धूमकेतु — गुणाकर मुले
कक्षा 10 हिंदी | संपूर्ण पाठ के नोट्स, सारांश एवं प्रश्न-उत्तर
पाठ: धूमकेतु
निबंधकार: गुणाकर मुले
विधा: वैज्ञानिक एवं शोधपरक निबंध
विषय: धूमकेतु का वैज्ञानिक परिचय, प्राचीन मान्यताएँ, हेली का अध्ययन, धूमकेतु की बनावट और अंतरिक्ष अनुसंधान
1. निबंधकार गुणाकर मुले का परिचय
गुणाकर मुले हिंदी के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, शोधपरक एवं ज्ञानवर्धक लेखन के लिए प्रसिद्ध निबंधकार थे। उनका जन्म 3 जनवरी 1935 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के सिंधु बुजुर्ग गाँव में हुआ था। वे मराठी भाषी परिवार से संबंधित थे, लेकिन उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में महत्वपूर्ण लेखन किया।
गुणाकर मुले प्रसिद्ध साहित्यकार एवं घुमक्कड़ विद्वान राहुल सांकृत्यायन के शिष्य थे। राहुल सांकृत्यायन की तरह उनमें भी ज्ञान प्राप्त करने, नई चीजों को समझने और तथ्यों की खोज करने की गहरी जिज्ञासा थी।
मुले जी ने विज्ञान, गणित, अंतरिक्ष, लिपि, अंक-पद्धति तथा भारतीय संस्कृति जैसे विषयों को सामान्य पाठकों के लिए सरल और रोचक भाषा में प्रस्तुत किया। उन्होंने वैज्ञानिक विषयों को इतना सहज बनाया कि विद्यार्थी भी कठिन वैज्ञानिक तथ्यों को आसानी से समझ सकें।
उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘भारतीय अंक-पद्धति की कहानी’, ‘भारतीय सिक्कों की कहानी’, ‘भारतीय लिपियों की कहानी’, ‘गणित की कहानी’, ‘ज्यामिति की कहानी’, ‘लिपियों की कहानी’, ‘आँखों की कहानी’, ‘नक्षत्रलोक’, ‘ब्रह्मांड परिचय’ आदि उल्लेखनीय हैं।
गुणाकर मुले को हिंदी में शोधपरक वैज्ञानिक लेखन को लोकप्रिय बनाने वाले प्रमुख लेखकों में गिना जाता है। उनके लेखन की सबसे बड़ी विशेषता है—तथ्य, तर्क, सरल भाषा और रोचक प्रस्तुति।
2. निबंध ‘धूमकेतु’ का परिचय
‘धूमकेतु’ एक वैज्ञानिक एवं शोधपरक निबंध है। इसमें गुणाकर मुले ने धूमकेतु से संबंधित प्राचीन धारणाओं और आधुनिक वैज्ञानिक खोजों की तुलना की है।
प्राचीन समय में लोग धूमकेतु को देखकर डर जाते थे। उन्हें लगता था कि धूमकेतु का दिखाई देना किसी युद्ध, महामारी, विनाश या बड़े संकट का संकेत है।
लेखक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से इस अंधविश्वास को दूर करते हैं। वे बताते हैं कि धूमकेतु कोई अलौकिक या विनाशकारी शक्ति नहीं, बल्कि सौरमंडल का एक खगोलीय पिंड है।
निबंध में धूमकेतु के अर्थ, उसके नाम, प्राचीन उल्लेख, एडमंड हेली के अध्ययन, उसकी कक्षा, नाभिक, सिर और पूँछ तथा अंतरिक्ष यानों द्वारा किए गए अध्ययन का वर्णन किया गया है।
3. ‘धूमकेतु’ शब्द का अर्थ
‘धूमकेतु’ दो शब्दों से मिलकर बना है—
- धूम — धुआँ
- केतु — पताका या झंडे के समान चिह्न
इस प्रकार धुएँ जैसी पूँछ वाली पताका के समान दिखाई देने वाले खगोलीय पिंड को धूमकेतु कहा गया।
इसे सामान्य भाषा में पुच्छल तारा भी कहा जाता है। पश्चिमी देशों में इसे Comet (कॉमेट) कहा जाता है। ‘कॉमेट’ शब्द की उत्पत्ति यूनानी शब्द से मानी गई है, जिसका संबंध लंबे बालों जैसी आकृति से है।
4. ‘धूमकेतु’ का विस्तृत सारांश
गुणाकर मुले का निबंध ‘धूमकेतु’ विज्ञान और साहित्य का सुंदर मेल प्रस्तुत करता है। लेखक ने एक खगोलीय घटना के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया है कि मनुष्य को किसी भी प्राकृतिक घटना को अंधविश्वास के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए।
प्राचीन समय में जब लोगों को आकाश में अचानक एक चमकीला पिंड दिखाई देता था, जिसकी लंबी पूँछ होती थी, तब वे भयभीत हो जाते थे। धूमकेतु के संबंध में अनेक प्रकार की गलत धारणाएँ प्रचलित थीं। भारत के प्राचीन ग्रंथों में भी धूमकेतु का उल्लेख मिलता है। अथर्ववेद, महाभारत और वराहमिहिर की ‘वृहत्संहिता’ में इसके संबंध में बातें मिलती हैं। उस समय सामान्य धारणा थी कि धूमकेतु किसी बड़े संकट या युद्ध का संकेत है।
यूरोप में भी धूमकेतु को लेकर भय की ऐसी ही स्थिति थी। सन् 1528 में यूरोप के आकाश में धूमकेतु दिखाई देने पर लोगों में डर फैल गया। इससे स्पष्ट होता है कि वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में मनुष्य प्राकृतिक घटनाओं को रहस्यमय और भयावह मान लेता था।
धीरे-धीरे विज्ञान का विकास हुआ और वैज्ञानिकों ने धूमकेतुओं का अध्ययन शुरू किया। टाइको ब्राहे ने धूमकेतु की दूरी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। बाद में एडमंड हेली ने धूमकेतुओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
हेली ने अलग-अलग वर्षों में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं का अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि 1531, 1607 और 1682 में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं में समानता थी। इससे उन्होंने अनुमान लगाया कि यह अलग-अलग धूमकेतु नहीं, बल्कि एक ही धूमकेतु है, जो निश्चित अवधि के बाद सूर्य के पास लौटता है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि यह धूमकेतु 1758 के आसपास फिर दिखाई देगा। उनकी भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई। इसी कारण इसे हेली का धूमकेतु कहा जाने लगा।
वैज्ञानिक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि धूमकेतु भी सौरमंडल के सदस्य हैं। वे सूर्य की परिक्रमा करते हैं और उनकी कक्षाएँ सामान्य ग्रहों की कक्षाओं से अलग हो सकती हैं। अनेक धूमकेतु बहुत लंबी अवधि में अपनी परिक्रमा पूरी करते हैं, जबकि कुछ की परिक्रमा अवधि अपेक्षाकृत कम होती है।
निबंध में धूमकेतु की बनावट का भी वर्णन है। इसके मुख्य तीन भाग माने गए हैं—नाभिक, सिर और पूँछ। नाभिक में अधिकांश पदार्थ होता है। सूर्य के पास पहुँचने पर नाभिक के पदार्थ गर्म होकर गैस और धूल के रूप में फैलते हैं। इससे धूमकेतु का चमकीला सिर और लंबी पूँछ दिखाई देती है।
धूमकेतु की पूँछ हमेशा सूर्य से विपरीत दिशा में दिखाई देती है। धूमकेतु के नाभिक से निकलने वाली गैस और धूल तथा सूर्य से संबंधित प्रभावों के कारण पूँछ का निर्माण होता है।
कुछ धूमकेतु सूर्य के बहुत निकट से गुजरते हैं और सूर्य की गर्मी के कारण नष्ट भी हो सकते हैं। उनके अवशेषों के कारण पृथ्वी के वातावरण में उल्काओं की वर्षा दिखाई दे सकती है।
आधुनिक विज्ञान ने धूमकेतुओं के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष यानों का भी प्रयोग किया। 1985-86 के दौरान विभिन्न देशों और अंतरिक्ष एजेंसियों ने हेली के धूमकेतु का नजदीक से अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष यान भेजे। इन यानों ने धूमकेतु के चित्र और वैज्ञानिक सूचनाएँ पृथ्वी तक पहुँचाईं।
इस प्रकार पूरा निबंध हमें अंधविश्वास से वैज्ञानिक सोच की यात्रा कराता है। लेखक का उद्देश्य केवल धूमकेतु के बारे में जानकारी देना नहीं है, बल्कि पाठक के भीतर जिज्ञासा, तर्कशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना भी है।
5. निबंध का उद्देश्य
‘धूमकेतु’ निबंध के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- विद्यार्थियों को धूमकेतु के बारे में वैज्ञानिक जानकारी देना।
- धूमकेतु से जुड़ी प्राचीन अंधविश्वासी धारणाओं को स्पष्ट करना।
- वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
- एडमंड हेली के वैज्ञानिक योगदान से परिचित कराना।
- धूमकेतु की संरचना और गति को समझाना।
- सौरमंडल में धूमकेतु की स्थिति बताना।
- अंतरिक्ष अनुसंधान के महत्व को समझाना।
- प्राकृतिक घटनाओं से अनावश्यक भय को दूर करना।
- विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा पैदा करना।
- कठिन वैज्ञानिक विषय को सरल और रोचक भाषा में समझाना।
6. निबंध की प्रमुख विशेषताएँ
- वैज्ञानिक विषय की सरल प्रस्तुति
- शोधपरक दृष्टिकोण
- तथ्य और तर्क का प्रयोग
- अंधविश्वास का विरोध
- वैज्ञानिक चेतना का विकास
- ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक जानकारी का समन्वय
- सरल और रोचक भाषा
- उदाहरणों द्वारा विषय को स्पष्ट करना
- अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी
- जिज्ञासा उत्पन्न करने वाली शैली
7. बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- निबंध — धूमकेतु
- निबंधकार — गुणाकर मुले
- विधा — वैज्ञानिक/शोधपरक निबंध
- धूम — धुआँ
- केतु — पताका
- धूमकेतु का दूसरा नाम — पुच्छल तारा
- पश्चिमी नाम — कॉमेट
- धूमकेतु के मुख्य भाग — नाभिक, सिर और पूँछ
- धूमकेतु का अधिकांश पदार्थ — नाभिक में
- प्रसिद्ध वैज्ञानिक — एडमंड हेली
- हेली का प्रमुख निष्कर्ष — धूमकेतु सौरमंडल के सदस्य हैं।
- धूमकेतु सूर्य की — परिक्रमा करते हैं
- धूमकेतु की कक्षा — अंडाकार
- धूमकेतु की पूँछ — सूर्य से विपरीत दिशा में
- प्राचीन समय में धूमकेतु — भय और संकट का संकेत माना जाता था।
- वराहमिहिर की पुस्तक — वृहत्संहिता
- 1528 — यूरोप में धूमकेतु के कारण भय
- 1531, 1607, 1682 — हेली के अध्ययन से जुड़े वर्ष
- 1758 — हेली की भविष्यवाणी के अनुसार धूमकेतु का पुनः प्रकट होना
- हेली का धूमकेतु — इसी वैज्ञानिक अध्ययन के कारण प्रसिद्ध नाम
- 1985-86 — हेली के धूमकेतु के अंतरिक्ष अध्ययन का महत्वपूर्ण काल
8. महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) — 20
प्रश्न 1. ‘धूमकेतु’ निबंध के लेखक कौन हैं?
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) गुणाकर मुले
(ग) हरिवंश राय बच्चन
(घ) रघुवीर सहाय
उत्तर: (ख) गुणाकर मुले
प्रश्न 2. ‘धूमकेतु’ किस प्रकार का निबंध है?
(क) हास्य निबंध
(ख) राजनीतिक निबंध
(ग) वैज्ञानिक एवं शोधपरक निबंध
(घ) आत्मकथात्मक निबंध
उत्तर: (ग) वैज्ञानिक एवं शोधपरक निबंध
प्रश्न 3. ‘धूम’ का अर्थ क्या है?
(क) प्रकाश
(ख) धुआँ
(ग) जल
(घ) अग्नि
उत्तर: (ख) धुआँ
प्रश्न 4. ‘केतु’ का अर्थ क्या है?
(क) पताका
(ख) ग्रह
(ग) बादल
(घ) किरण
उत्तर: (क) पताका
प्रश्न 5. धूमकेतु को सामान्य भाषा में क्या कहा जाता है?
(क) टूटता तारा
(ख) पुच्छल तारा
(ग) ध्रुव तारा
(घ) शुक्र तारा
उत्तर: (ख) पुच्छल तारा
प्रश्न 6. पश्चिमी देशों में धूमकेतु को क्या कहा जाता है?
(क) Planet
(ख) Star
(ग) Comet
(घ) Meteor
उत्तर: (ग) Comet
प्रश्न 7. प्राचीन समय में धूमकेतु को किसका संकेत माना जाता था?
(क) सुख
(ख) समृद्धि
(ग) संकट और विनाश
(घ) वर्षा
उत्तर: (ग) संकट और विनाश
प्रश्न 8. ‘वृहत्संहिता’ के रचनाकार कौन थे?
(क) आर्यभट्ट
(ख) वराहमिहिर
(ग) हेली
(घ) न्यूटन
उत्तर: (ख) वराहमिहिर
प्रश्न 9. एडमंड हेली किस वैज्ञानिक के मित्र थे?
(क) आइजक न्यूटन
(ख) गैलीलियो
(ग) आर्यभट्ट
(घ) कोपरनिकस
उत्तर: (क) आइजक न्यूटन
प्रश्न 10. हेली ने धूमकेतु के संबंध में क्या सिद्ध किया?
(क) वह पृथ्वी का उपग्रह है
(ख) वह सूर्य की परिक्रमा करता है
(ग) वह केवल गैस है
(घ) वह पृथ्वी पर गिरता है
उत्तर: (ख) वह सूर्य की परिक्रमा करता है
प्रश्न 11. धूमकेतु के मुख्य भाग कितने हैं?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
उत्तर: (ख) तीन
प्रश्न 12. धूमकेतु के तीन प्रमुख भाग कौन-से हैं?
(क) सिर, पैर, पूँछ
(ख) नाभिक, सिर, पूँछ
(ग) केंद्र, ग्रह, पूँछ
(घ) सिर, प्रकाश, गैस
उत्तर: (ख) नाभिक, सिर, पूँछ
प्रश्न 13. धूमकेतु का अधिकांश पदार्थ कहाँ पाया जाता है?
(क) सिर में
(ख) पूँछ में
(ग) नाभिक में
(घ) प्रकाश में
उत्तर: (ग) नाभिक में
प्रश्न 14. धूमकेतु किसकी परिक्रमा करते हैं?
(क) पृथ्वी
(ख) चंद्रमा
(ग) सूर्य
(घ) मंगल
उत्तर: (ग) सूर्य
प्रश्न 15. धूमकेतु की कक्षा सामान्यतः कैसी होती है?
(क) गोलाकार
(ख) अंडाकार
(ग) चौकोर
(घ) सीधी
उत्तर: (ख) अंडाकार
प्रश्न 16. धूमकेतु की पूँछ किस दिशा में रहती है?
(क) सूर्य की ओर
(ख) सूर्य से विपरीत दिशा में
(ग) पृथ्वी की ओर
(घ) चंद्रमा की ओर
उत्तर: (ख) सूर्य से विपरीत दिशा में
प्रश्न 17. हेली की भविष्यवाणी के अनुसार धूमकेतु किस वर्ष फिर दिखाई देने वाला था?
(क) 1742
(ख) 1758
(ग) 1800
(घ) 1910
उत्तर: (ख) 1758
प्रश्न 18. गुणाकर मुले किसके शिष्य थे?
(क) प्रेमचंद
(ख) राहुल सांकृत्यायन
(ग) निराला
(घ) दिनकर
उत्तर: (ख) राहुल सांकृत्यायन
प्रश्न 19. गुणाकर मुले के लेखन की प्रमुख विशेषता क्या है?
(क) रहस्य और रोमांच
(ख) वैज्ञानिक तथ्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना
(ग) केवल कविता लिखना
(घ) केवल व्यंग्य लिखना
उत्तर: (ख) वैज्ञानिक तथ्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना
प्रश्न 20. ‘धूमकेतु’ निबंध का मुख्य संदेश क्या है?
(क) प्राकृतिक घटनाओं से डरना चाहिए
(ख) अंधविश्वास को बढ़ावा देना चाहिए
(ग) वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए
(घ) अंतरिक्ष से दूर रहना चाहिए
उत्तर: (ग) वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए
9. One-Liner Questions with Answers — 20
प्रश्न 1. ‘धूमकेतु’ के निबंधकार कौन हैं?
उत्तर: गुणाकर मुले।
प्रश्न 2. ‘धूमकेतु’ किस विधा की रचना है?
उत्तर: वैज्ञानिक एवं शोधपरक निबंध।
प्रश्न 3. धूमकेतु का सामान्य नाम क्या है?
उत्तर: पुच्छल तारा।
प्रश्न 4. ‘धूम’ का अर्थ क्या है?
उत्तर: धुआँ।
प्रश्न 5. ‘केतु’ का अर्थ क्या है?
उत्तर: पताका।
प्रश्न 6. धूमकेतु को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?
उत्तर: Comet.
प्रश्न 7. धूमकेतु के कितने प्रमुख भाग होते हैं?
उत्तर: तीन।
प्रश्न 8. धूमकेतु के तीन भाग कौन-से हैं?
उत्तर: नाभिक, सिर और पूँछ।
प्रश्न 9. धूमकेतु सूर्य की क्या करते हैं?
उत्तर: सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
प्रश्न 10. धूमकेतु की कक्षा कैसी होती है?
उत्तर: अंडाकार।
प्रश्न 11. धूमकेतु का अधिकांश पदार्थ कहाँ होता है?
उत्तर: नाभिक में।
प्रश्न 12. एडमंड हेली किस क्षेत्र से संबंधित थे?
उत्तर: खगोल विज्ञान से।
प्रश्न 13. हेली के नाम पर किस धूमकेतु का नाम पड़ा?
उत्तर: हेली के धूमकेतु का।
प्रश्न 14. ‘वृहत्संहिता’ के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर: वराहमिहिर।
प्रश्न 15. प्राचीन लोग धूमकेतु से क्यों डरते थे?
उत्तर: वे उसे संकट और विनाश का संकेत मानते थे।
प्रश्न 16. गुणाकर मुले किसके शिष्य थे?
उत्तर: राहुल सांकृत्यायन के।
प्रश्न 17. धूमकेतु की पूँछ किस दिशा में होती है?
उत्तर: सूर्य से विपरीत दिशा में।
प्रश्न 18. धूमकेतु का अध्ययन किस वैज्ञानिक ने विशेष रूप से किया?
उत्तर: एडमंड हेली ने।
प्रश्न 19. ‘धूमकेतु’ पाठ हमें क्या सिखाता है?
उत्तर: वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण अपनाना।
प्रश्न 20. गुणाकर मुले किस प्रकार के लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं?
उत्तर: वैज्ञानिक और शोधपरक लेखन के लिए।
10. 2 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर — 20
प्रश्न 1. धूमकेतु किसे कहते हैं?
उत्तर: धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा करने वाला एक खगोलीय पिंड है, जो सूर्य के निकट आने पर चमकीले सिर और लंबी पूँछ के साथ दिखाई दे सकता है। इसे पुच्छल तारा भी कहा जाता है।
प्रश्न 2. ‘धूमकेतु’ शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘धूमकेतु’ दो शब्दों से बना है—‘धूम’ अर्थात् धुआँ और ‘केतु’ अर्थात् पताका। धुएँ जैसी पूँछ के कारण इसका नाम धूमकेतु पड़ा।
प्रश्न 3. प्राचीन लोग धूमकेतु को अशुभ क्यों मानते थे?
उत्तर: वैज्ञानिक ज्ञान के अभाव में प्राचीन लोग धूमकेतु को रहस्यमय घटना समझते थे। वे मानते थे कि इसके दिखाई देने से युद्ध, संकट या विनाश आने वाला है।
प्रश्न 4. ‘पुच्छल तारा’ नाम क्यों पड़ा?
उत्तर: धूमकेतु के पीछे लंबी पूँछ जैसी संरचना दिखाई देती है। इसी कारण इसे सामान्य भाषा में पुच्छल तारा कहा जाता है।
प्रश्न 5. एडमंड हेली का प्रमुख योगदान क्या था?
उत्तर: हेली ने विभिन्न वर्षों में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं का अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला कि वे सूर्य की परिक्रमा करते हैं और निश्चित अवधि के बाद पुनः दिखाई दे सकते हैं।
प्रश्न 6. हेली का धूमकेतु क्यों प्रसिद्ध हुआ?
उत्तर: हेली ने इसके पुनः दिखाई देने की वैज्ञानिक भविष्यवाणी की थी और वह भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई। इसी कारण यह धूमकेतु उनके नाम से प्रसिद्ध हुआ।
प्रश्न 7. धूमकेतु के तीन भागों के नाम लिखिए।
उत्तर: धूमकेतु के तीन प्रमुख भाग हैं—नाभिक, सिर और पूँछ।
प्रश्न 8. धूमकेतु का नाभिक क्या है?
उत्तर: नाभिक धूमकेतु का केंद्रीय और ठोस पदार्थ वाला भाग है। इसमें धूल, बर्फीले पदार्थ और गैसों से संबंधित पदार्थ पाए जाते हैं।
प्रश्न 9. धूमकेतु का सिर कैसे बनता है?
उत्तर: जब धूमकेतु सूर्य के निकट आता है, तो सूर्य की गर्मी से उसके नाभिक के पदार्थ गर्म होकर फैलते हैं। इससे चमकीला सिर बनता है।
प्रश्न 10. धूमकेतु की पूँछ कैसे बनती है?
उत्तर: सूर्य के निकट आने पर नाभिक से गैस और धूल बाहर निकलती है। सूर्य के प्रभाव से ये पदार्थ पीछे की ओर फैलते हैं और पूँछ का रूप लेते हैं।
प्रश्न 11. धूमकेतु की पूँछ सूर्य से विपरीत दिशा में क्यों होती है?
उत्तर: सूर्य की ऊर्जा और सौर-वायु के प्रभाव से धूमकेतु से निकली गैस और धूल सूर्य से दूर की दिशा में फैलती है। इसलिए पूँछ सूर्य से विपरीत दिशा में दिखाई देती है।
प्रश्न 12. वराहमिहिर का धूमकेतु के संदर्भ में क्या महत्व है?
उत्तर: वराहमिहिर ने अपनी ‘वृहत्संहिता’ में धूमकेतुओं के संबंध में प्राचीन मान्यताओं और उनके शुभ-अशुभ प्रभावों का वर्णन किया है।
प्रश्न 13. धूमकेतु से डरना क्यों उचित नहीं है?
उत्तर: वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि धूमकेतु प्राकृतिक खगोलीय पिंड हैं। उनके दिखाई देने का अर्थ किसी आपदा का आना नहीं है। इसलिए उनसे अंधविश्वास के कारण डरना उचित नहीं।
प्रश्न 14. गुणाकर मुले की भाषा की विशेषता क्या है?
उत्तर: उनकी भाषा सरल, स्पष्ट, तथ्यपूर्ण और रोचक है। वे कठिन वैज्ञानिक विषयों को भी सामान्य पाठक के लिए आसानी से समझने योग्य बनाते हैं।
प्रश्न 15. गुणाकर मुले के लेखन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: उनका उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान को सामान्य पाठकों और विद्यार्थियों तक सरल भाषा में पहुँचाना तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करना था।
प्रश्न 16. धूमकेतु और ग्रहों में एक समानता लिखिए।
उत्तर: धूमकेतु और ग्रह दोनों सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बँधे हुए हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
प्रश्न 17. धूमकेतु के संबंध में वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या है?
उत्तर: वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार धूमकेतु प्राकृतिक खगोलीय पिंड हैं। उनके दिखाई देने को किसी शुभ-अशुभ घटना से जोड़ना अंधविश्वास है।
प्रश्न 18. हेली ने किन वर्षों के धूमकेतुओं का अध्ययन किया?
उत्तर: हेली ने विशेष रूप से 1531, 1607 और 1682 में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं के आधार पर अपना निष्कर्ष तैयार किया।
प्रश्न 19. निबंध में अंधविश्वास और विज्ञान का संबंध कैसे दिखाया गया है?
उत्तर: लेखक ने पहले धूमकेतु से जुड़ी प्राचीन भयपूर्ण धारणाएँ बताई हैं और फिर वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से सिद्ध किया है कि धूमकेतु एक प्राकृतिक खगोलीय पिंड है।
प्रश्न 20. ‘धूमकेतु’ निबंध विद्यार्थियों के लिए उपयोगी क्यों है?
उत्तर: यह निबंध विद्यार्थियों को अंतरिक्ष और धूमकेतुओं की जानकारी देने के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और तर्कशीलता विकसित करने में मदद करता है।
11. 5 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर — 20
प्रश्न 1. ‘धूमकेतु’ शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके नामकरण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
‘धूमकेतु’ शब्द दो शब्दों—‘धूम’ और ‘केतु’ से मिलकर बना है। ‘धूम’ का अर्थ धुआँ और ‘केतु’ का अर्थ पताका या ध्वज होता है। धूमकेतु आकाश में दिखाई देने पर एक चमकीले पिंड के साथ लंबी पूँछ जैसा दिखाई देता है। इस कारण उसका आकार धुएँ वाली पताका के समान लगता है और उसे धूमकेतु कहा गया। सामान्य भाषा में इसे पुच्छल तारा भी कहा जाता है। पश्चिमी देशों में इसे Comet कहते हैं। इस नामकरण में धूमकेतु के रूप और उसकी पूँछ का विशेष महत्व है।
प्रश्न 2. प्राचीन काल में धूमकेतु के प्रति लोगों की धारणा कैसी थी?
उत्तर:
प्राचीन काल में वैज्ञानिक जानकारी सीमित थी। इसलिए आकाश में अचानक दिखाई देने वाली धूमकेतु जैसी घटना लोगों के लिए रहस्यमय थी। लोग इसके प्रकट होने को किसी बड़े संकट, युद्ध या विनाश का संकेत मानते थे। भारत के प्राचीन ग्रंथों में भी धूमकेतु का उल्लेख मिलता है। वराहमिहिर ने ‘वृहत्संहिता’ में इसके शुभ-अशुभ प्रभावों की चर्चा की। यूरोप में भी धूमकेतु को लेकर भय की स्थिति थी। इससे पता चलता है कि वैज्ञानिक ज्ञान के अभाव में मनुष्य प्राकृतिक घटनाओं को अंधविश्वास से जोड़ देता था।
प्रश्न 3. एडमंड हेली ने धूमकेतु के संबंध में क्या महत्वपूर्ण कार्य किया?
उत्तर:
एडमंड हेली ने अलग-अलग समय में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं का अध्ययन किया। उन्होंने 1531, 1607 और 1682 में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं के बीच समानता देखी। उन्होंने अनुमान लगाया कि ये अलग-अलग धूमकेतु नहीं, बल्कि एक ही धूमकेतु हैं जो निश्चित अवधि के बाद सूर्य के पास लौटता है। उन्होंने इसके पुनः दिखाई देने की भविष्यवाणी की। बाद में उनकी भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई। इससे यह प्रमाणित हुआ कि धूमकेतु सौरमंडल के सदस्य हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इसी वैज्ञानिक योगदान के कारण धूमकेतु उनके नाम से ‘हेली का धूमकेतु’ कहलाया।
प्रश्न 4. धूमकेतु की संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
धूमकेतु के तीन प्रमुख भाग माने जाते हैं—नाभिक, सिर और पूँछ। नाभिक इसका केंद्रीय भाग है और इसमें अधिकांश पदार्थ रहता है। इसमें बर्फ, धूल और गैसों से संबंधित पदार्थ पाए जाते हैं। जब धूमकेतु सूर्य के निकट पहुँचता है तो सूर्य की गर्मी से नाभिक के पदार्थ गर्म होकर फैलने लगते हैं। इससे एक चमकीला सिर बनता है। नाभिक से निकलने वाली गैस और धूल सूर्य के प्रभाव से पीछे की ओर फैलती है और लंबी पूँछ का निर्माण करती है। इस प्रकार धूमकेतु की विशेष पहचान उसके सिर और पूँछ से होती है।
प्रश्न 5. धूमकेतु की पूँछ सूर्य की विपरीत दिशा में क्यों रहती है?
उत्तर:
धूमकेतु जब सूर्य के पास पहुँचता है तो सूर्य की गर्मी के कारण उसके नाभिक से गैस और धूल बाहर निकलती है। सौर-वायु तथा सूर्य के विकिरण का प्रभाव इन पदार्थों को सूर्य से दूर की ओर धकेलता है। इसलिए धूमकेतु की पूँछ सामान्यतः सूर्य से विपरीत दिशा में दिखाई देती है। यह पूँछ ठोस वस्तु नहीं होती, बल्कि गैस और धूल के पदार्थों से बनी होती है। इस वैज्ञानिक तथ्य को समझने से धूमकेतु से जुड़े कई पुराने भ्रम दूर हो जाते हैं।
प्रश्न 6. ‘धूमकेतु’ निबंध वैज्ञानिक दृष्टिकोण को कैसे बढ़ावा देता है?
उत्तर:
निबंध में लेखक ने पहले धूमकेतु से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं का वर्णन किया है। पुराने समय में लोग इसे संकट और विनाश का संकेत मानते थे। इसके बाद लेखक वैज्ञानिक खोजों और खगोलविदों के अध्ययन द्वारा वास्तविक स्थिति बताते हैं। हेली के अध्ययन से पता चलता है कि धूमकेतु सौरमंडल के सदस्य हैं। उनके निश्चित परिक्रमा-पथ और संरचना का वैज्ञानिक अध्ययन हो चुका है। इस प्रकार निबंध अंधविश्वास की जगह तथ्य, तर्क और वैज्ञानिक सोच अपनाने की प्रेरणा देता है।
प्रश्न 7. गुणाकर मुले की वैज्ञानिक लेखन शैली की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
गुणाकर मुले की शैली सरल, स्पष्ट, तथ्यपूर्ण और रोचक है। वे कठिन वैज्ञानिक विषयों को बिना अनावश्यक जटिल शब्दों के समझाते हैं। वे ऐतिहासिक घटनाओं, वैज्ञानिक खोजों और उदाहरणों के माध्यम से विषय को क्रमशः स्पष्ट करते हैं। उनकी रचना में जिज्ञासा पैदा करने की क्षमता है। वे पाठक को केवल जानकारी नहीं देते, बल्कि उसे सोचने के लिए भी प्रेरित करते हैं। यही कारण है कि उनका वैज्ञानिक लेखन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
प्रश्न 8. हेली के निष्कर्ष का वैज्ञानिक महत्व समझाइए।
उत्तर:
हेली के अध्ययन ने धूमकेतुओं के संबंध में प्रचलित रहस्यमय और भयपूर्ण धारणाओं को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि अलग-अलग समय पर दिखाई देने वाले धूमकेतुओं में क्या संबंध है। उनके अध्ययन से यह निष्कर्ष सामने आया कि धूमकेतु भी सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनकी भविष्यवाणी के सही सिद्ध होने से उनका वैज्ञानिक निष्कर्ष मजबूत हुआ। इससे धूमकेतुओं को सौरमंडल के प्राकृतिक सदस्यों के रूप में समझने में सहायता मिली।
प्रश्न 9. धूमकेतु और अंधविश्वास का संबंध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी, तब लोग प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए कल्पनाओं और धार्मिक धारणाओं का सहारा लेते थे। धूमकेतु का अचानक दिखाई देना भी उन्हें असामान्य घटना लगता था। इसलिए उसे युद्ध, बीमारी या विनाश का संकेत माना गया। वैज्ञानिक अध्ययन ने इन धारणाओं को बदल दिया। आज धूमकेतु को एक खगोलीय पिंड के रूप में समझा जाता है। इस प्रकार निबंध दिखाता है कि ज्ञान के विकास के साथ अंधविश्वास की जगह वैज्ञानिक सोच ले सकती है।
प्रश्न 10. ‘धूमकेतु’ निबंध का केंद्रीय संदेश क्या है?
उत्तर:
निबंध का केंद्रीय संदेश है कि प्राकृतिक और वैज्ञानिक घटनाओं को अंधविश्वास के आधार पर नहीं समझना चाहिए। मनुष्य को हर घटना के पीछे के कारण को जानने के लिए प्रश्न पूछना चाहिए और वैज्ञानिक प्रमाणों का सहारा लेना चाहिए। धूमकेतु को कभी भय और विनाश का प्रतीक माना जाता था, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन ने सिद्ध किया कि वह सौरमंडल का एक प्राकृतिक सदस्य है। इसलिए हमें जिज्ञासु, तर्कशील और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला बनना चाहिए।
प्रश्न 11. धूमकेतु की गति और परिक्रमा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनकी कक्षाएँ सामान्य ग्रहों की कक्षाओं की तुलना में अधिक लंबी और अंडाकार हो सकती हैं। कुछ धूमकेतु सूर्य के पास अपेक्षाकृत जल्दी लौटते हैं, जबकि कुछ को बहुत लंबा समय लगता है। कुछ धूमकेतु सूर्य के बहुत दूर तक चले जाते हैं और फिर वापस लौटते हैं। इस प्रकार धूमकेतुओं की गति और परिक्रमा उनके कक्षीय पथ पर निर्भर करती है।
प्रश्न 12. प्राचीन भारतीय ग्रंथों में धूमकेतु का उल्लेख किस प्रकार मिलता है?
उत्तर:
धूमकेतु का उल्लेख भारतीय प्राचीन साहित्य और ग्रंथों में मिलता है। अथर्ववेद और महाभारत जैसे ग्रंथों में धूमकेतु संबंधी उल्लेख पाए जाते हैं। वराहमिहिर की ‘वृहत्संहिता’ में भी धूमकेतुओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई है। उस समय धूमकेतु को अक्सर शुभ-अशुभ घटनाओं से जोड़कर देखा जाता था। इससे पता चलता है कि धूमकेतु मानव समाज के लिए प्राचीन काल से ही जिज्ञासा का विषय रहा है।
प्रश्न 13. धूमकेतुओं के अध्ययन में आधुनिक अंतरिक्ष यानों का क्या महत्व है?
उत्तर:
आधुनिक अंतरिक्ष यानों ने वैज्ञानिकों को धूमकेतुओं का नजदीक से अध्ययन करने का अवसर दिया। पृथ्वी से दूर स्थित खगोलीय पिंडों को केवल दूरबीन से देखने की सीमाएँ होती हैं। अंतरिक्ष यान धूमकेतु के पास जाकर उसके चित्र और वैज्ञानिक आँकड़े प्राप्त कर सकते हैं। हेली के धूमकेतु के अध्ययन के लिए विभिन्न देशों द्वारा भेजे गए यानों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इससे धूमकेतु की वास्तविक संरचना और गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त हुई।
प्रश्न 14. धूमकेतु से संबंधित भय किस प्रकार समाप्त हुआ?
उत्तर:
वैज्ञानिक अध्ययन बढ़ने के साथ धूमकेतु के संबंध में वास्तविक तथ्य सामने आए। वैज्ञानिकों ने उसकी कक्षा, गति, संरचना और सूर्य के साथ उसके संबंधों का अध्ययन किया। हेली की भविष्यवाणी ने यह सिद्ध करने में मदद की कि धूमकेतु निश्चित नियमों के अनुसार सूर्य की परिक्रमा करते हैं। जब लोगों को वैज्ञानिक जानकारी मिलने लगी तो धूमकेतु को विनाश का संकेत मानने वाली धारणाएँ कमजोर होने लगीं। इस प्रकार वैज्ञानिक ज्ञान ने भय और अंधविश्वास को कम किया।
प्रश्न 15. गुणाकर मुले का हिंदी वैज्ञानिक साहित्य में योगदान बताइए।
उत्तर:
गुणाकर मुले ने वैज्ञानिक विषयों को हिंदी में सरल और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विज्ञान, गणित, अंतरिक्ष, अंक-पद्धति और लिपियों जैसे विषयों पर लिखा। उनका उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान को केवल विशेषज्ञों तक सीमित रखना नहीं था। वे सामान्य पाठकों और विद्यार्थियों को भी विज्ञान से जोड़ना चाहते थे। सरल भाषा और शोधपरक दृष्टिकोण के कारण उनका लेखन हिंदी वैज्ञानिक साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
प्रश्न 16. धूमकेतु के नाभिक, सिर और पूँछ में अंतर बताइए।
उत्तर:
नाभिक धूमकेतु का केंद्रीय भाग है, जिसमें उसका अधिकांश पदार्थ पाया जाता है। सूर्य के पास पहुँचने पर नाभिक के पदार्थ गर्म होकर गैस और धूल के रूप में फैलते हैं और इसके आसपास चमकीला सिर दिखाई देता है। नाभिक से निकलने वाली गैस और धूल सूर्य के प्रभाव से पीछे की ओर फैलती है और पूँछ बनाती है। इस प्रकार नाभिक मुख्य केंद्रीय पदार्थ है, सिर चमकीला फैला हुआ भाग है और पूँछ उससे बाहर की ओर फैला हुआ पदार्थ है।
प्रश्न 17. धूमकेतु और उल्का-वर्षा का क्या संबंध है?
उत्तर:
कुछ धूमकेतु सूर्य के निकट आने पर टूटने या नष्ट होने लगते हैं। उनके पीछे बचे धूल और अन्य छोटे कण अंतरिक्ष में फैल सकते हैं। पृथ्वी जब ऐसे कणों के क्षेत्र से गुजरती है, तो वे पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करके चमकते हुए दिखाई देते हैं। इसे उल्का-वर्षा के रूप में देखा जा सकता है। इस प्रकार कुछ उल्का-वर्षाओं का संबंध धूमकेतु के अवशेषों से हो सकता है।
प्रश्न 18. निबंध में इतिहास और विज्ञान का समन्वय कैसे हुआ है?
उत्तर:
लेखक ने धूमकेतु की चर्चा केवल वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं की है। उन्होंने प्राचीन भारतीय ग्रंथों, यूरोप की मान्यताओं, पुराने वैज्ञानिकों और आधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान को एक साथ जोड़ा है। इससे पाठक समझ पाता है कि धूमकेतु के प्रति मनुष्य की धारणा समय के साथ कैसे बदली। इस प्रकार इतिहास की घटनाओं और वैज्ञानिक खोजों का सुंदर समन्वय निबंध को रोचक बनाता है।
प्रश्न 19. ‘धूमकेतु’ विद्यार्थियों को क्या प्रेरणा देता है?
उत्तर:
यह निबंध विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने और प्रश्न पूछने की प्रेरणा देता है। यह बताता है कि किसी घटना को केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर स्वीकार नहीं करना चाहिए। उसके कारण और प्रमाण खोजने चाहिए। धूमकेतु से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं और आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान की तुलना विद्यार्थियों में तार्किक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करती है।
प्रश्न 20. ‘धूमकेतु’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
निबंध का पूरा विषय धूमकेतु के वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और सामाजिक पक्षों के इर्द-गिर्द घूमता है। लेखक ने इसके नामकरण, प्राचीन धारणाओं, हेली के अध्ययन, संरचना, कक्षा, पूँछ और अंतरिक्ष अनुसंधान की चर्चा की है। इसलिए ‘धूमकेतु’ शीर्षक पूरी तरह सार्थक है। यह छोटा और विषयानुकूल शीर्षक पाठक को तुरंत निबंध के मुख्य विषय का संकेत देता है।
12. 10 अंक के महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. ‘धूमकेतु’ निबंध का विस्तृत सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
गुणाकर मुले का ‘धूमकेतु’ एक वैज्ञानिक एवं शोधपरक निबंध है। इसमें लेखक ने धूमकेतु के बारे में प्रचलित पुरानी धारणाओं से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक खोजों तक की पूरी यात्रा प्रस्तुत की है।
प्राचीन समय में धूमकेतु को देखकर लोग भयभीत हो जाते थे। उन्हें लगता था कि यह युद्ध, महामारी, संकट या विनाश का संकेत है। भारत के प्राचीन ग्रंथों में भी धूमकेतु का उल्लेख मिलता है। वराहमिहिर ने अपनी ‘वृहत्संहिता’ में धूमकेतु के दिखाई देने से जुड़े शुभ-अशुभ विचारों का उल्लेख किया।
यूरोप में भी धूमकेतु को लेकर भय था। लेकिन विज्ञान के विकास के साथ वैज्ञानिकों ने इसके वास्तविक स्वरूप का अध्ययन शुरू किया।
एडमंड हेली ने अलग-अलग समय में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं का अध्ययन किया। उन्होंने 1531, 1607 और 1682 में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं में समानता देखी। उन्होंने अनुमान लगाया कि यह एक ही धूमकेतु है, जो निश्चित अवधि के बाद सूर्य के पास लौटता है। उन्होंने इसके पुनः दिखाई देने की भविष्यवाणी की और उनकी भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई। इसी कारण यह ‘हेली का धूमकेतु’ कहलाया।
वैज्ञानिकों ने यह भी जाना कि धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनकी कक्षाएँ अंडाकार होती हैं। धूमकेतु के तीन मुख्य भाग—नाभिक, सिर और पूँछ—होते हैं। नाभिक में अधिकांश पदार्थ रहता है। सूर्य के पास आने पर उससे गैस और धूल निकलती है, जिससे सिर और पूँछ दिखाई देती है।
आधुनिक समय में अंतरिक्ष यानों की सहायता से धूमकेतुओं का नजदीक से अध्ययन किया गया। इससे वैज्ञानिकों को उनकी वास्तविक संरचना और गतिविधियों की जानकारी मिली।
इस प्रकार निबंध का मुख्य संदेश है कि हमें प्राकृतिक घटनाओं से अंधविश्वास के कारण डरना नहीं चाहिए। हमें वैज्ञानिक तथ्यों, तर्क और प्रमाणों के आधार पर किसी भी घटना को समझना चाहिए।
प्रश्न 2. धूमकेतु के संबंध में प्राचीन और आधुनिक धारणाओं की तुलना कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन समय में धूमकेतु मनुष्य के लिए रहस्य और भय का विषय था। लोगों के पास आकाशीय घटनाओं को समझने के पर्याप्त वैज्ञानिक साधन नहीं थे। इसलिए वे धूमकेतु को युद्ध, महामारी, विनाश या किसी बड़े संकट का संकेत मानते थे। भारत और यूरोप दोनों में ऐसी धारणाएँ प्रचलित थीं।
समय के साथ विज्ञान का विकास हुआ। वैज्ञानिकों ने धूमकेतुओं को दूरबीन और अन्य उपकरणों की सहायता से समझना शुरू किया। एडमंड हेली ने धूमकेतु की गति और पुनरागमन का अध्ययन किया। उनकी भविष्यवाणी के सही सिद्ध होने से यह स्पष्ट हुआ कि धूमकेतु भी निश्चित नियमों के अनुसार सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
आधुनिक विज्ञान ने धूमकेतु की संरचना भी स्पष्ट की। अब यह ज्ञात है कि उसके नाभिक, सिर और पूँछ होते हैं तथा उसकी पूँछ गैस और धूल से संबंधित होती है।
इस प्रकार प्राचीन धारणा भय और अंधविश्वास पर आधारित थी, जबकि आधुनिक धारणा वैज्ञानिक तथ्य, निरीक्षण और प्रमाण पर आधारित है।
प्रश्न 3. एडमंड हेली के वैज्ञानिक योगदान का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एडमंड हेली धूमकेतुओं के वैज्ञानिक अध्ययन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइजक न्यूटन के मित्र थे। हेली ने अलग-अलग वर्षों में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं का अध्ययन किया।
उन्होंने 1531, 1607 और 1682 में दिखाई देने वाले धूमकेतुओं के बारे में जानकारी एकत्र की। उन्हें लगा कि इन घटनाओं के बीच लगभग समान समय का अंतर है। इससे उन्होंने अनुमान लगाया कि ये अलग-अलग धूमकेतु नहीं, बल्कि एक ही धूमकेतु है, जो अपनी अंडाकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करता है।
हेली ने गणना के आधार पर भविष्यवाणी की कि यह धूमकेतु लगभग 1758 के आसपास फिर दिखाई देगा। उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई। यद्यपि हेली स्वयं इस घटना को देखने के लिए जीवित नहीं रहे, लेकिन उनकी वैज्ञानिक गणना सफल हुई।
इस खोज से यह सिद्ध हुआ कि धूमकेतु सौरमंडल के सदस्य हैं और उनकी गति निश्चित नियमों का पालन करती है। हेली के योगदान के सम्मान में यह धूमकेतु ‘हेली का धूमकेतु’ कहलाया।
प्रश्न 4. धूमकेतु की संरचना और उसकी पूँछ बनने की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
धूमकेतु के तीन मुख्य भाग माने जाते हैं—नाभिक, सिर और पूँछ।
नाभिक इसका केंद्रीय भाग है। इसमें धूल, बर्फीले पदार्थ और अन्य पदार्थों का बड़ा हिस्सा मौजूद रहता है। जब धूमकेतु सूर्य से बहुत दूर होता है, तब उसका अधिकांश पदार्थ नाभिक के रूप में रहता है।
जब वह सूर्य के निकट पहुँचता है, तो सूर्य की गर्मी के कारण नाभिक के बर्फीले पदार्थ गर्म होकर गैस में बदलने लगते हैं। गैस और धूल बाहर फैलती है। इससे नाभिक के चारों ओर एक चमकीला सिर दिखाई देता है।
सूर्य की ऊर्जा और सौर-वायु के प्रभाव से गैस और धूल सूर्य से विपरीत दिशा में फैलती है। इससे लंबी पूँछ बनती है। इसलिए धूमकेतु की पूँछ हमेशा सूर्य से विपरीत दिशा में दिखाई देती है।
इस प्रकार धूमकेतु की पूँछ कोई ठोस वस्तु नहीं, बल्कि गैस और धूल से संबंधित विस्तृत संरचना है।
प्रश्न 5. ‘धूमकेतु’ निबंध में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘धूमकेतु’ निबंध का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। लेखक ने दिखाया है कि वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में मनुष्य प्राकृतिक घटनाओं को रहस्यमय और भयावह मान सकता है।
प्राचीन लोग धूमकेतु को युद्ध और विनाश का संकेत मानते थे। वे उसकी वास्तविक प्रकृति से परिचित नहीं थे। बाद में वैज्ञानिकों ने धूमकेतु का अध्ययन किया। हेली ने उसके पुनरागमन की भविष्यवाणी करके यह सिद्ध किया कि धूमकेतु भी निश्चित कक्षीय नियमों का पालन करते हैं।
आधुनिक विज्ञान ने धूमकेतु की संरचना, गति और पूँछ के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। अंतरिक्ष यानों द्वारा किए गए अध्ययन ने इन जानकारियों को और मजबूत किया।
इससे यह संदेश मिलता है कि किसी प्राकृतिक घटना से डरने या उसके बारे में अंधविश्वास फैलाने के बजाय हमें उसका वैज्ञानिक कारण जानना चाहिए। यही वैज्ञानिक दृष्टिकोण समाज को अज्ञान और भय से मुक्त करता है।
प्रश्न 6. गुणाकर मुले का साहित्यिक एवं वैज्ञानिक परिचय दीजिए।
उत्तर:
गुणाकर मुले हिंदी के प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं शोधपरक लेखक थे। उनका जन्म 3 जनवरी 1935 को महाराष्ट्र के अमरावती क्षेत्र में हुआ था। वे राहुल सांकृत्यायन के शिष्य थे और उनमें शोध तथा ज्ञान प्राप्त करने की गहरी जिज्ञासा थी।
उन्होंने विज्ञान, गणित, अंतरिक्ष, भारतीय अंक-पद्धति, सिक्कों और लिपियों जैसे विषयों पर सरल भाषा में लिखा। उनकी विशेषता यह थी कि वे कठिन विषयों को सामान्य पाठक के लिए भी समझने योग्य बना देते थे।
उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘भारतीय अंक-पद्धति की कहानी’, ‘भारतीय सिक्कों की कहानी’, ‘भारतीय लिपियों की कहानी’, ‘गणित की कहानी’, ‘ज्यामिति की कहानी’, ‘नक्षत्रलोक’ और ‘ब्रह्मांड परिचय’ आदि शामिल हैं।
हिंदी वैज्ञानिक लेखन को लोकप्रिय बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। ‘धूमकेतु’ भी उनके इसी शोधपरक और वैज्ञानिक लेखन का उदाहरण है।
प्रश्न 7. ‘धूमकेतु’ शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
‘धूमकेतु’ निबंध का शीर्षक अत्यंत संक्षिप्त, स्पष्ट और विषयानुकूल है। निबंध में शुरुआत से अंत तक धूमकेतु को ही केंद्र में रखा गया है।
लेखक ने धूमकेतु के अर्थ और नामकरण से शुरुआत की है। इसके बाद उन्होंने प्राचीन भारतीय तथा यूरोपीय मान्यताओं, धूमकेतु के प्रति भय, वैज्ञानिकों के अध्ययन, एडमंड हेली की भविष्यवाणी, धूमकेतु की कक्षा, संरचना, नाभिक, सिर और पूँछ तथा अंतरिक्ष यानों द्वारा किए गए अध्ययन की चर्चा की है।
इस प्रकार निबंध का प्रत्येक प्रमुख भाग धूमकेतु से संबंधित है। इसलिए ‘धूमकेतु’ शीर्षक विषय की पूरी तरह पहचान कराता है और निबंध की विषय-वस्तु के लिए पूर्णतः सार्थक है।
प्रश्न 8. ‘धूमकेतु’ निबंध से मिलने वाली वैज्ञानिक चेतना की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
यह निबंध विद्यार्थियों को सबसे पहले यह सिखाता है कि किसी भी प्राकृतिक घटना को देखकर तुरंत निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। उसके पीछे के वैज्ञानिक कारण को समझने का प्रयास करना चाहिए।
धूमकेतु को प्राचीन समय में संकट का संकेत माना जाता था। वैज्ञानिकों ने इसका अध्ययन करके इस धारणा को बदल दिया। हेली की भविष्यवाणी और आधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान ने यह स्पष्ट कर दिया कि धूमकेतु एक प्राकृतिक खगोलीय पिंड है।
निबंध हमें प्रश्न पूछने, प्रमाण खोजने, तथ्यों की जाँच करने और तार्किक सोच विकसित करने की प्रेरणा देता है। इसलिए यह केवल अंतरिक्ष विज्ञान का पाठ नहीं, बल्कि वैज्ञानिक चेतना विकसित करने वाला महत्वपूर्ण निबंध भी है।
प्रश्न 9. ‘धूमकेतु’ निबंध में अंधविश्वास से विज्ञान तक की यात्रा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
निबंध की शुरुआत में धूमकेतु के प्रति प्राचीन लोगों की भयपूर्ण मानसिकता दिखाई देती है। वे इसे युद्ध, विनाश और संकट का संकेत मानते थे। धूमकेतु के अचानक दिखाई देने के कारण उनके मन में भय उत्पन्न होता था।
इसके बाद वैज्ञानिकों ने धूमकेतुओं का अध्ययन करना शुरू किया। हेली ने उनके पुनरागमन का अध्ययन करके यह सिद्ध किया कि उनकी गति निश्चित नियमों के अनुसार होती है। बाद में धूमकेतु की संरचना, कक्षा और गति के बारे में अनेक वैज्ञानिक तथ्य सामने आए।
अंतरिक्ष यानों ने धूमकेतु के और निकट जाकर उसका अध्ययन किया। इस प्रकार जो वस्तु कभी भय और अंधविश्वास का प्रतीक थी, वह वैज्ञानिक अध्ययन का विषय बन गई।
यह यात्रा बताती है कि ज्ञान और विज्ञान के विकास से मनुष्य अंधविश्वास से निकलकर तर्क और सत्य की ओर बढ़ सकता है।
प्रश्न 10. ‘धूमकेतु’ निबंध का उद्देश्य, संदेश और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता बताइए।
उत्तर:
‘धूमकेतु’ निबंध का उद्देश्य धूमकेतु के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी देना और उसके प्रति प्रचलित अंधविश्वासी धारणाओं को दूर करना है। लेखक ने इतिहास और विज्ञान के माध्यम से बताया है कि मनुष्य की धारणाएँ ज्ञान के विकास के साथ बदलती हैं।
निबंध का मुख्य संदेश है कि प्राकृतिक घटनाओं को अंधविश्वास से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए। धूमकेतु का उदाहरण इस बात को स्पष्ट करता है कि वैज्ञानिक अनुसंधान किसी रहस्यमय घटना के पीछे छिपे वास्तविक कारणों को सामने ला सकता है।
आज के समय में भी यह निबंध प्रासंगिक है, क्योंकि समाज में अनेक प्रकार के अंधविश्वास मौजूद हैं। विज्ञान हमें प्रश्न पूछना, प्रमाण देखना और तर्क के आधार पर निष्कर्ष निकालना सिखाता है।
इस प्रकार ‘धूमकेतु’ केवल एक वैज्ञानिक निबंध नहीं, बल्कि वैज्ञानिक चेतना, तर्कशीलता और जिज्ञासा का संदेश देने वाली रचना है।
परीक्षा में याद रखने योग्य अति महत्वपूर्ण बिंदु
- ‘धूमकेतु’ के लेखक — गुणाकर मुले
- विधा — वैज्ञानिक शोधपरक निबंध
- धूम — धुआँ
- केतु — पताका
- पुच्छल तारा — धूमकेतु
- Comet — धूमकेतु
- धूमकेतु के भाग — नाभिक, सिर, पूँछ
- नाभिक — मुख्य पदार्थ वाला केंद्रीय भाग
- सिर — सूर्य के निकट आने पर बनने वाला चमकीला भाग
- पूँछ — गैस और धूल से बनने वाला विस्तृत भाग
- धूमकेतु — सूर्य की परिक्रमा करता है
- कक्षा — अंडाकार
- प्राचीन धारणा — संकट/विनाश का संकेत
- वराहमिहिर — ‘वृहत्संहिता’
- एडमंड हेली — धूमकेतु के वैज्ञानिक अध्ययन से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक
- हेली की भविष्यवाणी — धूमकेतु के पुनः दिखाई देने के संबंध में
- हेली का धूमकेतु — प्रसिद्ध धूमकेतु
- आधुनिक अध्ययन — अंतरिक्ष यानों द्वारा भी
- मुख्य संदेश — वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- लेखक की शैली — सरल, तथ्यपूर्ण, शोधपरक और रोचक
निष्कर्ष
गुणाकर मुले का ‘धूमकेतु’ ज्ञान और विज्ञान से जुड़ा अत्यंत उपयोगी निबंध है। लेखक ने धूमकेतु के माध्यम से यह दिखाया है कि अज्ञान के कारण मनुष्य किसी प्राकृतिक घटना से भयभीत हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान उस भय को ज्ञान में बदल सकता है।
इस निबंध से विद्यार्थियों को धूमकेतु के बारे में जानकारी मिलने के साथ-साथ तर्कशीलता, जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और प्रमाण आधारित विचार अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
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