हैं कि यदि चातक पक्षी शिकारी के हाथों घायल हो जाए, तब भी वह वर्षा के जल के अलावा किसी अन्य जल को स्वीकार नहीं करता। मृत्यु के समय भी उसकी निष्ठा और प्रेम में कोई कमी नहीं आती।
यह उदाहरण हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम और सच्ची भक्ति कभी परिस्थितियों के कारण नहीं बदलते।
मुख्य संदेश
- सच्चा प्रेम अटल होता है।
- कठिन समय में भी अपने आदर्शों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
- भक्ति में दृढ़ विश्वास आवश्यक है।
दोहा – 11
मूल दोहा
तुलसी चातक देति सिख, सुतहिं बारहीं बार।
तात न तर्पन कीजिऐ, बिना बारिधर धार।।
शब्दार्थ
- सुतहिं – पुत्र को
- तात – पुत्र
- तर्पन – संतोष करना
- बारिधर – बादल
सरल व्याख्या
तुलसीदास कहते हैं कि चातक पक्षी अपने बच्चों को बार-बार यही शिक्षा देता है कि वे बादल की वर्षा के अतिरिक्त किसी अन्य जल से अपनी प्यास न बुझाएँ।
इसका तात्पर्य यह है कि मनुष्य को भी अपने जीवन में सच्चे आदर्शों, सत्य और ईश्वर-भक्ति को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ।
मुख्य संदेश
- अच्छी शिक्षा पीढ़ी-दर-पीढ़ी दी जानी चाहिए।
- जीवन में आदर्शों पर अडिग रहना चाहिए।
- सच्ची भक्ति में समझौता नहीं करना चाहिए।
दोहा – 12
मूल दोहा
जड़ चेतन गुन दोष मय, बिस्व कीन्ह करतार।
संत हंस गुन गहहि, पय परिहरि बारि बिकार।।
शब्दार्थ
- जड़ – निर्जीव
- चेतन – सजीव
- करतार – सृष्टिकर्ता (ईश्वर)
- पय – दूध
- बारि – पानी
- बिकार – दोष
सरल व्याख्या
तुलसीदास कहते हैं कि ईश्वर ने इस संसार की प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक जीव में गुण और दोष दोनों दिए हैं। संसार में कोई भी व्यक्ति पूरी तरह गुणों या दोषों से रहित नहीं है।
संतों का स्वभाव हंस के समान होता है। जैसे हंस दूध और पानी के मिश्रण में से केवल दूध ग्रहण कर लेता है और पानी छोड़ देता है, वैसे ही सज्जन व्यक्ति दूसरों के दोषों को छोड़कर उनके गुणों को अपनाते हैं।
मुख्य संदेश
- प्रत्येक मनुष्य में गुण और दोष दोनों होते हैं।
- सज्जन व्यक्ति केवल अच्छे गुणों को अपनाते हैं।
- हमें दूसरों की अच्छाइयों से सीख लेनी चाहिए।
दोहावली – गोस्वामी तुलसीदास
: 25 महत्वपूर्ण MCQs एवं महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर
(WB Board Class 12 | Board Exam Friendly)
1. ‘दोहावली’ के रचयिता कौन हैं?
A. कबीरदास
B. सूरदास
C. गोस्वामी तुलसीदास
D. रहीम
✅ उत्तर: C. गोस्वामी तुलसीदास
2. तुलसीदास किस भक्ति धारा के प्रमुख कवि हैं?
A. कृष्ण भक्ति
B. निर्गुण भक्ति
C. रामभक्ति
D. सूफी भक्ति
✅ उत्तर: C. रामभक्ति
3. पहले दोहे में तुलसीदास किसका स्मरण करने की प्रेरणा देते हैं?
A. गुरु का
B. राम-नाम का
C. माता-पिता का
D. मित्र का
✅ उत्तर: B. राम-नाम का
4. ‘राम-नाम-मणि-दीप’ किसका प्रतीक है?
A. धन का
B. ज्ञान और आध्यात्मिक प्रकाश का
C. युद्ध का
D. वैभव का
✅ उत्तर: B. ज्ञान और आध्यात्मिक प्रकाश का
5. कलियुग में तुलसीदास किसे कल्पवृक्ष कहते हैं?
A. धन को
B. राम-नाम को
C. शिक्षा को
D. तपस्या को
✅ उत्तर: B. राम-नाम को
6. ‘सुरधेनु’ शब्द का अर्थ क्या है?
A. गाय
B. कामधेनु
C. नदी
D. पृथ्वी
✅ उत्तर: B. कामधेनु
7. ‘राम भगति सुरधेनु’ का क्या अर्थ है?
A. रामभक्ति सभी इच्छाएँ पूरी करती है।
B. रामभक्ति कठिन है।
C. रामभक्ति केवल संतों के लिए है।
D. रामभक्ति का कोई महत्व नहीं।
✅ उत्तर: A. रामभक्ति सभी इच्छाएँ पूरी करती है।
8. तुलसीदास के अनुसार संसार के अधिकांश मित्र कैसे होते हैं?
A. निःस्वार्थ
B. स्वार्थी
C. विद्वान
D. साहसी
✅ उत्तर: B. स्वार्थी
9. सच्चा हितैषी कौन है?
A. मित्र
B. गुरु
C. भगवान श्रीराम
D. राजा
✅ उत्तर: C. भगवान श्रीराम
10. केवल सुंदर वेश और मधुर वाणी से क्या भगवान मिलते हैं?
A. हाँ
B. नहीं
C. कभी-कभी
D. केवल संतों को
✅ उत्तर: B. नहीं
11. ‘वेष विसद बोलनि मधुर’ दोहे का मुख्य संदेश क्या है?
A. बाहरी दिखावे से ईश्वर नहीं मिलते।
B. धन कमाना चाहिए।
C. यात्रा करनी चाहिए।
D. युद्ध करना चाहिए।
✅ उत्तर: A. बाहरी दिखावे से ईश्वर नहीं मिलते।
12. विभीषण को भगवान राम ने क्या दिया?
A. धन
B. राज्य और सम्मान
C. युद्ध
D. शिक्षा
✅ उत्तर: B. राज्य और सम्मान
13. केवट, निषाद, पक्षी और पशुओं को सम्मान किसने दिया?
A. लक्ष्मण ने
B. भरत ने
C. श्रीराम ने
D. हनुमान ने
✅ उत्तर: C. श्रीराम
14. तुलसीदास के अनुसार राम की कृपा कैसी है?
A. सीमित
B. दुखदायी
C. सभी मंगलों की खान
D. केवल राजाओं के लिए
✅ उत्तर: C. सभी मंगलों की खान
15. ज्ञान का महत्व किसके बिना नहीं समझा जा सकता?
A. अज्ञान के बिना
B. धन के बिना
C. मित्र के बिना
D. परिवार के बिना
✅ उत्तर: A. अज्ञान के बिना
16. सच्चा गुरु किसे कहा गया है?
A. जो केवल पुस्तक पढ़ाए।
B. जो निर्गुण और सगुण दोनों का ज्ञान दे।
C. जो धन दे।
D. जो प्रसिद्ध हो।
✅ उत्तर: B. जो निर्गुण और सगुण दोनों का ज्ञान दे।
17. चातक पक्षी किसका प्रतीक है?
A. लोभ का
B. सच्ची निष्ठा और विश्वास का
C. क्रोध का
D. भय का
✅ उत्तर: B. सच्ची निष्ठा और विश्वास का
18. चातक केवल किसका जल पीता है?
A. नदी का
B. तालाब का
C. वर्षा की बूंदों का
D. समुद्र का
✅ उत्तर: C. वर्षा की बूंदों का
19. संत किसके समान बताए गए हैं?
A. सिंह
B. हंस
C. हाथी
D. मोर
✅ उत्तर: B. हंस
20. हंस किसे ग्रहण करता है?
A. केवल जल
B. केवल दूध
C. दूध ग्रहण कर जल छोड़ देता है।
D. कुछ नहीं।
✅ उत्तर: C. दूध ग्रहण कर जल छोड़ देता है।
21. संतों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
A. वे केवल दोष देखते हैं।
B. वे गुणों को ग्रहण करते हैं।
C. वे क्रोधित रहते हैं।
D. वे धनवान होते हैं।
✅ उत्तर: B. वे गुणों को ग्रहण करते हैं।
22. दोहावली का मुख्य विषय क्या है?
A. युद्ध
B. नीति, भक्ति और जीवन-दर्शन
C. राजनीति
D. विज्ञान
✅ उत्तर: B. नीति, भक्ति और जीवन-दर्शन
23. तुलसीदास किस भाषा के महान कवि हैं?
A. संस्कृत
B. हिंदी
C. उर्दू
D. फ़ारसी
✅ उत्तर: B. हिंदी
24. दोहावली में किसका विशेष महत्व बताया गया है?
A. धन का
B. भक्ति, सदाचार और राम-नाम का
C. व्यापार का
D. राजनीति का
✅ उत्तर: B. भक्ति, सदाचार और राम-नाम का
25. ‘दोहावली’ का मुख्य संदेश क्या है?
A. धन ही जीवन का लक्ष्य है।
B. सच्ची भक्ति, सदाचार, राम-नाम, गुरु का सम्मान और अच्छे गुणों को अपनाकर जीवन सफल बनाया जा सकता है।
C. केवल तीर्थ यात्रा करनी चाहिए।
D. केवल ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।
✅ उत्तर: B. सच्ची भक्ति, सदाचार, राम-नाम, गुरु का सम्मान और अच्छे गुणों को अपनाकर जीवन सफल बनाया जा सकता है।
महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर (Board Exam Friendly)
1. ‘राम-नाम-मणि-दीप’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: तुलसीदास राम-नाम को एक ऐसे दिव्य दीपक के समान मानते हैं जो मनुष्य के जीवन के भीतर और बाहर दोनों ओर ज्ञान, भक्ति और सद्गुणों का प्रकाश फैलाता है। जो व्यक्ति निरंतर राम-नाम का स्मरण करता है, उसका जीवन अज्ञान और दुःख के अंधकार से मुक्त हो जाता है।
2. तुलसीदास के अनुसार रामभक्ति का क्या महत्व है?
उत्तर: तुलसीदास के अनुसार रामभक्ति कलियुग में कल्पवृक्ष और कामधेनु के समान है। यह मनुष्य के जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और मोक्ष प्रदान करती है। रामभक्ति सभी शुभ कार्यों का मूल है।
3. ‘वेष विसद बोलनि मधुर’ दोहे का मुख्य संदेश लिखिए।
उत्तर: इस दोहे में तुलसीदास बताते हैं कि केवल सुंदर वस्त्र पहनने, मीठा बोलने या धार्मिक दिखावा करने से भगवान नहीं मिलते। यदि मनुष्य का मन बुरे विचारों और स्वार्थ से भरा है, तो बाहरी आडंबर व्यर्थ हैं। ईश्वर सच्चे और निर्मल हृदय से प्रसन्न होते हैं।
4. तुलसीदास ने चातक पक्षी से क्या शिक्षा दी है?
उत्तर: चातक पक्षी केवल वर्षा की बूंदों का जल ग्रहण करता है। तुलसीदास ने इसे अटूट विश्वास, धैर्य और एकनिष्ठ भक्ति का प्रतीक माना है। मनुष्य को भी अपने लक्ष्य और ईश्वर के प्रति इसी प्रकार अडिग रहना चाहिए।
5. ‘संत हंस गुन गहहि’ का क्या आशय है?
उत्तर: तुलसीदास कहते हैं कि संसार में गुण और दोष दोनों मौजूद हैं। जैसे हंस दूध ग्रहण कर पानी छोड़ देता है, वैसे ही सज्जन व्यक्ति दूसरों के गुणों को अपनाते हैं और दोषों को त्याग देते हैं। यही श्रेष्ठ जीवन का आदर्श है।
दोहावली – गोस्वामी तुलसीदास
: केवट प्रसंग की सरल व्याख्या (WB Board Class 10 Hindi Notes)
अध्याय परिचय
केवट प्रसंग रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड का अत्यंत प्रसिद्ध और प्रेरणादायक प्रसंग है। इसमें भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान गंगा नदी के तट पर पहुँचते हैं। उन्हें नदी पार करने के लिए नाव की आवश्यकता होती है। केवट अपनी सरलता, बुद्धिमत्ता और भगवान के प्रति अटूट प्रेम के कारण पहले नाव लाने से मना कर देता है। वह कहता है कि पहले वह श्रीराम के चरण धोएगा, तभी उन्हें नाव में बैठाएगा। यह प्रसंग सच्ची भक्ति, विनम्रता, समानता और ईश्वर के प्रति निष्काम प्रेम का संदेश देता है।
पद्यांश 1
नासु वियोग विकल पसु ऐसें।
प्रजा मातु पितु जिअहिं कैसें।।
सरल व्याख्या
जब भगवान श्रीराम वनवास के लिए अयोध्या छोड़ते हैं, तब नगर के लोग, पशु-पक्षी और उनके माता-पिता सभी अत्यंत दुःखी हो जाते हैं। कवि कहते हैं कि जब पशु तक श्रीराम के वियोग में व्याकुल हैं, तो माता-पिता और प्रजा की पीड़ा का अनुमान लगाया जा सकता है।
मुख्य संदेश
- श्रीराम सभी के प्रिय थे।
- उनके प्रति लोगों का गहरा प्रेम था।
पद्यांश 2
नरबस राम सुमंतु पठाए।
सुरसरि तीर आपु तब आए।।
सरल व्याख्या
श्रीराम मंत्री सुमंत्र को अयोध्या वापस भेज देते हैं और स्वयं सीता तथा लक्ष्मण के साथ गंगा नदी के तट पर पहुँचते हैं। अब उन्हें नदी पार करनी है।
मुख्य संदेश
- श्रीराम कर्तव्यनिष्ठ और दृढ़ निश्चयी हैं।
- वे परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करते हैं।
पद्यांश 3
मागी नाव न केवट आना।
कहइ तुम्हार मरम मैं जाना।।
सरल व्याख्या
जब श्रीराम ने केवट से नाव माँगी, तो उसने तुरंत नाव नहीं लाई। वह विनम्रता से कहता है कि वह भगवान की महिमा और उनके चरणों का प्रभाव जानता है।
मुख्य संदेश
- केवट भगवान की दिव्यता को पहचानता है।
- उसकी भक्ति सच्ची और गहरी है।
पद्यांश 4
चरन कमल रेनु कहइ सबु।
मानुष करनि मूड़ि कछु अहई।।
सरल व्याख्या
केवट कहता है कि आपके चरणों की धूल में अद्भुत शक्ति है। आपके चरणों के स्पर्श से पत्थर भी जीवित स्त्री (अहिल्या) बन गया था। इसलिए मैं आपकी महिमा अच्छी तरह जानता हूँ।
मुख्य संदेश
- भगवान के चरणों की महिमा का वर्णन।
- अहिल्या उद्धार की घटना का संकेत।
पद्यांश 5
सुअत सिला भइ नारि सुहाई।
पाहन तें न काठ कठिनाई।।
सरल व्याख्या
केवट हँसते हुए कहता है कि जब पत्थर भी आपके चरण स्पर्श से स्त्री बन गया, तो मेरी लकड़ी की नाव तो पत्थर से भी नरम है। यदि नाव भी किसी स्त्री में बदल गई, तो मेरा परिवार भूखा रह जाएगा।
यह कथन हास्यपूर्ण है, लेकिन इसके पीछे गहरी भक्ति छिपी हुई है।
मुख्य संदेश
- केवट की चतुराई और विनोदप्रियता।
- भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा।
पद्यांश 6
एहि प्रतिपालउँ सकल परिवारू।
नहिं जानउँ कछु अउर कबारू।।
सरल व्याख्या
केवट कहता है कि यही नाव उसके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। यदि नाव को कुछ हो गया, तो उसके परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा?
मुख्य संदेश
- ईमानदार श्रमिक का जीवन।
- परिवार के प्रति जिम्मेदारी।
पद्यांश 7
जौ प्रभु पार अवसि गा चहहू।
मोहि पद पदुम पखारन कहहू।।
सरल व्याख्या
केवट कहता है कि यदि प्रभु सचमुच नदी पार करना चाहते हैं, तो पहले मुझे आपके चरण धोने की अनुमति दीजिए। उसके बाद मैं आपको नाव में बैठाकर पार ले जाऊँगा।
मुख्य संदेश
- भगवान के चरणों की सेवा ही केवट का सबसे बड़ा सौभाग्य है।
- सच्ची भक्ति सेवा में है।
पद्यांश 8
पद कमल धोइ चढ़ाइ नाव…
सरल व्याख्या
केवट कहता है कि जब तक वह श्रीराम के चरण धो नहीं लेगा, तब तक नाव में नहीं बैठाएगा। वह यह भी कहता है कि वह नाव का किराया भी नहीं लेगा। उसके लिए भगवान की सेवा ही सबसे बड़ा पुरस्कार है।
मुख्य संदेश
- निष्काम सेवा का आदर्श।
- भक्ति में स्वार्थ का अभाव।
पद्यांश 9
सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे।
बिहसे करुनाऐन चितइ जानकी लखन तन।।
सरल व्याख्या
केवट की प्रेमभरी और सरल बातें सुनकर भगवान श्रीराम मुस्कुरा देते हैं। माता सीता और लक्ष्मण भी केवट की निष्कपट भक्ति देखकर प्रसन्न होते हैं।
मुख्य संदेश
- भगवान अपने भक्तों के प्रेम से प्रसन्न होते हैं।
- सच्चा प्रेम सबसे बड़ा धन है।
पद्यांश 10
कृपासिंधु बोले मुसुकाई।
सोइ करु जेहिं तव नाव न जाई।।
सरल व्याख्या
भगवान श्रीराम मुस्कुराकर कहते हैं कि यदि तुम्हें ऐसा ही उचित लगता है, तो पहले मेरे चरण धो लो। इसके बाद हमें नदी पार करा देना।
मुख्य संदेश
- भगवान भक्तों की भावना का सम्मान करते हैं।
- ईश्वर प्रेम और श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं।
पद्यांश 11
अति आनंद उमगि अनुरागा।
चरन सरोज पखारन लागा।।
सरल व्याख्या
भगवान की आज्ञा मिलते ही केवट अत्यंत आनंदित हो जाता है। वह बड़े प्रेम और श्रद्धा से श्रीराम के चरण धोता है। उसके लिए यह जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य था।
मुख्य संदेश
- सेवा से बढ़कर कोई भक्ति नहीं।
- सच्चा भक्त सेवा में ही आनंद पाता है।
पद्यांश 12
पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार।
पितर पारु करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ लेइ पार।।
सरल व्याख्या
केवट भगवान के चरण धोकर उस जल को स्वयं और अपने परिवार सहित श्रद्धा से पीता है। उसका विश्वास है कि इससे उसके पूर्वजों का भी कल्याण होगा। इसके बाद वह अत्यंत प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को गंगा पार पहुँचा देता है।
मुख्य संदेश
- भगवान के चरणामृत की महिमा।
- सच्ची भक्ति से स्वयं और परिवार का कल्याण होता है।
- निष्काम सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
दोहावली – गोस्वामी तुलसीदास
: केवट प्रसंग के 25 महत्वपूर्ण MCQs (WB Board Class 12 | Board Exam Friendly)
1. ‘केवट प्रसंग’ किस ग्रंथ से लिया गया है?
A. विनय पत्रिका
B. दोहावली
C. रामचरितमानस (अयोध्याकाण्ड)
D. कवितावली
✅ उत्तर: C. रामचरितमानस (अयोध्याकाण्ड)
2. ‘केवट प्रसंग’ के रचयिता कौन हैं?
A. कबीरदास
B. सूरदास
C. गोस्वामी तुलसीदास
D. रहीम
✅ उत्तर: C. गोस्वामी तुलसीदास
3. भगवान श्रीराम वनवास के समय किस नदी के तट पर पहुँचे थे?
A. यमुना
B. सरयू
C. गंगा (सुरसरि)
D. गोदावरी
✅ उत्तर: C. गंगा (सुरसरि)
4. भगवान श्रीराम के साथ वनवास में कौन-कौन थे?
A. भरत और शत्रुघ्न
B. सीता और लक्ष्मण
C. हनुमान और सुग्रीव
D. विभीषण और जामवंत
✅ उत्तर: B. सीता और लक्ष्मण
5. श्रीराम ने अयोध्या वापस किसे भेजा था?
A. भरत
B. शत्रुघ्न
C. सुमंत्र
D. निषादराज
✅ उत्तर: C. सुमंत्र
6. केवट ने तुरंत नाव क्यों नहीं लाई?
A. नाव खराब थी।
B. उसे डर लग रहा था।
C. वह पहले श्रीराम के चरण धोना चाहता था।
D. वह वहाँ नहीं था।
✅ उत्तर: C. वह पहले श्रीराम के चरण धोना चाहता था।
7. केवट ने किस घटना का उदाहरण दिया?
A. सीता स्वयंवर
B. अहिल्या उद्धार
C. लंका दहन
D. राम राज्य
✅ उत्तर: B. अहिल्या उद्धार
8. केवट को किस बात का भय था?
A. नाव डूब जाएगी।
B. नाव स्त्री बन जाएगी।
C. नदी सूख जाएगी।
D. श्रीराम लौट जाएँगे।
✅ उत्तर: B. नाव स्त्री बन जाएगी।
9. केवट की आजीविका का साधन क्या था?
A. खेती
B. व्यापार
C. नाव चलाना
D. पशुपालन
✅ उत्तर: C. नाव चलाना
10. केवट ने श्रीराम से क्या प्रार्थना की?
A. धन देने की
B. भोजन देने की
C. चरण धोने की अनुमति देने की
D. वस्त्र देने की
✅ उत्तर: C. चरण धोने की अनुमति देने की
11. श्रीराम ने केवट की बात सुनकर क्या किया?
A. क्रोधित हो गए।
B. वापस लौट गए।
C. मुस्कुराकर अनुमति दे दी।
D. लक्ष्मण को भेज दिया।
✅ उत्तर: C. मुस्कुराकर अनुमति दे दी।
12. केवट ने श्रीराम के चरण किससे धोए?
A. गंगाजल से
B. दूध से
C. सुगंधित जल से
D. वर्षा के जल से
✅ उत्तर: A. गंगाजल से
13. चरण धोने के बाद केवट ने क्या किया?
A. जल फेंक दिया।
B. चरणामृत स्वयं और परिवार सहित पिया।
C. नदी में बहा दिया।
D. किसी को दे दिया।
✅ उत्तर: B. चरणामृत स्वयं और परिवार सहित पिया।
14. केवट का विश्वास किस पर था?
A. धन पर
B. बल पर
C. भगवान श्रीराम की कृपा पर
D. भाग्य पर
✅ उत्तर: C. भगवान श्रीराम की कृपा पर
15. केवट ने नाव का किराया क्यों नहीं लिया?
A. उसके पास समय नहीं था।
B. वह श्रीराम की सेवा को ही सबसे बड़ा पुरस्कार मानता था।
C. उसके पास नाव नहीं थी।
D. वह भूल गया।
✅ उत्तर: B. वह श्रीराम की सेवा को ही सबसे बड़ा पुरस्कार मानता था।
16. केवट प्रसंग का मुख्य विषय क्या है?
A. युद्ध
B. भक्ति और निष्काम सेवा
C. व्यापार
D. राजनीति
✅ उत्तर: B. भक्ति और निष्काम सेवा
17. केवट का चरित्र किस गुण का प्रतीक है?
A. अहंकार
B. लोभ
C. विनम्रता और भक्ति
D. क्रोध
✅ उत्तर: C. विनम्रता और भक्ति
18. श्रीराम ने केवट के प्रेम का सम्मान कैसे किया?
A. उसे दंड दिया।
B. उसकी बात मान ली।
C. उसे छोड़ दिया।
D. उससे नाराज़ हो गए।
✅ उत्तर: B. उसकी बात मान ली।
19. केवट प्रसंग हमें क्या शिक्षा देता है?
A. धन सबसे बड़ा है।
B. सच्ची भक्ति में प्रेम और सेवा का भाव होना चाहिए।
C. केवल पूजा करनी चाहिए।
D. केवल तीर्थ यात्रा करनी चाहिए।
✅ उत्तर: B. सच्ची भक्ति में प्रेम और सेवा का भाव होना चाहिए।
20. भगवान श्रीराम किसके प्रेम से प्रसन्न हुए?
A. राजा के
B. मंत्री के
C. केवट के
D. सैनिकों के
✅ उत्तर: C. केवट के
21. ‘सुरसरि’ शब्द का अर्थ क्या है?
A. सरयू नदी
B. गंगा नदी
C. यमुना नदी
D. गोदावरी नदी
✅ उत्तर: B. गंगा नदी
22. केवट के अनुसार भगवान के चरणों की धूल में क्या शक्ति थी?
A. धन देने की
B. पत्थर को भी जीवित करने की
C. युद्ध जीतने की
D. वर्षा कराने की
✅ उत्तर: B. पत्थर को भी जीवित करने की
23. केवट ने चरणामृत क्यों पिया?
A. प्यास लगी थी।
B. उसे भगवान का प्रसाद मानकर स्वयं और अपने पूर्वजों के कल्याण के लिए।
C. किसी ने कहा था।
D. वह बीमार था।
✅ उत्तर: B. उसे भगवान का प्रसाद मानकर स्वयं और अपने पूर्वजों के कल्याण के लिए।
24. केवट प्रसंग में भगवान श्रीराम का कौन-सा गुण दिखाई देता है?
A. क्रोध
B. अहंकार
C. करुणा और भक्तवत्सलता
D. कठोरता
✅ उत्तर: C. करुणा और भक्तवत्सलता
25. ‘केवट प्रसंग’ का केंद्रीय संदेश क्या है?
A. धन से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है।
B. केवल कर्मकांड ही भक्ति है।
C. सच्ची भक्ति, विनम्रता, निष्काम सेवा और भगवान के प्रति अटूट प्रेम ही जीवन का सर्वोच्च मार्ग है।
D. केवल तीर्थ यात्रा करने से मोक्ष मिलता है।
✅ उत्तर: C. सच्ची भक्ति, विनम्रता, निष्काम सेवा और भगवान के प्रति अटूट प्रेम ही जीवन का सर्वोच्च मार्ग है।
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