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Toggleसजीवों में नियंत्रण व समन्वय chapter-1/part-2
अभ्यास प्रश्न एवं Board Ready Answers
A. सही विकल्प का चयन कीजिए
[1 अंक]
प्रश्न 1. शरीर में समन्वय करने का कार्य करता है—
(a) परिवहन तंत्र
(b) तंत्रिका तंत्र
(c) अंतःस्रावी तंत्र
(d) (b) और (c) दोनों
उत्तर: (d) तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र दोनों।
प्रश्न 2. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के भाग हैं—
(a) मस्तिष्क और कपाल तंत्रिकाएँ
(b) मस्तिष्क और मेरुरज्जु
(c) मेरुतंत्रिका और क्रेनियल तंत्रिका
(d) मेरुरज्जु और मेरुतंत्रिका
उत्तर: (b) मस्तिष्क और मेरुरज्जु।
प्रश्न 3. मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है—
(a) सेरिबेलम
(b) सेरिब्रम
(c) थैलेमस
(d) मेडुला
उत्तर: (b) सेरिब्रम।
प्रश्न 4. मनुष्य में कॉर्पस कैलोसम जोड़ता है—
उत्तर: मस्तिष्क के दोनों सेरेब्रल गोलार्द्धों को।
प्रश्न 5. मनुष्य में क्रेनियल तंत्रिकाओं की संख्या है—
(a) 10 जोड़ियाँ
(b) 12 जोड़ियाँ
(c) 24 जोड़ियाँ
(d) 31 जोड़ियाँ
उत्तर: (b) 12 जोड़ियाँ।
प्रश्न 6. मनुष्य में मेरुतंत्रिकाओं की संख्या है—
(a) 31 जोड़ियाँ
(b) 33 जोड़ियाँ
(c) 24 जोड़ियाँ
(d) 12 जोड़ियाँ
उत्तर: (a) 31 जोड़ियाँ।
प्रश्न 7. एसिटिलकोलीन है—
(a) एन्जाइम
(b) विटामिन
(c) न्यूरोट्रांसमीटर
(d) न्यूरोहॉर्मोन
उत्तर: (c) न्यूरोट्रांसमीटर।
प्रश्न 8. निम्नलिखित में से कौन रासायनिक दूत है?
उत्तर: हार्मोन।
प्रश्न 9. निम्नलिखित में से कौन अंतःस्रावी ग्रंथि नहीं है?
(a) पीयूष
(b) अग्न्याशय
(c) थायराइड
(d) अधिवृक्क
उत्तर: (b) अग्न्याशय।
नोट: अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रंथि है।
प्रश्न 10. डायबिटिज इन्सिपिडस किस हार्मोन की कमी से होता है?
(a) ऑक्सीटोसिन
(b) वैसोप्रेसिन
(c) इंसुलिन
(d) थायरॉक्सिन
उत्तर: (b) वैसोप्रेसिन/ADH।
प्रश्न 11. वृक्क में जल के पुनः अवशोषण का नियंत्रण किसके अधीन है?
(a) LH
(b) ADH
(c) TSH
(d) ACTH
उत्तर: (b) ADH।
प्रश्न 12. एड्रिनेलिन स्रावित होता है—
(a) एड्रिनल कॉर्टेक्स से
(b) एड्रिनल मेड्यूला से
(c) पीयूष ग्रंथि से
(d) थायराइड से
उत्तर: (b) एड्रिनल मेड्यूला से।
प्रश्न 13. मनुष्य में संकट/आपातकालीन परिस्थितियों से संबंधित ग्रंथि है—
उत्तर: अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland)।
प्रश्न 14. अग्न्याशय स्रावित करता है—
(a) इंसुलिन
(b) ग्लूकागॉन
(c) सेक्रेटिन
(d) (a) और (b) दोनों
उत्तर: (d) इंसुलिन और ग्लूकागॉन दोनों।
प्रश्न 15. डायबिटिज मेलिटस किस हार्मोन की कमी से होता है?
(a) ऑक्सिन
(b) इंसुलिन
(c) जिबरेलिन
(d) थायरॉक्सिन
उत्तर: (b) इंसुलिन।
प्रश्न 16. निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हार्मोन है?
(a) ऑक्सिन
(b) जिबरेलिन
(c) दोनों
(d) इंसुलिन
उत्तर: (c) ऑक्सिन और जिबरेलिन दोनों।
प्रश्न 17. पौधे का कौन-सा भाग ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन प्रदर्शित करता है?
उत्तर: तना।
प्रश्न 18. दो न्यूरॉनों के बीच के रिक्त स्थान को कहते हैं—
(a) डेंड्राइट
(b) सिनेप्स
(c) एक्सॉन
(d) न्यूरिलेमा
उत्तर: (b) सिनेप्स।
प्रश्न 19. निम्नलिखित में से कौन एक पादप हार्मोन है?
(a) इंसुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) ऑक्सिन
(d) ADH
उत्तर: (c) ऑक्सिन।
प्रश्न 20. मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर का संतुलन ठीक रखने में सहायता करता है?
(a) सेरिब्रम
(b) सेरिबेलम
(c) थैलेमस
(d) हाइपोथैलेमस
उत्तर: (b) सेरिबेलम।
प्रश्न 21. कुछ फूल सूर्योदय के बाद खिलते हैं और सूर्यास्त के बाद बंद हो जाते हैं। यह है—
(a) फोटोनैस्टी
(b) सिस्मोनैस्टी
(c) केमोनैस्टी
(d) थर्मोनैस्टी
उत्तर: (a) फोटोनैस्टी।
प्रश्न 22. सनड्यू पौधे की पत्ती के रोम कीट के संपर्क में आते ही मुड़कर कीट को पकड़ लेते हैं। यह है—
उत्तर: सिस्मोनैस्टी।
प्रश्न 23. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ट्रॉपिक गति से संबंधित है?
उत्तर: ट्रॉपिक गति उद्दीपन की दिशा द्वारा नियंत्रित प्रेरित वक्रता गति है।
प्रश्न 24. ट्रॉपिक गति का लक्षण निम्न में से कौन-सा है?
(a) उद्दीपन की दिशा से पौधे के निर्दिष्ट भाग में प्रेरित वक्रता गति
(b) स्फीत गति
(c) केवल उद्दीपन की तीव्रता से नियंत्रित गति
(d) ऑक्सिन के प्रभाव में नहीं होती
उत्तर: (a)।
प्रश्न 25. डायबिटिज मेलिटस से पीड़ित व्यक्ति किस हार्मोन का उचित मात्रा में स्राव करने में असमर्थ होता है?
(a) एड्रिनेलिन
(b) इंसुलिन
(c) थायरॉक्सिन
(d) टेस्टोस्टेरॉन
उत्तर: (b) इंसुलिन।
प्रश्न 26. महिलाओं में FSH अंडाशय के फॉलिकल को विकसित करके किस हार्मोन के स्राव को बढ़ाता है?
(a) TSH
(b) ADH
(c) एस्ट्रोजन
(d) ACTH
उत्तर: (c) एस्ट्रोजन।
प्रश्न 27. निम्न कथनों में असत्य कथन चुनिए—
(a) FSH, LH तथा प्रोलैक्टिन GTH के विभिन्न प्रकार हैं।
(b) एड्रिनेलिन हृदय के आउटपुट को घटाता है।
(c) इंसुलिन रक्त ग्लूकोज के नियंत्रण में सहायता करता है।
(d) प्रोजेस्ट्रॉन प्रजनन संबंधी क्रियाओं में महत्वपूर्ण है।
उत्तर: (b) एड्रिनेलिन हृदय के आउटपुट को घटाता है।
एड्रिनेलिन सामान्यतः हृदय की गति और हृदय के आउटपुट को बढ़ाता है।
प्रश्न 28. इंसुलिन के बारे में गलत कथन है—
(a) रक्त से ग्लूकोज को कोशिकाओं में लेने में सहायता करता है।
(b) यकृत तथा पेशी कोशिकाओं में ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में बदलने में सहायता करता है।
(c) ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है।
(d) वसा तथा प्रोटीन को ग्लूकोज में परिवर्तन करने में सहायक है।
उत्तर: (d)।
प्रश्न 29. एड्रिनेलिन संबंधी कौन-सा कथन असत्य है?
(a) हृदय की गति बढ़ाता है।
(b) किशोरावस्था में शुक्राणु उत्पादन में सहायक है।
(c) हृदय के आउटपुट में वृद्धि करता है।
(d) सिस्टोलिक रक्तचाप में वृद्धि करता है।
उत्तर: (b)।
प्रश्न 30. शरीर का तापक्रम नियंत्रित करने से संबंधित मस्तिष्क का भाग है—
(a) थैलेमस
(b) सेरिबेलम
(c) हाइपोथैलेमस
(d) मेडुला ऑब्लोंगाटा
उत्तर: (c) हाइपोथैलेमस।
प्रश्न 31. इनमें से प्रतिवर्ती चाप का सही क्रम है—
(a) ग्राही → प्रभावी अंग → चालक तंत्रिका → तंत्रिका केंद्र → संवेदी तंत्रिका
(b) तंत्रिका केंद्र → ग्राही → संवेदी तंत्रिका → प्रभावी अंग → चालक तंत्रिका
(c) चालक तंत्रिका → ग्राही → संवेदी तंत्रिका → तंत्रिका केंद्र → प्रभावी अंग
(d) ग्राही → संवेदी तंत्रिका → तंत्रिका केंद्र → चालक तंत्रिका → प्रभावी अंग
उत्तर: (d)।
प्रश्न 32. मनुष्य के शरीर में क्रेनियल तंत्रिकाओं की संख्या है—
उत्तर: 12 जोड़ियाँ।
प्रश्न 33. सही जोड़ी चुनिए—
(a) सेरिब्रम — शारीरिक संतुलन
(b) हाइपोथैलेमस — बुद्धिमता का नियंत्रण
(c) सेरिबेलम — शारीरिक संतुलन
(d) मेडुला — केवल स्मृति का नियंत्रण
उत्तर: (c) सेरिबेलम — शारीरिक संतुलन।
प्रश्न 34. स्तंभ A और B का सही मिलान कीजिए—
A. CSF
B. मेनिन्जेज
C. न्यूरोग्लिया
(i) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को आघात से बचाता है।
(ii) मायलिन शीथ के गठन में सहायक है।
(iii) आघात अवशोषक का कार्य करता है।
उत्तर: A-(iii), B-(i), C-(ii)।
प्रश्न 35. सही क्रम है—
(a) संवेदी अंग → कार्यवाही अंग → संवेदी तंत्रिका → चालक तंत्रिका → तंत्रिका केंद्र
(b) संवेदी अंग → तंत्रिका केंद्र → चालक तंत्रिका → संवेदी तंत्रिका → कार्यकारी अंग
(c) संवेदी अंग → संवेदी तंत्रिका → तंत्रिका केंद्र → चालक तंत्रिका → कार्यकारी अंग
(d) संवेदी अंग → चालक तंत्रिका → कार्यकारी अंग → संवेदी तंत्रिका → तंत्रिका केंद्र
उत्तर: (c)।
प्रश्न 36. सही जोड़ी चुनिए—
(a) स्केलेरा — अतिरिक्त प्रकाश का अवशोषण
(b) कोरॉयड — नेत्रगोलक को निश्चित आकृति प्रदान करता है
(c) लेंस — प्रकाश का अपवर्तन तथा समायोजन
(d) रेटिना — लेंस को सस्पेंसरी लिगामेंट से पकड़े रखना
उत्तर: (c) लेंस — प्रकाश का अपवर्तन तथा समायोजन।
प्रश्न 37. स्तंभ A और B का सही मिलान कीजिए—
A. फ्लेक्शन
B. एक्सटेंशन
C. रोटेशन
(i) क्वाड्रिसेप्स
(ii) पिरिफॉर्मिस
(iii) बाइसेप्स
उत्तर: A-(iii), B-(i), C-(ii)।
B. अति संक्षिप्त उत्तरवाले प्रश्न
[1 अंक]
प्रश्न 1. मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करने वाली झिल्ली का नाम लिखिए।
उत्तर: मेनिन्जेज।
प्रश्न 2. मस्तिष्क में उपस्थित द्रव का नाम बताइए।
उत्तर: सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (CSF)।
प्रश्न 3. अनुचलन गति की इकाई क्या है?
उत्तर: पूरे जीव या उसकी गति करने वाली इकाई/अंग के संदर्भ में अनुचलन गति उद्दीपन के प्रति दिशा-विशिष्ट गति है।
प्रश्न 4. एक्सॉन के अंतिम छोर पर उपस्थित एक न्यूरोट्रांसमीटर का नाम बताइए।
उत्तर: एसिटिलकोलीन।
प्रश्न 5. आँसू में उपस्थित एक एन्जाइम का नाम बताइए।
उत्तर: लाइसोजाइम।
प्रश्न 6. हाइपोथैलेमस का एक प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर: यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
प्रश्न 7. आंतरिक कर्ण में उपस्थित ग्राही का नाम बताइए।
उत्तर: श्रवण तथा संतुलन से संबंधित ग्राही।
प्रश्न 8. स्वाद को महसूस करने वाली क्रेनियल तंत्रिका का नाम बताइए।
उत्तर: ग्लॉसोफैरिंजियल तंत्रिका।
प्रश्न 9. आँख में होने वाले एक रोग का नाम बताइए।
उत्तर: मायोपिया।
प्रश्न 10. अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं से उत्पन्न हार्मोन का नाम बताइए।
उत्तर: इंसुलिन।
प्रश्न 11. थायरॉक्सिन हार्मोन किस ग्रंथि से उत्पन्न होता है?
उत्तर: थायराइड ग्रंथि।
प्रश्न 12. वृक्क के शीर्ष पर उपस्थित अंतःस्रावी ग्रंथि का नाम बताइए।
उत्तर: अधिवृक्क ग्रंथि।
प्रश्न 13. किस अंतःस्रावी ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि कहा जाता है?
उत्तर: पीयूष ग्रंथि।
प्रश्न 14. हार्मोन उत्पन्न करने वाली ग्रंथियाँ कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर: मुख्यतः अंतःस्रावी, बहिःस्रावी और मिश्रित ग्रंथियाँ बताई जाती हैं।
प्रश्न 15. एक पादप हार्मोन का नाम बताइए जो पौधों की वृद्धि में सहायक है।
उत्तर: ऑक्सिन।
प्रश्न 16. मनुष्य में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के लिए कौन-सा हार्मोन उत्तरदायी है?
उत्तर: पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन तथा महिलाओं में एस्ट्रोजन।
प्रश्न 17. नाक में उपस्थित संवेदी ग्राही का नाम बताइए।
उत्तर: घ्राण ग्राही।
प्रश्न 18. मनुष्य में वृद्धि हार्मोन किस ग्रंथि से स्रावित होता है?
उत्तर: पीयूष ग्रंथि के अग्र पिंड से।
प्रश्न 19. कौन-सी अंतःस्रावी ग्रंथि पुरुषों में उपस्थित है, लेकिन महिलाओं में अनुपस्थित है?
उत्तर: वृषण।
प्रश्न 20. असदृश चुनिए— TSH, ACTH, GTH, CSF
उत्तर: CSF — यह द्रव है, जबकि बाकी हार्मोन/हार्मोन समूह हैं।
प्रश्न 21. बेमेल चुनिए— बौनापन, अंधता, थैलेसीमिया, डायबिटिज मेलिटस
उत्तर: थैलेसीमिया।
प्रश्न 22. हार्मोन का कार्य पूरा हो जाने के बाद शरीर में उसकी क्या परिणति होती है?
उत्तर: हार्मोन निष्क्रिय होकर टूट जाते हैं तथा शरीर से बाहर निकाल दिए जाते हैं।
प्रश्न 23. निम्न में से बेमेल चुनिए— बेसल चयापचय दर, थायरॉक्सिन, लाल रक्त कोशिकाओं का क्रमिक परिवर्तन, एक्सॉफ्थैल्मिक गॉइटर।
उत्तर: लाल रक्त कोशिकाओं का क्रमिक परिवर्तन।
प्रश्न 24. श्वान कोशिका कहाँ स्थित होती है?
उत्तर: परिधीय तंत्रिकाओं के एक्सॉन के चारों ओर।
प्रश्न 25. मायलिन शीथ का एक कार्य लिखिए।
उत्तर: यह तंत्रिका आवेग के संचरण को तेज करती है तथा एक्सॉन को सुरक्षा प्रदान करती है।
प्रश्न 26. मानव नेत्रगोलक के लेंस का एक कार्य लिखिए।
उत्तर: लेंस प्रकाश का अपवर्तन करके उसे रेटिना पर केंद्रित करता है।
प्रश्न 27. लेंस तथा रेटिना के बीच के विट्रियस चैंबर में उपस्थित द्रव का कार्य लिखिए।
उत्तर: विट्रियस ह्यूमर नेत्रगोलक का आकार बनाए रखने तथा प्रकाश के संचरण में सहायता करता है।
प्रश्न 28. बेमेल शब्द चुनिए— ग्लॉसोफैरिंजियल, ऑक्यूलोमोटर, ट्राइजेमिनल, ऑक्सीटोसिन।
उत्तर: ऑक्सीटोसिन, क्योंकि यह हार्मोन है, बाकी क्रेनियल तंत्रिकाएँ हैं।
प्रश्न 29. बेमेल शब्द चुनिए— हाइपोथैलेमस आदि।
उत्तर: प्रश्न में विकल्प/शब्द अस्पष्ट हैं; उपलब्ध पाठ के आधार पर निश्चित उत्तर देना संभव नहीं है।
B. रिक्त स्थान भरिए
प्रश्न 1. आचार्य जगदीश चंद्र बोस ने पौधों के ______ के गुण को स्थापित किया।
उत्तर: संवेदनशीलता।
प्रश्न 2. पौधों के पके हुए फलों में ______ हार्मोन अधिक मात्रा में पाया जाता है।
उत्तर: एथिलीन।
प्रश्न 3. आयोडीन की कमी से ______ हार्मोन के संश्लेषण में रुकावट आती है।
उत्तर: थायरॉक्सिन।
प्रश्न 4. मानव नेत्र में लेंस की फोकस दूरी को ठीक करने की प्रक्रिया को ______ कहते हैं।
उत्तर: समायोजन (Accommodation)।
प्रश्न 5. आपातकालीन परिस्थितियों में एड्रिनेलिन से प्रभावित होकर शरीर के ______ खड़े हो जाते हैं।
उत्तर: रोम।
सही और गलत
कथन 1. ऑक्सिन बीजों की प्रसुप्त अवस्था समाप्त करके अंकुरण में सहायता करता है।
उत्तर: सही।
कथन 2. डायबिटिज इन्सिपिडस में अधिक मात्रा में पतला मूत्र बनता है।
उत्तर: सही।
कथन 3. हाइपोथैलेमस मनुष्य के शारीरिक तापक्रम को कायम रखता है।
उत्तर: सही।
कथन 4. एसिटिलकोलीन तथा एड्रिनेलिन दोनों न्यूरोट्रांसमीटर हैं।
उत्तर: गलत।
एसिटिलकोलीन न्यूरोट्रांसमीटर है, जबकि एड्रिनेलिन मुख्यतः हार्मोन के रूप में कार्य करता है।
कथन 5. कोरॉयड लेंस की वक्रता और आकार परिवर्तन से आँखों के समायोजन में सहायता करता है।
उत्तर: गलत।
समायोजन में लेंस और सिलियरी मांसपेशियाँ महत्वपूर्ण हैं।
कथन 6. दूरस्थ वस्तुओं को देखने के लिए लेंस की फोकस दूरी बढ़ती है।
उत्तर: सही।
कथन 7. पैरामीशियम का प्रचलन अंग फ्लैजेला है।
उत्तर: गलत।
पैरामीशियम का प्रचलन पक्ष्माभ (Cilia) द्वारा होता है।
कथन 8. पौधों में वृद्धि से संबंधित गति ट्रॉपिक गति है।
उत्तर: सही।
C. संक्षिप्त उत्तरवाले प्रश्न
[2 अंक]
प्रश्न 1. संवेदनशीलता क्या है?
उत्तर:
पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों को महसूस करने तथा उनके प्रति प्रतिक्रिया करने की जीव की क्षमता को संवेदनशीलता कहते हैं।
प्रश्न 2. उद्दीपन किसे कहते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण में होने वाला ऐसा परिवर्तन जो जीव में कोई प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, उद्दीपन कहलाता है।
जैसे—प्रकाश, ताप, स्पर्श, ध्वनि आदि।
प्रश्न 3. अनुक्रिया क्या है?
उत्तर:
किसी उद्दीपन के प्रति जीव द्वारा दिखाई गई प्रतिक्रिया को अनुक्रिया कहते हैं।
जैसे—गर्म वस्तु छूने पर हाथ पीछे हटाना।
प्रश्न 4. उत्तेजनशीलता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
उद्दीपन को ग्रहण करके उसके प्रति उचित प्रतिक्रिया करने की जीव की क्षमता को उत्तेजनशीलता कहते हैं।
प्रश्न 5. संवेग से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
तंत्रिका कोशिका में उत्पन्न होकर तंत्रिका तंतु के माध्यम से आगे बढ़ने वाले विद्युत-रासायनिक संकेत को तंत्रिका संवेग कहते हैं।
प्रश्न 6. अनुचलन गति की परिभाषा बताइए।
उत्तर:
किसी बाहरी उद्दीपन के कारण पूरे जीव का उद्दीपन की दिशा या उसके विपरीत दिशा में स्थान परिवर्तन करना अनुचलन गति कहलाता है।
प्रश्न 7. अनुवर्तन गति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी बाहरी उद्दीपन की दिशा के अनुसार पौधे के किसी अंग में होने वाली प्रेरित वृद्धि या वक्रता गति को अनुवर्तन गति कहते हैं।
जैसे—तने का प्रकाश की ओर मुड़ना।
प्रश्न 8. अनुकुंचन गति किसे कहते हैं?
उत्तर:
बाहरी उद्दीपन के कारण पौधे के किसी अंग में होने वाली ऐसी गति जिसमें अंग सिकुड़ता या मुड़ता है, अनुकुंचन गति कहलाती है।
प्रश्न 9. प्रतिक्षेप/प्रतिवर्ती क्रिया से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी उद्दीपन के प्रति होने वाली तेज, स्वतः तथा अनैच्छिक प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
जैसे—गर्म वस्तु छूने पर हाथ पीछे हटाना।
प्रश्न 10. समायोजन क्या है?
उत्तर:
निकट और दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए आँख के लेंस की वक्रता और फोकस में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को समायोजन कहते हैं।
प्रश्न 11. आँख में होने वाले दो रोगों के नाम बताइए।
उत्तर:
मायोपिया
हाइपरमेट्रोपिया
प्रश्न 12. प्रचलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी जीव का एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना प्रचलन कहलाता है।
जैसे—मनुष्य का चलना और पक्षी का उड़ना।
प्रश्न 13. गति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
शरीर के किसी अंग या पूरे शरीर की स्थिति में परिवर्तन को गति कहते हैं।
प्रश्न 14. संधि किसे कहते हैं?
उत्तर:
दो या दो से अधिक हड्डियों के मिलने के स्थान को संधि (Joint) कहते हैं।
प्रश्न 15. अग्न्याशय को मिश्रित ग्रंथि कहते हैं। इससे उत्पन्न दो हार्मोन के नाम बताइए।
उत्तर:
अग्न्याशय से प्रमुख रूप से—
इंसुलिन
ग्लूकागॉन
स्रावित होते हैं।
प्रश्न 16. प्रतिक्षेप क्रिया के दो लाभ बताइए।
उत्तर:
यह शरीर को चोट और नुकसान से तुरंत बचाती है।
यह बिना सोच-विचार के बहुत तेजी से प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है।
प्रश्न 17. छुईमुई की पत्ती को स्पर्श करने पर वह क्यों बंद हो जाती है?
उत्तर:
छुईमुई की पत्ती स्पर्श जैसे उद्दीपन के प्रति अनुकुंचन/नैस्टिक गति द्वारा प्रतिक्रिया करती है। स्पर्श के कारण पत्ती के आधार पर उपस्थित कोशिकाओं के स्फीत में परिवर्तन होता है, जिससे पत्ती बंद हो जाती है।
प्रश्न 18. ऑक्सिन किस प्रकार तने को प्रकाश की ओर मुड़ने में सहायता करता है?
उत्तर:
जब प्रकाश एक दिशा से पड़ता है, तो ऑक्सिन तने के छायावाले भाग में अधिक एकत्रित होता है। इससे उस भाग की कोशिकाएँ अधिक लंबी होती हैं। परिणामस्वरूप तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है।
प्रश्न 19. गति और प्रचलन में अंतर बताइए।
| गति | प्रचलन |
|---|---|
| शरीर के किसी अंग या पूरे शरीर की स्थिति में परिवर्तन | पूरे जीव का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना |
| उदाहरण—हाथ हिलाना | उदाहरण—चलना |
प्रश्न 20. जिबरेलिन हार्मोन पौधों में बीज तथा पर्व-संधि को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
जिबरेलिन बीज की प्रसुप्त अवस्था को समाप्त करके अंकुरण में सहायता करता है। यह तने के पर्वों की लंबाई बढ़ाकर पौधे की ऊँचाई बढ़ाता है। इसलिए यह पौधों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 21. कृषि में खर-पतवार की समस्या के समाधान तथा उत्पादन बढ़ाने में कृत्रिम पादप हार्मोन की भूमिका बताइए।
उत्तर:
कृत्रिम पादप हार्मोन का उपयोग—
खर-पतवार को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
पौधों की वृद्धि बढ़ाने में किया जाता है।
फल बनने और पकने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में किया जाता है।
कुछ परिस्थितियों में बीजरहित फल प्राप्त करने में सहायता करता है।
प्रश्न 22. पौधों में वृद्धि से संबंधित ऑक्सिन के कार्यों की सारणी बनाइए।
| ऑक्सिन का कार्य | प्रभाव |
|---|---|
| कोशिका वृद्धि | पौधे की वृद्धि |
| तने की वृद्धि | तना लंबा होता है |
| प्रकाशानुवर्तन | तना प्रकाश की ओर मुड़ता है |
| जड़ निर्माण | जड़ों के विकास में सहायता |
| फल विकास | फल बनने में सहायता |
प्रश्न 23. मानव शरीर की जनन ग्रंथियों पर GTH की दो भूमिकाएँ लिखिए।
उत्तर:
GTH में मुख्यतः FSH और LH जैसे हार्मोन शामिल होते हैं।
FSH जनन कोशिकाओं के विकास तथा मादा में फॉलिकल के विकास में सहायता करता है।
LH अंडोत्सर्जन तथा पुरुष में टेस्टोस्टेरॉन स्राव जैसी जनन क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
प्रश्न 24. निम्न कार्यों से संबंधित हार्मोन के नाम लिखिए।
| कार्य | हार्मोन |
|---|---|
| रक्त में शर्करा नियंत्रित करना | इंसुलिन |
| थायराइड को उत्तेजित करना | TSH |
| अंडाशय/जनन ग्रंथि की क्रिया | FSH/LH |
| संकट की स्थिति में शरीर को तैयार करना | एड्रिनेलिन |
| रक्तचाप बढ़ाना | एड्रिनेलिन |
| गर्भाशय का संकुचन | ऑक्सीटोसिन |
प्रश्न 25. LH तथा ICSH मनुष्य की जनन ग्रंथियों से हार्मोन के स्राव को नियंत्रित करते हैं—कथन की यथार्थता का मूल्यांकन करें।
उत्तर:
यह कथन सही है। LH स्त्रियों में अंडोत्सर्जन तथा कॉर्पस ल्यूटियम के निर्माण में सहायता करता है। पुरुषों में इसी प्रकार के हार्मोन को ICSH कहा जाता है, जो लेडिग कोशिकाओं को टेस्टोस्टेरॉन स्राव के लिए प्रेरित करता है।
प्रश्न 26. निम्न कार्यों को नियंत्रित करने वाले हार्मोन की सारणी बनाइए।
| कार्य | हार्मोन |
|---|---|
| हड्डियों की लंबाई में वृद्धि | वृद्धि हार्मोन |
| कॉर्पस ल्यूटियम बनने में सहायता | LH |
| प्रोजेस्ट्रॉन स्राव के लिए प्रेरणा | LH |
| यकृत में ग्लूकोज उत्पादन को रोकना | इंसुलिन |
| प्रसव के दौरान गर्भाशय का संकुचन | ऑक्सीटोसिन |
प्रश्न 27. निम्न क्रियाओं को प्राकृतिक तथा अर्जित प्रतिवर्ती क्रिया में बाँटिए।
| प्राकृतिक प्रतिवर्ती क्रिया | अर्जित प्रतिवर्ती क्रिया |
|---|---|
| नवजात की स्तनपान की इच्छा | साइकिल चलाना |
| छींक आना | विकेटकीपर द्वारा गेंद पकड़ना |
प्रश्न 28. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र एवं परिधीय तंत्रिका तंत्र के भाग लिखिए।
उत्तर:
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र:
मस्तिष्क
मेरुरज्जु
परिधीय तंत्रिका तंत्र:
क्रेनियल तंत्रिकाएँ
स्पाइनल/मेरुतंत्रिकाएँ
प्रश्न 29. दरवाजे पर दस्तक सुनकर दरवाजा खोलने की क्रिया में तंत्रिका पथ बताइए।
उत्तर:
ध्वनि → कान के ग्राही → श्रवण तंत्रिका → मस्तिष्क → चालक तंत्रिका → हाथ की मांसपेशियाँ → दरवाजा खोलना।
प्रश्न 30. जब खाद्य कण ट्रैकिया में प्रवेश करता है अथवा बाहरी कण नाक में प्रवेश करता है तो कौन-सी प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर:
ट्रैकिया में खाद्य कण जाने पर खाँसी तथा नाक में बाहरी कण जाने पर छींक जैसी प्रतिवर्ती क्रियाएँ होती हैं।
प्रश्न 31. मानव नेत्रगोलक के विभिन्न अपवर्तक माध्यमों को सही क्रम में लिखिए।
उत्तर:
कॉर्निया → जलीय ह्यूमर → लेंस → विट्रियस ह्यूमर → रेटिना।
प्रश्न 32. मेनिन्जेज तथा CSF की स्थिति बताइए।
उत्तर:
मेनिन्जेज मस्तिष्क और मेरुरज्जु को घेरने वाली सुरक्षात्मक झिल्लियाँ हैं।
CSF मस्तिष्क और मेरुरज्जु के चारों ओर उपस्थित द्रव है, जो सुरक्षा तथा आघात अवशोषण में सहायता करता है।
प्रश्न 33. एक जन्तु जो विश्रामावस्था में था, अचानक दौड़ने लगा। इसके संभावित कारण लिखिए।
उत्तर:
बाहरी उद्दीपन, भय, खतरा, भोजन की उपलब्धता या शिकारी की उपस्थिति जैसे कारणों से तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप मांसपेशियों में तेजी से अनुक्रिया उत्पन्न होती है और जन्तु दौड़ने लगता है।
D. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
[5 अंक]
नोट: नीचे के उत्तर 5 अंक के अनुसार विस्तृत रखे गए हैं। परीक्षा में जहाँ चित्र पूछा गया है, वहाँ उत्तर के साथ चित्र अवश्य बनाइए।
प्रश्न 1. मनुष्य के मस्तिष्क के विभिन्न भागों के नाम और कार्य बताइए।
उत्तर:
मनुष्य का मस्तिष्क शरीर का प्रमुख नियंत्रण केंद्र है। इसके विभिन्न भाग अलग-अलग कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
1. सेरिब्रम
यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह बुद्धि, स्मृति, सोचने, समझने, निर्णय लेने तथा इच्छानुसार होने वाली क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
2. सेरिबेलम
यह शरीर का संतुलन बनाए रखने तथा मांसपेशियों की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने में सहायता करता है।
3. मेडुला ऑब्लोंगाटा
यह हृदय गति, श्वसन, निगलने आदि कई अनैच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण में महत्वपूर्ण है।
4. हाइपोथैलेमस
यह शरीर के तापमान, भूख, प्यास तथा कई अंतःस्रावी क्रियाओं के नियंत्रण में सहायता करता है।
5. थैलेमस
यह संवेदी सूचनाओं के संचार और प्रसंस्करण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष: मस्तिष्क के विभिन्न भाग मिलकर शरीर की गतिविधियों का नियंत्रण और समन्वय करते हैं।
प्रश्न 2. प्रतिक्षेप क्रिया क्या है? यह कितने प्रकार की होती है? प्रत्येक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
किसी उद्दीपन के प्रति होने वाली तेज, स्वतः तथा अनैच्छिक प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
उदाहरण:
गर्म वस्तु छूने पर हाथ तुरंत पीछे हटाना।
प्रतिवर्ती क्रिया को सामान्य रूप से निम्न रूपों में समझा जा सकता है—
1. प्राकृतिक प्रतिवर्ती क्रिया
जो जन्मजात होती है और इसके लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती।
उदाहरण: छींकना, नवजात का दूध पीना।
2. अर्जित प्रतिवर्ती क्रिया
जो अभ्यास या अनुभव से विकसित होती है।
उदाहरण: साइकिल चलाना, प्रशिक्षित तरीके से गेंद पकड़ना।
महत्व
प्रतिवर्ती क्रिया शरीर को चोट और खतरे से तुरंत बचाने में सहायता करती है।
प्रश्न 3. पौधे किस प्रकार वातावरण के परिवर्तनों को महसूस करते हैं?
उत्तर:
पौधे स्थान परिवर्तन करके खतरे से बच नहीं सकते, फिर भी वे अपने वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को महसूस करके प्रतिक्रिया करते हैं।
पौधों में—
प्रकाश की प्रतिक्रिया,
गुरुत्वाकर्षण की प्रतिक्रिया,
पानी की प्रतिक्रिया,
तापमान की प्रतिक्रिया,
रसायनों की प्रतिक्रिया,
स्पर्श की प्रतिक्रिया
देखी जाती है।
उदाहरण:
1. प्रकाश: तना प्रकाश की ओर बढ़ता है। इसे प्रकाशानुवर्तन कहते हैं।
2. गुरुत्वाकर्षण: जड़ गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ती है, जबकि तना इसके विपरीत बढ़ता है।
3. पानी: जड़ें पानी की ओर बढ़ती हैं।
4. स्पर्श: छुईमुई की पत्तियाँ छूने पर बंद हो जाती हैं।
इन प्रतिक्रियाओं में पौधों के पादप हार्मोन, विशेषकर ऑक्सिन, महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 4. गति किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार की होती है? प्रत्येक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
शरीर के किसी अंग या पूरे शरीर की स्थिति में परिवर्तन को गति कहते हैं।
पौधों में उद्दीपन के आधार पर गति को मुख्य रूप से निम्न प्रकारों में समझा जा सकता है—
1. अनुचलन गति
उद्दीपन के कारण पूरे जीव का उद्दीपन की दिशा या विपरीत दिशा में चलना अनुचलन गति है।
2. अनुवर्तन गति
उद्दीपन की दिशा के अनुसार पौधे के किसी अंग में होने वाली वृद्धि या वक्रता गति अनुवर्तन गति है।
3. अनुकुंचन गति
उद्दीपन के कारण पौधे के किसी अंग में सिकुड़ने या मुड़ने की गति अनुकुंचन गति कहलाती है।
उदाहरण:
प्रकाश की ओर तने का मुड़ना — प्रकाशानुवर्तन।
प्रश्न 5. हार्मोन किसे कहते हैं? पादप हार्मोन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक पदार्थ, जो शरीर के विभिन्न अंगों की क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं, हार्मोन कहलाते हैं।
पौधों में पाए जाने वाले वृद्धि और विकास को नियंत्रित करने वाले रासायनिक पदार्थों को पादप हार्मोन कहते हैं।
पादप हार्मोन की विशेषताएँ:
ये बहुत कम मात्रा में कार्य करते हैं।
ये विशेष कोशिकाओं द्वारा बनाए जाते हैं।
इनका परिवहन पौधे के विभिन्न भागों तक होता है।
इनकी कमी या अधिकता से पौधे पर प्रभाव पड़ता है।
ये वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं।
इनका प्रभाव विशेष परिस्थितियों में अधिक या कम हो सकता है।
ये पौधों की विभिन्न जैविक क्रियाओं में समन्वय स्थापित करते हैं।
मुख्य पादप हार्मोन: ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एथिलीन और एब्सिसिक अम्ल।
प्रश्न 6. मनुष्य की तीन अंतःस्रावी ग्रंथियों के नाम बताइए। अंतःस्रावी और बहिःस्रावी ग्रंथि में अंतर बताइए।
उत्तर:
तीन अंतःस्रावी ग्रंथियाँ:
पीयूष ग्रंथि
थायराइड ग्रंथि
अधिवृक्क ग्रंथि
अंतःस्रावी और बहिःस्रावी ग्रंथि में अंतर
| अंतःस्रावी ग्रंथि | बहिःस्रावी ग्रंथि |
|---|---|
| इनमें नलिका नहीं होती | इनमें नलिका होती है |
| हार्मोन सीधे रक्त में छोड़ती हैं | स्राव नलिका द्वारा बाहर पहुँचता है |
| उदाहरण—पीयूष | उदाहरण—लार ग्रंथि |
प्रश्न 7. न्यूरॉन नियमन और समन्वय से आप क्या समझते हैं? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। न्यूरॉन शरीर के विभिन्न भागों से सूचना प्राप्त करता है और तंत्रिका संकेतों को दूसरे भागों तक पहुँचाता है।
उदाहरण:
जब कोई व्यक्ति गर्म वस्तु को छूता है—
गर्मी → त्वचा के ग्राही → संवेदी न्यूरॉन → मेरुरज्जु → चालक न्यूरॉन → हाथ की मांसपेशी → हाथ पीछे हटता है।
इस प्रकार न्यूरॉनों की सहायता से शरीर उद्दीपन को पहचानता है और उचित प्रतिक्रिया करता है।
प्रश्न 8. द्विनेत्री दृष्टि से क्या समझते हैं? एकनेत्री और द्विनेत्री दृष्टि में अंतर बताइए।
उत्तर:
दोनों आँखों से किसी वस्तु को एक साथ देखने की क्षमता को द्विनेत्री दृष्टि कहते हैं।
| एकनेत्री दृष्टि | द्विनेत्री दृष्टि |
|---|---|
| एक आँख से देखने पर प्राप्त दृष्टि | दोनों आँखों से देखने पर प्राप्त दृष्टि |
| गहराई का अनुमान कम स्पष्ट | गहराई का अनुमान अधिक स्पष्ट |
| दृष्टि क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है | दोनों आँखों के संयुक्त क्षेत्र में वस्तु की स्पष्ट त्रिविमीय अनुभूति होती है |
| प्रतिबिंब की तुलना सीमित | दोनों आँखों के प्रतिबिंबों से दूरी/गहराई का अनुमान बेहतर |
प्रश्न 9. आँख में होने वाले दो रोगों के नाम, कारण और उपाय बताइए।
उत्तर:
1. मायोपिया
कारण: व्यक्ति पास की वस्तुओं को स्पष्ट देखता है लेकिन दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं।
उपाय: उपयुक्त अवतल लेंस के चश्मे का प्रयोग किया जाता है।
2. हाइपरमेट्रोपिया
कारण: व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है लेकिन पास की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं।
उपाय: उपयुक्त उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 10. कोई जन्तु प्रचलन क्यों करता है? प्रचलन और गति में क्या अंतर है?
उत्तर:
जन्तु भोजन की खोज, शत्रु से बचने, साथी की खोज, सुरक्षित स्थान प्राप्त करने और अनुकूल वातावरण में पहुँचने के लिए प्रचलन करते हैं।
प्रचलन और गति में अंतर
गति: शरीर के किसी अंग या पूरे शरीर की स्थिति में परिवर्तन।
प्रचलन: पूरे जन्तु का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।
उदाहरण:
हाथ हिलाना — गति।
चलकर दूसरे स्थान पर जाना — प्रचलन।
प्रश्न 11. संधि से आप क्या समझते हैं? विभिन्न प्रकार की चल संधियों के नाम और उदाहरण बताइए।
उत्तर:
दो हड्डियों के मिलने के स्थान को संधि कहते हैं। शरीर में हड्डियों की गति संधियों के कारण संभव होती है।
प्रमुख चल संधियाँ:
1. हिंज संधि
एक दिशा में गति होती है।
उदाहरण: कोहनी और घुटना।
2. बॉल एंड सॉकेट संधि
विभिन्न दिशाओं में गति संभव होती है।
उदाहरण: कंधा और कूल्हा।
3. पिवट संधि
एक हड्डी दूसरी के चारों ओर घूमती है।
उदाहरण: गर्दन की कुछ कशेरुकाओं के बीच।
4. ग्लाइडिंग संधि
हड्डियाँ एक-दूसरे पर फिसलती हैं।
उदाहरण: कलाई की हड्डियाँ।
प्रश्न 12. मेरुरज्जु की तुलना में मस्तिष्क द्वारा किसी सूचना के संचरण में अधिक समय क्यों लगता है?
उत्तर:
मस्तिष्क तक पहुँचने वाली सूचना को मस्तिष्क के विभिन्न भागों द्वारा ग्रहण और विश्लेषित किया जाता है। मस्तिष्क में सूचना के प्रसंस्करण और उचित प्रतिक्रिया के लिए अधिक जटिल समन्वय की आवश्यकता होती है।
इसके विपरीत कुछ प्रतिवर्ती क्रियाओं में सूचना का प्रसंस्करण मुख्यतः मेरुरज्जु के स्तर पर ही हो जाता है। इसलिए ऐसी प्रतिक्रिया बहुत तेजी से होती है।
प्रश्न 13. मनुष्य के शरीर का एक स्वच्छ चित्र बनाकर अंतःस्रावी ग्रंथियों का नामांकन कीजिए।
उत्तर:
चित्र में निम्न ग्रंथियों को सही स्थान पर दर्शाएँ—
पीयूष ग्रंथि
थायराइड ग्रंथि
थाइमस
अधिवृक्क ग्रंथियाँ
अग्न्याशय
अंडाशय/वृषण
परीक्षा में: मानव शरीर की रूपरेखा बनाकर प्रत्येक ग्रंथि के पास उसका नाम लिखें।
प्रश्न 14. मानव मस्तिष्क का स्वच्छ चित्र बनाकर प्रमुख भागों का नामांकन कीजिए।
उत्तर:
चित्र में मुख्य रूप से निम्न भागों को दर्शाएँ—
सेरिब्रम
सेरिबेलम
थैलेमस
हाइपोथैलेमस
मेडुला ऑब्लोंगाटा
मेरुरज्जु
परीक्षा सुझाव: चित्र साफ, बड़ा और लेबल स्पष्ट रखें।
प्रश्न 15. प्रतिवर्ती चाप का स्वच्छ चित्र बनाकर ग्राही, संवेदी न्यूरॉन, तंत्रिका केंद्र, चालक न्यूरॉन और प्रभावी को दर्शाइए।
उत्तर:
प्रतिवर्ती चाप का क्रम:
ग्राही → संवेदी न्यूरॉन → तंत्रिका केंद्र/मेरुरज्जु → चालक न्यूरॉन → प्रभावी अंग
उदाहरण:
त्वचा का ग्राही → संवेदी तंत्रिका → मेरुरज्जु → चालक तंत्रिका → हाथ की मांसपेशी → हाथ पीछे हटता है।
प्रश्न 16. मानव आँख के ऊर्ध्व काट का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
चित्र में निम्न भाग अवश्य दिखाएँ—
कॉर्निया
आइरिस
पुतली
लेंस
जलीय ह्यूमर
विट्रियस ह्यूमर
रेटिना
ऑप्टिक तंत्रिका
स्क्लेरा
कोरॉयड
प्रश्न 17. न्यूरॉन का स्वच्छ चित्र बनाकर निम्न भागों को नामांकित कीजिए।
उत्तर:
चित्र में निम्न भाग अवश्य दर्शाएँ—
कोशिका शरीर
डेंड्राइट
एक्सॉन
न्यूरिलेमा
मायलिन शीथ
नोड ऑफ रैनवियर
श्वान कोशिका
सिनेप्स
न्यूरॉन का कार्य
न्यूरॉन तंत्रिका संकेत को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाता है।
प्रश्न 18. कृषि कार्य तथा बागवानी में कृत्रिम पादप हार्मोन की भूमिका की सारणी बनाइए। मनुष्य के शरीर में ग्लूकोज के अवशोषण तथा उपापचय में हार्मोन के प्रभाव बताइए।
उत्तर:
कृषि एवं बागवानी में कृत्रिम पादप हार्मोन
| उपयोग | प्रभाव |
|---|---|
| खर-पतवार नियंत्रण | अवांछित पौधों को नियंत्रित करना |
| वृद्धि बढ़ाना | पौधे की वृद्धि में सहायता |
| फल विकास | फल बनने में सहायता |
| बीजरहित फल | कुछ फसलों में बीजरहित फल प्राप्त करना |
| फल पकाना | पकने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना |
ग्लूकोज के नियंत्रण में इंसुलिन
इंसुलिन अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं से स्रावित होता है। यह रक्त में ग्लूकोज की मात्रा कम करने में सहायता करता है। यह कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज के उपयोग तथा यकृत और मांसपेशियों में ग्लाइकोजन के निर्माण को बढ़ावा देता है।
प्रश्न 19. एक मनुष्य दूर की चीजें स्पष्ट देख सकता है लेकिन पास की चीजें स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता। संभावित कारण और निवारण बताइए।
उत्तर:
यह स्थिति सामान्यतः हाइपरमेट्रोपिया (दूरदृष्टिता) से संबंधित है।
कारण:
इसमें निकट वस्तु से आने वाली किरणें रेटिना के पीछे फोकस होने की प्रवृत्ति रखती हैं। इसका कारण नेत्रगोलक की लंबाई कम होना या लेंस की अपवर्तक क्षमता कम होना हो सकता है।
निवारण:
उपयुक्त उत्तल लेंस के चश्मे का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 20. दुर्घटना में घायल व्यक्ति में निम्न शारीरिक कार्य प्रभावित हुए। संबंधित मस्तिष्क के भागों के नाम लिखिए।
उत्तर:
| प्रभावित कार्य | संबंधित मस्तिष्क भाग |
|---|---|
| वाक्शक्ति | सेरिब्रम |
| भूख और प्यास | हाइपोथैलेमस |
| निद्रा | हाइपोथैलेमस |
| शारीरिक तापमान | हाइपोथैलेमस |
| शारीरिक संतुलन | सेरिबेलम |
| जीभ का संचालन | मेडुला/मस्तिष्क के संबंधित मोटर केंद्र |
| निगलना | मेडुला ऑब्लोंगाटा |
| हार्मोनल नियंत्रण का फीडबैक | हाइपोथैलेमस–पीयूष तंत्र |
प्रश्न 21. द्विनेत्री तथा एकनेत्री दृष्टि में तीन अंतर लिखिए।
उत्तर:
| आधार | एकनेत्री दृष्टि | द्विनेत्री दृष्टि |
|---|---|---|
| प्रतिबिंब | एक आँख से प्राप्त | दोनों आँखों से प्राप्त |
| दृष्टि क्षेत्र | सामान्यतः अधिक व्यापक | दोनों आँखों के संयुक्त क्षेत्र तक सीमित |
| गहराई का अनुमान | कम स्पष्ट | अधिक स्पष्ट |
| त्रिविमीय अनुभूति | कम | बेहतर |
प्राकृतिक और उपार्जित प्रतिवर्ती क्रिया में अंतर
| आधार | प्राकृतिक प्रतिवर्ती क्रिया | उपार्जित प्रतिवर्ती क्रिया |
|---|---|---|
| प्रकृति | जन्मजात | अनुभव से प्राप्त |
| पूर्व अनुभव | आवश्यक नहीं | आवश्यक |
| तंत्रिका पथ | जन्म से विकसित | अभ्यास से विकसित/परिष्कृत |
| उदाहरण | छींकना | साइकिल चलाना |
प्रश्न 22. प्रतिवर्ती चाप का चित्रण करें तथा भागों का नामांकन करें।
उत्तर:
प्रतिवर्ती चाप का क्रम है—
(a) ग्राही अंग
↓
(b) संवेदी तंत्रिका
↓
(c) तंत्रिका केंद्र/मेरुरज्जु
↓
(d) चालक तंत्रिका
↓
प्रभावी अंग
↓
प्रतिक्रिया
उदाहरण: गर्म वस्तु छूने पर हाथ पीछे हटना।
प्रश्न 23. मानव नेत्रगोलक के ऊर्ध्व काट का स्वच्छ चित्र बनाकर निम्न भागों का नाम लिखिए।
उत्तर: चित्र में निम्न भागों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ—
(a) कॉर्निया
(b) लेंस
(c) विट्रियस ह्यूमर
(d) रेटिना
इसके अतिरिक्त अच्छे अंक के लिए आइरिस, पुतली, स्क्लेरा और ऑप्टिक तंत्रिका भी दिखा सकते हैं।
प्रश्न 24. न्यूरॉन का स्पष्ट चित्र बनाकर निम्न भागों का नामांकन करें।
उत्तर: चित्र में निम्न भाग अवश्य दिखाएँ—
(a) डेंड्रॉन/डेंड्राइट
(b) नोड ऑफ रैनवियर
(c) मायलिन शीथ
(d) श्वान कोशिका
साथ में कोशिका शरीर, एक्सॉन और एक्सॉन टर्मिनल भी दिखाना बेहतर रहेगा।
अंतिम बोर्ड रिवीजन — सबसे महत्वपूर्ण बातें
उद्दीपन → अनुक्रिया
न्यूरॉन → तंत्रिका तंत्र की इकाई
मस्तिष्क → शरीर का प्रमुख नियंत्रण केंद्र
सेरिब्रम → बुद्धि, स्मृति, सोच
सेरिबेलम → संतुलन
हाइपोथैलेमस → तापमान, भूख, प्यास आदि
मेडुला → कई अनैच्छिक क्रियाएँ
मेरुरज्जु → प्रतिवर्ती क्रिया में महत्वपूर्ण
मेनिन्जेज → मस्तिष्क की सुरक्षा
CSF → सुरक्षा और आघात अवशोषण
सिनेप्स → दो न्यूरॉनों के बीच का संपर्क क्षेत्र
ऑक्सिन → वृद्धि एवं प्रकाशानुवर्तन
जिबरेलिन → तने की वृद्धि एवं अंकुरण
एथिलीन → फल पकना
पीयूष ग्रंथि → मास्टर ग्रंथि
ADH → जल का पुनः अवशोषण
TSH → थायराइड की क्रिया
FSH/LH → जनन संबंधी क्रियाएँ
थायरॉक्सिन → चयापचय, वृद्धि एवं विकास
इंसुलिन → रक्त ग्लूकोज कम करने में सहायता
एड्रिनेलिन → आपातकालीन प्रतिक्रिया
प्रतिवर्ती क्रिया → तेज और अनैच्छिक प्रतिक्रिया
प्रचलन → पूरे जीव का स्थान परिवर्तन
गति → शरीर/अंग की स्थिति में परिवर्तन
मायोपिया → अवतल लेंस
हाइपरमेट्रोपिया → उत्तल लेंस
(1 .d )जन्तुओ में प्रतिक्रिया एवं भौतिक समन्वय तंत्रिका तंत्र (Reaction and actual co-appointment in creature Mervous framework)
उत्तर :वह तंत्र जिसके द्वारा प्राणी के शरीर की विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण, नियमन और उनके विभिन्न अंगों के कार्यों के मध्य सामंजस्य स्थापित किया जाता है, उसे तंत्रिका तंत्र कहते हैं।
तंत्रिका तंत्र (Sensory system)- प्राणियों का शरीर जटिल रचना है। इसलिए इसके समस्त भागों को सुचारु रूप से कार्य करने के लिए उतने ही जटिल समन्वयित तंत्र की आवश्यकता है जो तंत्रिका तंत्र हैं। यह जन्तु शरीर के सभी अंग तथा अंग तंत्रों का समन्वय (Coordination) करता है। पेड़-पौधों में तंत्रिका तंत्र का पूर्णतः अभाव होता है।
उत्तर :हम सभी जिस वातावरण में निवास करते हैं वहाँ विभिन्न प्रकार के परिवर्तन होते रहते हैं जिसकी सूचना हमें प्राप्त होती रहती है। वातावरण में होने वाले इन्हीं परिवर्तनों को उद्दीपन (Boosts) कहते हैं। उद्दीपन भी दो प्रकार के हो सकते हैं-(1) बाहरी उद्दीपन (Outer stimulf), (2) आन्तरिक उद्दीपन (Interior improvements) ।
1) बाहरी उद्दीपन वे हैं जिनका अनुभव हमें परिवेश से होता है; जैसे-गर्मी, सर्दी आदि।
(2) आन्तरिक उद्दीपन को हम शरीर के भीतर के परिवर्तन द्वारा समझ सकते हैं; जैसे-भूख लगना, प्यास लगना आदि।
उत्तर :उद्दीपनों द्वारा जो सूचनायें तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क (Mind) अपना रीढ़-रज्जू (Spinal line) को पहुँचायी जाती हैं, संवेदनायें (Driving forces) कहलाती हैं।
उत्तर :संवेदनाओं के फलस्वरूप अंगों द्वारा जो कार्य सम्पन्न होता है, प्रतिक्रिया (Reaction) कहलाता है जो सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है।
उत्तर : (1) जन्तुओं के शरीर में होने वाली विभिन्न क्रियाओं का नियमन (Guideline) करना तथा अंगों एवं तंत्रों के बीच समन्वय (Co-appointment) स्थापित करना। (2) शरीर के बाहरी तथा आन्तरिक वातावरण से उद्दीपन ग्रहण करना। (3) उद्दीपनों के प्रभाव से प्रतिचार (Reaction) उत्पन्न कर अपने वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करना। (4) शरीर के विभिन्न पेशियों के संकुचन तथा ग्रन्थियों के स्राव में सहायता करना। (5) संवेदी अंगों की सहायता से वातावरण में होने वाले परिवर्तनों की जानकारी करना। (6) बुद्धि, विवेक, स्मरण, तर्क आदि का संचालन करना। (7) स्पर्श, स्वाद, गंध, पीड़ा, दृष्टि आदि का ज्ञान कराना।
उत्तर :त्तंत्रिका तंत्र के अवयव (Parts of sensory system) – तंत्रिका तंत्र के अवयव को दो भागों में बाँटा गया है-(1) रचनात्मक अवयव (Underlying parts), (2) क्रियात्मक अवयव (Utilitarian parts)
(1) रचनात्मक अवयव (Underlying parts) तंत्रिका तंत्र प्रधानतः दो भागों द्वारा गठित होता है-(I) न्यूरान (Neuron), (ii) न्यूरोग्लिया (Neuroglia)। न्यूरान के नष्ट होने या मृत्यु के पश्चात् न्यूरोग्लिया न्यूरान का स्थान ग्रहण कर लेता है। इसके अतिरिक्त अमेरुदण्डी प्राणियों में तंत्रिका, तंत्रिका गैग्लिऑन तथा सूत्र-युग्मन भी उपस्थित रहता है तथा सजीवों में नियंत्रण एवं समन्वय अमेरुदण्डी प्राणियों में तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क, रीढ़-रज्जु, कपाल तंत्रिकाएं तथा मेरुतंत्रिकाओं द्वारा गठित होता है। ये सभी अंग न्यूरान तथा न्यूरोग्लिया द्वारा गठित होते हैं।
(2) क्रियात्मक अवयव (Practical parts) – वातावरण से उद्दीपनों का ग्रहण, प्रतिचार तथा विभिन्न कार्यों के सम्पादन हेतु तंत्रिका तंत्र के क्रियात्मक अवयव तीन प्रकार के होते हैं-(a) ग्राहक (receptor) (b) अपवाहक या प्रभावक (effector) (c) वाहक (conductor)।
(a) ग्राहक (Receptor) – ग्राहक वे विशिष्ट कोशकीय रचनायें हैं जो वातावरण या कुछ अंशों तक शरीर के भीतर के उद्दीपनों को ग्रहण कर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र में प्रेषित करती हैं जहाँ पर क्रियात्मक निर्णय सम्पन्न होता है। निम्न जन्तुओं में ये कोशिकाएँ आपस में संयुक्त होकर संवेदी अंग (tactile organs) का निर्माण करती हैं। उद्दीपन ग्रहण करने के अनुसार ग्राहक कोशिकाओं को दो भागों में बांटा गया है –
(I) वाह्य ग्राहक (Extero-receptors or exteroceptors)- इस प्रकार की ग्राहक कोशिकाएँ शरीर के बाहरी भागों में पायी जाती हैं; जैसे-त्वचा, आँख, नाक, जीभ, कान आदि। ये कोशिकायें बाहरी उद्दीपनों को ग्रहण करती हैं। इन कोशिकाओं को ताप ग्राहक, दबाव ग्राहक, स्पर्श ग्राहक, स्वाद ग्राहक, प्रकाश ग्राहक, रंग ग्राहक, घ्राण ग्राहक, स्वर ग्राहक आदि कहते हैं।
(ii) अन्तः ग्राहक (Intero-receptors or enteroceptors)- इस प्रकार की ग्राहक कोशिकाएं शरीर के आन्तरिक रचनाओं में पायी जाती हैं तथा आन्तरिक उद्दीपनों जैसे भूख, प्यास, पीड़ा, हृदय की धड़कन, श्वसन आदि को ग्रहण करती हैं।
(b) अपवाहक (Effectors) -वे सभी अंग जो उद्दीपनों के प्रभाव से प्रभावित होते हैं उन्हें अपवाहक कहते हैं; जैसे विभिन्न प्रकार की पेशियाँ, ग्रन्थियाँ (organs) आदि।
(c) वाहक (Guides) – ग्राहकों द्वारा किये गये उदीपन जिस माध्यम द्वारा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र में पहुँचाया है या केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र से प्रतिचार अपवाहक (effectors) अंगों तक पहुंचाया जाता है उसे वाहक (Guides) कहते। जैसे-न्यूरान तथा नर्भ (nerve) वाहक का कार्य करते हैं।
न्यूरॉन (Neuron or
nerve cell) – “न्यूरॉन या नर्भसेल तंत्रिका तंत्र की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है:
” तंत्रिका कोशिका के दो भाग होते हैं-(a) कोशिकाकाय या साईटॉन तथा (b) कोशिका प्रकर्ष ।
कोशिका प्रवर्ध भी दो प्रकार के होते हैं-(1) प्रतानिकायें तथा (ii) अक्षततु (axon)
तंत्रिका कोशिका को रचना के आधार पर निम्न तीन प्रकार में विभाजित किया गया है-
(1) एक ध्रुवीय तंत्रिका कोशिका (2 ) द्विध्रुवीय तंत्रिका कोशिका तथा (3 ) बहुध्रुवीय तंत्रिका कोशिका
(1) एक ध्रुवीय तंत्रिका कोशिका –वे तंत्रिका-कोशिकाएँ जो प्रतानिकायें विहीन होती हैं, एक ध्रुवीय तत्रिका कोशिकाएं कहलाती हैं। ये प्रमस्तिष्क-गुच्छिकाओं और भ्रूण में पायी जाती है।
(2 )द्विध्रुवीय तंत्रिका कोशिका – जिस तंत्रिका कोशिका में एक अक्ष तन्तु तथा एक प्रतानिका मिलती है उसे द्विध्रुवीय तंत्रिका कोशिका कहते हैं। ये कोशिकाएं नेत्र के दृष्टिपटल में पायी जाती है।
(3 ) बहुध्रुवीय तंत्रिका कोशिका :एक अक्ष तंतु तथा अनेक प्रतनिका वाली कोशिकाएँ बहुध्रुवीय तंत्रिका कोशिका कहलाती है। जिसके द्वारा मस्तिक ,रीढ़ -रज्जु तथा तंत्रिकाओं निर्माण होता है।
(Q )तंत्रिका का परिभाषा देते हुए उसके प्रकारो का वर्णन करो।
उत्तर :तंत्रिकाएं (Nerves) – संयोजी उत्तकों से घिरे हुए तंत्रिका तन्तुओं के समूह को तंत्रिका कहते हैं। ये पेशियों के संकुचन से ग्रन्थियों द्वारा होने वाले स्राव को नियंत्रित करती है। उदीपनों को मस्तिष्क में पहुँचाती हैं तथा जवाब में प्रभावो अंगों तक भी पहुँचाने में अपनी भूमिका निभाती है।
तंत्रिकाओं के भेद (Sorts of nerves)- तंत्रिकाएं तीन प्रकार की होती हैं जो निम्न हैं-
(1) संवेदी या अन्तर्वाही नर्भ (Tactile or Afferent nerves) – संवेदी न्यूरान के तंत्रिका तंतु द्वारा गठित वे नर्भ जो ग्राहक (Receptor) से उद्दीपनों को ग्रहण कर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र में पहुँचाने का कार्य करती हैं उन्हें संवेदी नर्भ कहते हैं। चूंकि ये नर्भ उद्दीपनों को बाहरी भाग से अन्दर की ओर वहन करती हैं, अतः इन्हें अन्तर्वाही (Afferent nerve) भी कहते जैसे-दृष्टि, श्रवण, घ्राण आदि। हैं;
(2) चालक या बहिर्वाही नर्भ (Engine or efferent nerves) – चालक न्यूरान के तंत्रिका तंतु द्वारा गठित्त वे नर्भ जो प्रतिक्रिया (Reactions) को केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र से अपवाहक (Effectors) या उद्दीप्त अंगों तक पहुँचाने का कार्य करती हैं उन्हें चालक (Engine) नर्भ कहते हैं। चूंकि ये प्रतिचार को अन्दर से बाहरी भाग की ओर वहन करती हैं अतः इन्हें बहिर्वाही (Efferent) नर्भ कहते हैं; जैसे-तीसरी तथा छठवीं कपाल तंत्रिकाएँ।
(3 )मिश्रित नर्भ- वे नर्भ जो संवेदी (Tactile) तथा चालक (Engine) दोनों प्रकार के न्यूरान के तंत्रिका तंतु द्वारा गठित होती हैं तथा ये उद्दीपन ग्रहण कर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र में तथा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र से प्रतिवार उद्दीप्त अंगों तक पहुँचाने का कार्य करती हैं, उन्हें मिश्रित नर्भ कहते हैं; जैसे-फेसियल या आनन तंत्रिका (seventh Cranial nerve), वेगस तंत्रिका (tenth Cranial nerve), मेरु तंत्रिकायें आदि।
(Q )प्रतिवर्ती क्रियाओं के प्रकार का प्रयोग सहित वर्णन करो।
उत्तर :प्रतिवर्ती क्रियाओं के प्रकार (Sorts of reflex activity)- प्रतिवर्ती क्रियायें दो प्रकार की होती है।
1. सरल प्रतिवर्ती क्रिया (Straightforward reflex activity)- वे प्रतिक्षेप क्रियायें जो जन्मजात होती है तथा स्वाभाविक होती हैं, सरल प्रतिवर्ती क्रियाये कहलाती है; जैसे-श्वसन, हृदय की धड़कन, रक्त परिवहन इत्यादि। शर्त विहीन प्रतिक्षेप क्रियाये सभी जन्तुओं में होती हैं। इसे वंशागत प्रतिवर्ती क्रियायें भी कहते हैं।
2. अनुकूलित या उपार्जित प्रतिवर्ती क्रिया (Contingent or obtained reflex activity)- जन्मजात तथा स्वाभाविक क्रियाओं के आलावा कुछ ऐसी प्रतिवर्ती क्रियायें होती हैं जिनको जन्तु अपने जीवनकाल में विकसित करता है अथवा उपार्जित करता है। ऐसी प्रतिवर्ती क्रियाओं को अनुकूलित प्रतिवर्ती क्रियायें कहते हैं। इस तथ्य को सर्वप्रथम रूसी वैज्ञानिक पैवलाव (Pavlov) ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपना प्रयोग कुत्ते पर दर्शाया।
प्रयोग- पैवलाव ने एक निश्चित समय पर कुत्ते को भोजन देने की व्यवस्था शुरु की। भोजन को देखकर कुत्ते के मुँह से लार का स्राव प्रारम्भ हो गया। तत्पश्चात्। घण्टी बजाने की ही केवल व्यवस्था हुई. भोजन नहीं दिया गया, परिणाम यह हुआ कि कुत्ते के मुँह से लार स्त्राव बन्द हो गया। इसके बाद घण्टी बजाकर भोजन देने की व्यवस्था की गयी।
देखा गया कि कुत्ते के मुँह से लार का स्त्राव फिर से प्रारम्भ हो गया। कुछ दिनों तक यह अभ्यास जारी रखा गया तथा बाद में घंटी बजाकर भोजन हटा लिया गया। देखा गया कि कुत्ते के मुँह में लार का स्त्राव पहले की तरह ही था। कहने का मतलब यहाँ है की कुत्ते ने खुद ही पैदा किया ,उसमे जनम जात नहीं था। यही विशेषता उपार्जित लक्षण कहलाती है।
उत्तर :प्रतिवर्ती क्रिया– चाप के रूप में वह पथ जिससे होकर प्रतिवर्ती क्रिया सम्पन्न होती है, प्रतिवर्ती चार
प्रतिवर्ती चाप कहलाता है। इस चाप में अग्रलिखित अवयव या घटक अथवा उपादान (parts) भाग लेते हैं-
● ग्राही अंग (Receptors)- शरीर की त्ववा, पेशियों या दूसरे अंगों में उपस्थित ये अंग विभिन्न प्रकार के उद्दीपनों boosts) को ग्रहण करने का कार्य करते हैं।
● संवेदना मार्ग (Tactile way)- ग्राही अंगों के उद्दीपनों का संचरण संवेदी न्यूरॉनों में होता है जो संवेदना मार्ग को निर्मित करते हैं।
● तंत्रिका केन्द्र (Operational hubs)- मस्तिष्क और मेरूरज्जु (spinal string) संवेदना मार्ग द्वारा प्राप्त सूचनाओं के आधार पर उचित आदेश देने का कार्य करते हैं।
● चालक मार्ग (Engine way)- तंत्रिका केन्द्र द्वारा आदेशों के संचरण चालक न्यूरॉनों (engine neurons) द्वारा कार्यकारी अंगों तक पहुँचाया जाता है। इन्हीं संचरण अथवा चालक न्यूरॉनों द्वारा चालक मार्ग निर्मित होता है।
• अभिवाही अंग (Effectors)- इनके द्वारा तंत्रिका केन्द्र से प्राप्त आदेशों के अनुसार कार्य संपादित होता है।
उत्तर :केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Focal sensory system) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र एक खोखली नली के समान रचना है जिसका एक सिरा फूला रहता है। इस फूले भाग को मस्तिष्क (Cerebrum) कहते हैं तथा नली वाले भाग को मेरुरज्यू (Spinal string) कहते हैं। इसमें निम्नलिखित रचनायें पायी जाती हैं-
(I) भेट्रिकल (Ventricles)- मस्तिष्क के चौड़े खोखले भाग को Ventricles कहते हैं। इनमें CSF भरा रहता है।
(2 ) सेन्ट्रल केनाल (Focal channel)- मेरुरज्जू के पतले खोखले भाग को Focal waterway कहते हैं।
(3 ) मस्तिष्क आवरण (Meninges)- मस्तिष्क तथा रोदरज्जु एक सुरक्षात्मक आवरण द्वारा घिरे रहते हैं। इस आवरण को मस्तिष्क आवरण कहते हैं। मस्तिष्क आवरण तीन झिल्लियों द्वारा गठित होता है।
उत्तर :तंत्रिका तंत्र का वर्गीकरण (Order of sensory system)- अध्ययन की सुगमता हेतु तंत्रिका तंत्र करे को तीन भागो में बाँटा जा सकता है।
1. केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Focal sensory system)- यह तंत्र मस्तिष्क (Mind) तथा रीढ़रज्जु (Spinal line) द्वारा गठित होता है।
2. परिधीय तंत्रिका तंत्र (Fringe anxious system)-यह तंत्र 12 जोड़ी कपल तंत्रिकाओं (Cranial nerves) तथा 31 जोड़ी मेरु तंत्रिकाओं (Spinal nerves) द्वारा गठित होता है।
3. अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र (Autonomic sensory system)- यह तंत्र सिम्पैटिक (Thoughtful)
पैरासिम्पैथेटिक (Para thoughtful) नर्भ द्वारा गठित होता है।
उत्तर :पायामेटर तथा आर्कन्वायड मेटर के मध्य सब आर्कन्वायड स्थान (Sub arachnoid space) पाया जाता है जिसमें उपस्थित द्रव को C.S.F. कहते हैं ।
• मस्तिष्क – रीढ़रज्जु ऊपरी फूला हुआ तथा विकसित भाग जो खोपड़ी के क्रेनियम (Cerebrum Box) में सुरक्षित रहता है उसे मस्तिष्क कहते हैं। यह बुद्धि, स्मरण, ज्ञान आदि का प्रमुख केन्द्र है। मस्तिष्क, खोपड़ी के आधार पर उपस्थित एक छिद्र फोरामेन मैगनम (Foramen magnum) द्वारा रीढ़रज्जू से जुड़ा रहता है।
मनुष्य का मस्तिष्क पूर्ण विकसित रहता है। इसका वजन लगभग 1.36 Kg. तथा आयतन लगभग 1500 c.८. होता है। इसमें लगभग 10″ न्यूरान पाये जाते हैं तथा असंख्य न्यूरोग्लिया उपस्थित रहते हैं। मस्तिष्क को तीन भागों में बाँटा जाकर सकते हैं-(1 ) अग्रमस्तिष्क (2 ) मध्यमस्तिष्क (3 ) पश्च मस्तिष्क।
(1 ) अग्रमस्तिष्क :- अग्रमस्तिष्क यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा तथा सामने का भाग है। इसमें निम्नलिखित रचनायें
• प्रमस्तिष्क (Cerebrum) – यह मनुष्य के मस्तिष्क का सबसे बड़ा तथा प्रमुख भाग है। इससे निम्न रचनायें उपस्थित रहती है-र्टस (Cort) यह प्रमस्तिष्क का बाहरी भाग है। यह न्यूरानों के साइटान द्वारा गठित होता है जिसे धूसर पदर्श (Grey matter) कहते हैं।
इसका क्षेत्रफल लगभग 2200 वर्ष से० मी० होता है जो खोपड़ी के अन्तः क्षेत्रफल का तीन गुना होता है। इस विशाल क्षेत्रफल को थोड़े भाग में रखने के लिए कार्टेक्स घुमावदार रूप में ऐंठनदार (Convoluted) हो जाता है। जिस व्यक्ति में यह जितना ही ऐंठनदार होता है वह व्यक्ति उतना ही बुद्धिमान होता है।
• मलकसाहस Sunnd) कार्टेक्स के ऐंठन से उत्पन्न खांचा को सलकस तथा ऐंठनदार उभरे हुए भाग को गाइरस कहते है।
• मेडूला (Medulla) यह सेरीबम का भीतरी भाग है। यह तंत्रिका तन्तुओं (Nerve fibres) द्वारा गठित होता है। जिसे सफेद पदार्थ (White matter) कहते हैं।
(2)मध्यमस्तिष्का (Mid Mind) ;- यह मस्तिष्क का सबसे छोटा भाग है। उसके उसके पृष्ट भाग को टेक्टम कहते है। तथा अगर भाग को सेरेब्रम पेडणकल कहते है। यह फूली हुई तंत्रिकाओं से गठित होता है। जिन्हें Corpora quadrigernuna कहते है।
मध्यमस्तिष्का का कार्य (Capability of mid Mind)- (1) यह दृष्टि को नियंत्रित करता है। (2 ) पेशियों को गति तापक्रम तथा शौर का संतुलन नियंत्रित करता है।
(3 ) पशच मस्तिष्क (Rear Cerebrum): यह मस्तिष्क का निचला भाग है। इसे दो भागों में बांटा जा सकता है-(1 ) सेरीबेलम (2 ) पोन्स
• सेरीबेलम (Cerebellum) – यह पश्च मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है जो पोन्स तथा मेडूला ओवलांगाटा के मध्य स्थित रहता है। यह दो अर्द्धगोलों में विभक्त रहता है। ये दोनों अर्द्धगोलक भर्मिस (Vermis) नामक रचना द्वारा जुड़े रहते हैं।
इसके सतह पर खांच (Wrinkles) तथा फिसर (Crevices) पाये जाते हैं। इसके सतह पर उपस्थित उभार को सेरीबेलर फोलिया (Cerebellar folia) कहते हैं। इसके बाहरी भाग में धूसर पदार्थ (dim matter) तथा भीतरी भाग में सफेद पदार्थ (White matter) पाया जाता है।
कार्य (Capability)- (I) शरीर का सन्तुलन बनाये रखना (ii) शरीर की विभिन्न गतिविधियों में पेशियों से सामन्जस्य स्थापित करता है।
• पोन्स (Pons) – यह मध्य मस्तिष्क के आधार के नीचे स्थित रहता है। शरीर के सभी भागों को तंत्रिकाएँ इसी से डेकर गुजरती हैं।
कार्य (Capability) (1) पाचन तंत्र की अनुकम्पी (Autonomic) क्रियाओं को नियंत्रित करता है। (2) श्वसन को नियंत्रित करता है। (3) हृदय की धड़कन को नियंत्रित करता है। (4) यह भोजन को चचाने तथा निगलने में सहायता करता है। (5) लार, पसीना, गैसट्रिक रस (Gastric juice) के स्राव को नियंत्रित करता है।
(Q )रीढ़रज्जू (Spinal line) का वर्णन करो।
उत्तर :रीढ़रज्जू (Spinal line) – “केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का बेलनाकार भाग जो मेडूला आबलांगाटा के पश्य भाग से लेकर दूसरे कटि केशुरूका (Second lumbar vertebra) तक कशेरुक नल के अन्दर स्थित रहता है उसे रीढ़रज्जू (Spinal rope) कहते हैं।”
रीढ़रज्जू की मनुष्य में लम्बाई लगभग 45 cm. तथा चौड़ाई 1.25cm. है। इसकाऊपरी सिरा खोपड़ी के फेरमें मैग्नम (Foramen magnum) छिद्र द्वारा मेडूलाओवलांगाटा से जुड़ा रहता है तथा निचला सिरा द्वितीय कटि कशेरुका के प्रारम्भ तक होता है जिसे कोनस मेडूलरीस (Conus medularis) कहते हैं। कोनस मेडूलरीस से तन्तुमय रचनाएँ निकलती हैं जिसे फिलम टर्मिनल (Filum terminale) कहते हैं।
रीढ़रज्जू एक अटूट (Persistent) रचना है लेकिन यह 31 खण्डों युक्त कार्यकारी रचनाओं द्वारा गठित होता है जिसमें से 8 ग्रीवा (Cervical), 12 वक्षीय (Thoracic), 5 कटि प्रदेशीय (Lumbar), 5 श्रेणी प्रदेशीय (Sacral) तथा कोएसीजील (Coecygeal) होती है। प्रत्येक खण्ड से एक जोड़ी मेरु तंत्रिकाएँ (Spinal nerves) निकलती हैं। अर्थात् कुल 31 जोड़ी मेर तंत्रिकाएँ उपस्थित रहती हैं।
रीढ़रज्जू के मध्य में एक नाल उपस्थित रहता है जिसे केन्द्रीय नाल (Focal channel) या न्यूरो सील (Neurocoel) कहते हैं। यह नाल Mind के चतुर्थ निलय (Ventricle) तक फैला रहता है। इस नाल की दिवार मोटो होती है। भीतरी दिवाल धूसर पदार्थ (Dark matter) तथा बाहरी दीवाल सफेद पदार्थ (White matter) की बनी होती है। इस न्यूरोसील में CSF भरा रहता है।
(Q )मनुष्य के ज्ञनेन्द्रियाँ का परिचय दो। उदहारण के साथ वर्णन करो ?
उत्तर : मनुष्य के शरीर में पॉँच ज्ञनेन्द्रियाँ पायी हैं तथा प्रत्येक ज्ञनेन्द्रियाँ किसी विशेष प्रकार के उद्दीपन को ग्रहण करती है ,जैसे
आँखे –देखने में मदद करती है। रंग और प्रकाश का ज्ञान करवाती है।
कान – आवाज सुनने में मदत करती है। और शरीर के संतुलन को बनाए रखती है।
नाक –गंध और सुगंध की जानकारी देती है और श्वाश लेने में मदद करती है।
जीभ –स्वाद का ज्ञान दिलाती है। बोले में मद्दद करती है। भोजन चबाने में सेहत प्रदान करती है।
त्वचा :स्पर्श का ज्ञान करवाती है। शरीर के पेशियों की रक्षा करती है। उतसर्जित पदार्थ को तयागति है।
(Q )आँखों का परिभाषा देते हुए उसकी कार्य और स्तिथि का वर्णन करो।
उत्तर :आँख (Eye) – जिसके द्वारा दृष्टि की अनुभूति प्राप्त होती है उसे आँख कहते हैं। ऊपरी पलक में अश्रु ग्रन्थि (Lacrymal organ) पाई जाती हैं जो आँखों को नम रखती है।
कार्य (Capability)- (I) आँख में धूलकण जलकण आदि के प्रवेश को रोकते हैं। (ii) आँसू ग्रन्थि के स्राव को सम्पूर्ण कनजकटिभा पर फैला कर आँखों को नम बनाये रखते हैं। (iii) बाहरी आघातों से रक्षा करते हैं। (iv) तीव्र प्रकाश के समय बन्द होकर आँख के संवेदी आवरणों की सुरक्षा करते हैं।
स्थिति (Position) – मनुष्य में एक जोड़ी आँख खोपड़ी के अग्र भाग में नेत्र कोटर (Eye circle) में स्थित रहती है। इनके ऊपर दो पलकें पायी जाती हैं। मनुष्य की आँख को मुख्यतः चार भागों में बांटा गया है (1) नेत्र गोलक (Eye ball) (2)रक्षात्मक भाग (Defensive section) (3) नेत्र पेशियाँ (Eye muscles) (4) आंसूग्रन्थि (Tear organs)
उत्तर :राड कोशिका के निर्माण में विटामिन A जरूरत होता है। विटामिन A न रहे तो राड कोशिका नष्ट हो जाती हैं। जिसके कारण रतौंधी होता है।
उत्तर :लेंस (Lense) – नेत्र गोलक के सामने एक गोलाकार उभय उत्तल (Biconvex) लेंस पाया जाता है जो कोर्निया से लगभग 2 mm पीछे स्थित रहता है। यह ससपेंसरी लिगामेंट द्वारा झूलता रहता है। यह आँख को दो तरल युक्त प्रकोष्ठ में विभाजित करता है। कोर्निया दथा लेंस के बीच के भाग को एकुवस या अग्र प्रकोष्ठ (Fluid chamber) तथा लेंस के पीछे भाग को भिट्स या पश्च प्रकोष्ठ (Glassy chamber) कहते हैं।
कार्य (Capability) – (I) लेंस प्रकाशीय किरणों को वर्तित तथा रेटिना पर फोकस होने में सहायता करता है। (2 ) रेटिना पर वास्तविक प्रतिविम्ब बनने में सहायता करता है।
उत्तर :उल्लू के रेटिना में केवल Bars पाये जाते हैं जिसके कारण यह रात को देख सकता है। कुत्ता, बिल्ली तथा अन्य रजनीचर जन्तुओं (Nighttime) की आँखों में Poles कोशिकाओं की संख्या बहुत अधिक होती है जिसके कारण ये रात के समय भी देख सकते हैं लेकिन कोन की संख्या बहुत कम या नहीं होती है जिससे इन्हें रंग भेदा को जानकारी नहीं हो पाती।
बिल्ली, कुत्ता, गाय, भैंस आदि पशुओं की आँखें रात में चमकती हैं, इसका कारण यह है कि इनके रेटिना की ऊपरी पर्त वर्णक स्वर (Pigmented layer) में चाँदी के समान चमकते हुए गुआनिन (Guanin) संयोजी उत्तक या वर्णक पदार्थ पाये जाते हैं जिन्हें टेपिडम लुसिडम (Tapetum Lucidum) कहते हैं। ये रेटिना पर अतिरिक्त प्रकाश फेंकते य परावर्तित करते हैं जिसके कारण इनकी आँखें रात को चमकती हैं तथा इन्हें रात को दिखाई भी पड़ता है।
• मोतियाबिन्द (Waterfall) – मोतियाबिन्द आँखों का एक सामान्य रोग है। प्रायः पचपन वर्ष की आयु से अधिक के लोगों में मोतियाबिन्द होता है, किन्तु युवा लोग भी इससे प्रतिरक्षित नहीं है। मोतियबिन्द विश्व भर में अंधत्त्व के मुख्य कारण हैं। शल्य क्रिया ही इसका एकमात्र उपचार है, जो सुरक्षित एवं आसान प्रक्रिया है।
आँखों के लेंस आँख से विभित्र दूरियों की वस्तुओं पर ध्यान केन्द्रित करने में मदद करता है। समय के साथ लेंस अपनी पारदर्शिता खो देता है तथा अपारदर्शी हो जाता है। लेस के धुंधलेपन को मोतियाबिन्द कहा जाता है। दृष्टिपटल तक प्रकाश नहीं पहुँच पाता है एवं धीरे-धीरे दृष्टि में कमी अन्धता के बिन्दु तक हो जाती है। ज्यादातर लोगों में अंतिम परिणाम धुंधलापन एवं विकृत दृष्टि होती है।
मोतियाबिन्द के कारण – मोतियाबिन्द के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिसमें सबसे आम वृद्धावस्था का मोतियाबिन्द है, जो 50 से अधिक आयु वाले लोगों में विकसित होता है। वे लोग जो सिगरेट के पुर्ण, पराबैंगनी विकिरण या कुछ दवाओं के सम्पर्क में रहते हैं, उन्हें भी मोतियाबिन्द होने का खतर। होता है। मुक्त कण और ऑक्सीकरण एजेंन्ड्स भी आयु सम्बन्धी मोतियाबिन्द के होने से जुड़े हैं।
इसके लक्षणों में समय के साथ दृष्टि के क्रमिक गिरावट, वस्तुएं धुंधली, विकृत, पीली या अस्पष्ट दिखाई देती हैं। रात में अथवा कम रोशनी में दृष्टि में कमी होना रात में रंग मलिन दिखाई दे सकते हैं या रात की दृष्टि कमजोर हो सकती है। धूप या तेज रोशनी में दृष्टि चमक से प्रभावित होती है। चमकदार रोशनी के चारों ओर कुण्डल दिखाई देते हैं। मोतियाबिन्द से खुजली, आंसू आना या सिर दर्द नहीं होता है।
मोतियाबिन्द के उपचार –वर्तमान में लेंस की पारदर्शिता की पुनस्र्थापित करने वाली कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। चश्मे मदद नहीं कर पाते क्योंकि प्रकाश की किरणे आँखों से पारित नहीं हो पाती है। शल्यक्रिया के द्वारा हटाना ही मोतियाबिन्द के इलाज का एकमात्र तरीका है।
मोतियाबिन्द सर्जरी के विभिन्न प्रकार होते है। यदि दृष्टि केवल कुछ धुंधली हो तो मोतियाबिन्द का इलाज करने की आवश्यकता नहीं होती है। बस चश्मे बदलने से दृष्टि के सुधार में मदद मिलती है, लेकिन केवल थोड़े समय के लिए। सर्जरी तब करनी चाहिए जब मरीज को अपनी पसंद की चीजें करने के लिए पर्याप्त दिखाई न दें।
(1 .e )जन्तुओ में प्रचलन एक प्रकार की पर्तिकिर्या :
उत्तर :जिस प्रक्रिया द्वारा कोई सजीव स्वतः या उद्दीपन के प्रभाव से अपने अंग परिवर्तन के माध्यम से स्थान परिवर्तन करते है। उसे प्रचलन कहते है
उत्तर :गति (Movement):-
1. इसमें सजीवों द्वारा सम्पूर्ण रूप से स्थान परिवर्तन नहीं होता।
2. इस क्रिया में सजीव के किसी विशेष अंग की स्थिति में परिवर्तन होता है।
3. गति के द्वारा हमेशा प्रचलन सम्भव नहीं है।
4. किसी स्थान पर स्थिर रहकर अंगों के संचालन द्वारा गति सम्भव होती है।
5. गति प्राय: पौधों में होती है, अपवाद भालवाक्स (Volvox) क्लेमाइडोमोनास (Chlamydomonas)
प्रचलन (Locomation):-
1. इसमें सजीव अपना स्थान सम्पूर्ण रूप से परिवर्तन करते हैं।
2. इस क्रिया में सजीव के सम्पूर्ण अंग की स्थिति में परिवर्तन होता है।
3. प्रचलन द्वारा गति का होना हमेशा सम्भव है।
4. किसी स्थान पर स्थिर रह कर प्रचलन सम्भव नहीं है।
5. प्रचलन प्रायः जन्तुओं में होता है, अपवाद स्पंज (Sponge) कोरल (coral) etc.
उत्तर : अमीबा में प्रचलन जीवद्रव्य (Cellular material) के द्वारा प्रदर्शित होती है। जीवद्रव्य के आकार में परिवर्तन के फलस्वरूप कूटपाद (Pseudopo-dia) का निर्माण होता है। इस कूटपाद द्वारा अमीबा एक स्थान से दूसरे स्थान तक चलते हैं। अमीबा में चलन की क्रिया को अमीबायी गति (Amoeboid development) कहते हैं।
कूटपाद के निर्माण के सम्बन्ध में विभित्र वैज्ञानिकों ने अपना अलग-अलग सिद्धान्त प्रतिपादित किया। सर्वप्रथम हायमेन (Hymen,1917) ने इस मत को व्यक्त किया जिसकी पुष्टि Pole, 1925 तथा Pantin, 1926 ने की। इन वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिपादित Gel-Sol Hypothesis सबसे अधिक सर्वमान्य है।
उत्तर :-मछलियों का प्रचलन अंग पंख (balances) है लेकिन फिन्स के साथ-साथ जुड़ी हुई पेशियाँ मछलियों के प्रचलन में सहायक हैं। अतः मछलियों में प्रचलन पेशियों तथा पंख द्वारा सम्पन्न होता है।
उत्तर :प्रचलन क्रिया में v आकार वाली मायोटोन पेशियों के संकुचन तथा चित्र 1.22 मछली में प्रचलन के समय शरीर व पंखों की स्थिति प्रसारण के फलस्वरूप मछलियों के शरीर में गति उत्पन्न होती है। मायोटोन (Myotone) पेशियाँ वर्टीब्रा (Vertebra) के दोनों तरफ वक्ष से पूंछ तक क्रमवद्ध रूप से सजी रहती हैं। ये पेशियाँ मछली के शरीर के एक ओर संकुचित होती हैं तो दूसरी तरफ इनमें प्रसारण होता है।
जब बायें पक्ष की मायोटोम पेशियों में संकुचन होता है तो दाहिने तरफ की पेशियों में प्रसारण होता है। फलस्वरूप मछली का शरीर बांयें तरफ झुक जाता है। इसके पश्चात् यही क्रिया ठीक विपरीत दिशा में होती है फलस्वरूप मछलियों का शरीर दाहिनी तरफ झुकने लगता है। इस झुकाव से मछली के पूंछ पर एक प्रकार का प्रतिक्रियात्मक बल कार्य की श करता है जो मछली को आगे की ओर बढ़ने में सहायता करता है।
उत्तर : मछलियों में कुल 7 पंख होते हैं जिसमें दो युग्म (Matched) तथा तीन एकल (Single) होते हैं। युग्म पंख में एक जोड़ी पृष्ठफिन या पेक्टोरल (Pectoral Blades) तथा एक जोड़ी वक्ष फिन पेल्विक (Pelvic Balances) होती हैं। पेल्विक पंख द्वारा मछली जल की गहराई में प्रवेश करती है। पेक्टोरल पंख (Pectoral Balances) की जमी सहायता से जल के सतह पर आती है। पूछीय पंख (Caudal balance) तैरते समय दिशा परिवर्तन का कार्य करती है जिसे मछलियों प्रोपेलर कहते है
उत्तर : – मनुष्य में चलन (Motion in Man) :- दो पैरों पर शरीर के संपूर्ण भार को सम्भालते हुए स्थानान्तरण की क्रिया को बाइपेडल प्रचलन गति कहते हैं। इस प्रकार की सक्रिय प्रचलन गति मनुष्य में होती है।
मनुष्य में द्विपादीय (Bipidal) गति मनुष्य में दो पावों का परिचलन निम्न प्रकार से होता है-
(1) सामने की ओर शरीर का झुकाव- प्रचलन की शुरूआत में कुल्हा, जांघ और अलग-बगल की पेशियों को सिथिल रखने के उद्देश्य से शरीर का ऊपरी अर्द्ध भाग सामने की ओर झुक जाता है।
(2 ) एड़ी का उठना – अब बायें पैर की एड़ी जमीन से ऊपर उठ जाती है जिससे शरीर के बायें तरफ का भार केवल पैर की अंगुलियों के ऊपर ही केन्द्रित हो जाता है।
(3 ) पैर का ऊपर उठना तथा घुटने का मुड़ना
– जाँघ की संधि (joints) मुड़ कर बायें पैर को ऊपर उठा कर पीछे की ओर झुका देती है।
(4 ) शरीर के संपूर्ण भार का दायें पाँव पर केन्द्रीकरण – बायें पैर के उठने के साथ-साथ शरीर का
संपूर्ण भार दायें पैर पर आ जाता है। दायें कुल्हे की कुछ पेशियाँ संकुचित होकर इस भार को नियंत्रित करती है।
क्यों
(5 ) एड़ी-संधि का मुड़ना – अब बायें पैर की एड़ी-संधि मुड़कर पैर आगे की तरफ कर देती है।
(6 ) बायें पैर का आगे बढ़ना – बायें पैर की पेशियाँ संकुचित होकर कुल्हे को फैला देती हैं और पाँव सामने की
(7 ) बायें पैर का पुनः- जमीन पर स्थिर होना – अब बायें पैर की एड़ी जमीन पर पड़ती है, साथ-साथ तलवा भी जमीन से स्पर्श करता है और पैर सीधा हो जाता है।
(8 ) दायें पैर का आगे बढ़ना – बायें पैर पर शरीर का आधा भाग स्थिर होता है और दायां पैर आगे बढ़ने की स्थिति में आ जाता है। पहले एड़ी ऊपर उठती है इसके बाद घुटना मुड़कर पूरे पाँव को जमीन से ऊपर उठा लेता है। अब दायाँ पाँव आगे बढ़कर पुनः अपनी एड़ी और अंगुलियों द्वारा जमीन पर स्थिर हो जाता है। इस प्रकार बायाँ और दायाँ पैर क्रमबद्ध रूप से जमीन से उठकर सामने की ओर बढ़ता है।
उत्तर :पेशियाँ (Muscles) अस्थि संधि के अलावे कंकाल पेशियाँ भी प्रचलन में सहायता प्रदान करती हैं। पेशियाँ एक प्रकार की उत्तक हैं जो पेशी तन्तुओं या कोशिकाओं द्वारा निर्मित होती हैं। मांसपेशिया जो लिगामेंट और टेंडल की सहायता से अस्थियों द्वारा जुड़ी होती हैं। कंकाल पेशिया (skeletal muscles) कहलाती हैं।
पेशियों का प्रकार (Sort of muscles) :- कार्य तथा बनावट के अनुसार पेशियाँ निम्न प्रकार की होती हैं (1) ऐक्षिक पेशियाँ (Willful muscles) or Skeletal muscles (2) अनैक्षिक पेशियाँ (Compulsory) or Instinctive muscles (3) हृदय पेशियाँ (Cardic muscles) I
(1 ) ऐच्छिक पेशियाँ (Deliberate muscles) – वे पेशियाँ जिन्हें इच्छानुसार संचालित अर्थात् संकुचित तथा प्रसारित किया जा सकता है। इन पेशियों पर सफेद तथा काले रंग का दाग रहता है। अतः इसे चिन्हित (striped muscles) कहते हैं। ये पेशियाँ अस्थिबों से जुड़ी रहती हैं अतः इन्हें कंकाल पेशियाँ (Skeletal muscles) भी कहते हैं।
(2) अनैच्छिक पेशियाँ (Compulsory or instinctive muscles) – वे पेशियाँ जिन्हें इच्छानुसार संचालित नहीं किया जा सकता तथा इन पर सफेद या काला चिन्ह नहीं पाया जाता; अतः इन्हें अरेखित पेशियाँ (Unstriped muscles) कहते हैं। जैसे-आहार नाल, मूत्राशय आदि की पेशियाँ।
(3) हृदय पेशियाँ (Cardic muscles) हृदय की गठित पेशियों को हृदय पेशियाँ (Cardic muscles) कहते हैं।
लघुत्तरी प्रशन :
1 .सुप्रवाही शरीर किसे कहते हैं? पंखों के कार्यों को लिखी।
उत्तर :-सुप्रवाही शरीर वह शरीर है जिसमें रक्त की प्रवाह की प्रक्रिया होती है। पंखों के कार्य में रक्त को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाना शामिल है।
2. गति एवं प्रचलन में अन्तर लिखो।
उत्तर :गति और प्रचलन में अंतर इस बात को दर्शाता है कि गति वह धारिता है जिसमें समय के साथ स्थिति का परिवर्तन होता है, जबकि प्रचलन वह धारिता है जिसमें समय के साथ स्थिति में परिवर्तन नहीं होता है।
3. सजीवों में प्रचालन के दो उद्देश्यों को लिखो।
उत्तर :सजीवों में प्रचालन के दो उद्देश्य हैं: जीवन की धारा को बनाए रखना और पोषण के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त करना।
4. किस धन्धि द्वारा GTH को स्राव होता है?
उत्तर :- GTH (ग्रोथ हार्मोन) को स्राव पिट्यूटरी ग्लैंड के द्वारा होता है।
5. हार्मोन्स को रासायनिक दूत की संज्ञा क्यों दी गई है?
उत्तर :हार्मोन्स को रासायनिक दूत की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि ये शरीर में रक्त प्रवाह करने के लिए शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचते हैं, जिससे उनका संदेश पहुंचता है।
6. IAA का पूरा नाम लिखो।
उत्तर : IAA का पूरा नाम “इंडोल एसिटिक एसिड” है।
7. घेघा से कोई रीड़ित क्यों होता है?
उत्तर :- घेघा से कोई रीड़ित होता है क्योंकि उसकी नाली में घटिया नमक पाया जाता है, जिससे वह पानी अधिक आत्मविकसित करने के लिए जल में संतुलन को बनाए रख सकता है।
8 .स्थानीय हार्मोन किसे कहते है ?
उत्तर :स्थानीय हार्मोन वे हार्मोन होते हैं जो केवल निकट उत्सर्जन करने वाले ग्रंथियों में ही प्रभावित कार्य करते हैं, जैसे कि थाइरॉइड हार्मोन जो थाइरॉइड ग्रंथि में उत्सर्जित होते हैं। इन हार्मोनों का प्रभाव उन ग्रंथियों और उनके प्रत्यक्ष आसपासी क्षेत्रों पर ही होता है।
9. पार्थनोकार्यों की परिभाषा लिखो।
उतर:पार्थनोकार्य एक ऐसी क्रिया है जिसमें एक संगतियों या उद्देश्य के लिए अलग-अलग उपादानों को जोड़ा जाता है।
10 तंत्रिका तंत्र को मुख्य कार्य क्या है ?
उत्तर :तंत्रिका तंत्र का मुख्य कार्य प्राणियों में ऊर्जा स्थायित्व को बनाए रखना है।
11. सरल प्रतिक्षेप क्रिया किसे कहते हैं? एक उदाहरण दो।
उत्तर : सरल प्रतिक्षेप क्रिया एक प्रकार की गतिक्रिया है जिसमें एक पादानुक्रमिक अवधि के बाद कोई परिणाम होता है। उदाहरण: दिन की प्रारंभिक बिजली का प्रसारण।
12. न्यूरॉन की परिभाषा लिखो।
उत्तर :न्यूरॉन एक संयोजन तंत्र होता है जो तंत्रिका तंत्र के रूप में प्राणी के शरीर में ऊर्जा और संकेतों को प्रेषित करने में सहायक होता है।
1 3 . नेत्र गोलक के तीन पटल कौन-कौन हैं?
उत्तर : नेत्र गोलक के तीन पटल हैं – छिपकली पटल, परवतीय पटल, और स्त्री पटल।
14: अध विन्दु किसे कहते हैं?
उत्तर :अध विन्दु को वह बिंदु कहते हैं जिससे दोनों आँखों की दृष्टि को एक समान किया जाता है।
15. द्विनेत्रीय दृष्टि से क्या समझते हो?
उत्तर : द्विनेत्रीय दृष्टि में एक प्राणी की दोनों आँखें एक ही दिशा में देखती हैं।
.विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
उत्तर :पौधों में विभिन्न वक्रतागतियाँ होती हैं जो उनके स्टेम, पत्तियों, और फूलों में देखी जा सकती हैं। यहाँ कुछ सोदाहरण हैं:
1. गोलाकार वक्रता: इसमें पौधे का स्टेम गोलाकार होता है, जैसे आम के पौधे का स्टेम।
2. लबाकार वक्रता:कुछ पत्तियों की आकृति लबाकार होती है, जैसे अर्कटोसिस के पत्ते।
3. कमाल वक्रता: कुछ फूलों की आकृति कमाल वक्रता होती है, जैसे गुलाब के फूल।
4. उलट वक्रता: कुछ पौधों का स्टेम उलट वक्रता होता है, जैसे तुलसी का पौधा।
5. वायुमध्य कर्णीय वक्रता:कुछ पत्तियों की आकृति वायुमध्य कर्णीय होती है, जैसे खुशबू की पत्तियाँ।
ये वक्रतागतियाँ पौधों की समृद्धि और सुंदरता में विविधता और समृद्धि उत्पन्न करती हैं।
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