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Toggleपृथ्वी एक ग्रह के रूप में
प्रस्तावना
पृथ्वी हमारे सौरमंडल का एक महत्वपूर्ण ग्रह है। यह सूर्य से दूरी के क्रम में तीसरा ग्रह है और अब तक ज्ञात ग्रहों में एक ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ मौजूद हैं। पृथ्वी पर जल, वायुमंडल, उपयुक्त तापमान और जीवन के लिए आवश्यक गैसें उपलब्ध हैं।
इस अध्याय में हम पृथ्वी की स्थिति, आकार, गति, जल और स्थल भाग, वायुमंडल तथा पृथ्वी पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों के बारे में जानेंगे।
1. पृथ्वी का सौरमंडल में स्थान
सूर्य सौरमंडल का केंद्र है। इसके चारों ओर आठ ग्रह अपनी-अपनी कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं।
सूर्य से दूरी के क्रम में ग्रह हैं—
- बुध
- शुक्र
- पृथ्वी
- मंगल
- बृहस्पति
- शनि
- अरुण
- वरुण
पृथ्वी सूर्य से तीसरा ग्रह है। सूर्य से इसकी दूरी न तो बहुत अधिक है और न ही बहुत कम। इसी कारण पृथ्वी पर जीवन के लिए उपयुक्त तापमान पाया जाता है।
2. पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?
जब पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखा जाता है तो इसका बड़ा भाग नीला दिखाई देता है। इसका मुख्य कारण पृथ्वी की सतह पर मौजूद विशाल मात्रा में जल है।
पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है, जबकि लगभग 29 प्रतिशत भाग स्थल है।
इसी कारण पृथ्वी को “नीला ग्रह” कहा जाता है।
पृथ्वी पर जल के प्रमुख स्रोत
- महासागर
- समुद्र
- नदियाँ
- झीलें
- हिमनद
- भूमिगत जल
हालाँकि पृथ्वी पर जल बहुत अधिक है, लेकिन इसका अधिकांश भाग खारा है। मनुष्य के उपयोग के लिए उपलब्ध मीठे जल की मात्रा अपेक्षाकृत कम है।
3. पृथ्वी का आकार
पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं है। इसका आकार ध्रुवों पर थोड़ा चपटा और भूमध्य रेखा के पास थोड़ा उभरा हुआ है।
इस प्रकार पृथ्वी का वास्तविक आकार जियोइड के निकट माना जाता है।
सरल शब्दों में कहा जाए तो पृथ्वी को एक ऐसा गोलाकार पिंड समझ सकते हैं जो ध्रुवों पर थोड़ा चपटा है।
4. पृथ्वी की प्रमुख गतियाँ
पृथ्वी लगातार गतिशील है। इसकी दो प्रमुख गतियाँ हैं—
(क) घूर्णन गति
पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है। पृथ्वी को अपने अक्ष पर एक पूरा चक्कर लगाने में लगभग 24 घंटे लगते हैं।
इसे घूर्णन कहते हैं।
घूर्णन गति का प्रमुख परिणाम
पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने के कारण दिन और रात होते हैं।
जब पृथ्वी का कोई भाग सूर्य के सामने होता है, वहाँ दिन होता है और जब वह भाग सूर्य से विपरीत दिशा में होता है, वहाँ रात होती है।
5. परिक्रमण गति
पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमने के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर भी चक्कर लगाती है। सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की इस गति को परिक्रमण कहते हैं।
पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 365 दिन और 6 घंटे लगते हैं।
इसी अतिरिक्त समय के कारण लगभग हर चार वर्ष में एक दिन अतिरिक्त जोड़कर लीप वर्ष बनाया जाता है।
6. ऋतुओं का परिवर्तन
पृथ्वी पर अलग-अलग ऋतुओं के होने का प्रमुख कारण पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमण गति है।
पृथ्वी की धुरी अपनी कक्षीय सतह के लंबवत से लगभग 23½° झुकी हुई है।
पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने के दौरान सूर्य की किरणें अलग-अलग क्षेत्रों पर अलग-अलग कोणों से पड़ती हैं। इसके कारण तापमान और दिन-रात की अवधि में परिवर्तन होता है तथा ऋतुओं का परिवर्तन होता है।
मुख्य ऋतुएँ हैं—
- वसंत
- ग्रीष्म
- वर्षा
- शरद
- शीत
भारत में ऋतुओं का विभाजन स्थानीय जलवायु और मानसूनी परिस्थितियों के आधार पर भी किया जाता है।
7. पृथ्वी का अक्ष
पृथ्वी के केंद्र से होकर उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा को पृथ्वी का अक्ष कहते हैं।
पृथ्वी इसी काल्पनिक अक्ष के चारों ओर घूमती है।
पृथ्वी का अक्ष उसकी कक्षा के तल के लंबवत से लगभग 23½° झुका हुआ है। यह झुकाव ऋतु परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
8. अक्षांश और देशांतर
पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति जानने के लिए अक्षांश और देशांतर की सहायता ली जाती है।
अक्षांश
भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण किसी स्थान की कोणीय दूरी को अक्षांश कहते हैं।
भूमध्य रेखा को 0° अक्षांश माना जाता है।
प्रमुख अक्षांश हैं—
- भूमध्य रेखा — 0°
- कर्क रेखा — 23½° उत्तरी अक्षांश
- मकर रेखा — 23½° दक्षिणी अक्षांश
- आर्कटिक वृत्त — 66½° उत्तरी अक्षांश
- अंटार्कटिक वृत्त — 66½° दक्षिणी अक्षांश
देशांतर
प्रधान मध्यान्ह रेखा के पूर्व या पश्चिम किसी स्थान की कोणीय दूरी को देशांतर कहते हैं।
प्रधान मध्यान्ह रेखा को 0° देशांतर माना जाता है। यह रेखा इंग्लैंड के ग्रीनविच से होकर गुजरती है।
देशांतर की सहायता से समय निर्धारित करने में भी मदद मिलती है।
9. पृथ्वी के ताप कटिबंध
पृथ्वी पर सूर्य की किरणें हर स्थान पर समान कोण से नहीं पड़तीं। इसी कारण पृथ्वी को अलग-अलग ताप कटिबंधों में बाँटा गया है।
1. उष्ण कटिबंध
कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच का क्षेत्र उष्ण कटिबंध कहलाता है।
इस क्षेत्र में सूर्य की किरणें अपेक्षाकृत अधिक सीधी पड़ती हैं। इसलिए यहाँ तापमान सामान्यतः अधिक रहता है।
2. शीतोष्ण कटिबंध
उष्ण कटिबंध के दोनों ओर शीतोष्ण कटिबंध पाए जाते हैं।
यहाँ तापमान उष्ण कटिबंध की तुलना में कम होता है और ऋतुओं में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
3. शीत कटिबंध
ध्रुवीय क्षेत्रों के आसपास स्थित क्षेत्र शीत कटिबंध कहलाते हैं।
यहाँ सूर्य की किरणें बहुत तिरछी पड़ती हैं, इसलिए तापमान बहुत कम रहता है।
10. पृथ्वी का वायुमंडल
पृथ्वी के चारों ओर गैसों का एक आवरण पाया जाता है, जिसे वायुमंडल कहते हैं।
वायुमंडल में मुख्य रूप से—
- नाइट्रोजन
- ऑक्सीजन
- आर्गन
- कार्बन डाइऑक्साइड
- जलवाष्प
जैसी गैसें पाई जाती हैं।
वायुमंडल पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
वायुमंडल का महत्व
- मनुष्य और जीव-जंतुओं को साँस लेने के लिए ऑक्सीजन मिलती है।
- पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड मिलती है।
- यह पृथ्वी के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है।
- बादल, वर्षा और मौसम संबंधी घटनाएँ वायुमंडल में होती हैं।
- वायुमंडल पृथ्वी को अंतरिक्ष से आने वाले कुछ हानिकारक प्रभावों से बचाने में सहायता करता है।
11. पृथ्वी पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ
पृथ्वी को जीवन के लिए अनुकूल ग्रह बनाने वाली कई विशेषताएँ हैं।
जल की उपलब्धता
जीवन के लिए जल अत्यंत आवश्यक है। पृथ्वी पर जल ठोस, द्रव और गैसीय तीनों अवस्थाओं में पाया जाता है।
उपयुक्त तापमान
सूर्य से उचित दूरी के कारण पृथ्वी पर तापमान ऐसा है कि यहाँ जल का बड़ा भाग द्रव अवस्था में रह सकता है।
वायुमंडल
पृथ्वी का वायुमंडल जीवों के लिए आवश्यक गैसें उपलब्ध कराता है।
ऑक्सीजन
अधिकांश जीवों के लिए श्वसन में ऑक्सीजन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ओजोन परत
वायुमंडल में ओजोन की परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
12. पृथ्वी के स्थल और जल भाग
पृथ्वी की सतह को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है—
स्थल भाग और जल भाग।
प्रमुख स्थल भाग
पृथ्वी पर सात प्रमुख महाद्वीप माने जाते हैं—
- एशिया
- अफ्रीका
- उत्तरी अमेरिका
- दक्षिणी अमेरिका
- अंटार्कटिका
- यूरोप
- ऑस्ट्रेलिया
प्रमुख महासागर
पृथ्वी के प्रमुख महासागर हैं—
- प्रशांत महासागर
- अटलांटिक महासागर
- हिंद महासागर
- दक्षिणी महासागर
- आर्कटिक महासागर
महाद्वीप और महासागर पृथ्वी की भौगोलिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
13. पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह — चंद्रमा
चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है। यह पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
चंद्रमा स्वयं प्रकाश उत्पन्न नहीं करता। हमें चंद्रमा सूर्य के प्रकाश के परावर्तन के कारण चमकता हुआ दिखाई देता है।
चंद्रमा की कलाओं में परिवर्तन पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की बदलती स्थितियों के कारण दिखाई देता है।
चंद्रमा का पृथ्वी पर समुद्र की ज्वार-भाटा जैसी घटनाओं पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
14. पृथ्वी का महत्व
पृथ्वी केवल सौरमंडल का एक ग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का आधार है।
पृथ्वी पर—
- जल उपलब्ध है।
- वायुमंडल मौजूद है।
- जीवन के लिए आवश्यक गैसें हैं।
- विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु और वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
- मिट्टी कृषि के लिए उपयोगी है।
- प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं।
इसलिए पृथ्वी की रक्षा करना मानव समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
15. पृथ्वी को बचाने की आवश्यकता
मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी के पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है। वनों की कटाई, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ पृथ्वी के पर्यावरण को प्रभावित कर रही हैं।
पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए हमें—
- अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।
- जल का संरक्षण करना चाहिए।
- बिजली और ईंधन की बचत करनी चाहिए।
- प्लास्टिक का कम उपयोग करना चाहिए।
- वायु और जल प्रदूषण को कम करना चाहिए।
- प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।
- वन्यजीवों और जैव विविधता की रक्षा करनी चाहिए।
16. अध्याय का सारांश
“पृथ्वी एक ग्रह के रूप में” अध्याय से हमें पृथ्वी की स्थिति और उसकी विशेषताओं की जानकारी मिलती है।
पृथ्वी सूर्य से तीसरा ग्रह है और इसे नीला ग्रह कहा जाता है क्योंकि इसकी सतह का बड़ा भाग जल से ढका हुआ है। पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन करती है और सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करती है। घूर्णन से दिन और रात तथा पृथ्वी के अक्ष के झुकाव और परिक्रमण से ऋतु परिवर्तन होता है।
अक्षांश और देशांतर पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति निर्धारित करने में सहायता करते हैं। पृथ्वी पर जल, वायुमंडल, उपयुक्त तापमान और जीवन के लिए आवश्यक अन्य परिस्थितियाँ मौजूद हैं। यही विशेषताएँ पृथ्वी को एक जीवनयुक्त ग्रह बनाती हैं।
महत्वपूर्ण शब्दावली
ग्रह: ऐसा खगोलीय पिंड जो किसी तारे की परिक्रमा करता है।
घूर्णन: पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना।
परिक्रमण: पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना।
अक्ष: उत्तर और दक्षिण ध्रुव को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा।
अक्षांश: भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण किसी स्थान की कोणीय दूरी।
देशांतर: प्रधान मध्यान्ह रेखा के पूर्व या पश्चिम किसी स्थान की कोणीय दूरी।
भूमध्य रेखा: 0° अक्षांश की काल्पनिक रेखा।
वायुमंडल: पृथ्वी को घेरने वाला गैसीय आवरण।
जियोइड: पृथ्वी के वास्तविक आकार का लगभग प्रतिनिधित्व करने वाला आकार।
नीला ग्रह: पृथ्वी को जल की अधिकता के कारण दिया गया नाम।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1. पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?
उत्तर: पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है। अंतरिक्ष से पृथ्वी का अधिकांश भाग नीला दिखाई देता है। इसलिए पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है।
प्रश्न 2. पृथ्वी की दो प्रमुख गतियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर: पृथ्वी की दो प्रमुख गतियाँ घूर्णन और परिक्रमण हैं। अपने अक्ष पर घूमना घूर्णन और सूर्य के चारों ओर घूमना परिक्रमण कहलाता है।
प्रश्न 3. दिन और रात क्यों होते हैं?
उत्तर: पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने के कारण दिन और रात होते हैं। पृथ्वी का जो भाग सूर्य के सामने होता है वहाँ दिन और विपरीत भाग में रात होती है।
प्रश्न 4. ऋतुओं का परिवर्तन क्यों होता है?
उत्तर: पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की परिक्रमण गति ऋतु परिवर्तन के प्रमुख कारण हैं।
प्रश्न 5. अक्षांश क्या है?
उत्तर: भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण किसी स्थान की कोणीय दूरी को अक्षांश कहते हैं।
प्रश्न 6. देशांतर क्या है?
उत्तर: प्रधान मध्यान्ह रेखा के पूर्व या पश्चिम किसी स्थान की कोणीय दूरी को देशांतर कहते हैं।
प्रश्न 7. पृथ्वी पर जीवन संभव होने के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर: पृथ्वी पर जल, उपयुक्त तापमान, वायुमंडल, ऑक्सीजन तथा जीवन के लिए आवश्यक अन्य परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं। यही कारण है कि पृथ्वी जीवन के लिए अनुकूल ग्रह है।
निष्कर्ष
पृथ्वी सौरमंडल का एक विशिष्ट ग्रह है। जल, वायुमंडल और उपयुक्त तापमान जैसी विशेषताओं के कारण यहाँ जीवन संभव हुआ है। पृथ्वी की प्राकृतिक संपदा केवल मानव के लिए ही नहीं, बल्कि सभी जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए महत्वपूर्ण है।
इसलिए पृथ्वी को समझना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है पृथ्वी के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना।
🔹 A. पृथ्वी एक ग्रह के रूप में – एक पंक्ति के प्रश्न (1 अंक)
प्रश्न 1. पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह कौन-सा है?
उत्तर: चंद्रमा।
प्रश्न 2. पृथ्वी सूर्य से दूरी के क्रम में कौन-सा ग्रह है?
उत्तर: तीसरा।
प्रश्न 3. पृथ्वी को गोलाकार सर्वप्रथम किसने बताया?
उत्तर: पाइथागोरस।
प्रश्न 4. पृथ्वी के विषुवतीय और ध्रुवीय व्यास में कितना अंतर है?
उत्तर: लगभग 43 किमी।
प्रश्न 5. पृथ्वी का वास्तविक आकार क्या कहलाता है?
उत्तर: पृथ्वाकार (चपटा उपगोल)।
🔹 B. पृथ्वी एक ग्रह के रूप में -अति संक्षिप्त उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्रश्न 1. पृथ्वी को चपटा उपगोल क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी तथा विषुवत रेखा पर उभरी हुई है। इसलिए इसे पूर्ण गोल न कहकर चपटा उपगोल या पृथ्वाकार कहा जाता है।
प्रश्न 2. आइजक न्यूटन ने पृथ्वी के आकार के बारे में क्या कहा?
उत्तर:
आइजक न्यूटन ने बताया कि पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी और मध्य भाग में उभरी हुई है तथा इसकी तुलना नारंगी फल से की।
प्रश्न 3. पृथ्वी को अनोखा ग्रह क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
पृथ्वी पर जल, वायु, उपयुक्त तापमान और जीवन का अस्तित्व पाया जाता है, जो अन्य ग्रहों पर नहीं है, इसलिए इसे अनोखा ग्रह कहा जाता है।
🔹 C.पृथ्वी एक ग्रह के रूप में- कारण बताइए (3 अंक)
प्रश्न 1. प्लूटो को ग्रहों की सूची से क्यों हटाया गया?
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) के अनुसार प्लूटो अपने कक्षा क्षेत्र को पूरी तरह साफ नहीं कर पाया। इसलिए 2006 में इसे ग्रह की श्रेणी से हटाकर बौना ग्रह घोषित कर दिया गया।
प्रश्न 2. सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8 मिनट क्यों लेता है?
उत्तर:
सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी लगभग 15 करोड़ किमी है। प्रकाश की गति बहुत तेज होने पर भी इतनी अधिक दूरी तय करने में उसे लगभग 8 मिनट लगते हैं।
🔹 D.पृथ्वी एक ग्रह के रूप में- 5 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1. पृथ्वी की गोलाभ आकृति के चार प्रमाण लिखिए।
उत्तर:
पृथ्वी की गोलाभ आकृति के प्रमुख प्रमाण निम्नलिखित हैं—
समुद्र में जहाज पहले नीचे से अदृश्य होते हैं।
चंद्रग्रहण के समय पृथ्वी की छाया गोल दिखाई देती है।
उपग्रहों से ली गई तस्वीरों में पृथ्वी गोल दिखाई देती है।
पृथ्वी की परिक्रमा करके उसी स्थान पर पहुँचा जा सकता है।
प्रश्न 2. सौरमण्डल का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सौरमण्डल सूर्य तथा उसके चारों ओर परिक्रमा करने वाले 8 ग्रहों, उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं और उल्काओं से मिलकर बना है। सूर्य सौरमण्डल का केंद्र है और सभी ग्रह उसी से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
🔹 E. पृथ्वी एक ग्रह के रूप में – दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 अंक)
प्रश्न. पृथ्वी के आकार के बारे में प्राचीन एवं आधुनिक धारणाओं का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन काल में पृथ्वी के आकार को लेकर विभिन्न धारणाएँ प्रचलित थीं। प्रारंभ में कुछ विद्वानों का मानना था कि पृथ्वी चपटी है। यूनानी विद्वान पाइथागोरस ने सबसे पहले पृथ्वी को गोलाकार बताया। अरस्तू ने चंद्रग्रहण के समय पृथ्वी की गोल छाया देखकर इसकी पुष्टि की।
आधुनिक काल में वैज्ञानिक प्रयोगों और गणनाओं से यह सिद्ध हुआ कि पृथ्वी पूर्ण रूप से गोल नहीं है। आइजक न्यूटन ने बताया कि पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी तथा विषुवत रेखा पर उभरी हुई है। बाद में कृत्रिम उपग्रहों से प्राप्त चित्रों ने पृथ्वी के पृथ्वाकार (चपटा उपगोल) स्वरूप को पूरी तरह प्रमाणित कर दिया।
आज यह स्पष्ट है कि पृथ्वी का वास्तविक आकार पृथ्वाकार है, जो जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है।
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