🌍 वातावरण तथा इसके संसाधन (Environment and Its Resources) – Class 9 Notes with Q&A
1. प्रस्तावना
हमारे चारों ओर उपस्थित सभी जीवित और निर्जीव चीजों से मिलकर हमारा वातावरण बनता है। हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, मनुष्य, सूर्य का प्रकाश आदि वातावरण के महत्वपूर्ण भाग हैं।
मनुष्य अपने जीवन के लिए वातावरण पर निर्भर है। हमें भोजन, पानी, हवा, ईंधन और अनेक उपयोगी वस्तुएँ वातावरण से ही प्राप्त होती हैं।
इसलिए वातावरण की रक्षा करना और उसके संसाधनों का सही उपयोग करना बहुत आवश्यक है।
2. वातावरण क्या है?
हमारे चारों ओर मौजूद सभी प्राकृतिक और जीवित तत्वों का समूह वातावरण कहलाता है।
उदाहरण:
- वायु
- जल
- मिट्टी
- सूर्य का प्रकाश
- पेड़-पौधे
- पशु-पक्षी
- सूक्ष्मजीव
- मनुष्य
वातावरण के दो प्रमुख घटक
| घटक | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| जैविक घटक | जीवित घटक | मनुष्य, पशु, पौधे, सूक्ष्मजीव |
| अजैविक घटक | निर्जीव घटक | हवा, पानी, मिट्टी, प्रकाश, तापमान |
3. पर्यावरण और वातावरण में संबंध
पर्यावरण शब्द का अर्थ हमारे चारों ओर मौजूद परिस्थितियों और घटकों से है। इसमें प्राकृतिक, जैविक तथा मानव निर्मित सभी तत्व शामिल हो सकते हैं।
वातावरण मुख्य रूप से हमारे चारों ओर की प्राकृतिक परिस्थितियों को समझने में उपयोग किया जाता है।
दोनों का उद्देश्य हमें यह समझाना है कि जीव अपने आसपास की परिस्थितियों से किस प्रकार प्रभावित होते हैं।
4. प्राकृतिक संसाधन क्या हैं?
प्रकृति से प्राप्त वे वस्तुएँ और पदार्थ जिनका उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के लिए करता है, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं।
उदाहरण
- जल
- वायु
- मिट्टी
- वन
- खनिज
- सूर्य का प्रकाश
- जीव-जंतु
- जीवाश्म ईंधन
प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
5. प्राकृतिक संसाधनों के प्रकार
प्राकृतिक संसाधनों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है:
1. नवीकरणीय संसाधन
जिन संसाधनों की प्रकृति में पुनः पूर्ति हो सकती है, उन्हें नवीकरणीय संसाधन कहते हैं।
उदाहरण:
- सूर्य का प्रकाश
- पवन
- जल
- वन, यदि उनका उचित संरक्षण किया जाए
2. अनवीकरणीय संसाधन
जिन संसाधनों का निर्माण होने में बहुत अधिक समय लगता है और जिनके समाप्त होने की संभावना रहती है, उन्हें अनवीकरणीय संसाधन कहते हैं।
उदाहरण:
- कोयला
- पेट्रोलियम
- प्राकृतिक गैस
- कुछ खनिज
6. वायु — एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन
वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है।
वायु में मुख्य रूप से:
- नाइट्रोजन
- ऑक्सीजन
- कार्बन डाइऑक्साइड
- जलवाष्प
- अन्य गैसें
पाई जाती हैं।
वायु का महत्व
ऑक्सीजन मनुष्य और अन्य जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक है।
पौधे कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग प्रकाश संश्लेषण में करते हैं।
वायु:
- मौसम को प्रभावित करती है।
- जलचक्र में सहायता करती है।
- पौधों और जीवों के जीवन के लिए आवश्यक है।
7. वायुमंडल
पृथ्वी को चारों ओर से घेरने वाली गैसों की परत को वायुमंडल कहते हैं।
वायुमंडल पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
यह:
- हमें आवश्यक गैसें प्रदान करता है।
- पृथ्वी का तापमान संतुलित रखने में सहायता करता है।
- सूर्य से आने वाली कुछ हानिकारक किरणों से रक्षा करता है।
- मौसम और वर्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
8. वायु प्रदूषण
जब वायु में हानिकारक पदार्थों की मात्रा इतनी बढ़ जाती है कि वह जीवों और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो जाए, तो इसे वायु प्रदूषण कहते हैं।
वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण
- वाहनों से निकलने वाला धुआँ
- कारखानों का धुआँ
- जीवाश्म ईंधन का अधिक उपयोग
- कचरा जलाना
- जंगलों की आग
- धूल और धुआँ
वायु प्रदूषण के प्रभाव
- श्वसन संबंधी समस्याएँ
- आँखों में जलन
- पौधों को नुकसान
- जलवायु परिवर्तन में योगदान
- अम्लीय वर्षा जैसी समस्याएँ
9. जल — जीवन का आधार
जल पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों में से एक है।
मनुष्य, पशु और पौधे सभी जल पर निर्भर हैं।
जल के प्रमुख स्रोत
- नदियाँ
- झीलें
- तालाब
- कुएँ
- भूमिगत जल
- वर्षा
जल का उपयोग:
- पीने में
- भोजन बनाने में
- कृषि में
- उद्योगों में
- सफाई में
- विद्युत उत्पादन में
किया जाता है।
10. जलचक्र
पृथ्वी पर जल लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर और एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाता रहता है। इस प्रक्रिया को जलचक्र कहते हैं।
जलचक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं:
वाष्पीकरण → संघनन → वर्षण → जल का संग्रह → पुनः वाष्पीकरण
सरल उदाहरण
सूर्य की गर्मी से समुद्र और नदियों का पानी वाष्प में बदलता है। ऊपर जाकर जलवाष्प ठंडी होती है और बादल बनाती है। बादलों से वर्षा होती है और पानी फिर पृथ्वी पर पहुँच जाता है।
11. जल प्रदूषण
जब जल में हानिकारक पदार्थ मिल जाते हैं और उसका उपयोग जीवों के लिए हानिकारक हो जाता है, तो इसे जल प्रदूषण कहते हैं।
जल प्रदूषण के कारण
- घरेलू गंदा पानी
- औद्योगिक अपशिष्ट
- रासायनिक पदार्थ
- कृषि में इस्तेमाल होने वाले उर्वरक और कीटनाशक
- प्लास्टिक और कचरा
जल प्रदूषण के प्रभाव
- पीने योग्य पानी की कमी
- जलजनित रोग
- जलीय जीवों को नुकसान
- जल की गुणवत्ता में कमी
12. मिट्टी — महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन
पृथ्वी की ऊपरी परत जिसमें पौधे उग सकते हैं, सामान्य रूप से मिट्टी कहलाती है।
मिट्टी में पाए जाते हैं:
- खनिज
- जल
- वायु
- जैविक पदार्थ
- सूक्ष्मजीव
मिट्टी कृषि और पौधों की वृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
13. मिट्टी का निर्माण
मिट्टी का निर्माण चट्टानों के लंबे समय तक टूटने और अपक्षय तथा जैविक पदार्थों के मिलने से होता है।
मिट्टी बनने में बहुत लंबा समय लग सकता है।
इसी कारण मिट्टी का संरक्षण आवश्यक है।
14. मृदा अपरदन
हवा और पानी के कारण मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत का हट जाना मृदा अपरदन कहलाता है।
मृदा अपरदन के कारण
- वनों की कटाई
- अत्यधिक चराई
- तेज वर्षा
- तेज हवा
- गलत कृषि पद्धतियाँ
- पेड़-पौधों की कमी
मृदा संरक्षण के उपाय
- अधिक पेड़ लगाना
- वनों की रक्षा करना
- सीढ़ीदार खेती करना
- फसल चक्र अपनाना
- अत्यधिक चराई रोकना
15. वन — प्राकृतिक संसाधन
वन पृथ्वी के महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं।
वनों में पेड़-पौधों के साथ अनेक पशु, पक्षी और सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं।
वनों का महत्व
वन:
- ऑक्सीजन के संतुलन में सहायता करते हैं।
- कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं।
- मिट्टी का संरक्षण करते हैं।
- वर्षा और जलचक्र को प्रभावित करते हैं।
- अनेक जीवों को आवास प्रदान करते हैं।
- मनुष्य को लकड़ी, फल, औषधीय पौधे आदि प्रदान करते हैं।
16. वनों की कटाई
बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटकर वन क्षेत्र को कम करना वनों की कटाई कहलाता है।
वनों की कटाई के कारण
- कृषि के लिए भूमि
- उद्योगों का विस्तार
- सड़क और भवन निर्माण
- लकड़ी की आवश्यकता
- शहरीकरण
इसके दुष्प्रभाव
- जैव विविधता में कमी
- मृदा अपरदन
- वर्षा के स्वरूप में परिवर्तन
- वन्यजीवों के आवास का नुकसान
- जलवायु परिवर्तन में वृद्धि
17. जैव विविधता
पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, पशुओं और सूक्ष्मजीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।
उदाहरण:
- विभिन्न प्रकार के पेड़
- अलग-अलग पक्षी
- विभिन्न पशु
- अनेक प्रकार के सूक्ष्मजीव
जैव विविधता का महत्व
जैव विविधता प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में सहायता करती है।
यह मनुष्य को:
- भोजन
- औषधियाँ
- ईंधन
- कच्चा माल
प्रदान करती है।
18. खाद्य श्रृंखला
एक जीव द्वारा दूसरे जीव को भोजन के रूप में उपयोग करने की क्रमबद्ध प्रक्रिया को खाद्य श्रृंखला कहते हैं।
उदाहरण
घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज
इसमें घास उत्पादक है और अन्य जीव विभिन्न उपभोक्ता हैं।
खाद्य श्रृंखला से प्रकृति में ऊर्जा के प्रवाह को समझने में सहायता मिलती है।
19. पारितंत्र
जीवित घटकों और निर्जीव घटकों के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं से बनने वाली प्राकृतिक व्यवस्था को पारितंत्र (Ecosystem) कहते हैं।
पारितंत्र के प्रमुख घटक
जैविक घटक:
- पौधे
- पशु
- सूक्ष्मजीव
अजैविक घटक:
- जल
- वायु
- मिट्टी
- प्रकाश
- तापमान
20. उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक
उत्पादक
हरे पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसलिए उन्हें उत्पादक कहते हैं।
उपभोक्ता
जो जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें उपभोक्ता कहते हैं।
उदाहरण:
- गाय
- हिरण
- शेर
- मनुष्य
अपघटक
कुछ सूक्ष्मजीव मृत पौधों और जीवों के अवशेषों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। इन्हें अपघटक कहते हैं।
उदाहरण:
- बैक्टीरिया
- कवक
अपघटक पोषक तत्वों को फिर से मिट्टी में पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
21. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
प्राकृतिक संसाधनों का सोच-समझकर और आवश्यकता के अनुसार उपयोग करना तथा भविष्य के लिए उन्हें बचाकर रखना संसाधन संरक्षण कहलाता है।
संरक्षण के प्रमुख उपाय
- पानी की बचत करें।
- बिजली का अनावश्यक उपयोग न करें।
- पेड़ लगाएँ।
- वनों की रक्षा करें।
- प्लास्टिक का उपयोग कम करें।
- कचरे का उचित निपटान करें।
- पुनर्चक्रण को बढ़ावा दें।
- सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
- जीवाश्म ईंधन का कम उपयोग करें।
- वन्यजीवों की रक्षा करें।
22. 3R का सिद्धांत
पर्यावरण संरक्षण में 3R का विशेष महत्व है।
Reduce — कम करना
अनावश्यक वस्तुओं और संसाधनों का उपयोग कम करना।
Reuse — पुनः उपयोग
किसी वस्तु को फेंकने के बजाय उसका दोबारा उपयोग करना।
Recycle — पुनर्चक्रण
पुरानी वस्तुओं से उपयोगी सामग्री बनाना।
उदाहरण
पुरानी प्लास्टिक, कागज, धातु और काँच की वस्तुओं को पुनर्चक्रित किया जा सकता है।
23. सतत विकास
ऐसा विकास जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी हों, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को नुकसान न पहुँचे, उसे सतत विकास (Sustainable Development) कहते हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य है:
विकास + पर्यावरण संरक्षण = सतत विकास
हमें प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा उपयोग करना चाहिए जिससे वे लंबे समय तक उपलब्ध रहें।
24. ऊर्जा संसाधन
मनुष्य के दैनिक जीवन और औद्योगिक कार्यों के लिए ऊर्जा आवश्यक है।
प्रमुख ऊर्जा संसाधन
नवीकरणीय ऊर्जा:
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
- जल विद्युत
- जैव ऊर्जा
अनवीकरणीय ऊर्जा:
- कोयला
- पेट्रोलियम
- प्राकृतिक गैस
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत पर्यावरण की दृष्टि से अधिक टिकाऊ माने जाते हैं।
25. जीवाश्म ईंधन
कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को जीवाश्म ईंधन कहा जाता है।
ये लाखों वर्षों में पुराने जीवों और पौधों के अवशेषों से बनने वाले ईंधन हैं।
इनका अत्यधिक उपयोग:
- वायु प्रदूषण बढ़ाता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ाता है।
- जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है।
इसलिए इनके स्थान पर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है।
26. ग्रीनहाउस प्रभाव
पृथ्वी के वायुमंडल में कुछ गैसें ऊष्मा को रोककर पृथ्वी को गर्म बनाए रखने में सहायता करती हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया को ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं।
लेकिन मानव गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि हो सकती है।
इसे वैश्विक तापन (Global Warming) कहा जाता है।
27. ओजोन परत
वायुमंडल के समताप मंडल में ओजोन की एक परत पाई जाती है, जिसे ओजोन परत कहते हैं।
यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों के एक बड़े भाग को रोकने में सहायता करती है।
इसलिए ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
28. अम्लीय वर्षा
जब वायु में उपस्थित कुछ प्रदूषक गैसें जलवाष्प के साथ प्रतिक्रिया करती हैं और अम्लीय पदार्थ बनाती हैं, तो ऐसी वर्षा को अम्लीय वर्षा कहते हैं।
अम्लीय वर्षा:
- मिट्टी को प्रभावित कर सकती है।
- जल स्रोतों को प्रभावित कर सकती है।
- पेड़-पौधों को नुकसान पहुँचा सकती है।
- इमारतों और स्मारकों को नुकसान पहुँचा सकती है।
29. कचरा प्रबंधन
घर, बाजार, उद्योग और अन्य स्थानों से निकलने वाले बेकार पदार्थों का उचित संग्रह, अलगाव, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और निपटान कचरा प्रबंधन कहलाता है।
कचरे को अलग करना
कचरे को सामान्य रूप से:
- जैव अपघटनीय
- अजैव अपघटनीय
श्रेणियों में बाँटा जा सकता है।
जैव अपघटनीय कचरा
जिसे सूक्ष्मजीव आसानी से विघटित कर सकते हैं।
उदाहरण:
- सब्जियों के छिलके
- पत्तियाँ
- भोजन का कचरा
अजैव अपघटनीय कचरा
जो आसानी से प्राकृतिक रूप से विघटित नहीं होता।
उदाहरण:
- प्लास्टिक
- कुछ धातु
- काँच
30. वातावरण को बचाने में हमारी भूमिका
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति इसमें योगदान दे सकता है।
हम:
- पानी बचा सकते हैं।
- पेड़ लगा सकते हैं।
- बिजली बचा सकते हैं।
- प्लास्टिक का उपयोग कम कर सकते हैं।
- कचरा इधर-उधर नहीं फेंक सकते।
- सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकते हैं।
- वस्तुओं का पुनः उपयोग कर सकते हैं।
- जैव विविधता और वन्यजीवों की रक्षा कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| वातावरण | हमारे चारों ओर मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियाँ और घटक |
| प्राकृतिक संसाधन | प्रकृति से प्राप्त उपयोगी पदार्थ |
| नवीकरणीय संसाधन | जिनकी पुनः पूर्ति हो सकती है |
| अनवीकरणीय संसाधन | जिनकी मात्रा सीमित है और बनने में बहुत समय लगता है |
| जैव विविधता | जीवों की विभिन्नता |
| पारितंत्र | जैविक और अजैविक घटकों की परस्पर क्रिया की व्यवस्था |
| मृदा अपरदन | मिट्टी की ऊपरी परत का हटना |
| जलचक्र | जल का लगातार विभिन्न अवस्थाओं में घूमना |
| प्रदूषण | पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों का बढ़ना |
| सतत विकास | वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकास |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1. वातावरण क्या है?
उत्तर: हमारे चारों ओर उपस्थित जीवित और निर्जीव घटकों तथा प्राकृतिक परिस्थितियों के समूह को वातावरण कहा जाता है।
प्रश्न 2. प्राकृतिक संसाधन क्या हैं?
उत्तर: प्रकृति से प्राप्त वे पदार्थ और वस्तुएँ जिनका उपयोग जीव अपनी आवश्यकताओं के लिए करते हैं, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं।
प्रश्न 3. नवीकरणीय संसाधन क्या हैं?
उत्तर: जिन प्राकृतिक संसाधनों की प्रकृति में उचित परिस्थितियों में पुनः पूर्ति हो सकती है, उन्हें नवीकरणीय संसाधन कहते हैं।
प्रश्न 4. अनवीकरणीय संसाधनों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: कोयला और पेट्रोलियम अनवीकरणीय संसाधनों के उदाहरण हैं।
प्रश्न 5. मृदा अपरदन क्या है?
उत्तर: हवा या पानी जैसे प्राकृतिक कारकों के कारण मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत के हटने की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहते हैं।
प्रश्न 6. जैव विविधता क्या है?
उत्तर: पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, पशुओं और सूक्ष्मजीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।
प्रश्न 7. 3R का क्या अर्थ है?
उत्तर: 3R का अर्थ है — Reduce, Reuse और Recycle, अर्थात कम उपयोग करना, पुनः उपयोग करना और पुनर्चक्रण करना।
प्रश्न 8. सतत विकास क्या है?
उत्तर: ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को प्रभावित न करे, सतत विकास कहलाता है।
त्वरित पुनरावृत्ति — Quick Revision
- वातावरण हमारे चारों ओर उपस्थित जीवित और निर्जीव घटकों से संबंधित है।
- वायु, जल, मिट्टी, वन और खनिज महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं।
- प्राकृतिक संसाधन नवीकरणीय और अनवीकरणीय हो सकते हैं।
- जल जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- जल का प्राकृतिक चक्र जलचक्र कहलाता है।
- वायु और जल का प्रदूषण जीवों के लिए हानिकारक है।
- वन जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- मिट्टी कृषि का प्रमुख आधार है।
- मृदा अपरदन से उपजाऊ मिट्टी की हानि होती है।
- पारितंत्र में जैविक और अजैविक घटक परस्पर क्रिया करते हैं।
- उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक पारितंत्र के महत्वपूर्ण भाग हैं।
- 3R — Reduce, Reuse और Recycle — संसाधन संरक्षण में सहायक हैं।
- सतत विकास भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया विकास है।
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष
“वातावरण तथा इसके संसाधन” हमें यह समझाता है कि पृथ्वी पर जीवन प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। वायु, जल, मिट्टी, वन और ऊर्जा संसाधनों का सही उपयोग करना आवश्यक है।
यदि हम प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करेंगे तो पर्यावरणीय समस्याएँ बढ़ेंगी। इसलिए संरक्षण, पुनर्चक्रण, प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास को अपनाकर हम वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाए रख सकते हैं।
✅ Group-A: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) उत्तर सहित
1. किसी परितंत्र में ऊर्जा को ग्रहण करने वाले होते हैं –
(a) उपभोक्ता (b) उत्पादक (c) सूक्ष्म जीव (d) पटन
✔ उत्तर: (b) उत्पादक
2. निम्नलिखित में उत्पादक कौन है?
(a) घास (b) टिड्डा (c) मेढ़क (d) इनमें से कोई नहीं
✔ उत्तर: (a) घास
3. मैदानी परितंत्र में तृतीय उपभोक्ता कौन है?
(a) सर्प (b) मेढ़क (c) हरा पौधा (d) टिड्डा
✔ उत्तर: (a) सर्प
4. राइजोबियम जीवाणु है –
(a) नाइट्रोजन को स्थिर करने वाला (b) परजीवी (c) डिनाइट्रीकरण करने वाला (d) मृत
✔ उत्तर: (a) नाइट्रोजन को स्थिर करने वाला
5. जन्तुओं को कार्बन तथा नाइट्रोजन मिलता है –
(a) पानी से (b) पौधों से (c) हवा से (d) इनमें से कोई नहीं
✔ उत्तर: (b) पौधों से
6. शेर है –
(a) प्राथमिक उपभोक्ता (b) द्वितीय उपभोक्ता (c) तृतीय उपभोक्ता (d) इनमें से कोई नहीं
✔ उत्तर: (c) तृतीय उपभोक्ता
7. प्रोटीन के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण तत्व है –
(a) नाइट्रोजन (b) ऑक्सीजन (c) फॉस्फोरस (d) कार्बन
✔ उत्तर: (a) नाइट्रोजन
8. उत्पादकों को कार्बन की प्राप्ति होती है –
(a) CO₂ के रूप में (b) ऑक्सीजन के रूप में (c) नाइट्रोजन के रूप में (d) ATP के रूप में
✔ उत्तर: (a) CO₂ के रूप में
9. परितंत्र में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है –
(a) क्लोरोफिल (b) ATP (c) सूर्य का प्रकाश (d) इनमें से कोई नहीं
✔ उत्तर: (c) सूर्य का प्रकाश
10. O₃ परत द्वारा अवशोषित नहीं होती –
(a) CO₂ (b) ऑक्सीजन (c) हानिकारक पराबैंगनी किरणें (d) इनमें से कोई नहीं
✔ उत्तर: (a) CO₂
11. O₃ परत के अवक्षय के लिए जिम्मेदार है –
(a) CO₂ (b) CFC (c) NO₂ (d) SO₂
✔ उत्तर: (b) CFC
12. परितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह होता है –
(a) एकदिशीय (b) द्विदिशीय (c) बहुदिशीय (d) किसी भी दिशा में नहीं
✔ उत्तर: (a) एकदिशीय
13. ऊर्जा का मुख्य स्रोत है –
(a) बल्ब (b) मोमबत्ती (c) किरासन तेल (d) सूर्य
✔ उत्तर: (d) सूर्य
14. फसलों के साथ उगने वाले अनावश्यक पौधों को कहते हैं –
(a) घास (b) खर-पतवार (c) जंगली पौधे (d) इनमें से कोई नहीं
✔ उत्तर: (b) खर-पतवार
15. पॉम फ्रेट है –
(a) मृदु जलीय मछली (b) समुद्री मछली (c) झींगा की एक प्रजाति (d) इनमें से कोई नहीं
✔ उत्तर: (b) समुद्री मछली
✅ Group-B: रिक्त स्थान पूर्ति (Fill in the Blanks)
जैव तथा अजैविक घटकों से परितंत्र बनता है।
प्राथमिक उपभोक्ता प्रायः शाकाहारी होते हैं।
कृषि के लिए फसलों का चक्रण आवश्यक है।
भारत का एक राष्ट्रीय उद्यान है – काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान।
O₃ परत के अवक्षय से मनुष्य में त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदा एक दिशा में होता है।
आहार श्रृंखला के विभिन्न स्तरों को पोषी स्तर कहते हैं।
मृत उत्पादक एवं उपभोक्ताओं का अपघटन अपघटक द्वारा होता है।
जन्तु उत्पादित खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।
मछली से पौष्टिक आहार के अतिरिक्त तेल और प्राप्त होता है।
✅ Group-C: सही / गलत (True / False)
कोयला का अनवीनीकरण ऊर्जा का स्रोत है। ✔ सही
10% नियम लिण्डमेन के द्वारा दिया गया था। ✔ सही
टिड्डा किसी भी आहार श्रृंखला में प्राथमिक उपभोक्ता होता है। ✔ सही
कैक्टस के पौधे में काँटे पत्तों के रूपान्तरण हैं। ✔ सही
SCP का उदाहरण स्पाइरुलिना हो सकता है। ✔ सही
प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करके ऊर्जा का संरक्षण किया जा सकता है। ✔ सही

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C. निम्न को मिलाओ (A के साथ B का सही जोड़ा बनाओ)
| A | B |
|---|---|
| (1) कार्बन | (c) वायुमण्डलीय CO₂ |
| (ii) दूध, अण्डा तथा मांस | (e) जन्तु-भोजन उत्पाद |
| (iii) सजीव तथा निर्जीव के मध्य सम्पर्क | (a) परितन्त्र |
| (iv) रोहू, कतला, एनाबास आदि | (b) मृदु जलीय मछलियाँ |
D. लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित
1. परितंत्र में उत्पादक का क्या कार्य है?
उत्पादक सूर्य के प्रकाश की सहायता से प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन तैयार करते हैं। ये अन्य सभी जीवों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं।
2. पोषी स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण देकर विभिन्न पोषी स्तर को बताओ।
आहार श्रृंखला में विभिन्न स्थानों को पोषी स्तर कहते हैं।
उदाहरण:
घास → टिड्डा → मेढ़क → सर्प
घास (उत्पादक)
टिड्डा (प्राथमिक उपभोक्ता)
मेढ़क (द्वितीयक उपभोक्ता)
सर्प (तृतीयक उपभोक्ता)
3. आहार जाल का निर्माण कैसे होता है?
जब एक से अधिक आहार श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं, तो आहार जाल का निर्माण होता है। यह प्राकृतिक रूप से बनता है क्योंकि कोई भी जीव एक ही प्रकार का भोजन नहीं करता।
4. उत्पादक एवं उपभोक्ता में क्या अंतर है?
उत्पादक: अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (जैसे- हरे पौधे)।
उपभोक्ता: अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, वे अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं (जैसे- जानवर, मनुष्य)।
5. पशुपालन की परिभाषा लिखो।
पालतू जानवरों का पालन-पोषण एवं उनसे दूध, मांस, ऊन, अंडे आदि प्राप्त करने की प्रक्रिया को पशुपालन कहते हैं।
6. हमारे देश में दूध का औसत उत्पादन कम होने का कारण क्या है?
उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों की कमी
उचित पोषण की कमी
आधुनिक तकनीकों का अभाव
रोगों का फैलाव
7. मिश्रित मछली संवर्धन किसे कहते हैं?
एक ही तालाब में विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन करना मिश्रित मछली संवर्धन कहलाता है। इससे संसाधनों का पूर्ण उपयोग होता है।
8. जन्तु उत्प्लावी किसे कहते हैं? उदाहरण दो।
पानी की सतह पर तैरते सूक्ष्म जन्तुओं को जन्तु उत्प्लावी कहते हैं।
उदाहरण: झींगा, जल-कीड़े।
9. विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तंत्रों के नाम लिखो।
स्थलीय पारितंत्र
जलीय पारितंत्र
वन पारितंत्र
मरुस्थलीय पारितंत्र
10. भारतीय भैसों की प्रमुख प्रजातियों के नाम लिखो।
मुर्रा
जाफराबादी
नीलीरावी
सुरती
11. जैव-भू-रासायनिक चक्र क्या है?
जीवों और पर्यावरण के बीच तत्वों का चक्रीय प्रवाह जैव-भू-रासायनिक चक्र कहलाता है, जैसे कार्बन चक्र, नाइट्रोजन चक्र।
12. जीवभार किसे कहते हैं? समुदाय कहने से तुम क्या समझते हो?
जीवभार: किसी पारितंत्र में जीवित पदार्थों का कुल भार।
समुदाय: विभिन्न प्रजातियों का समूह जो एक क्षेत्र में रहता है और आपसी संबंध बनाए रखता है।
13. खर-पतवार किसे कहते हैं? मनुष्य परपोषी है, कैसे?
खर-पतवार: फसलों के साथ उगने वाले अनावश्यक पौधे।
मनुष्य परपोषी है: क्योंकि मनुष्य अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकता, उसे पौधों और जानवरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
14. मौसम के आधार पर फसल कितने प्रकार की होती है? नाम लिखो।
फसलें दो प्रकार की होती हैं:
खरीफ फसल (जैसे- धान, मक्का)
रबी फसल (जैसे- गेहूं, चना)
15. फसल चक्रण के लिए दलहन जाति के पौधों का चयन क्यों किया जाता है?
क्योंकि दलहन पौधों की जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया होते हैं, जो मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाते हैं और भूमि की उर्वरता बनाए रखते हैं।
E. विस्तृत उत्तरीय प्रश्न उत्तर सहित
1. परितंत्र की संरचना का संक्षिप्त विवरण दो।
परितंत्र दो मुख्य घटकों से मिलकर बना होता है:
जैविक घटक: इसमें उत्पादक (हरे पौधे), उपभोक्ता (शाकाहारी एवं मांसाहारी जीव), और अपघटक (कवक, जीवाणु) शामिल होते हैं।
अजैविक घटक: वायु, जल, मिट्टी, प्रकाश, तापमान आदि।
सभी घटक एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और ऊर्जा व पोषक तत्त्वों का आदान-प्रदान करते हैं।
2. पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह किस प्रकार होता है?
ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है।
यह सूर्य से शुरू होकर उत्पादकों तक पहुँचता है, फिर उपभोक्ताओं और अंत में अपघटकों तक जाता है।
10% नियम के अनुसार, प्रत्येक पोषी स्तर पर केवल 10% ऊर्जा अगले स्तर पर जाती है।
उदाहरण:
सूर्य → घास → हिरण → शेर → अपघटक
3. आहार जाल का निर्माण कैसे होता है? अगर किसी पोषी स्तर के सभी जीवों को नष्ट कर दिया जाए तो इसका परितंत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
आहार जाल तब बनता है जब कई आहार श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ती हैं।
यदि किसी एक पोषी स्तर के सभी जीव नष्ट हो जाएँ, तो ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो जाएगा और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा।
उदाहरण: यदि शाकाहारी जीव समाप्त हो जाएँ, तो मांसाहारी जीव भी मर जाएंगे।
4. ओ₃ छिद्र से क्या समझते हो? यह कैसे उत्पन्न होता है? इससे होने वाली हानियों के बारे में लिखो।
ओजोन छिद्र का मतलब है ओजोन परत का पतला होना।
कारण: CFC गैस, औद्योगिक प्रदूषण।
हानियाँ:
पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक पहुँचती हैं।
त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद का खतरा।
पौधों और जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव।
5. पोषक चक्र किसे कहते हैं? उस गैस का नाम लिखो जिसे पौधे सीधे हवा से ग्रहण कर सकते हैं लेकिन जन्तु नहीं। हवा में उसका % क्या है? उस चक्र की व्याख्या करो।
जैविक और अजैविक घटकों के बीच पोषक तत्त्वों का बार-बार पुनर्चक्रण पोषक चक्र कहलाता है।
गैस: कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
हवा में इसकी मात्रा लगभग 0.03% है।
कार्बन चक्र: पौधे CO₂ ग्रहण कर प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। उपभोक्ता इसे खाते हैं। श्वसन एवं अपघटन द्वारा CO₂ वापस वातावरण में पहुँचता है।
6. प्राकृतिक संपदा किसे कहते हैं? इनकी उपयोगिता पर प्रकाश डालो।
प्रकृति से प्राप्त सभी संसाधन जो जीवन के लिए आवश्यक हैं, उन्हें प्राकृतिक संपदा कहते हैं।
उपयोगिता:जल → पीने, कृषि के लिए।
वन → ऑक्सीजन, लकड़ी।
खनिज → उद्योगों में।
मिट्टी → फसल उत्पादन।
7. तालाब के पारिस्थितिक तंत्र का सचित्र वर्णन करो।
तालाब का पारितंत्र तीन भागों में बँटा होता है:
ऊपरी सतह: तैरते पौधे और शैवाल।
मध्य भाग: मछलियाँ, जलीय जन्तु।
तल भाग: अपघटक जीव।
(चित्र: तालाब के तीन स्तरों के साथ पौधे, मछली और अपघटक दर्शाएं।)
8. परितंत्र के संतुलन में मानव की भूमिका पर टिप्पणी लिखो।
मानव वृक्षारोपण कर संतुलन बनाए रख सकता है।
प्रदूषण, वनों की कटाई, औद्योगीकरण से असंतुलन होता है।
पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों का सही उपयोग आवश्यक है।
9. किस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ‘भारत सरकार’ ने ‘वन महोत्सव’ कार्यक्रम को प्रारम्भ किया है? वन्य जीवों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है? किस प्रकार से वन्य जीवों का संरक्षण किया जाता है?
वन महोत्सव उद्देश्य: वनों का संरक्षण और अधिक वृक्षारोपण।
वन्य जीवों का महत्व: जैव विविधता बनाए रखना।
संरक्षण के उपाय:
राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य।
शिकार पर प्रतिबंध।
जनजागरूकता अभियान।
10. पशुपालन से होने वाले आर्थिक लाभों का विवरण दो। अधिक अंडे तथा मांस के उत्पादन हेतु मुर्गी पालन में कैसे सुधार लाया जा सकता है? गाय की उच्च प्रजातियों के नाम लिखो।
आर्थिक लाभ: दूध, मांस, ऊन, चमड़ा, खाद।
मुर्गी पालन सुधार:
उच्च नस्लों का चयन।
संतुलित आहार।
वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग।
गाय की उच्च प्रजातियाँ:
साहीवाल
गीर
notice : इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के “नव जीवन विज्ञान एंव पर्यावरण ” class – की पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।







