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सुखलता राव
“फूल (फूलपरियाँ)” सुखलता राव की एक बहुत ही सुंदर और कल्पनाशील बाल कहानी है। इस कहानी में लेखिका ने बड़े ही रोचक तरीके से बताया है कि धरती पर फूल कैसे आए। कहानी में कल्पना, प्रकृति की सुंदरता और परियों की दुनिया का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। यह कहानी बच्चों को प्रकृति से प्रेम करना और फूलों की सुंदरता को समझना सिखाती है।
नीचे इस कहानी का सरल और विस्तृत सारांश दिया गया है।
सुखलता राव की कहानी फूल (फूलपरियाँ) का सारांश :
१.मनुष्य के जन्म से पेहले पथ्वी की दशा :
बहुत-बहुत पुराने समय की बात है, जब पृथ्वी पर अभी मनुष्य का जन्म भी नहीं हुआ था। उस समय धरती का रूप आज की तरह सुंदर और रंग-बिरंगा नहीं था। चारों ओर बड़े-बड़े पेड़, झाड़ियाँ और लंबी-लंबी घास उगी हुई थी। जंगल बहुत घने थे और प्रकृति शांत दिखाई देती थी।
लेकिन उस समय धरती पर एक चीज की कमी थी—फूल। आज हम धरती पर तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल देखते हैं, लेकिन उस समय ऐसा कुछ नहीं था। पेड़ों पर केवल पत्ते थे, लेकिन फूल नहीं थे।
जब सूरज की रोशनी धरती पर आती थी, तो वह चारों ओर फूलों को खोजती थी। लेकिन उसे कहीं भी फूल दिखाई नहीं देते थे। फिर वह निराश होकर वापस चली जाती थी। इसी तरह हवा भी धरती पर घूमती थी। वह पेड़ों और पत्तों को सूँघती थी, लेकिन उसे फूलों की सुगंध नहीं मिलती थी।
ऐसी सुंदर धरती पर फूलों का न होना प्रकृति के लिए भी एक कमी जैसा था। ऐसा लगता था जैसे धरती की सुंदरता अधूरी हो।
२.एक रात धरती के बागानों में फूलपरियाँ उतर आई:
फूलपरियाँ बहुत सुंदर होती थीं। वे अपने देश में फूलों के बीच रहती थीं। उनके कपड़े भी फूलों की पंखुड़ियों से बने होते थे। वे फूलों का मधु पीती थीं और फूलों की खुशबू में रहती थीं।
जब फूलपरियाँ धरती पर आईं तो उन्होंने देखा कि यहाँ चारों ओर हरियाली तो है, लेकिन फूल नहीं हैं। उन्हें यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ।
परियों ने आपस में कहा,
“इतनी सुंदर धरती है, लेकिन यहाँ फूल क्यों नहीं हैं?”
उन्हें लगा कि इस सुंदर धरती पर फूल होने चाहिए। इसलिए उन्होंने तय किया कि वे अपने देश से फूलों के बीज लाकर यहाँ लगाएंगी।
फिर फूलपरियाँ अपने देश लौट गईं और वहाँ से बहुत सारे फूलों के बीज लेकर आईं।
३.फूलपरियाँ ने उन बीजों को धरती के वनों में छींट दिया :
फूलपरियाँ रात के समय चुपचाप धरती के जंगलों और बागानों में घूमने लगीं। उन्होंने अपने साथ लाए हुए फूलों के बीज धरती पर हर जगह बिखेर दिए।
कुछ समय बाद उन बीजों से छोटे-छोटे पौधे निकलने लगे। धीरे-धीरे वे पौधे बड़े होने लगे और उनमें सुंदर कलियाँ आने लगीं।
कुछ दिनों बाद वे कलियाँ खिल गईं और जंगल रंग-बिरंगे फूलों से भर गया। वहाँ सफेद, नीले, पीले, लाल और बैंगनी रंग के सुंदर फूल खिलने लगे।
अब धरती का रूप पूरी तरह बदल गया। जहाँ पहले केवल पत्ते और घास थी, वहाँ अब सुंदर फूल खिलने लगे थे।
जब सूरज की रोशनी उन फूलों पर पड़ी तो वे और भी सुंदर लगने लगे। हवा आई और फूलों को धीरे-धीरे झुलाने लगी। फूलों की खुशबू चारों ओर फैलने लगी।
फूलों की सुगंध से आकर्षित होकर मधुमक्खियाँ भी वहाँ आ गईं। वे फूलों का मधु पीने लगीं और चारों ओर गुनगुनाने लगीं।
इस प्रकार धीरे-धीरे पूरी धरती फूलों से भर गई और बहुत सुंदर दिखाई देने लगी।
४.क्या आज भी फूलपरियाँ आती है :
कहानी के अंत में लेखिका एक सुंदर कल्पना प्रस्तुत करती हैं। वह कहती हैं कि शायद आज भी फूलपरियाँ धरती पर आती होंगी।
लेकिन वे उन जगहों पर नहीं आतीं जहाँ बहुत ज्यादा लोग रहते हैं। वे केवल शांत और घने जंगलों में आती हैं।
जब रात होती है और चाँद आसमान में निकलता है, तब फूलपरियाँ चुपचाप जंगलों में उतरती हैं। वे फूलों के बीच हाथों में हाथ डालकर पूरी रात नृत्य करती हैं।
वे फूलों के बीच खेलती हैं और उनकी खुशबू का आनंद लेती हैं।
लेकिन जैसे ही सुबह होने लगती है, वे वापस अपने देश चली जाती हैं। जब सुबह लोग जंगल में जाते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है कि घास झुकी हुई है, जैसे किसी ने वहाँ नृत्य किया हो।
ऐसा लगता है जैसे परियों के पैरों के निशान घास पर रह गए हों।
लेकिन किसी ने भी सचमुच फूलपरियों को देखा है या नहीं, यह एक रहस्य ही है।
कहानी से मिलने वाली शिक्षा
इस कहानी से हमें कई सुंदर बातें सीखने को मिलती हैं—
प्रकृति बहुत सुंदर और अनमोल है।
फूल धरती की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
हमें प्रकृति और फूलों की रक्षा करनी चाहिए।
कल्पना और कहानी बच्चों के मन को खुश कर देती है।
.फूल पाठ का खाली स्थान :
१.कच्चा आम खाने में खट्टा और पक्का आम खाने में मीठा होता है।
२.झूला बार-बार ऊपर जाता है फिर नीचे आता है।
३.सूरज के उठते ही चारों ओर उजाला छा जाता है और रात होती ही अंधेरा हो जाता है।
४.यदि मैं शैतानी करूंगा तो लोग मुझे खराब कहेंगे और यदि लोगों का कहना मांग लूंगा तो लोग मुझे अच्छा कहेंगे।
५. पूरब की और सूरज उगता है और पश्चिम की ओर डूबता है।
३. सही शब्द चुनकर वाक्य पूरे करो
३.१. तरह–तरह के रंगीन फूलों की कलियों से तरह–तरह के रंगों वाले पत्ते निकलते हैं।
३.२. धरती के पत्ते भरे बागानों में फूलपरियां उतर आई |
३.३. रौशनी आकर उन पर अपना हाथ फेर गई |
३.४. हवा पत्तों को सूंघ-सूंघकर चली जाती है।
३.५. आज भी शायद फूलपरियाँ धरती पर आती हैं।
४. नए वाक्य बनाओ
कोमलता: फूल बहुत कोमल होते हैं।
पवित्रता: फूल पवित्रता का प्रतीक होते हैं।
सुगंध: फूलों से अच्छी सुगंध आती है।
विचित्रता: प्रकृति की विचित्रता अद्भुत होती है।
सौन्दर्य: फूल धरती का सौन्दर्य बढ़ाते हैं।
५. प्रश्नों के उत्तर
५.१. लेखक के अनुसार किस समय धरती में फूल नहीं थे?
उत्तर: बहुत पहले, जब मनुष्य भी नहीं था, तब धरती पर फूल नहीं थे।
५.२. जब फूल धरती के ऊपर नहीं थे , तब धरती कैसी थी?
उत्तर: धरती सूनी और कम सुंदर थी, केवल घास और पेड़ थे।
५.३. फूलपरियाँ कैसी पोशाक पहनती थीं? वे क्या पीती थीं?
उत्तर: फूलपरियाँ सुंदर और रंग-बिरंगी पोशाक पहनती थीं और मधु (रस) पीती थीं।
५.४.फूलपरियों द्वारा लाई गयी बीजों से जो पौधा निकले उनमें कौन -कौन से रंग वाले फूल खिले ?
उत्तर: लाल, पीले, नीले, सफेद आदि रंगों के फूल खिले।
५.५. वे जंगलों में क्यों उतर आती हैं?
उत्तर: ताकि धरती को सुंदर बना सकें और फूल उगा सकें।
६. घटना अपने शब्दों में लिखो
उत्तर:
परियाँ आकाश से बीज लाईं और उन्हें धरती पर बोया। फिर उन बीजों से सुंदर फूल उग आए और धरती रंग-बिरंगी हो गई।
७. ऋतु अनुसार फूलों के नाम
गर्मी: गुलाब, सूरजमुखी
वर्षा: कमल, कनेर
शरद: चंपा, चमेली
हेमंत/शीत: गुलदाउदी
बसंत: सरसों, पलाश
८. समानार्थी शब्द
पृथ्वी → धरती
माटी → मिट्टी
वायु → हवा
वृक्ष → पेड़
पुष्प → फूल
तृण → घास
९. मिलान करो
फूल → मधु
परी → पोशाक
बागान → पौधे
पौधे → पंखुड़ी
१०. वर्ण-विच्छेद
धरती → ध + र + ती
सुन्दर → सु + न् + दर
मधुमक्खी → म + धु + म + क्खी
जंगल → ज + ं + ग + ल
मनुष्य → म + नु + ष्य
११. वाक्यों की संख्या
उत्तर: कुल 5 वाक्य हैं।
१२. विपरीतार्थक शब्द
रात → दिन
बड़ा → छोटा
आगे → पीछे
जाना → आना
सोना → जागना
.फूल पाठ का importance question :
उत्तर :फूल पाठ की कवित्री का नाम सुखलता राव है
उत्तर :बहुत समय पहले धरती में फूल नहीं थे।
उत्तर :रौशनी फूलो को ढूंढ कर चली जाती थी।
उत्तर :एक दिन धरती पर फूलपरियां उतरी।
उत्तर :परियाँ घने जंगल में उतरती है।
उत्तर :लेखक के द्वारा मनुष्य के जनम से पहले धरती में फूल नहीं थे।
उत्तर :परियाँ फूलो का पोशाक थी।
उत्तर :परियाँ फूल का मधू पीती थी।
notice :-फूल कविता सुखलता राव ने लिखा है। इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के पाठबहार पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।






