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— हरिवंश राय बच्चन
रचनाकार परिचय — हरिवंश राय बच्चन
हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के अत्यंत लोकप्रिय और संवेदनशील कवियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 27 नवंबर 1907 को इलाहाबाद के निकट प्रतापगढ़ जिले के बाबूपट्टी गाँव में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव और माता का नाम सरस्वती देवी था।
बचपन में उन्हें प्यार से ‘बच्चन’ कहा जाता था। आगे चलकर यही नाम उनकी साहित्यिक पहचान बन गया। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा कायस्थ पाठशाला में प्राप्त की। उस समय उन्होंने उर्दू का भी अध्ययन किया। आगे चलकर उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. किया।
इसके बाद वे इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए और वहाँ अंग्रेजी साहित्य के प्रसिद्ध कवि डब्ल्यू. बी. यीट्स की कविताओं पर शोध करके पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
हरिवंश राय बच्चन ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया। बाद में वे भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ के रूप में भी कार्यरत रहे। वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी बने।
उनका विवाह तेजी सूरी से हुआ। तेजी बच्चन रंगमंच और गायन से जुड़ी हुई थीं। उनके दो पुत्र हुए—अमिताभ बच्चन और अजिताभ बच्चन। अमिताभ बच्चन आगे चलकर भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता बने।
बच्चन जी की सबसे प्रसिद्ध कृतियों में ‘मधुशाला’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उनकी अन्य रचनाओं में मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल अंतर, सतरंगिनी, दो चट्टानें, नीड़ का पुनर्निर्माण आदि प्रमुख हैं।
उनकी कृति ‘दो चट्टानें’ को 1968 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार और अन्य साहित्यिक सम्मानों से भी सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें 1963 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
हरिवंश राय बच्चन की कविताओं में जीवन-संघर्ष, आशा, प्रेम, पीड़ा, संघर्ष और पुनर्निर्माण की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है। 18 जनवरी 2003 को मुंबई में उनका निधन हुआ।
कविता परिचय
कविता का नाम: नीड़ का निर्माण फिर-फिर
कवि: हरिवंश राय बच्चन
विधा: कविता
मुख्य भाव: संघर्ष, आशा, पुनर्निर्माण और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण।
कविता का केंद्रीय भाव
‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ कविता में कवि ने जीवन के संघर्ष और पुनर्निर्माण की भावना को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। आँधी, अंधकार और प्रलय जैसी परिस्थितियाँ जीवन में आने वाली कठिनाइयों का प्रतीक हैं।
कवि बताता है कि विनाश कितना भी भयंकर क्यों न हो, मनुष्य को निराश नहीं होना चाहिए। जैसे आँधी में पक्षियों के घोंसले टूट जाते हैं, फिर भी वे दोबारा तिनके जुटाकर अपना घोंसला बनाते हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी कठिनाइयों के बाद अपने जीवन का पुनर्निर्माण करना चाहिए।
कविता का संदेश है कि नाश के बाद निर्माण और निराशा के बाद आशा का जन्म होता है।
पहला काव्यांश
काव्यांश
बह उठी आँधी की नभ में छा गया सहसा अँधेरा भूमि को इस भाँति घेरा
धूलि-धूसर बादलों ने
रात-सा दिन हो गया, फिर
रात आयी और काली
लग रहा था अब न होगा
इस निशा का फिर सवेरा
रात के उत्पात भय से
भीत जन-जन, भीत कण-कण,
किन्तु प्राची से उषा की
मोहिनी मुस्कान फिर-फिर
नीड़ का निर्माण फिर-फिर
नेह का आह्वान फिर-फिर
बह चले झोंके कि काँपे भीम कायावान भूधर,
जड़ समेत उखड़-पुखड़ कर,
गिर पड़े, टूटे विटप वर,
हाय तिनकों से विनिर्मित
घोंसलों पर क्या न बीती,
डगमगाये जबकि कंकड़ ईट पत्थर के महल पर
बोल, आशा के विहंगम किस जगह पर तू छिपा था, जो गगन पर चढ़ उठाता गर्व से निज वक्ष फिर-फिर।
प्रसंग
प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य कविता ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ से लिया गया है। इसके कवि हरिवंश राय बच्चन हैं। इस काव्यांश में कवि ने भयंकर आँधी और अंधकार के बीच आशा के पुनर्जन्म तथा पक्षियों के संघर्ष को चित्रित किया है।
व्याख्या
कवि कहता है कि अचानक बहुत तेज आँधी चलने लगी और पूरे आकाश में अंधेरा छा गया। धूल से भरे बादलों ने धरती को इस प्रकार ढक लिया कि दिन भी रात जैसा दिखाई देने लगा। इसके बाद और अधिक भयानक रात आ गई।
ऐसा लगने लगा कि अब इस अंधेरी रात का कभी अंत नहीं होगा और सुबह नहीं आएगी। इस भयंकर वातावरण के कारण प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक प्राणी भयभीत हो गया।
लेकिन निराशा के इस वातावरण में भी पूर्व दिशा से उगने वाली सुबह की किरणों ने अपनी सुंदर मुस्कान दिखाई। इसका अर्थ है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो, उसके बाद प्रकाश अवश्य आता है।
इसके बाद कवि आँधी की भयंकर शक्ति का वर्णन करता है। तेज हवाओं के कारण बड़े-बड़े पर्वत तक काँपने लगे और पेड़ जड़ों सहित उखड़कर गिर पड़े। पक्षियों के तिनकों से बने छोटे-छोटे घोंसलों की तो बहुत बुरी स्थिति हुई होगी।
लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि जिन कंकड़, ईंट और पत्थरों से बने बड़े-बड़े महल भी आँधी में डगमगा गए, उसी समय आशा का पक्षी कहाँ छिपा हुआ था? वह फिर से आकाश में अपने साहस और आत्मविश्वास के साथ उड़ने लगा।
कवि यहाँ पक्षी को आशा, साहस और पुनर्निर्माण का प्रतीक बनाता है।
भावार्थ
जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, मनुष्य को आशा नहीं छोड़नी चाहिए। विनाश के बाद निर्माण और अंधकार के बाद प्रकाश अवश्य आता है। हमें पक्षियों की तरह कठिनाइयों के बाद फिर से अपने जीवन का निर्माण करना चाहिए।
दूसरा काव्यांश
काव्यांश
क्रुद्ध नभ के वज्र दन्तों में उषा है मुस्कराती,
घोर गर्जनमय गगन के कंठ में खग पंक्ति गाती,
एक चिड़िया चोंच में तिनका लिये जो जा रही है,
वह सहज में ही पवन उनचास को नीचा दिखाती !
नाश के दुःख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख
प्रलय की निस्तब्धता से सृष्टि का नवगान फिर-फिर !
नीड़ का निर्माण फिर-फिर
नेह का आह्वान फिर-फिर
प्रसंग
प्रस्तुत काव्यांश हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध कविता ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ से लिया गया है। इसमें कवि ने विनाश के बीच निर्माण, निराशा के बीच आशा तथा कठिन परिस्थितियों के बीच संघर्ष की भावना को व्यक्त किया है।
व्याख्या
कवि कहता है कि आकाश क्रोधित होकर भयंकर रूप धारण किए हुए है। बादल गरज रहे हैं और वातावरण में भय उत्पन्न हो रहा है। लेकिन इसी भयंकर वातावरण के बीच सुबह मुस्करा रही है।
आकाश में बादलों की तेज गर्जना हो रही है, फिर भी पक्षियों की पंक्ति अपनी मधुर आवाज में गीत गा रही है। इसका अर्थ है कि जीवन की मधुरता और आशा कठिन परिस्थितियों में भी समाप्त नहीं होती।
कवि एक छोटी-सी चिड़िया का उदाहरण देता है। वह अपनी चोंच में केवल एक तिनका लेकर अपना घोंसला बनाने जा रही है। उसके सामने बहुत तेज हवा है, लेकिन वह उससे डरती नहीं है।
इतनी शक्तिशाली हवा के सामने एक छोटी-सी चिड़िया का यह प्रयास उसके साहस और आत्मविश्वास को दिखाता है। वह अपनी छोटी-सी शक्ति से भी तूफान को चुनौती देती दिखाई देती है।
अंत में कवि कहता है कि विनाश का दुख कभी भी निर्माण के सुख को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता। प्रलय के बाद जब शांति आती है, तब सृष्टि में फिर से नया जीवन और नया गीत सुनाई देता है।
भावार्थ
कठिनाइयाँ जीवन का अंत नहीं हैं। वे नए निर्माण की शुरुआत बन सकती हैं। हमें निराश होकर बैठने के बजाय छोटी-सी चिड़िया की तरह लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। आशा, साहस और निर्माण की भावना ही जीवन को आगे बढ़ाती है।
कविता का संदेश
‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ कविता हमें सिखाती है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए। यदि हमारा निर्माण बार-बार नष्ट भी हो जाए, तो हमें फिर से निर्माण करना चाहिए।
कविता का सबसे बड़ा संदेश है—
“विनाश के बाद निर्माण और निराशा के बाद आशा का जन्म होता है।”
20 महत्वपूर्ण वैकल्पिक प्रश्न — MCQ
1. ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ कविता के कवि कौन हैं?
(क) रवींद्रनाथ ठाकुर
(ख) हरिवंश राय बच्चन
(ग) निराला
(घ) दिनकर
उत्तर: (ख) हरिवंश राय बच्चन
2. ‘नीड़’ शब्द का अर्थ क्या है?
(क) जंगल
(ख) घर/घोंसला
(ग) पर्वत
(घ) नदी
उत्तर: (ख) घर/घोंसला
3. कविता में नीड़ किसका प्रतीक है?
(क) संघर्ष
(ख) जीवन और आश्रय
(ग) अंधकार
(घ) भय
उत्तर: (ख) जीवन और आश्रय
4. कविता में आँधी किसका प्रतीक है?
(क) सुख
(ख) जीवन की कठिनाइयों
(ग) प्रेम
(घ) सफलता
उत्तर: (ख) जीवन की कठिनाइयों
5. आँधी के कारण दिन कैसा हो गया था?
(क) सुबह जैसा
(ख) रात जैसा
(ग) दोपहर जैसा
(घ) उज्ज्वल
उत्तर: (ख) रात जैसा
6. उषा कहाँ से आती दिखाई देती है?
(क) पश्चिम से
(ख) उत्तर से
(ग) प्राची से
(घ) दक्षिण से
उत्तर: (ग) प्राची से
7. ‘प्राची’ का अर्थ क्या है?
(क) पश्चिम दिशा
(ख) पूर्व दिशा
(ग) उत्तर दिशा
(घ) दक्षिण दिशा
उत्तर: (ख) पूर्व दिशा
8. घोंसले किससे बने थे?
(क) लोहे से
(ख) पत्थर से
(ग) तिनकों से
(घ) लकड़ी से
उत्तर: (ग) तिनकों से
9. आँधी में बड़े-बड़े क्या उखड़ गए?
(क) घर
(ख) पेड़
(ग) पुल
(घ) खेत
उत्तर: (ख) पेड़
10. कविता में चिड़िया की चोंच में क्या है?
(क) फूल
(ख) दाना
(ग) तिनका
(घ) पत्ता
उत्तर: (ग) तिनका
11. चिड़िया किसका सामना करती है?
(क) वर्षा का
(ख) पवन का
(ग) धूप का
(घ) नदी का
उत्तर: (ख) पवन का
12. कविता में ‘उषा’ किसकी प्रतीक है?
(क) निराशा
(ख) आशा और नए आरंभ
(ग) विनाश
(घ) भय
उत्तर: (ख) आशा और नए आरंभ
13. ‘नेह’ का अर्थ क्या है?
(क) घृणा
(ख) प्रेम
(ग) भय
(घ) क्रोध
उत्तर: (ख) प्रेम
14. कविता में ‘नाश’ के सामने कौन-सी भावना रखी गई है?
(क) निर्माण
(ख) भय
(ग) घृणा
(घ) आलस्य
उत्तर: (क) निर्माण
15. ‘विहंगम’ शब्द का अर्थ क्या है?
(क) पर्वत
(ख) पक्षी
(ग) बादल
(घ) मनुष्य
उत्तर: (ख) पक्षी
16. ‘नवगान’ किसका प्रतीक है?
(क) नए जीवन और नई शुरुआत का
(ख) विनाश का
(ग) अंधकार का
(घ) भय का
उत्तर: (क) नए जीवन और नई शुरुआत का
17. कविता में पक्षी किस भावना का प्रतीक है?
(क) निराशा
(ख) आशा और साहस
(ग) आलस्य
(घ) भय
उत्तर: (ख) आशा और साहस
18. ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ में कौन-सा भाव प्रमुख है?
(क) निराशा
(ख) पुनर्निर्माण और आशा
(ग) क्रोध
(घ) हास्य
उत्तर: (ख) पुनर्निर्माण और आशा
19. हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध कृति कौन-सी है?
(क) मधुशाला
(ख) गोदान
(ग) कामायनी
(घ) गबन
उत्तर: (क) मधुशाला
20. कविता हमें क्या संदेश देती है?
(क) कठिनाइयों से भागना चाहिए
(ख) हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना चाहिए
(ग) कठिनाइयों के बाद भी पुनः प्रयास करना चाहिए
(घ) संघर्ष छोड़ देना चाहिए
उत्तर: (ग) कठिनाइयों के बाद भी पुनः प्रयास करना चाहिए
20 एक-पंक्ति प्रश्न-उत्तर
1. प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ के कवि कौन हैं?
उत्तर: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ के कवि हरिवंश राय बच्चन हैं।
2. प्रश्न: ‘नीड़’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘नीड़’ का अर्थ घोंसला या आश्रय है।
3. प्रश्न: ‘नेह’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘नेह’ का अर्थ प्रेम या स्नेह है।
4. प्रश्न: कविता में आँधी किसका प्रतीक है?
उत्तर: आँधी जीवन की कठिनाइयों और संकटों का प्रतीक है।
5. प्रश्न: ‘प्राची’ किस दिशा को कहते हैं?
उत्तर: प्राची पूर्व दिशा को कहते हैं।
6. प्रश्न: ‘उषा’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: उषा नई आशा और नए जीवन का प्रतीक है।
7. प्रश्न: घोंसले किससे बने थे?
उत्तर: घोंसले तिनकों से बने थे।
8. प्रश्न: चिड़िया की चोंच में क्या था?
उत्तर: चिड़िया की चोंच में एक तिनका था।
9. प्रश्न: चिड़िया तिनका लेकर क्या कर रही थी?
उत्तर: चिड़िया नया घोंसला बनाने के लिए तिनका लेकर जा रही थी।
10. प्रश्न: आँधी में पेड़ों की क्या स्थिति हुई?
उत्तर: कई पेड़ जड़ सहित उखड़कर गिर गए।
11. प्रश्न: कविता में पक्षी किसका प्रतीक है?
उत्तर: पक्षी आशा, साहस और संघर्ष का प्रतीक है।
12. प्रश्न: ‘विहंगम’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: विहंगम का अर्थ पक्षी है।
13. प्रश्न: ‘नवगान’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: नवगान का अर्थ नया गीत या नए जीवन का गीत है।
14. प्रश्न: कविता का प्रमुख संदेश क्या है?
उत्तर: कठिनाइयों के बाद भी आशा बनाए रखते हुए पुनर्निर्माण करते रहना।
15. प्रश्न: कवि ने चिड़िया को प्रेरणादायक क्यों बनाया है?
उत्तर: क्योंकि वह तूफान से बिना डरे अपना घोंसला फिर से बनाने का प्रयास करती है।
16. प्रश्न: बच्चन जी का जन्म कब हुआ?
उत्तर: बच्चन जी का जन्म 27 नवंबर 1907 को हुआ।
17. प्रश्न: बच्चन जी की प्रसिद्ध रचना कौन-सी है?
उत्तर: ‘मधुशाला’ उनकी प्रसिद्ध रचना है।
18. प्रश्न: बच्चन जी को पद्म भूषण कब मिला?
उत्तर: उन्हें 1963 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
19. प्रश्न: ‘दो चट्टानें’ को कौन-सा पुरस्कार मिला?
उत्तर: ‘दो चट्टानें’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
20. प्रश्न: हरिवंश राय बच्चन का निधन कब हुआ?
उत्तर: उनका निधन 18 जनवरी 2003 को मुंबई में हुआ।
20 दो-अंकीय प्रश्न-उत्तर
1. प्रश्न: कविता में आँधी और अंधकार का क्या महत्व है?
उत्तर: आँधी और अंधकार जीवन में आने वाली कठिनाइयों, संकटों और निराशा के प्रतीक हैं। इनके माध्यम से कवि बताता है कि कठिन समय कितना भी भयंकर हो, उसके बाद आशा और प्रकाश अवश्य आता है।
2. प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि घोंसला नष्ट हो जाने के बाद पक्षी उसे फिर से बनाता है। प्रतीक रूप में इसका अर्थ है कि मनुष्य को असफलता और विनाश के बाद भी अपना जीवन फिर से सँवारना चाहिए।
3. प्रश्न: उषा की मुस्कान किस भाव को व्यक्त करती है?
उत्तर: उषा की मुस्कान आशा, प्रकाश और नए आरंभ का भाव व्यक्त करती है। यह बताती है कि अंधकार स्थायी नहीं होता।
4. प्रश्न: चिड़िया का तिनका लेकर जाना क्या दर्शाता है?
उत्तर: यह चिड़िया के साहस, परिश्रम और पुनर्निर्माण की भावना को दर्शाता है। वह विनाश से निराश नहीं होती।
5. प्रश्न: कविता में महलों और घोंसलों की तुलना क्यों की गई है?
उत्तर: इससे यह दिखाया गया है कि शक्तिशाली दिखने वाले महल भी संकट में डगमगा सकते हैं, जबकि छोटी चिड़िया अपनी इच्छा और साहस से फिर निर्माण शुरू कर देती है।
6. प्रश्न: ‘नाश के दुःख’ और ‘निर्माण के सुख’ से कवि क्या समझाता है?
उत्तर: कवि बताता है कि विनाश दुखद होता है, लेकिन उसके बाद होने वाला पुनर्निर्माण अत्यंत सुखद और आशापूर्ण होता है।
7. प्रश्न: चिड़िया पवन को कैसे चुनौती देती है?
उत्तर: चिड़िया तेज पवन के बीच भी अपनी चोंच में तिनका लेकर घोंसला बनाने निकलती है। उसका यह प्रयास पवन की शक्ति के सामने उसके साहस को दिखाता है।
8. प्रश्न: कविता में प्रलय किसका प्रतीक है?
उत्तर: प्रलय जीवन में आने वाले अत्यंत बड़े संकट और विनाश का प्रतीक है।
9. प्रश्न: ‘नवगान’ से क्या आशय है?
उत्तर: ‘नवगान’ नए जीवन, नई सृष्टि और नए आरंभ का प्रतीक है।
10. प्रश्न: कवि के अनुसार जीवन में कठिनाइयों का क्या महत्व है?
उत्तर: कठिनाइयाँ मनुष्य को संघर्ष करना और अपनी शक्ति पहचानना सिखाती हैं। इनके बाद सफलता और पुनर्निर्माण का आनंद अधिक गहरा होता है।
11. प्रश्न: कविता में आशा का प्रतीक कौन है?
उत्तर: कविता में उषा और चिड़िया दोनों आशा के प्रतीक हैं।
12. प्रश्न: कविता में पक्षियों की पंक्ति क्यों गाती है?
उत्तर: पक्षियों का गाना यह दर्शाता है कि भयावह परिस्थितियों में भी जीवन और आशा समाप्त नहीं होती।
13. प्रश्न: ‘भीत जन-जन, भीत कण-कण’ का भाव क्या है?
उत्तर: इसका भाव है कि भयंकर आँधी और अंधकार के कारण सभी लोग और सभी प्राणी भयभीत हो गए थे।
14. प्रश्न: कविता का शीर्षक सार्थक क्यों है?
उत्तर: कविता का पूरा भाव बार-बार टूटने के बाद फिर से निर्माण करने पर आधारित है। इसलिए ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ शीर्षक पूरी तरह सार्थक है।
15. प्रश्न: बच्चन जी के साहित्य की प्रमुख विशेषता क्या है?
उत्तर: उनके साहित्य में जीवन-संघर्ष, प्रेम, आशा, निराशा और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
16. प्रश्न: ‘मधुशाला’ का बच्चन जी के साहित्य में क्या महत्व है?
उत्तर: ‘मधुशाला’ बच्चन जी की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है और इसी ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई।
17. प्रश्न: चिड़िया को साहस का प्रतीक क्यों कहा जा सकता है?
उत्तर: क्योंकि तूफान जैसी विपरीत परिस्थिति में भी वह अपना प्रयास नहीं छोड़ती और तिनका लेकर नया घोंसला बनाने निकल पड़ती है।
18. प्रश्न: कविता में अंधकार के बाद क्या आता है?
उत्तर: अंधकार के बाद उषा और प्रकाश आता है, जो आशा और नए जीवन का संकेत है।
19. प्रश्न: कविता में पुनर्निर्माण की भावना कैसे दिखाई देती है?
उत्तर: घोंसलों के नष्ट होने के बाद पक्षियों का फिर से तिनके जुटाना पुनर्निर्माण की भावना को व्यक्त करता है।
20. प्रश्न: कविता हमें कौन-सी जीवन-शिक्षा देती है?
उत्तर: कविता हमें सिखाती है कि असफलता या विनाश के बाद भी निराश नहीं होना चाहिए और साहस के साथ फिर प्रयास करना चाहिए।
20 तीन-अंकीय प्रश्न-उत्तर
1. प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ कविता का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कविता का मुख्य भाव संघर्ष और पुनर्निर्माण है। कवि बताता है कि जीवन में आँधी और प्रलय जैसी कठिन परिस्थितियाँ आती रहती हैं। इनसे हमारा निर्माण नष्ट हो सकता है, लेकिन हमें निराश होकर बैठना नहीं चाहिए। पक्षी की तरह हमें भी फिर से अपना नीड़ बनाना चाहिए। कविता आशा, साहस और निरंतर प्रयास का संदेश देती है।
2. प्रश्न: कविता में आँधी का चित्रण कैसे किया गया है?
उत्तर: कवि ने आँधी को बहुत भयंकर रूप में प्रस्तुत किया है। आँधी के कारण आकाश में अंधकार छा जाता है, पेड़ जड़ सहित उखड़ जाते हैं और घोंसले नष्ट हो जाते हैं। बड़े-बड़े पत्थरों के महल भी डगमगाने लगते हैं। यह आँधी जीवन की कठिन परिस्थितियों का प्रतीक है।
3. प्रश्न: ‘उषा की मोहिनी मुस्कान’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘उषा की मोहिनी मुस्कान’ नई सुबह और आशा का प्रतीक है। भयंकर अंधकार के बाद उषा का आना यह संदेश देता है कि संकट हमेशा नहीं रहता। कठिन समय के बाद सुख और प्रकाश का आगमन निश्चित है।
4. प्रश्न: चिड़िया का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर: चिड़िया साहसी, कर्मठ और आशावादी है। उसका घोंसला आँधी में नष्ट हो जाता है, फिर भी वह निराश नहीं होती। वह अपनी चोंच में तिनका लेकर फिर से घोंसला बनाने निकल पड़ती है। वह कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।
5. प्रश्न: कविता में ‘नीड़’ का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
उत्तर: ‘नीड़’ केवल पक्षी का घोंसला नहीं है। यह मनुष्य के जीवन, सपनों, परिवार और आश्रय का प्रतीक है। जब जीवन की परिस्थितियाँ हमारे सपनों को नष्ट कर देती हैं, तब हमें उन्हें फिर से बनाने का प्रयास करना चाहिए।
6. प्रश्न: ‘नाश के दुःख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख’ का आशय बताइए।
उत्तर: इसका आशय है कि विनाश से होने वाला दुख पुनर्निर्माण की खुशी को समाप्त नहीं कर सकता। जब कोई व्यक्ति कठिनाइयों के बाद अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित करता है, तो उसे विशेष संतोष और आनंद मिलता है।
7. प्रश्न: कविता में आशा की भावना किस प्रकार व्यक्त हुई है?
उत्तर: आशा की भावना उषा, पक्षियों के गीत और चिड़िया के तिनका लेकर जाने के माध्यम से व्यक्त हुई है। अंधकार के बाद उषा आती है और विनाश के बाद चिड़िया फिर से अपना घोंसला बनाने लगती है।
8. प्रश्न: कवि ने छोटी चिड़िया को इतना महत्व क्यों दिया है?
उत्तर: छोटी चिड़िया सीमित साधनों के बावजूद संघर्ष करती है। वह तूफान से नहीं डरती और एक तिनके से अपना घोंसला फिर बनाने निकलती है। इसलिए वह मनुष्य के साहस और आत्मविश्वास का प्रेरक प्रतीक बन जाती है।
9. प्रश्न: कविता में प्रकृति का चित्रण कीजिए।
उत्तर: कविता में आँधी, बादल, अंधकार, उषा, पवन, आकाश और पक्षियों का सुंदर चित्रण है। प्रकृति कभी विनाशकारी रूप में दिखाई देती है तो कभी आशा और नए जीवन का संदेश देती है।
10. प्रश्न: कविता का शीर्षक क्यों प्रभावशाली है?
उत्तर: शीर्षक छोटा होते हुए कविता के पूरे संदेश को अपने भीतर समेटे हुए है। ‘नीड़’ जीवन और आश्रय का प्रतीक है तथा ‘फिर-फिर’ निरंतर प्रयास का। इसलिए शीर्षक संघर्ष और पुनर्निर्माण का प्रभावशाली प्रतीक बन जाता है।
11. प्रश्न: कविता में अंधकार और प्रकाश का क्या संबंध है?
उत्तर: अंधकार कठिनाई और निराशा का प्रतीक है, जबकि प्रकाश आशा और सफलता का प्रतीक है। कवि बताता है कि अंधकार के बाद प्रकाश आता है। इसी प्रकार दुख के बाद सुख और विनाश के बाद निर्माण आता है।
12. प्रश्न: कविता में पक्षियों के गीत का क्या महत्व है?
उत्तर: पक्षियों का गीत कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन की सक्रियता और आशा को दिखाता है। घोर गर्जना के बावजूद उनका गाना यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियाँ जीवन की आशा को समाप्त नहीं कर सकतीं।
13. प्रश्न: कविता से मिलने वाली दो प्रमुख जीवन-शिक्षाएँ लिखिए।
उत्तर: पहली शिक्षा यह है कि कठिनाइयों से घबराकर प्रयास छोड़ना नहीं चाहिए। दूसरी शिक्षा यह है कि विनाश या असफलता के बाद हमें नए उत्साह के साथ पुनर्निर्माण करना चाहिए।
14. प्रश्न: बच्चन जी के साहित्यिक जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर: हरिवंश राय बच्चन हिंदी के लोकप्रिय कवि थे। उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. किया और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से शोध किया। वे अध्यापक, हिंदी विशेषज्ञ और राज्यसभा के सदस्य भी रहे। ‘मधुशाला’ सहित उनकी अनेक रचनाएँ प्रसिद्ध हैं।
15. प्रश्न: कविता में संघर्ष की भावना कैसे दिखाई देती है?
उत्तर: आँधी में घोंसले टूट जाते हैं, पेड़ उखड़ जाते हैं, लेकिन चिड़िया हार नहीं मानती। वह तिनका लेकर फिर से घोंसला बनाने निकलती है। यही निरंतर प्रयास संघर्ष की भावना को व्यक्त करता है।
16. प्रश्न: ‘पवन उनचास को नीचा दिखाती’ का भाव क्या है?
उत्तर: इसका भाव है कि छोटी-सी चिड़िया अपने साहस और प्रयास के कारण अत्यंत तेज हवा के सामने भी हार नहीं मानती। उसका आत्मविश्वास उसे शक्तिशाली बना देता है।
17. प्रश्न: कविता में विनाश और सृजन को कैसे जोड़ा गया है?
उत्तर: कवि के अनुसार विनाश के बाद सृजन की संभावना बनी रहती है। आँधी घोंसला तोड़ देती है, लेकिन चिड़िया फिर से उसे बनाती है। इसी प्रकार प्रलय के बाद नई सृष्टि का नवगान सुनाई देता है।
18. प्रश्न: कविता मनुष्य को निराशा से कैसे बचाती है?
उत्तर: कविता यह विश्वास जगाती है कि कठिन समय हमेशा नहीं रहता। उषा अंधकार को समाप्त करती है और चिड़िया पुनः घोंसला बनाती है। इससे मनुष्य को आशा और प्रयास बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
19. प्रश्न: ‘फिर-फिर’ शब्द की पुनरावृत्ति का क्या महत्व है?
उत्तर: ‘फिर-फिर’ शब्द निरंतरता और बार-बार प्रयास करने की भावना को व्यक्त करता है। यह बताता है कि जीवन में एक बार नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर बार-बार निर्माण करना चाहिए।
20. प्रश्न: कविता का जीवन-दर्शन क्या है?
उत्तर: कविता का जीवन-दर्शन आशावादी और संघर्षशील है। जीवन में विनाश, दुख और संकट आते हैं, लेकिन मनुष्य को उनसे हारना नहीं चाहिए। उसे आशा, साहस और कर्म के द्वारा जीवन का पुनर्निर्माण करते रहना चाहिए।
20 पाँच-अंकीय प्रश्न-उत्तर
1. प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ कविता का विस्तृत सारांश लिखिए।
उत्तर: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ हरिवंश राय बच्चन की प्रेरणादायक कविता है। इसमें कवि ने जीवन में आने वाली कठिनाइयों और उनसे संघर्ष करके आगे बढ़ने की भावना को व्यक्त किया है।
कविता में एक भयंकर आँधी का वर्णन किया गया है। आकाश में अंधकार छा जाता है और दिन रात जैसा दिखाई देने लगता है। पेड़ जड़ों सहित उखड़ जाते हैं और पक्षियों के तिनकों से बने घोंसले नष्ट हो जाते हैं।
ऐसा लगता है कि अब अंधकार समाप्त नहीं होगा। लेकिन थोड़ी देर बाद पूर्व दिशा से उषा मुस्कराती हुई दिखाई देती है। इससे आशा का संचार होता है।
इसके बाद कवि एक छोटी चिड़िया को देखता है, जो अपनी चोंच में एक तिनका लेकर फिर से अपना घोंसला बनाने जा रही है। उसके सामने तेज हवा है, लेकिन वह डरती नहीं है।
अंत में कवि कहता है कि विनाश का दुख निर्माण के सुख को दबा नहीं सकता। प्रलय के बाद नई सृष्टि का गीत फिर सुनाई देता है। कविता हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बाद भी हमें आशा और साहस के साथ अपने जीवन का पुनर्निर्माण करना चाहिए।
2. प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
उत्तर: कविता का शीर्षक अत्यंत सार्थक है। ‘नीड़’ का अर्थ घोंसला है, लेकिन यहाँ यह मनुष्य के जीवन, सपनों और आश्रय का प्रतीक है। आँधी में पक्षियों के घोंसले टूट जाते हैं, फिर भी वे दोबारा उन्हें बनाने लगते हैं।
‘फिर-फिर’ शब्द निरंतर प्रयास का संकेत देता है। इसका अर्थ है कि असफलता या विनाश के बाद भी प्रयास बंद नहीं करना चाहिए।
पूरी कविता में नष्ट होने के बाद पुनः निर्माण की भावना दिखाई देती है। इसलिए कविता का शीर्षक उसके मूल संदेश को पूरी तरह व्यक्त करता है।
3. प्रश्न: कविता में संघर्ष और आशा की भावना स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कविता में संघर्ष और आशा दोनों साथ-साथ चलते हैं। आँधी जीवन के संकटों का प्रतीक है। वह पेड़ों और घोंसलों को नष्ट कर देती है।
लेकिन इस विनाश के बाद उषा आती है। वह नई आशा का संदेश देती है। चिड़िया भी हार नहीं मानती और तिनका लेकर फिर से अपना नीड़ बनाने निकल पड़ती है।
इस प्रकार कवि बताता है कि संघर्ष के बीच आशा बनाए रखना ही जीवन की सफलता का आधार है।
4. प्रश्न: कविता में चिड़िया का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: चिड़िया कविता की सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक छवि है। वह छोटे साधनों के बावजूद बड़े साहस का परिचय देती है।
उसका घोंसला नष्ट हो गया है, लेकिन वह निराश नहीं होती। वह एक तिनका लेकर फिर निर्माण के लिए निकलती है।
चिड़िया मनुष्य को सिखाती है कि साधन कम होने पर भी इच्छाशक्ति मजबूत होनी चाहिए। इसलिए वह आशा, साहस, कर्म और पुनर्निर्माण की प्रतीक है।
5. प्रश्न: ‘नाश के दुःख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख’ पंक्ति का विस्तृत भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने जीवन के सकारात्मक पक्ष को सामने रखा है। विनाश हमेशा दुखद होता है। जब हमारा घर, सपना या कोई उपलब्धि नष्ट होती है, तो हमें दुख होता है।
लेकिन यदि हम उस दुख में डूबे न रहकर फिर से निर्माण शुरू करते हैं, तो निर्माण का आनंद बहुत अधिक होता है। नई उपलब्धि हमें आत्मविश्वास देती है।
इसलिए कवि कहता है कि नाश का दुख निर्माण के सुख को दबा नहीं सकता। मनुष्य को विनाश के बाद सृजन की ओर बढ़ना चाहिए।
6. प्रश्न: कविता में प्रकृति के विनाशकारी और रचनात्मक दोनों रूपों को समझाइए।
उत्तर: कविता में प्रकृति का एक रूप विनाशकारी है। आँधी, अंधकार और तेज पवन पेड़ों और पक्षियों के घोंसलों को नष्ट कर देते हैं।
दूसरी ओर प्रकृति का रचनात्मक रूप उषा के रूप में सामने आता है। अंधकार के बाद सुबह होती है और नई आशा का जन्म होता है।
इस प्रकार प्रकृति कभी विनाश करती है तो उसी विनाश के बाद नए निर्माण की संभावना भी पैदा करती है।
7. प्रश्न: कविता मनुष्य को कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा कैसे देती है?
उत्तर: कविता में चिड़िया का उदाहरण मनुष्य को संघर्ष की प्रेरणा देता है। उसका घोंसला टूट जाता है, लेकिन वह निराश नहीं होती।
वह अपनी चोंच में एक तिनका लेकर फिर से अपना घर बनाने लगती है। इसी प्रकार मनुष्य को भी असफलता के बाद प्रयास जारी रखना चाहिए।
कवि का संदेश है कि कठिनाइयाँ हमें रोकने के लिए नहीं, बल्कि हमारी शक्ति को पहचानने के लिए आती हैं।
8. प्रश्न: हरिवंश राय बच्चन का साहित्यिक परिचय दीजिए।
उत्तर: हरिवंश राय बच्चन हिंदी के लोकप्रिय और संवेदनशील कवि थे। उनका जन्म 27 नवंबर 1907 को बाबूपट्टी में हुआ था।
उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. किया और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में शोध करके पीएच.डी. की।
उनकी प्रसिद्ध रचना ‘मधुशाला’ है। वे अध्यापक, हिंदी विशेषज्ञ और राज्यसभा के सदस्य भी रहे। ‘दो चट्टानें’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला और भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।
उनका निधन 18 जनवरी 2003 को हुआ।
9. प्रश्न: कविता का संदेश वर्तमान जीवन में किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर: आज के जीवन में भी असफलता, आर्थिक परेशानी, परीक्षा का तनाव, नौकरी की समस्या और अन्य कठिनाइयाँ आती रहती हैं।
कविता हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों से डरकर बैठना नहीं चाहिए। हमें चिड़िया की तरह छोटे-छोटे प्रयास करते हुए अपना जीवन फिर से व्यवस्थित करना चाहिए।
इसलिए कविता का संदेश आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है।
10. प्रश्न: कविता में अंधकार और उषा के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर: अंधकार निराशा और संकट का प्रतीक है। उषा आशा और नए जीवन का प्रतीक है।
कवि दिखाता है कि भयंकर रात के बाद सुबह अवश्य आती है। इसी प्रकार जीवन में दुख और संकट स्थायी नहीं होते।
इसलिए हमें कठिन समय में धैर्य रखना चाहिए और भविष्य के प्रति आशावादी रहना चाहिए।
11. प्रश्न: ‘फिर-फिर’ की पुनरावृत्ति कविता के भाव को कैसे प्रभावशाली बनाती है?
उत्तर: ‘फिर-फिर’ शब्द कविता में निरंतर प्रयास की भावना को मजबूत करता है। यह बताता है कि एक बार प्रयास करना पर्याप्त नहीं है।
यदि घोंसला टूट जाए तो उसे फिर बनाना चाहिए। यदि जीवन में असफलता आए तो फिर प्रयास करना चाहिए।
इस पुनरावृत्ति से कविता का प्रेरणादायक संदेश अधिक प्रभावशाली हो जाता है।
12. प्रश्न: ‘नीड़’ और ‘चिड़िया’ के माध्यम से कवि ने मनुष्य को क्या शिक्षा दी है?
उत्तर: ‘नीड़’ मनुष्य के जीवन और सपनों का प्रतीक है तथा चिड़िया संघर्षशील मनुष्य की प्रतीक है।
जब जीवन की परिस्थितियाँ हमारे सपनों को नष्ट कर दें, तब हमें चिड़िया की तरह फिर से उन्हें बनाने का प्रयास करना चाहिए।
कवि हमें धैर्य, आत्मविश्वास, परिश्रम और आशा का संदेश देता है।
13. प्रश्न: कविता में विनाश के बाद सृजन की प्रक्रिया स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पहले आँधी आती है और घोंसले नष्ट हो जाते हैं। पेड़ गिरते हैं और वातावरण अंधकारमय हो जाता है।
इसके बाद उषा का आगमन होता है और आशा पैदा होती है। चिड़िया तिनका लेकर फिर से अपना घोंसला बनाने निकलती है।
इस प्रकार विनाश के बाद पुनर्निर्माण और प्रलय के बाद नई सृष्टि का आरंभ होता है।
14. प्रश्न: कविता का मूल स्वर आशावादी क्यों है?
उत्तर: कविता में भयंकर आँधी और विनाश का वर्णन होने के बावजूद कवि निराशा पर समाप्त नहीं करता। वह उषा की मुस्कान, पक्षियों के गीत और चिड़िया के प्रयास को सामने रखता है।
अंत में वह नए निर्माण और नवगान की बात करता है। इसलिए कविता का मूल स्वर पूरी तरह आशावादी है।
15. प्रश्न: कविता में ‘प्रलय’ और ‘नवगान’ का संबंध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: प्रलय विनाश का प्रतीक है जबकि नवगान नए जीवन और सृजन का प्रतीक है। कवि के अनुसार प्रलय अंतिम अवस्था नहीं है।
विनाश के बाद नई सृष्टि होती है और उसके साथ नया जीवन शुरू होता है। इसलिए प्रलय और नवगान जीवन के दो क्रमिक चरण हैं।
16. प्रश्न: कविता में प्रेम और निर्माण का क्या संबंध है?
उत्तर: कविता के refrain में ‘नीड़ का निर्माण’ और ‘नेह का आह्वान’ साथ-साथ आते हैं। इसका अर्थ है कि निर्माण केवल भौतिक कार्य नहीं है, उसमें प्रेम और लगाव भी आवश्यक है।
पक्षी अपने घोंसले को केवल तिनकों से नहीं, बल्कि अपने प्रेम और आशा से भी बनाता है।
17. प्रश्न: कविता में महल और घोंसले की तुलना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: महल मजबूत और विशाल दिखाई देता है, फिर भी आँधी में वह डगमगा जाता है। दूसरी ओर तिनकों का छोटा-सा घोंसला नष्ट होने के बाद भी पक्षी उसे फिर से बना लेता है।
इस तुलना के माध्यम से कवि बाहरी शक्ति की अपेक्षा आंतरिक साहस और इच्छाशक्ति को अधिक महत्वपूर्ण बताता है।
18. प्रश्न: कविता में प्रकृति के माध्यम से जीवन का कौन-सा सत्य बताया गया है?
उत्तर: प्रकृति बताती है कि कोई भी अवस्था स्थायी नहीं होती। रात के बाद सुबह आती है और विनाश के बाद नया निर्माण होता है।
इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में दुख के बाद सुख और असफलता के बाद सफलता आ सकती है।
19. प्रश्न: कविता के अनुसार असफलता के बाद मनुष्य को क्या करना चाहिए?
उत्तर: मनुष्य को असफलता के कारण निराश नहीं होना चाहिए। उसे अपनी गलतियों से सीखकर फिर से प्रयास करना चाहिए।
उसे चिड़िया की तरह अपने जीवन का ‘नीड़’ फिर से बनाना चाहिए। यही कविता का प्रमुख संदेश है।
20. प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ को प्रेरणादायक कविता क्यों कहा जाता है?
उत्तर: यह कविता मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। आँधी में घोंसला नष्ट होने के बावजूद चिड़िया फिर से निर्माण शुरू करती है।
उषा अंधकार के बाद आशा का संदेश देती है और पक्षियों का गीत जीवन की सक्रियता दिखाता है। इसलिए यह कविता निराशा से निकालकर आशा, साहस और कर्म की ओर ले जाती है।
20 व्याख्या-मूलक प्रश्न-उत्तर
1. प्रश्न: “नीड़ का निर्माण फिर-फिर / नेह का आह्वान फिर-फिर” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कवि कहता है कि जीवन में बार-बार आने वाली कठिनाइयों के बावजूद हमें अपना जीवन फिर से बनाते रहना चाहिए। ‘नीड़’ घोंसले के साथ-साथ जीवन और आश्रय का प्रतीक है। ‘नेह’ प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। इसलिए इन पंक्तियों में निरंतर निर्माण और प्रेम की भावना व्यक्त हुई है।
2. प्रश्न: “रात-सा दिन हो गया” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भयंकर आँधी के कारण धूल और बादलों ने पूरे वातावरण को ढक लिया था। दिन के समय भी इतना अंधकार छा गया था कि ऐसा लग रहा था जैसे रात हो गई हो। यह जीवन में छाए संकट और निराशा का प्रतीक भी है।
3. प्रश्न: “लग रहा था अब न होगा / इस निशा का फिर सवेरा” का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भयंकर अंधकार देखकर ऐसा लग रहा था कि अब यह रात कभी समाप्त नहीं होगी और सुबह नहीं आएगी। प्रतीकात्मक रूप से यह मनुष्य की उस मानसिक स्थिति को दर्शाता है जिसमें कठिनाइयों के समय भविष्य निराशाजनक दिखाई देता है।
4. प्रश्न: “किन्तु प्राची से उषा की / मोहिनी मुस्कान फिर-फिर” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भयंकर अंधकार के बाद पूर्व दिशा से सुबह की किरणें दिखाई देती हैं। उषा की मुस्कान नई आशा और प्रकाश का प्रतीक है। कवि बताता है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, उसके बाद आशा का जन्म अवश्य होता है।
5. प्रश्न: “हाय तिनकों से विनिर्मित / घोंसलों पर क्या न बीती” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: आँधी इतनी भयंकर थी कि तिनकों से बने पक्षियों के छोटे-छोटे घोंसले बुरी तरह नष्ट हो गए। कवि उनके प्रति सहानुभूति व्यक्त करता है। इन घोंसलों के माध्यम से वह मनुष्य के कमजोर और अस्थायी जीवन-निर्माण का भी संकेत देता है।
6. प्रश्न: “डगमगाये जबकि कंकड़ ईट पत्थर के महल पर” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: आँधी की शक्ति इतनी अधिक थी कि मजबूत ईंट-पत्थर से बने महल भी डगमगाने लगे। कवि इससे बताता है कि बाहरी मजबूती हमेशा संकट से रक्षा नहीं कर सकती। वास्तविक शक्ति मनुष्य के साहस और इच्छाशक्ति में होती है।
7. प्रश्न: “बोल, आशा के विहंगम किस जगह पर तू छिपा था” का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कवि आशा के पक्षी से पूछता है कि इतनी भयंकर आँधी के समय वह कहाँ छिपा था। यह वास्तव में आशा के जीवित रहने का प्रतीकात्मक प्रश्न है। कवि बताता है कि कठिन समय में भी आशा कहीं न कहीं जीवित रहती है।
8. प्रश्न: “जो गगन पर चढ़ उठाता गर्व से निज वक्ष फिर-फिर” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: आशा का पक्षी कठिन परिस्थितियों के बाद फिर आकाश में उड़ता है। वह गर्व और आत्मविश्वास से अपना सीना तानता है। यह मनुष्य के संघर्ष के बाद पुनः आत्मविश्वास प्राप्त करने का प्रतीक है।
9. प्रश्न: “क्रुद्ध नभ के वज्र दन्तों में उषा है मुस्कराती” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: आकाश भयंकर और क्रोधित दिखाई दे रहा है। बादल गरज रहे हैं और वातावरण डरावना है। फिर भी उसी वातावरण में उषा मुस्करा रही है। इसका अर्थ है कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी आशा समाप्त नहीं होती।
10. प्रश्न: “घोर गर्जनमय गगन के कंठ में खग पंक्ति गाती” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: आकाश में बादलों की भयंकर गर्जना हो रही है, फिर भी पक्षियों की पंक्ति गीत गा रही है। यह बताता है कि बाहरी कठिनाइयाँ जीवन की आंतरिक प्रसन्नता और आशा को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकतीं।
11. प्रश्न: “एक चिड़िया चोंच में तिनका लिये जो जा रही है” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: एक छोटी-सी चिड़िया अपनी चोंच में तिनका लेकर जा रही है। वह आँधी से नष्ट हुए अपने घोंसले को फिर से बनाने का प्रयास कर रही है। यह परिश्रम, आशा और पुनर्निर्माण की भावना का प्रतीक है।
12. प्रश्न: “वह सहज में ही पवन उनचास को नीचा दिखाती” का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: चिड़िया छोटी और कमजोर दिखाई देती है, जबकि पवन बहुत शक्तिशाली है। फिर भी चिड़िया डरती नहीं है और अपना काम करती रहती है। उसका साहस और आत्मविश्वास उसे शक्तिशाली हवा से भी ऊपर उठा देता है।
13. प्रश्न: “नाश के दुःख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: विनाश से मनुष्य को दुख होता है, लेकिन पुनर्निर्माण का आनंद उस दुख को पीछे छोड़ देता है। यदि कोई व्यक्ति टूटने के बाद फिर से अपने जीवन को बनाता है, तो उसे अपने प्रयास पर विशेष गर्व और संतोष होता है।
14. प्रश्न: “प्रलय की निस्तब्धता से सृष्टि का नवगान फिर-फिर” का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: प्रलय के बाद कुछ समय के लिए शांति और निस्तब्धता होती है। उसके बाद नई सृष्टि का आरंभ होता है और जीवन का नया गीत सुनाई देता है। इसका अर्थ है कि विनाश के बाद भी सृजन की प्रक्रिया जारी रहती है।
15. प्रश्न: “नीड़ का निर्माण फिर-फिर” में ‘फिर-फिर’ का महत्व समझाइए।
उत्तर: ‘फिर-फिर’ शब्द बार-बार प्रयास करने और निरंतर निर्माण करने की भावना को व्यक्त करता है। कवि बताता है कि एक बार असफल होने से जीवन समाप्त नहीं हो जाता। आवश्यकता पड़ने पर हमें बार-बार प्रयास करना चाहिए।
16. प्रश्न: “नेह का आह्वान फिर-फिर” का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘नेह’ का अर्थ प्रेम है। कवि कहता है कि विनाश के बाद भी प्रेम और अपनापन समाप्त नहीं होना चाहिए। प्रेम ही मनुष्य को फिर से निर्माण करने और जीवन को सँवारने की शक्ति देता है।
17. प्रश्न: “भीत जन-जन, भीत कण-कण” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: आँधी और अंधकार का वातावरण इतना भयंकर था कि सभी लोग और सभी प्राणी भयभीत हो गए थे। ‘भीत’ शब्द भय की स्थिति को व्यक्त करता है। इससे आँधी की भयंकरता स्पष्ट होती है।
18. प्रश्न: “रात के उत्पात भय से” का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भयंकर रात और आँधी के कारण चारों ओर भय का वातावरण उत्पन्न हो गया था। लोगों को लग रहा था कि यह संकट बहुत लंबे समय तक चलेगा। यह पंक्ति कठिन समय की मानसिक बेचैनी को व्यक्त करती है।
19. प्रश्न: “नाश के दुःख” और “निर्माण के सुख” में क्या अंतर है?
उत्तर: नाश मनुष्य को दुख, निराशा और हानि देता है, जबकि निर्माण आशा, संतोष और आत्मविश्वास देता है। कवि निर्माण के सुख को अधिक महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि वह मनुष्य को आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
20. प्रश्न: “नीड़ का निर्माण फिर-फिर” कविता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है?
उत्तर: कविता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है कि मनुष्य को कठिनाइयों और विनाश से हार नहीं माननी चाहिए। उसे चिड़िया की तरह बार-बार प्रयास करके अपना जीवन और सपने फिर से बनाने चाहिए। आशा, साहस और निरंतर कर्म ही जीवन की सफलता का आधार हैं।
परीक्षा के लिए 10 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न
1. प्रश्न: ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर:
‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ हरिवंश राय बच्चन की एक प्रेरणादायक कविता है। इसमें कवि ने जीवन के संघर्ष, आशा और पुनर्निर्माण की भावना को व्यक्त किया है। कविता में भयंकर आँधी के कारण चारों ओर अंधकार छा जाता है। तेज हवाओं से बड़े-बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं और पक्षियों के तिनकों से बने घोंसले भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि अब इस अंधकार का अंत नहीं होगा।
लेकिन कुछ समय बाद पूर्व दिशा से उषा की किरणें दिखाई देती हैं। इससे नई आशा का जन्म होता है। इसी बीच एक छोटी-सी चिड़िया अपनी चोंच में तिनका लेकर फिर से अपना घोंसला बनाने के लिए निकल पड़ती है। वह तेज पवन से डरती नहीं है।
कवि के अनुसार विनाश के बाद निर्माण अवश्य होता है। इसी प्रकार जीवन में दुख और असफलता के बाद मनुष्य को फिर से प्रयास करना चाहिए। कविता हमें आशा, साहस, परिश्रम और निरंतर संघर्ष करते रहने की प्रेरणा देती है।
2. प्रश्न: कविता के शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ शीर्षक कविता के भाव के बिल्कुल अनुरूप है। ‘नीड़’ का सामान्य अर्थ पक्षी का घोंसला है, लेकिन कविता में यह मनुष्य के जीवन, घर, सपनों और आशाओं का प्रतीक भी है।
आँधी में पक्षियों के घोंसले नष्ट हो जाते हैं, फिर भी पक्षी निराश नहीं होते। वे दोबारा तिनके जुटाकर अपना घोंसला बनाने लगते हैं। इसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन में आने वाली असफलताओं और कठिनाइयों के बाद फिर से अपने जीवन का निर्माण करना चाहिए।
‘फिर-फिर’ शब्द निरंतर प्रयास और पुनर्निर्माण की भावना को व्यक्त करता है। इसलिए कविता का शीर्षक अत्यंत सार्थक और प्रभावशाली है।
3. प्रश्न: कविता में चिड़िया का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कविता में चिड़िया संघर्षशील और आशावादी मनुष्य का प्रतीक है। आँधी के कारण उसका घोंसला नष्ट हो जाता है, लेकिन वह निराश होकर बैठ नहीं जाती। वह अपनी चोंच में एक तिनका लेकर फिर से घोंसला बनाने निकल पड़ती है।
चिड़िया के इस छोटे-से प्रयास में बहुत बड़ा जीवन-संदेश छिपा है। वह बताती है कि साधन कम होने पर भी मनुष्य को अपनी कोशिश नहीं छोड़नी चाहिए। तेज पवन के सामने भी उसका साहस कम नहीं होता।
इस प्रकार चिड़िया आशा, साहस, आत्मविश्वास, परिश्रम और पुनर्निर्माण की प्रतीक है।
4. प्रश्न: ‘नाश के दुःख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख’ क
कविता से मिलने वाली प्रमुख जीवन-शिक्षाएँ
- कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए।
- असफलता के बाद फिर प्रयास करना चाहिए।
- आशा कभी नहीं छोड़नी चाहिए।
- सीमित साधनों में भी मेहनत की जा सकती है।
- आत्मविश्वास सफलता का आधार है।
- विनाश के बाद पुनर्निर्माण संभव है।
- संकट मनुष्य की शक्ति की परीक्षा लेते हैं।
- सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए।
- जीवन में निरंतर कर्म करते रहना चाहिए।
- दुख के बाद सुख आने की संभावना हमेशा रहती है।
निष्कर्ष
हरिवंश राय बच्चन की ‘नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ एक अत्यंत प्रेरणादायक कविता है। इसमें आँधी और विनाश के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों को दिखाया गया है, जबकि उषा और चिड़िया के माध्यम से आशा, साहस और पुनर्निर्माण का संदेश दिया गया है।
कविता हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी समस्या क्यों न आए, हमें निराश होकर बैठना नहीं चाहिए। यदि हमारा नीड़ टूट जाए, तो हमें उसे “फिर-फिर” बनाना चाहिए।
यही इस कविता का सबसे महत्वपूर्ण जीवन-संदेश है—
विनाश के बाद निर्माण, अंधकार के बाद प्रकाश और निराशा के बाद आशा निश्चित रूप से आती है।
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