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विकास और अनुकूलन
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Table of Contents

 विकास और अनुकूलन

इस पाठ को मुख्य रूप से दो भागों में समझा जा सकता है—

  1. विकास (Evolution)
  2. उत्तरजीविता योजनाएँ : अनुकूलन (Survival Strategies: Adaptation)

1. विकास (Evolution)

विकास क्या है?

विकास वह क्रमिक जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीवों की जनसंख्या में पीढ़ी-दर-पीढ़ी ऐसे वंशानुगत परिवर्तन जमा होते जाते हैं, जिनके कारण समय के साथ जीवों के लक्षण, संरचना और जीवन-शैली में परिवर्तन हो सकता है।

सरल शब्दों में—

कई पीढ़ियों के दौरान जीवों में होने वाले वंशानुगत परिवर्तनों के क्रमिक संचय को विकास कहते हैं।

उदाहरण के लिए, आज के जीव अपने बहुत पुराने पूर्वजों से बिल्कुल समान नहीं हैं। लंबे समय में वातावरण और प्राकृतिक चयन के कारण उनमें अनेक परिवर्तन हुए हैं।


विकास को समझने के लिए मुख्य बातें

विकास के लिए कुछ बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं—

वंशागति + विविधता + संघर्ष + प्राकृतिक चयन + लंबे समय का प्रभाव = विकास

इसे इस प्रकार समझ सकते हैं—

जीवों में विविधता → वातावरण में संघर्ष → अनुकूल लक्षण वाले जीवों की अधिक उत्तरजीविता → प्रजनन → लक्षणों का अगली पीढ़ी में जाना → कई पीढ़ियों में परिवर्तन → विकास


विविधता क्या है?

एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले छोटे-बड़े अंतर को विविधता (Variation) कहते हैं।

उदाहरण:

एक ही प्रजाति के मनुष्यों में—

  • किसी की ऊँचाई अधिक होती है।
  • किसी की ऊँचाई कम होती है।
  • किसी के बाल घुँघराले होते हैं।
  • किसी के बाल सीधे होते हैं।
  • त्वचा का रंग अलग-अलग हो सकता है।
  • शरीर की बनावट में अंतर हो सकता है।

इसी प्रकार पौधों और अन्य जीवों में भी विविधता पाई जाती है।


विविधता क्यों महत्वपूर्ण है?

विविधता विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

यदि वातावरण बदल जाए तो सभी जीव उस परिवर्तन का सामना समान रूप से नहीं कर पाएँगे।

मान लीजिए किसी क्षेत्र में तापमान बहुत कम हो गया। जिन जीवों में ठंड सहने की क्षमता अधिक है, उनके जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना अधिक हो सकती है।

इस प्रकार उपयोगी वंशानुगत लक्षण आगे की पीढ़ियों में अधिक दिखाई दे सकते हैं।


वंशागति और विकास

जो लक्षण माता-पिता से संतानों में पहुँचते हैं, उन्हें वंशागत लक्षण कहा जाता है।

इन लक्षणों का आधार जीन और DNA है।

उदाहरण:

यदि किसी जीव में ऐसा वंशागत लक्षण है जो उसे किसी विशेष वातावरण में जीवित रहने में सहायता करता है, तो उसके प्रजनन के बाद वह लक्षण उसकी संतानों में भी जा सकता है।

इस प्रकार कई पीढ़ियों तक ऐसे लक्षणों का संचय विकास में योगदान कर सकता है।


विकास में प्राकृतिक चयन की भूमिका

चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक चयन के सिद्धांत को समझाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनके अनुसार प्रकृति में जीवों के बीच अस्तित्व के लिए संघर्ष होता है। सभी जीव समान रूप से जीवित नहीं रह पाते।

जिन जीवों में वातावरण के अनुकूल उपयोगी लक्षण होते हैं, उनके जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना अधिक हो सकती है।

इसे प्राकृतिक चयन (Natural Selection) कहा जाता है।

उदाहरण

मान लीजिए किसी क्षेत्र में दो प्रकार के कीट हैं—

  • हरे रंग के कीट
  • चमकीले रंग के कीट

यदि ये कीट हरी पत्तियों पर रहते हैं, तो हरे कीट शिकारी से अधिक आसानी से छिप सकते हैं।

इसलिए—

हरे कीट → कम दिखाई देंगे → अधिक जीवित रहेंगे → अधिक प्रजनन करेंगे → अगली पीढ़ी में हरे कीटों की संख्या बढ़ सकती है।

यह प्राकृतिक चयन का सरल उदाहरण है।


प्राकृतिक चयन और अनुकूलन में संबंध

प्राकृतिक चयन और अनुकूलन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

विविधता जीवों में अलग-अलग लक्षण पैदा करती है।

पर्यावरण कुछ लक्षणों वाले जीवों के लिए अधिक अनुकूल हो सकता है।

ऐसे जीवों की उत्तरजीविता और प्रजनन की संभावना बढ़ सकती है।

लंबे समय में इससे जनसंख्या में अनुकूल लक्षणों की संख्या बढ़ सकती है।

इसी प्रक्रिया से अनुकूलन और विकास को समझा जाता है।


जीवाश्म (Fossils) और विकास

जीवाश्म विकास के अध्ययन के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

जीवाश्म प्राचीन जीवों के शरीर या उनके अवशेष/चिह्न हैं जो चट्टानों या अन्य प्राकृतिक संरचनाओं में सुरक्षित रह गए हैं।

जीवाश्मों का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह जानने का प्रयास करते हैं कि—

  • पुराने समय में कौन-कौन से जीव पाए जाते थे?
  • उनकी संरचना कैसी थी?
  • समय के साथ उनमें क्या परिवर्तन हुए?
  • कौन-से जीव विलुप्त हो गए?

इसलिए जीवाश्म विकास के इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


समजात और समरूप अंग

विकास के अध्ययन में अंगों की तुलना भी महत्वपूर्ण है।

1. समजात अंग (Homologous organs)

ऐसे अंग जिनकी मूल संरचना या उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य अलग हो सकते हैं, समजात अंग कहलाते हैं।

उदाहरण:

  • मनुष्य का हाथ
  • चमगादड़ का पंख
  • व्हेल का फ्लिपर

इनकी मूल अस्थि-रचना में समानता मिलती है, लेकिन इनके कार्य अलग-अलग हैं।

यह समान पूर्वज से विकास की ओर संकेत कर सकता है।


2. समरूप अंग (Analogous organs)

ऐसे अंग जिनके कार्य समान होते हैं, लेकिन उनकी मूल संरचना या उत्पत्ति अलग होती है, समरूप अंग कहलाते हैं।

उदाहरण:

पक्षी का पंख और कीट का पंख

दोनों उड़ने में सहायता करते हैं, लेकिन उनकी संरचना और उत्पत्ति अलग होती है।


विकास और प्रजाति निर्माण

लंबे समय तक विभिन्न समूहों में विविधताएँ जमा होती रहती हैं।

यदि किसी समूह के जीव दूसरे समूह से अलग वातावरण में रहते हैं और उनके बीच प्रजनन का संबंध कम या समाप्त हो जाता है, तो लंबे समय में उनमें इतने अंतर विकसित हो सकते हैं कि वे अलग प्रजातियाँ बन जाएँ।

इसे प्रजाति निर्माण (Speciation) कहा जाता है।

सरल क्रम

विविधता → अलगाव → प्राकृतिक चयन → पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवर्तन → अधिक अंतर → नई प्रजाति


2. उत्तरजीविता योजनाएँ : अनुकूलन

अब आते हैं पाठ के दूसरे महत्वपूर्ण भाग पर।

अनुकूलन क्या है?

किसी जीव में वातावरण के अनुसार पाए जाने वाले ऐसे वंशागत संरचनात्मक, शारीरिक या व्यवहारिक लक्षण, जो उसके जीवित रहने और प्रजनन में सहायता करते हैं, अनुकूलन कहलाते हैं।

सरल भाषा में—

किसी विशेष वातावरण में जीवित रहने के लिए जीवों में विकसित उपयोगी विशेषताओं को अनुकूलन कहते हैं।

ध्यान रखें:

अनुकूलन केवल शरीर की बनावट ही नहीं है।
यह संरचनात्मक, शारीरिक तथा व्यवहारिक भी हो सकता है।


अनुकूलन क्यों आवश्यक है?

प्रकृति में प्रत्येक स्थान की परिस्थितियाँ अलग होती हैं।

जैसे—

  • रेगिस्तान में पानी की कमी।
  • ध्रुवीय क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड।
  • जल में रहने वाले जीवों के लिए अलग परिस्थितियाँ।
  • जंगल में शिकारियों से बचने की आवश्यकता।
  • ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी।

इन परिस्थितियों में जीवों को जीवित रहने के लिए विशेष गुणों की आवश्यकता होती है।

इसीलिए अलग-अलग वातावरण में रहने वाले जीवों में अलग-अलग अनुकूलन पाए जाते हैं।


अनुकूलन के प्रमुख प्रकार

कक्षा 10 के स्तर पर अनुकूलन को मुख्य रूप से तीन प्रकार से समझ सकते हैं—

1. संरचनात्मक अनुकूलन

2. शारीरिक अनुकूलन

3. व्यवहारिक अनुकूलन


1. संरचनात्मक अनुकूलन

जीव के शरीर की बनावट में पाया जाने वाला ऐसा विशेष गुण जो उसके वातावरण में जीवित रहने में सहायता करे, संरचनात्मक अनुकूलन कहलाता है।

उदाहरण — ऊँट

ऊँट रेगिस्तानी वातावरण के लिए अच्छी तरह अनुकूलित है।

उसमें—

  • चौड़े पैर होते हैं।
  • लंबे पैर शरीर को गर्म रेत से कुछ दूर रखते हैं।
  • लंबी पलकें आँखों को रेत से बचाने में मदद करती हैं।
  • नथुने रेत से बचाव में सहायक होते हैं।
  • शरीर पानी की कमी की परिस्थितियों को सहने में सक्षम होता है।

इस प्रकार ऊँट में कई विशेषताएँ रेगिस्तानी जीवन में सहायता करती हैं।


रेगिस्तानी पौधों में अनुकूलन

रेगिस्तान में पानी बहुत कम होता है।

इसलिए वहाँ के पौधों में जल संरक्षण के लिए विशेष अनुकूलन पाए जाते हैं।

उदाहरण के लिए कैक्टस में—

  • पत्तियाँ काँटों में बदल गई हैं।
  • तना हरा और मांसल होता है।
  • तना जल संग्रह करने में सक्षम होता है।
  • बाहरी सतह पर मोमी परत जल हानि कम करने में सहायता करती है।
  • जड़ें उपलब्ध पानी को जल्दी अवशोषित करने में सहायक होती हैं।

याद रखें:

काँटा = पत्ती का रूपांतरण

कैक्टस में पत्तियों का काँटों में बदलना जल की हानि कम करने में सहायक है।


जल में रहने वाले जीवों का अनुकूलन

जल में रहने वाले जीवों को भी विशेष अनुकूलन की आवश्यकता होती है।

मछली में अनुकूलन

मछलियों में—

  • शरीर सामान्यतः धारारेखीय (streamlined) होता है।
  • पंख तैरने और दिशा बदलने में सहायता करते हैं।
  • गलफड़े जल से ऑक्सीजन प्राप्त करने में सहायता करते हैं।
  • शरीर पर शल्क और श्लेष्मा सुरक्षा में सहायक होते हैं।

इस प्रकार मछली का शरीर जल में रहने के लिए अनुकूलित है।


2. शारीरिक अनुकूलन

जीव के शरीर के अंदर होने वाली ऐसी विशेष शारीरिक क्रियाएँ जो उसे वातावरण में जीवित रहने में सहायता करती हैं, शारीरिक अनुकूलन कहलाती हैं।

उदाहरण

बहुत ठंडे वातावरण में रहने वाले कुछ जीव शरीर का ताप बनाए रखने के लिए विशेष शारीरिक प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं।

इसी प्रकार रेगिस्तान के जीव पानी की कमी को सहने के लिए शरीर में जल संरक्षण की विशेष क्षमता रखते हैं।


3. व्यवहारिक अनुकूलन

जब जीव अपने व्यवहार में ऐसी विशेषता दिखाता है जो उसके जीवित रहने में सहायता करती है, तो उसे व्यवहारिक अनुकूलन कहा जाता है।

उदाहरण

बहुत गर्म क्षेत्रों में कुछ जीव दिन के सबसे गर्म समय में कम सक्रिय रहते हैं और अपेक्षाकृत ठंडे समय में सक्रिय होते हैं।

कुछ पक्षी मौसम के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाते हैं।

इसे प्रवास (Migration) कहा जाता है।


ठंडे प्रदेशों के जीवों में अनुकूलन

बहुत ठंडे क्षेत्रों में रहने वाले जीवों के शरीर में गर्मी बनाए रखने के लिए विशेषताएँ हो सकती हैं।

उदाहरण के लिए ध्रुवीय भालू में—

  • शरीर पर घने बाल।
  • त्वचा के नीचे मोटी वसा की परत।
  • शरीर की गर्मी बनाए रखने की क्षमता।

ये विशेषताएँ अत्यधिक ठंडे वातावरण में जीवित रहने में सहायता करती हैं।


पर्वतीय क्षेत्रों में अनुकूलन

ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडल में उपलब्ध ऑक्सीजन कम हो सकती है।

ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले मनुष्यों तथा अन्य जीवों में वातावरण के अनुसार शारीरिक अनुकूलन हो सकते हैं।

उदाहरण के रूप में लंबे समय तक ऊँचाई वाले क्षेत्र में रहने पर शरीर ऑक्सीजन की कम उपलब्धता से निपटने के लिए कुछ शारीरिक परिवर्तन करता है।


अनुकूलन और उत्तरजीविता का संबंध

यह बहुत महत्वपूर्ण है।

अनुकूलन → वातावरण के अनुसार बेहतर जीवन → जीवित रहने की संभावना बढ़ना → प्रजनन की संभावना बढ़ना → उपयोगी लक्षणों का अगली पीढ़ी में जाना

इसलिए अनुकूलन को उत्तरजीविता की रणनीति कहा जा सकता है।


अनुकूलन और विकास में अंतर

विकासअनुकूलन
पीढ़ियों के दौरान होने वाले वंशागत परिवर्तन की व्यापक प्रक्रिया है।विशेष वातावरण में जीवित रहने में सहायक लक्षण है।
यह लंबे समय में जनसंख्या में परिवर्तन ला सकता है।यह जीव को विशेष वातावरण के अनुरूप बनाता है।
विकास में विविधता और प्राकृतिक चयन महत्वपूर्ण हैं।अनुकूलन प्राकृतिक चयन द्वारा बनी/बढ़ी उपयोगी विशेषताओं से जुड़ा है।
इसका परिणाम नई प्रजातियों के निर्माण तक हो सकता है।अनुकूलन किसी विशेष वातावरण में उत्तरजीविता बढ़ाने में सहायता करता है।

बहुत आसान उदाहरण से पूरा पाठ समझें

मान लीजिए एक क्षेत्र में बहुत कम वर्षा होती है।

वहाँ रहने वाले पौधों में कुछ पौधों के तनों में अधिक पानी जमा करने की क्षमता है और उनकी पत्तियाँ काँटों में बदल गई हैं।

अब—

विविधता

कुछ पौधों में जल संरक्षण की उपयोगी विशेषताएँ

कम पानी में भी जीवित रहने की क्षमता

ऐसे पौधों के जीवित रहने की संभावना अधिक

वे अधिक प्रजनन कर सकते हैं

उनके उपयोगी लक्षण संतानों में पहुँच सकते हैं

कई पीढ़ियों में ये विशेषताएँ अधिक सामान्य हो सकती हैं

अनुकूलन और विकास


परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें

विकास

  1. विकास एक क्रमिक जैविक प्रक्रिया है।
  2. विकास में विविधता महत्वपूर्ण है।
  3. वंशागत विविधता अगली पीढ़ी तक पहुँच सकती है।
  4. प्राकृतिक चयन विकास की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
  5. डार्विन ने प्राकृतिक चयन के सिद्धांत को समझाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  6. जीवाश्म विकास के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
  7. समजात अंग समान मूल संरचना की ओर संकेत करते हैं।
  8. समरूप अंग समान कार्य कर सकते हैं लेकिन उनकी उत्पत्ति अलग हो सकती है।
  9. लंबे समय में परिवर्तन प्रजाति निर्माण से जुड़ सकते हैं।

अनुकूलन

  1. अनुकूलन जीव को वातावरण में जीवित रहने में सहायता करता है।
  2. अनुकूलन संरचनात्मक, शारीरिक या व्यवहारिक हो सकता है।
  3. ऊँट रेगिस्तानी वातावरण के लिए अनुकूलित है।
  4. कैक्टस में पत्तियाँ काँटों में परिवर्तित होती हैं।
  5. मछली में गलफड़े श्वसन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  6. ध्रुवीय भालू में ठंड से बचने के लिए घने बाल और वसा की परत होती है।
  7. प्रवास एक व्यवहारिक अनुकूलन का उदाहरण हो सकता है।
  8. अनुकूलन का मुख्य महत्व उत्तरजीविता और प्रजनन की सफलता में है।

अध्याय — विकास (Evolution)

A. सही विकल्प का चयन कीजिए

Multiple Choice Questions — [1 Mark]

1. एपेंडिक्स एक उदाहरण है—

उत्तर: (a) अवशेषी अंग

व्याख्या: मनुष्य का एपेंडिक्स पूर्वजों में अधिक उपयोगी रहा होगा, लेकिन वर्तमान मनुष्य में इसका कोई प्रमुख आवश्यक कार्य नहीं है। इसलिए इसे अवशेषी अंग कहा जाता है।


2. अंगों के उपयोग और अनुपयोग का सिद्धांत किस वैज्ञानिक ने दिया था?

उत्तर: (d) लेमार्क


3. Equus किसका प्रतिनिधित्व करता है?

उत्तर: (b) आधुनिक घोड़ा


4. ‘अस्तित्व के लिए संघर्ष’ किस सिद्धांत से संबंधित है?

उत्तर: (a) डार्विन का प्राकृतिक चयन का सिद्धांत


5. घोड़े के क्रमिक विकास में एक प्रमुख परिवर्तन क्या था?

उत्तर: घोड़े के पैरों की उँगलियों की संख्या धीरे-धीरे कम हुई और अंततः आधुनिक घोड़े में एक प्रमुख उँगली तथा खुर विकसित हुआ।


6. तीन अंगुलियों वाला घोड़े का जीवाश्म कौन-सा था?

उत्तर: मेसोहिप्पस (Mesohippus)


7. समवृत्ति अंग का उदाहरण है—

उत्तर: पक्षी का पंख और कीट का पंख।


8. निम्न में से कौन-से अंग समजात अंग हैं?

उत्तर: मनुष्य का हाथ और पक्षी का अग्रपाद/पंख।

कारण: दोनों की मूल अस्थि-रचना में समानता है, लेकिन कार्य अलग हैं।


9. ‘जातियों की उत्पत्ति’ (On the Origin of Species) पुस्तक किसने लिखी?

उत्तर: चार्ल्स डार्विन


10. पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के समय वातावरण में कौन-सी गैस नहीं थी?

उत्तर: (b) ऑक्सीजन


11. समवृत्ति अंग की विशेषता है—

उत्तर: (b) उत्पत्ति में भिन्न लेकिन कार्य में समान।


12. घोड़े के क्रमिक विकास के दौरान कौन-सा बदलाव नहीं हुआ था?

उत्तर: (c) पैरों की सभी अंगुलियों की लंबाई और चौड़ाई में वृद्धि।


13. वैज्ञानिकों के मतानुसार जीवन की उत्पत्ति से पहले पृथ्वी पर वातावरण कैसा था?

उत्तर: गर्म, तनु/आदिम रासायनिक पदार्थों से युक्त समुद्री वातावरण।


14. निम्न में से कौन-सा अंतःप्रजातीय (Intraspecific) संघर्ष है?

उत्तर: (b) तालाब में रोहू मछलियों के बीच संघर्ष।

कारण: संघर्ष एक ही प्रजाति के जीवों के बीच है।


15. निम्न में से कौन-सा अंतर्जातीय (Interspecific) संघर्ष को दर्शाता है?

उत्तर: (b) चूहे को खाने के लिए साँप तथा उल्लू के बीच संघर्ष।

कारण: साँप और उल्लू दो अलग-अलग प्रजातियाँ हैं।


16. लेमार्क के सिद्धांत से संबंधित पद है—

उत्तर: (b) उपार्जित लक्षणों की वंशागति।


17. पार्थेनियम विदेशी प्रजाति है और जहाँ उगता है वहाँ देशी पौधों को प्रभावित करता है। यह किस प्रकार के संघर्ष को दर्शाता है?

उत्तर: (b) अंतर्जातीय संघर्ष।


18. मिलर और यूरे के प्रयोग में कौन-से अमीनो अम्ल बने?

उत्तर: (c) ग्लाइसिन और एलानिन।


B. अति संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्नविकास और अनुकूलन

Very Short Answer Type Questions — [1 Mark]

1. ‘प्राकृतिक चयन के सिद्धांत’ को किसने प्रतिपादित किया?

उत्तर: चार्ल्स डार्विन ने।

2. आधुनिक घोड़े का वैज्ञानिक नाम बताइए।

उत्तर: Equus (इक्वस)

3. ‘उपार्जित लक्षणों की वंशागति’ सिद्धांत के प्रवर्तक कौन थे?

उत्तर: जीन बैप्टिस्ट लैमार्क।

4. मनुष्य के एक अवशेषी अंग का नाम बताइए।

उत्तर: एपेंडिक्स।

5. घोड़े के उस जीवाश्म का नाम बताइए जिसके पिछले पैर में तीन अंगुलियाँ थीं।

उत्तर: मेसोहिप्पस (Mesohippus)।

6. उत्पत्ति की दृष्टि से घोड़े का कौन-सा अंग पक्षी के अंग से समानता रखता है?

उत्तर: अग्रपाद की अस्थि-रचना।

7. मनुष्य के कंकाल तंत्र में कौन-सा अवशेषी अंग उपस्थित है?

उत्तर: पूँछ की हड्डी (Coccyx)।


रिक्त स्थान भरिए

1. घोड़े के क्रमिक विकास का प्राचीन पूर्वज ________ है।

उत्तर: इओहिप्पस (Eohippus)

2. क्रम विकास के लिए ________ अंग महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

उत्तर: समजात

3. जीवन की उत्पत्ति के प्रारंभिक चरणों में कुछ विशाल ________ अणुओं का निर्माण/समन्वय हुआ।

उत्तर: कोलॉइडल

4. आधुनिक घोड़े का खुर उसके पूर्वज की ________ संख्या की पादांगुलि का रूपांतरण है।

उत्तर: तृतीय


सही या गलत बताइए

1. प्राकृतिक निर्वाचन सिद्धांत डार्विन के क्रमविकास का मूल सिद्धांत है।

उत्तर: सही।

2. लेमार्क के मतानुसार जीव अपनी आवश्यकता के अनुसार लक्षण प्राप्त कर सकते हैं और ये लक्षण संतानों में जा सकते हैं।

उत्तर: सही।

3. डार्विन के मतानुसार जीवों में प्रजनन ज्यामितीय अनुपात में होता है।

उत्तर: सही।


C. संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न

Short Answer Type Questions — [2 Marks]

1. अवशेषी अंग किसे कहते हैं? मनुष्य के एक अवशेषी अंग का नाम बताइए।

उत्तर:
ऐसे अंग जो जीव के पूर्वजों में उपयोगी और विकसित थे, लेकिन वर्तमान जीव में उनका कार्य बहुत कम या लगभग समाप्त हो गया है, अवशेषी अंग कहलाते हैं।

मनुष्य का एपेंडिक्स तथा पूँछ की हड्डी (Coccyx) अवशेषी अंगों के उदाहरण हैं।


2. समजात अंग किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर:
ऐसे अंग जिनकी मूल संरचना और उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग हो सकते हैं, समजात अंग कहलाते हैं।

उदाहरण: मनुष्य का हाथ और पक्षी का पंख।

ये अंग समान पूर्वज से विकास की ओर संकेत करते हैं।


3. समवृत्ति अंग किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर:
ऐसे अंग जिनका कार्य समान, लेकिन उनकी उत्पत्ति और मूल संरचना अलग होती है, समवृत्ति अंग कहलाते हैं।

उदाहरण: पक्षी का पंख और कीट का पंख।

दोनों उड़ने में सहायता करते हैं, लेकिन उनकी उत्पत्ति अलग है।


4. जैव क्रम विकास के प्रमाणस्वरूप मेरुदंडी प्राणियों में हृदय की आंतरिक संरचना की तुलनात्मक आलोचना कीजिए।

उत्तर:
विभिन्न मेरुदंडी प्राणियों के हृदय की संरचना में क्रमिक जटिलता दिखाई देती है।

  • मछलियों में 2 कक्ष होते हैं।
  • उभयचरों में 3 कक्ष होते हैं।
  • अधिकांश सरीसृपों में 3 कक्ष, परंतु मगरमच्छ में 4 कक्ष होते हैं।
  • पक्षियों और स्तनधारियों में 4 कक्ष होते हैं।

यह सरल से जटिल हृदय संरचना की क्रमिकता को दर्शाता है और विकास के प्रमाण के रूप में महत्वपूर्ण है।


5. अवशेषी अंग क्या हैं? क्रम विकास में इनकी भूमिका बताइए।

उत्तर:
जो अंग पूर्वजों में विकसित और उपयोगी थे, लेकिन वर्तमान जीवों में उनका उपयोग बहुत कम हो गया है, उन्हें अवशेषी अंग कहते हैं।

जैसे—मनुष्य में एपेंडिक्स और कॉक्सीक्स।

इन अंगों की उपस्थिति इस बात का संकेत देती है कि वर्तमान जीवों का संबंध उनके पूर्वजों से है। इसलिए ये क्रम विकास के प्रमाण प्रदान करते हैं।


6. समवृत्ति अंग के तीन उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

  1. पक्षी का पंख और कीट का पंख।
  2. मछली का पंख और व्हेल का फ्लिपर।
  3. पक्षी का पंख और चमगादड़ का पंख — कार्य उड़ना है, लेकिन संरचनात्मक आधार अलग माना जाता है।

7. जैव क्रम विकास के लिए जीवाश्म किस प्रकार प्रमाण का कार्य करते हैं?

उत्तर:
जीवाश्म प्राचीन जीवों के सुरक्षित अवशेष या उनके चिह्न हैं। अलग-अलग भू-स्तरों में पाए गए जीवाश्मों की तुलना करने पर पुराने और नए जीवों के बीच संरचनात्मक परिवर्तन का पता चलता है।

घोड़े के जीवाश्मों की श्रृंखला इसका अच्छा उदाहरण है। इससे उसके शरीर के आकार, पैरों और अंगुलियों में हुए क्रमिक परिवर्तन का पता चलता है।


8. डार्विन के सिद्धांत और लेमार्क के सिद्धांत की तुलना कीजिए।

उत्तर:

लेमार्कवादडार्विनवाद
उपयोग एवं अनुपयोग पर जोर।प्राकृतिक चयन पर जोर।
उपार्जित लक्षणों की वंशागति को स्वीकार करता है।वंशागत विविधता और चयन को महत्वपूर्ण मानता है।
जीव की आवश्यकता से लक्षण विकसित होने की बात करता है।वातावरण में संघर्ष और योग्यतम की उत्तरजीविता पर जोर देता है।
परिवर्तन का कारण जीव का उपयोग/अनुपयोग माना गया।परिवर्तन के चयन में प्रकृति की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई।

9. घोड़े के जीवाश्म क्रम विकास के पक्ष में प्रमाण कैसे प्रस्तुत करते हैं?

उत्तर:
घोड़े के विकास में Eohippus → Mesohippus → Merychippus → Equus जैसी क्रमिक श्रृंखला बताई जाती है।

इसमें—

  • शरीर का आकार बढ़ा।
  • पैरों की लंबाई बढ़ी।
  • पैर की उँगलियों की संख्या कम हुई।
  • मध्य की उँगली अधिक विकसित हुई।
  • अंततः आधुनिक घोड़े में एक प्रमुख खुर विकसित हुआ।

इसलिए घोड़े के जीवाश्म क्रमिक विकास का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।


10. अनुकूलन और क्रम विकास में संबंध स्थापित कीजिए।

उत्तर:
वातावरण के अनुसार जीवों में उपयोगी वंशागत लक्षण पाए या चयनित हो सकते हैं। ऐसे लक्षण जीवों की उत्तरजीविता और प्रजनन में सहायता करते हैं।

कई पीढ़ियों तक ऐसे लक्षणों का संचय जनसंख्या में परिवर्तन ला सकता है। इसलिए अनुकूलन प्राकृतिक चयन और क्रम विकास से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है।


11. डार्विन के सिद्धांत की कमियाँ बताइए।

उत्तर:
डार्विन ने विकास में प्राकृतिक चयन की महत्वपूर्ण भूमिका समझाई, लेकिन उनके समय में—

  1. आनुवंशिकता के नियम स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं थे।
  2. विविधताएँ उत्पन्न होने का वास्तविक आनुवंशिक आधार ज्ञात नहीं था।
  3. जीन और DNA की जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
  4. नई विविधताओं के उत्पन्न होने की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी।

बाद में आनुवंशिकी और आधुनिक जीवविज्ञान ने इन बातों को अधिक स्पष्ट किया।


12. एपेंडिक्स को अवशेषी अंग क्यों कहते हैं?

उत्तर:
मनुष्य का एपेंडिक्स एक छोटा-सा अंग है। वर्तमान मनुष्य में इसका कोई प्रमुख आवश्यक पाचन कार्य नहीं माना जाता। इसे विकासक्रम में पूर्वजों के अपेक्षाकृत विकसित पाचन तंत्र से संबंधित अवशेष माना जाता है।

इसलिए इसे अवशेषी अंग कहा जाता है।


13. मनुष्य के हाथ और पक्षी के पंख में एक रचनात्मक समानता बताइए।

उत्तर:
मनुष्य के हाथ और पक्षी के पंख की मूल अस्थि-रचना में समानता है। दोनों में ह्यूमरस, रेडियस और अल्ना जैसी प्रमुख अस्थियाँ पाई जाती हैं।

कार्य अलग होने के बावजूद संरचनात्मक समानता इनके समजात होने का प्रमाण है।


14. क्रम विकास से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:
जीवों की जनसंख्या में पीढ़ी-दर-पीढ़ी होने वाले वंशागत परिवर्तनों के लंबे क्रम को क्रम विकास (Evolution) कहते हैं।

इसके परिणामस्वरूप जीवों की संरचना, कार्य तथा जीवन-शैली में परिवर्तन हो सकते हैं और लंबे समय में नई प्रजातियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।


15. जीवाश्म क्या है?

उत्तर:
प्राचीन जीवों के शरीर, शरीर के भागों या उनकी गतिविधियों के ऐसे अवशेष या चिह्न जो चट्टानों या अन्य प्राकृतिक माध्यमों में सुरक्षित रह गए हैं, जीवाश्म (Fossils) कहलाते हैं।


16. उपार्जित लक्षणों की वंशागति से क्या समझते हैं?

उत्तर:
लेमार्क के अनुसार जीव अपने जीवनकाल में वातावरण, आवश्यकता और अंगों के उपयोग-अनुपयोग के कारण कुछ लक्षण प्राप्त कर सकता है। उनके अनुसार ऐसे उपार्जित लक्षण संतानों में पहुँच सकते हैं।

इसी विचार को उपार्जित लक्षणों की वंशागति कहा जाता है।


17. अस्तित्व के लिए संघर्ष क्या है?

उत्तर:
प्रकृति में भोजन, पानी, स्थान, साथी तथा अन्य आवश्यक संसाधन सीमित होते हैं। इसलिए जीवों के बीच जीवित रहने के लिए संघर्ष होता है।

इसे अस्तित्व के लिए संघर्ष (Struggle for existence) कहते हैं।

यह संघर्ष तीन प्रकार का हो सकता है—

  • अंतःप्रजातीय संघर्ष
  • अंतर्जातीय संघर्ष
  • पर्यावरणीय संघर्ष

18. योग्यतम की उत्तरजीविता क्या है?

उत्तर:
प्राकृतिक चयन में वे जीव जो अपने वातावरण के अनुकूल होते हैं, उनके जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना अधिक होती है।

इसी विचार को योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the fittest) कहा जाता है।


19. मनुष्य में दो अवशेषी अंगों के नाम बताइए।

उत्तर:

  1. एपेंडिक्स
  2. कॉक्सीक्स/पूँछ की हड्डी

20. जीवाश्म के दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

  1. घोड़े के जीवाश्म।
  2. आर्कियोप्टेरिक्स का जीवाश्म।

21. ‘अंगों का उपयोग एवं अनुपयोग’ किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया था?

उत्तर:
यह विचार लेमार्क के क्रम विकास सिद्धांत से संबंधित है। उन्होंने इसे अपनी पुस्तक Philosophie Zoologique (Zoological Philosophy) में प्रकाशित किया।


22. समजात अंग क्या है?

उत्तर:
समान मूल संरचना एवं उत्पत्ति वाले, लेकिन अलग-अलग कार्य करने वाले अंग समजात अंग कहलाते हैं।

उदाहरण: मनुष्य का हाथ और पक्षी का पंख।


23. समवृत्ति अंग क्या है?

उत्तर:
समान कार्य करने वाले, लेकिन अलग उत्पत्ति एवं संरचना वाले अंग समवृत्ति अंग कहलाते हैं।

उदाहरण: पक्षी का पंख और कीट का पंख।


24. क्रम विकास के पक्ष में समजात अंगों की भूमिका बताइए।

उत्तर:
समजात अंगों की मूल संरचना समान होती है, जबकि उनके कार्य अलग हो सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि विभिन्न जीवों का कोई सामान्य पूर्वज रहा होगा।

इसलिए समजात अंग सामान्य पूर्वज और अपसारी विकास (Divergent evolution) के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।


25. मिलर और यूरे के प्रयोग में प्रयुक्त अभिकारकों तथा उत्पन्न कार्बनिक यौगिक का नाम लिखिए।

उत्तर:
मिलर और यूरे ने प्रारंभिक पृथ्वी के वातावरण का अनुकरण करते हुए मुख्यतः—

  • मीथेन (CH₄)
  • अमोनिया (NH₃)
  • हाइड्रोजन (H₂)
  • जलवाष्प (H₂O)

का प्रयोग किया।

विद्युत चिंगारी देने पर अमीनो अम्ल, जैसे ग्लाइसिन और एलानिन, बने।


26. घोड़े के क्रम विकास में परिवर्तित होने वाली चार मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  1. शरीर के आकार में वृद्धि।
  2. पैरों की लंबाई में वृद्धि।
  3. पैरों की अंगुलियों की संख्या में कमी।
  4. मध्य अंगुली का अधिक विकसित होकर खुर बनना।

27. घोड़े के क्रम विकास के चार प्रमुख जीवाश्म पूर्वजों का क्रम लिखिए।

उत्तर:

Eohippus → Mesohippus → Merychippus → Equus

अर्थात—

इओहिप्पस → मेसोहिप्पस → मेरिकहिप्पस → इक्वस


28. मनुष्य की रीढ़ और पाचन तंत्र में उपस्थित एक-एक अवशेषी अंग का नाम लिखिए।

उत्तर:

  • रीढ़ के अंतिम भाग में — कॉक्सीक्स (पूँछ की हड्डी)
  • पाचन तंत्र — एपेंडिक्स

29. यदि किसी जंगल में बाघ विलुप्त हो गए हों और दूसरे अभयारण्य से बाघ वहाँ छोड़े जाएँ, तो उन्हें किन संघर्षों का सामना करना पड़ेगा?

उत्तर:
नए वातावरण में बाघों को मुख्यतः—

  1. अंतःप्रजातीय संघर्ष — दूसरे बाघों के साथ क्षेत्र और साथी के लिए।
  2. अंतर्जातीय संघर्ष — अन्य शिकारी जीवों के साथ भोजन के लिए।
  3. पर्यावरणीय संघर्ष — जलवायु, पानी और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों के साथ।

का सामना करना पड़ सकता है।


30. किसी तालाब में देशी मछलियों के साथ कुछ तेलापिया मछलियाँ छोड़ दी जाएँ, तो उन्हें किन संघर्षों का सामना करना पड़ेगा?

उत्तर:
तेलापिया मछलियों को—

  • भोजन के लिए देशी मछलियों से संघर्ष,
  • रहने की जगह के लिए संघर्ष,
  • प्रजनन के लिए संघर्ष,
  • तथा पानी में उपलब्ध ऑक्सीजन एवं अन्य संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा

करनी पड़ सकती है।

देशी मछलियों और तेलापिया के बीच संघर्ष अंतर्जातीय संघर्ष होगा।


31. संरचना और कार्य के आधार पर समवृत्ति अंग की अवधारणा उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:
समवृत्ति अंगों का कार्य समान, लेकिन मूल संरचना और उत्पत्ति अलग होती है।

उदाहरण के लिए—

पक्षी का पंख और कीट का पंख दोनों उड़ने में सहायता करते हैं। इसलिए इनका कार्य समान है। लेकिन दोनों की मूल संरचना और विकासात्मक उत्पत्ति अलग है।

इसलिए इन्हें समवृत्ति अंग कहा जाता है।


D. विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न

Long Answer Type Questions — [5 Marks]

1. जैव विकास संबंधी लेमार्क के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए। लेमार्क ने इसे किस पुस्तक में प्रकाशित कराया?

उत्तर:

जीन बैप्टिस्ट लेमार्क ने जीवों के विकास के संबंध में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके सिद्धांत को लेमार्कवाद कहा जाता है।

लेमार्क के अनुसार वातावरण में परिवर्तन होने पर जीवों की आवश्यकताएँ बदलती हैं। आवश्यकता के कारण जीव कुछ अंगों का अधिक उपयोग करते हैं और कुछ अंगों का कम उपयोग करते हैं।

लेमार्कवाद के मुख्य बिंदु

1. अंगों का उपयोग और अनुपयोग:
जिस अंग का अधिक उपयोग किया जाता है, वह अधिक विकसित और मजबूत हो सकता है। जिस अंग का उपयोग नहीं होता, वह कमजोर या अविकसित हो सकता है।

2. उपार्जित लक्षणों की वंशागति:
लेमार्क के अनुसार जीवनकाल में प्राप्त लक्षण संतानों में स्थानांतरित हो सकते हैं।

उदाहरण

लेमार्क ने जिराफ की लंबी गर्दन को समझाने के लिए कहा कि पहले जिराफ की गर्दन छोटी थी। ऊँची शाखाओं की पत्तियाँ खाने के लिए गर्दन को बार-बार फैलाने के कारण गर्दन लंबी होती गई और यह लक्षण अगली पीढ़ियों में पहुँचता गया।

लेमार्क ने अपना सिद्धांत Philosophie Zoologique (Zoological Philosophy) नामक पुस्तक में प्रकाशित किया।


2. ‘प्राकृतिक चयन’ के सिद्धांत के प्रतिपादक कौन थे? इस सिद्धांत के अनुसार नई जातियों की उत्पत्ति कैसे होती है?

उत्तर:

चार्ल्स डार्विन प्राकृतिक चयन के सिद्धांत के प्रमुख प्रतिपादक थे।

प्राकृतिक चयन के अनुसार किसी जनसंख्या के जीवों में विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। जीवों की संख्या बढ़ने के कारण भोजन, स्थान और अन्य संसाधनों के लिए संघर्ष होता है।

जो जीव वातावरण के अनुकूल उपयोगी लक्षण रखते हैं, उनके जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना अधिक होती है।

नई प्रजाति का निर्माण

विविधता

अस्तित्व के लिए संघर्ष

प्राकृतिक चयन

योग्य जीवों की अधिक उत्तरजीविता और प्रजनन

लाभकारी लक्षणों का पीढ़ियों में संचय

जनसंख्या में बड़े परिवर्तन

नई प्रजाति का निर्माण

इस प्रकार लंबे समय में प्राकृतिक चयन के कारण नई जातियों के उत्पन्न होने की प्रक्रिया को समझाया जाता है।


3. जैव विकास से आप क्या समझते हैं? क्रम विकास के पक्ष में जीवाश्म के महत्त्व को समझाइए।

उत्तर:

जीवों की जनसंख्या में पीढ़ी-दर-पीढ़ी होने वाले वंशागत परिवर्तनों के लंबे क्रम को जैव विकास या क्रम विकास (Evolution) कहते हैं।

जीवाश्मों का महत्त्व

जीवाश्म प्राचीन जीवों के सुरक्षित अवशेष या चिह्न होते हैं।

जीवाश्मों के अध्ययन से—

  1. प्राचीन जीवों की जानकारी प्राप्त होती है।
  2. पुराने और वर्तमान जीवों की तुलना की जा सकती है।
  3. समय के साथ शरीर में हुए परिवर्तनों का पता चलता है।
  4. विलुप्त जीवों के बारे में जानकारी मिलती है।
  5. घोड़े जैसे जीवों के जीवाश्मों की श्रृंखला से क्रमिक परिवर्तन का प्रमाण मिलता है।

इसलिए जीवाश्म जैव विकास के महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष प्रमाणों में से एक हैं।


4. प्राकृतिक चयन के सिद्धांत के प्रतिपादक कौन थे? इस सिद्धांत के अनुसार अस्तित्व के लिए संघर्ष की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

प्राकृतिक चयन के सिद्धांत के प्रमुख प्रतिपादक चार्ल्स डार्विन थे।

प्रकृति में जीवों की संख्या बहुत अधिक बढ़ने की क्षमता रखती है, लेकिन भोजन, पानी, स्थान और अन्य संसाधन सीमित होते हैं। इसलिए जीवों के बीच जीवन के लिए संघर्ष होता है।

संघर्ष के प्रकार

1. अंतःप्रजातीय संघर्ष:
एक ही प्रजाति के जीवों के बीच संघर्ष।
उदाहरण—एक तालाब की रोहू मछलियों के बीच भोजन के लिए संघर्ष।

2. अंतर्जातीय संघर्ष:
अलग-अलग प्रजातियों के जीवों के बीच संघर्ष।
उदाहरण—साँप और उल्लू के बीच चूहे के लिए संघर्ष।

3. पर्यावरणीय संघर्ष:
जीवों का प्रतिकूल पर्यावरण से संघर्ष।
उदाहरण—अत्यधिक गर्मी, ठंड, सूखा आदि।

इस संघर्ष में अनुकूल लक्षण वाले जीवों की उत्तरजीविता की संभावना अधिक होती है।


5. ‘उपार्जित लक्षणों की वंशागति’ से क्या समझते हैं? इसे किसने बताया? ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ से क्या समझते हैं?

उत्तर:

उपार्जित लक्षणों की वंशागति का विचार लेमार्क ने दिया था।

उनके अनुसार जीव अपने जीवनकाल में वातावरण, आवश्यकता तथा अंगों के अधिक या कम उपयोग के कारण कुछ लक्षण प्राप्त करता है। उनके अनुसार ये लक्षण संतानों में पहुँच सकते हैं।

उदाहरण के रूप में लेमार्क ने जिराफ की लंबी गर्दन की व्याख्या अंगों के उपयोग के आधार पर की।

योग्यतम की उत्तरजीविता

डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत में वातावरण के अनुकूल जीवों के जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना अधिक होती है। ऐसे जीव अपने उपयोगी लक्षण अगली पीढ़ी में अधिक प्रभावी रूप से पहुँचा सकते हैं।

इसी विचार को योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the fittest) कहते हैं।


6. “अनुकूलन के द्वारा विकास की क्रिया संपन्न होती है”—व्याख्या कीजिए। विकास प्रमाणित करने में जीवाश्मों की भूमिका बताइए।

उत्तर:

जीव अलग-अलग वातावरण में रहते हैं। वातावरण की परिस्थितियों के अनुसार उनमें कुछ उपयोगी वंशागत विशेषताएँ पाई जाती हैं। ऐसी विशेषताएँ जीवों को जीवित रहने और प्रजनन करने में सहायता करती हैं। इन्हें अनुकूलन कहते हैं।

उदाहरण के लिए—

  • रेगिस्तान के पौधों में जल संरक्षण की विशेषताएँ।
  • मछलियों में जल में तैरने के लिए धारारेखीय शरीर।
  • ध्रुवीय जीवों में ठंड से बचने के लिए शरीर पर वसा या घने बाल।

जब अनुकूल लक्षणों वाले जीव अधिक जीवित रहते और प्रजनन करते हैं, तो कई पीढ़ियों में ये लक्षण जनसंख्या में अधिक सामान्य हो सकते हैं। इससे विकास की प्रक्रिया को समझने में सहायता मिलती है।

जीवाश्मों की भूमिका

जीवाश्म पुराने जीवों के अवशेष हैं। अलग-अलग समय के जीवाश्मों की तुलना करने पर जीवों में हुए क्रमिक परिवर्तनों का पता चलता है।

घोड़े के जीवाश्म शरीर के आकार, पैरों की लंबाई तथा अंगुलियों की संख्या में हुए परिवर्तनों का उदाहरण देते हैं।

इसलिए जीवाश्म विकास के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।


7. जैव विकास के दो प्रमुख प्रमाण बताइए। विभिन्न वर्ग के मेरुदंडी प्राणियों के हृदय की संरचना क्रम विकास के पक्ष में किस प्रकार प्रमाण है?

उत्तर:

जैव विकास के दो प्रमुख प्रमाण हैं—

  1. जीवाश्म
  2. समजात अंग

इसके अतिरिक्त अवशेषी अंग, भ्रूणीय समानताएँ आदि भी विकास के अध्ययन में उपयोगी हैं।

हृदय की संरचना

विभिन्न मेरुदंडी प्राणियों में हृदय की संरचना में क्रमिक जटिलता दिखाई देती है—

प्राणीहृदय के कक्ष
मछली2
उभयचर3
अधिकांश सरीसृप3
मगरमच्छ4
पक्षी4
स्तनधारी4

इस प्रकार हृदय की संरचना में सरल से अधिक जटिल व्यवस्था की ओर परिवर्तन दिखाई देता है। यह मेरुदंडियों में विकासात्मक संबंधों को समझने में सहायता करता है।


8. प्राकृतिक चयन सिद्धांत के प्रवक्ता कौन हैं? योग्यतम की उत्तरजीविता एवं प्राकृतिक चयन के माध्यम से प्रजाति की उत्पत्ति कैसे होती है?

उत्तर:

प्राकृतिक चयन के सिद्धांत के प्रमुख प्रवक्ता चार्ल्स डार्विन थे।

जीवों की जनसंख्या में प्राकृतिक रूप से विविधताएँ पाई जाती हैं। सभी जीवों के लिए भोजन, पानी और स्थान पर्याप्त नहीं होते। इसलिए अस्तित्व के लिए संघर्ष होता है।

इस संघर्ष में वातावरण के अनुकूल उपयोगी लक्षण वाले जीवों के जीवित रहने की संभावना अधिक होती है। वे अधिक प्रजनन करते हैं और उनके उपयोगी वंशागत लक्षण अगली पीढ़ियों में अधिक दिखाई दे सकते हैं।

कई पीढ़ियों तक यह प्रक्रिया चलने पर जनसंख्या में पर्याप्त परिवर्तन हो सकता है।

विविधता → संघर्ष → प्राकृतिक चयन → योग्यतम की उत्तरजीविता → लक्षणों का संचय → नई प्रजाति

इसी प्रकार प्राकृतिक चयन नई प्रजातियों के निर्माण में योगदान कर सकता है।


9. व्हेल के फ्लिपर एवं पक्षी के पंख को समजात अंग क्यों माना जाता है? साथ ही मधुमक्खी भोजन के स्रोत और उसकी स्थिति की जानकारी कैसे देती है?

उत्तर:

व्हेल का फ्लिपर और पक्षी का पंख कार्य की दृष्टि से अलग हो सकते हैं, लेकिन दोनों के अग्रपाद की मूल अस्थि-रचना में समानता पाई जाती है।

दोनों में प्रमुख रूप से—

  • ह्यूमरस
  • रेडियस
  • अल्ना

जैसी अस्थियों का समान मूल विन्यास पाया जाता है।

इसलिए इन्हें समजात अंग माना जाता है और ये सामान्य पूर्वज की ओर संकेत करते हैं।

मधुमक्खी की जानकारी देने की विधि

मधुमक्खी भोजन के स्रोत की जानकारी दूसरी मधुमक्खियों को विशेष नृत्य (waggle dance) द्वारा देती है।

नृत्य की दिशा और उसकी अवधि/पैटर्न से अन्य मधुमक्खियों को भोजन के स्रोत की दिशा और दूरी के बारे में जानकारी मिलती है।


10. उपयुक्त उदाहरण द्वारा डार्विन की प्राकृतिक चयन प्रक्रिया समझाइए। रोहू मछली के जलीय अनुकूलन में स्विम ब्लैडर की भूमिका बताइए।

उत्तर:

डार्विन के अनुसार जीवों में विविधताएँ पाई जाती हैं और जीवों की संख्या बढ़ने के कारण अस्तित्व के लिए संघर्ष होता है।

मान लीजिए किसी वातावरण में हरे और अन्य रंग के कीट पाए जाते हैं। हरी पत्तियों पर हरे कीट कम दिखाई देते हैं। इसलिए शिकारी उन्हें कम पकड़ सकते हैं। परिणामस्वरूप हरे कीटों के जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना अधिक हो सकती है।

कई पीढ़ियों तक प्राकृतिक चयन के कारण हरे रंग का लक्षण जनसंख्या में अधिक सामान्य हो सकता है।

रोहू मछली में स्विम ब्लैडर

स्विम ब्लैडर (वायु-पुटिका) मछली के शरीर में उछाल (buoyancy) बनाए रखने में सहायता करता है।

इसके कारण मछली पानी में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा खर्च किए बिना विभिन्न गहराइयों पर रह सकती है।

इस प्रकार स्विम ब्लैडर जलीय जीवन के लिए उपयोगी अनुकूलन है।


11. मिलर तथा यूरे के प्रयोग से प्राप्त प्रमाण जीवन की उत्पत्ति के सिद्धांत में किस प्रकार उपयोगी हैं?

उत्तर:

मिलर और यूरे ने प्रारंभिक पृथ्वी के संभावित वातावरण का प्रयोगशाला में अनुकरण किया।

उन्होंने एक बंद उपकरण में—

मीथेन + अमोनिया + हाइड्रोजन + जलवाष्प

जैसे पदार्थों का उपयोग किया और विद्युत चिंगारी द्वारा बिजली/तड़ित जैसी ऊर्जा प्रदान की।

कुछ समय बाद उपकरण में कार्बनिक यौगिक, विशेष रूप से अमीनो अम्ल जैसे ग्लाइसिन और एलानिन, पाए गए।

इस प्रयोग से यह प्रमाण मिला कि उपयुक्त प्रारंभिक पृथ्वी जैसी परिस्थितियों में कुछ सरल अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक अणु स्वतः रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा बन सकते हैं।

इसलिए यह प्रयोग जीवन की रासायनिक उत्पत्ति की परिकल्पना के समर्थन में महत्वपूर्ण प्रयोगात्मक प्रमाण प्रदान करता है।


12. लेमार्क के क्रम विकास सिद्धांत के मुख्य दो विषयों का वर्णन कीजिए। हृदय की बनावट के तुलनात्मक विचरण से क्रम विकास कैसे प्रदर्शित होता है?

उत्तर:

लेमार्कवाद के दो प्रमुख विचार हैं—

1. अंगों का उपयोग और अनुपयोग

जिस अंग का अधिक उपयोग होता है, वह अधिक विकसित हो सकता है और जिस अंग का उपयोग कम होता है, वह कमजोर हो सकता है।

2. उपार्जित लक्षणों की वंशागति

लेमार्क के अनुसार जीव के जीवनकाल में प्राप्त लक्षण संतानों में स्थानांतरित हो सकते हैं।

हृदय की संरचना और विकास

मेरुदंडी प्राणियों में हृदय की संरचना में क्रमिक जटिलता दिखाई देती है।

मछली — 2 कक्ष

उभयचर — 3 कक्ष

अधिकांश सरीसृप — 3 कक्ष

पक्षी/स्तनधारी — 4 कक्ष

यह संरचनात्मक तुलना विभिन्न समूहों के विकासात्मक संबंधों को समझने में सहायता करती है।


13. फ्लोचार्ट की सहायता से मुख्य क्रम विकास घटनाओं को दिखाइए।

उत्तर:

क्रम विकास की मुख्य घटनाओं को सरल रूप में इस प्रकार दिखाया जा सकता है—

जीवों में विविधता

अस्तित्व के लिए संघर्ष

प्राकृतिक चयन

योग्यतम जीवों की उत्तरजीविता

लाभकारी वंशागत लक्षणों का संचय

जनसंख्या में क्रमिक परिवर्तन

प्रजनन पृथक्करण/अलगाव

नई प्रजाति का निर्माण


14. डार्विनवाद में अत्यधिक संतानोत्पत्ति, प्राकृतिक चयन तथा नई जाति की उत्पत्ति को समझाइए। साथ ही अनुकूलन को दो उदाहरणों से सत्यापित कीजिए।

उत्तर:

1. अत्यधिक संतानोत्पत्ति

अधिकांश जीव बड़ी संख्या में संतान उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं। यदि सभी संतानें जीवित रहें और प्रजनन करें, तो जीवों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ जाएगी।

2. अस्तित्व के लिए संघर्ष

भोजन, पानी, स्थान और साथी जैसे संसाधन सीमित होते हैं। इसलिए जीवों के बीच संघर्ष होता है।

3. प्राकृतिक चयन

जीवों में विविधताएँ होती हैं। वातावरण के अनुकूल उपयोगी लक्षण वाले जीवों के जीवित रहने और प्रजनन की संभावना अधिक होती है। प्रकृति द्वारा इस प्रकार के चयन को प्राकृतिक चयन कहा जाता है।

4. नई जाति की उत्पत्ति

लंबे समय तक उपयोगी वंशागत लक्षणों के संचय और समूहों के अलगाव से उनमें पर्याप्त अंतर विकसित हो सकते हैं। परिणामस्वरूप नई प्रजाति उत्पन्न हो सकती है।

अनुकूलन के उदाहरण

उदाहरण 1 — कैक्टस:
रेगिस्तानी पौधे कैक्टस में पत्तियाँ काँटों में बदल गई हैं और तना मांसल होता है। इससे जल की हानि कम होती है और जल संग्रह में सहायता मिलती है।

उदाहरण 2 — मछली:
मछली का धारारेखीय शरीर, पंख और गलफड़े जलीय जीवन के लिए अनुकूलित हैं। धारारेखीय शरीर पानी में गति को सुगम बनाता है और गलफड़े जल से ऑक्सीजन प्राप्त करने में सहायता करते हैं।

इस प्रकार अनुकूलन जीवों को विशेष वातावरण में जीवित रहने और प्रजनन करने में सहायता करता है।

अध्याय — अनुकूलन (Adaptation)

A. सही विकल्प का चयन कीजिए

Multiple Choice Questions — [1 Mark]

1. सुंदरी है—

(a) जलोद्भिद्
(b) मरुद्भिद्
(c) लवणोद्भिद्
(d) मध्योद्भिद्

उत्तर: (c) लवणोद्भिद्

व्याख्या: सुंदरी (Heritiera fomes) लवणीय तथा दलदली मैंग्रोव क्षेत्र में पाई जाती है। इसलिए इसे लवणोद्भिद् पौधे के उदाहरण के रूप में पढ़ाया जाता है।


2. कबूतर का डैना किसका संपरिवर्तित रूप है?

(a) अग्रबाहु
(b) पश्चबाहु
(c) पूँछ
(d) सिर

उत्तर: (a) अग्रबाहु


3. रोहू मछली में पंखों की संख्या है—

(a) 5
(b) 7
(c) 6
(d) 8

उत्तर: (b) 7


4. कैक्टस की पत्ती का काँटे में रूपांतरण किस कारण होता है?

(a) प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ाने के लिए
(b) वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ाने के लिए
(c) वाष्पोत्सर्जन को कम करने के लिए
(d) श्वसन की दर बढ़ाने के लिए

उत्तर: (c) वाष्पोत्सर्जन को कम करने के लिए


5. वह मिट्टी जिसमें सुंदरी पौधा उगता है, उसमें होता है—

(a) अधिक लवण और अधिक जल
(b) अधिक लवण और कम जल
(c) अधिक जल और कम लवण
(d) कम जल और कम लवण

उत्तर: (a) अधिक लवण और अधिक जल


6. पर्णाभ वृंत (Phyllode) है एक—

(a) रूपांतरित पत्ता
(b) रूपांतरित तना
(c) न तो पत्ता और न तना
(d) रूपांतरित वृंत

उत्तर: (d) रूपांतरित वृंत


7. अस्थियुक्त मछलियों में स्विम ब्लैडर में गैस का स्राव/अवशोषण किसके द्वारा होता है?

(a) लाल ग्रंथि (Red gland)
(b) वायु प्रकोष्ठ
(c) गैस्ट्रिक ग्रंथि
(d) रेटे मिराबिले (Rete mirabile)

उत्तर: (d) रेटे मिराबिले (Rete mirabile)


8. निम्नलिखित में कौन अपने समूह के दूसरे सदस्यों को विशिष्ट प्रकार के नृत्य द्वारा भोजन की सूचना देता है?

(a) चिम्पैंजी
(b) तिलचट्टा
(c) मोर
(d) मधुमक्खी

उत्तर: (d) मधुमक्खी


9. मधुमक्खियाँ वैगल (Waggle) नृत्य किस कार्य के लिए करती हैं?

(a) प्रजनन साथी की खोज के लिए
(b) खाद्य स्रोत की दूरी तथा दिशा की सूचना श्रमिक मधुमक्खियों तक पहुँचाने के लिए
(c) नए छत्ते के निर्माण के लिए जगह चुनने के लिए
(d) शत्रु से बचने के लिए

उत्तर: (b) खाद्य स्रोत की दूरी तथा दिशा की सूचना श्रमिक मधुमक्खियों तक पहुँचाने के लिए


B. अति संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न

Very Short Answer Type Questions — [1 Mark]

1. अनुकूलन कहाँ होता है?

उत्तर: अनुकूलन जीवों और उनकी आबादी में उनके विशिष्ट पर्यावरण के अनुसार विकसित होता है।


2. श्वसन मूल किस पौधे में पाई जाती है?

उत्तर: सुंदरी जैसे मैंग्रोव पौधों में।


3. कबूतर का डैना किस अंग का संपरिवर्तित रूप है?

उत्तर: अग्रबाहु (Forelimb) का।


4. कबूतर उड़ने के लिए किस अंग की सहायता लेता है?

उत्तर: डैने (पंख) और वायु थैलियों की सहायता से।


5. कैक्टस के किस अंग का रूपांतरण काँटे में हुआ है?

उत्तर: पत्ती।


6. कैक्टस में काँटे किस अंग के रूपांतरण से बनते हैं?

उत्तर: पत्ती के।


7. किस पौधे में फिलोक्लेड (Phylloclade) पाया जाता है?

उत्तर: Opuntia (नागफनी) में।


8. रोहू मछली में बिना जोड़े के पंखों की संख्या कितनी है?

उत्तर: 5 — दो पृष्ठीय, दो गुदीय और एक पुच्छीय पंख।


9. कबूतर में कितने वायुकोष पाए जाते हैं?

उत्तर: 9 वायुकोष।


10. अनुकूलन किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी विशेष पर्यावरण में जीवित रहने और प्रजनन करने में सहायता करने वाले विशेष वंशागत लक्षणों को अनुकूलन कहते हैं।


11. लवणोद्भिद् से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: ऐसे पौधे जो लवणीय मिट्टी या अधिक लवण वाले वातावरण में रहने के लिए अनुकूलित होते हैं, लवणोद्भिद् कहलाते हैं।


12. मछली में स्विम ब्लैडर की भूमिका बताइए।

उत्तर: स्विम ब्लैडर मछली के शरीर में उछाल (Buoyancy) बनाए रखने में सहायता करता है, जिससे वह पानी में विभिन्न गहराइयों पर रह सकती है।


13. न्यूमेटोफोर कहाँ पाया जाता है? इसका क्या कार्य है?

उत्तर: न्यूमेटोफोर मैंग्रोव पौधों, जैसे सुंदरी में पाया जाता है।

इसका मुख्य कार्य दलदली और ऑक्सीजन की कमी वाली मिट्टी में वायुमंडल से ऑक्सीजन प्राप्त करने में सहायता करना है।


14. जल की हानि रोकने के लिए कैक्टस में दो अनुकूलन बताइए।

उत्तर:

  1. इसकी पत्तियाँ काँटों में रूपांतरित हो गई हैं।
  2. इसका तना मोटा, हरा और जल संग्रह करने वाला होता है तथा बाहरी सतह पर मोमी परत होती है।

15. वाष्पोत्सर्जन रोकने के लिए कैक्टस में कौन-सा अनुकूलन पाया जाता है?

उत्तर: इसकी पत्तियाँ काँटों में परिवर्तित हो गई हैं और तने पर मोम जैसी क्यूटिकल परत होती है।


16. नमक के प्रति सहनशीलता के लिए सुंदरी पौधे में एक अनुकूलन बताइए।

उत्तर: सुंदरी पौधा अतिरिक्त लवण को विशेष लवण-उत्सर्जी ग्रंथियों/पत्तियों के माध्यम से बाहर निकालने में सक्षम होता है।


17. चिम्पैंजी किस प्रकार बादाम/कठोर छिलके वाले खाद्य को खाने के लिए तोड़ते हैं?

उत्तर: चिम्पैंजी पत्थर जैसे उपकरणों का उपयोग करके कठोर खोल को तोड़ते हैं।


C. संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न

Short Answer Type Questions — [2 Marks]

1. क्रम विकास और अनुकूलन में संबंध बताइए।

उत्तर:
क्रम विकास के दौरान जीवों की आबादी में पीढ़ी-दर-पीढ़ी वंशागत परिवर्तन होते हैं। इनमें से जो परिवर्तन जीव को उसके वातावरण में जीवित रहने और प्रजनन में सहायता करते हैं, वे प्राकृतिक चयन द्वारा अधिक सामान्य हो सकते हैं।

इस प्रकार अनुकूलन क्रम विकास की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।


2. सजीवों में अनुकूलन का क्या उद्देश्य है?

उत्तर:
अनुकूलन का मुख्य उद्देश्य जीव को उसके पर्यावरण में—

  1. जीवित रहने, और
  2. प्रजनन करने

में सहायता करना है।

अनुकूलन के कारण जीव भोजन प्राप्त करने, शत्रुओं से बचने तथा प्रतिकूल पर्यावरण का सामना करने में अधिक सक्षम हो सकता है।


3. अनुकूलन किसे कहते हैं?

उत्तर:
किसी विशेष पर्यावरण में जीवित रहने तथा प्रजनन करने में सहायता करने वाले जीव के विशेष वंशागत लक्षणों को अनुकूलन कहते हैं।

उदाहरण—कैक्टस में काँटेदार पत्तियाँ और मछली में गलफड़े।


4. व्यवहार की परिभाषा बताइए।

उत्तर:
जीव द्वारा किसी परिस्थिति, उत्तेजना या पर्यावरण के प्रति दिखाई जाने वाली क्रिया या प्रतिक्रिया के तरीके को व्यवहार कहते हैं।

उदाहरण—मधुमक्खियों का वैगल नृत्य।


5. मछली में स्विम ब्लैडर की भूमिका बताइए।

उत्तर:
स्विम ब्लैडर मछली के शरीर में उछाल बनाए रखता है। इसके कारण मछली पानी में बिना अधिक ऊर्जा खर्च किए अपनी स्थिति और गहराई बनाए रखने में सक्षम होती है।


6. मधुमक्खी दूसरी मधुमक्खियों को भोजन के स्रोत और स्थिति की जानकारी कैसे देती है?

उत्तर:
मधुमक्खी भोजन का स्रोत मिलने के बाद छत्ते में लौटकर विशेष वैगल नृत्य करती है।

इस नृत्य की दिशा से भोजन के स्रोत की दिशा और नृत्य के विशेष पैटर्न/अवधि से उसकी दूरी की जानकारी दूसरी मधुमक्खियों को मिलती है।


7. सुंदरी का पौधा अतिरिक्त लवण का उत्सर्जन किस प्रकार करता है?

उत्तर:
सुंदरी जैसे लवणोद्भिद् पौधे अतिरिक्त लवण को विशेष लवण-स्रावी ग्रंथियों/पत्तियों के माध्यम से बाहर निकाल सकते हैं। इससे शरीर में लवण की अधिक मात्रा जमा होने से बचाव होता है।


8. कबूतर के वायुकोषों के अनुकूलन में दो महत्त्व बताइए।

उत्तर:

  1. वायुकोष शरीर को हल्का रखने तथा उड़ान में सहायता करते हैं।
  2. ये फेफड़ों में वायु के निरंतर प्रवाह में सहायता करते हैं, जिससे उड़ान के दौरान प्रभावी श्वसन होता है।

9. लवण के प्रति सहनशीलता के लिए सुंदरी पौधे में दो अनुकूलन बताइए।

उत्तर:

  1. अतिरिक्त लवण को विशेष लवण-स्रावी ग्रंथियों के द्वारा बाहर निकालना।
  2. जड़ों द्वारा लवण के प्रवेश को सीमित/नियंत्रित करना।

इन अनुकूलनों से पौधा लवणीय दलदली वातावरण में जीवित रह सकता है।


10. चिम्पैंजी किस प्रकार दीमकों का शिकार करके भोजन के रूप में उपयोग करते हैं?

उत्तर:
चिम्पैंजी दीमक के बिल में पतली टहनी या घास जैसी वस्तु डालते हैं। दीमक उस वस्तु से चिपक जाती हैं। इसके बाद चिम्पैंजी उस वस्तु को बाहर निकालकर दीमकों को खा लेते हैं।

यह उपकरण के उपयोग द्वारा भोजन प्राप्त करने वाला व्यवहार है।


11. कबूतर के वायुकोष का उड़ने में क्या कार्य है?

उत्तर:
कबूतर के वायुकोष—

  • शरीर को हल्का रखने में सहायता करते हैं।
  • फेफड़ों में वायु के निरंतर प्रवाह को बनाए रखने में सहायता करते हैं।
  • उड़ान के दौरान अधिक ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रभावी श्वसन में सहायता करते हैं।

12. “जीवों के आकार, शारीरिक कार्य-कलापों तथा आचरण में बदलाव ही अनुकूलन है”—इस कथन को दो उदाहरणों से सत्यापित करें।

उत्तर:

उदाहरण 1 — कैक्टस:
कैक्टस की पत्तियाँ काँटों में परिवर्तित हो गई हैं और तना जल संग्रह करता है। इससे रेगिस्तान में जल की कमी का सामना करने में सहायता मिलती है।

उदाहरण 2 — चिम्पैंजी:
चिम्पैंजी भोजन प्राप्त करने के लिए पत्थर या टहनी जैसे उपकरणों का उपयोग करते हैं। यह व्यवहारिक अनुकूलन का उदाहरण है।

इस प्रकार अनुकूलन केवल शरीर की बनावट में ही नहीं, बल्कि शारीरिक क्रियाओं और व्यवहार में भी हो सकता है।


D. विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न

Long Answer Type Questions — [5 Marks]

1. ‘व्यवहार’ किसे कहते हैं? विकास की विधि में व्यवहार क्यों महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर:

जीव द्वारा किसी उत्तेजना, परिस्थिति या पर्यावरण के प्रति दिखाई जाने वाली क्रिया या प्रतिक्रिया के तरीके को व्यवहार (Behaviour) कहते हैं।

व्यवहार जीव के जीवन और उत्तरजीविता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विकास में व्यवहार का महत्त्व

1. भोजन प्राप्त करने में सहायता:
जीव विशेष व्यवहार के द्वारा भोजन खोजते और प्राप्त करते हैं।

2. शत्रुओं से बचाव:
कुछ जीव खतरा देखकर भागते हैं, छिपते हैं या रक्षा का व्यवहार करते हैं।

3. प्रजनन में सहायता:
साथी की खोज और प्रजनन संबंधी व्यवहार प्रजाति की निरंतरता में सहायता करते हैं।

4. पर्यावरण के अनुसार प्रतिक्रिया:
जीव बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार अपना व्यवहार बदल सकते हैं।

5. अनुकूलन में योगदान:
ऐसे व्यवहार जो जीव के जीवित रहने और प्रजनन में सहायता करते हैं, उत्तरजीविता के लिए लाभकारी हो सकते हैं।

उदाहरण: मधुमक्खियों का वैगल नृत्य भोजन की दिशा और दूरी की जानकारी देता है। इसी प्रकार चिम्पैंजी उपकरणों का प्रयोग करके भोजन प्राप्त करते हैं।

इसलिए व्यवहार जीव के उत्तरजीविता, भोजन, सुरक्षा और प्रजनन में महत्वपूर्ण है।


2. ‘अनुकूलन’ से आप क्या समझते हैं? सजीवों की आबादी में अनुकूलन की उत्पत्ति कैसे होती है?

उत्तर:

किसी विशेष पर्यावरण में जीवित रहने और प्रजनन करने में सहायता करने वाले विशेष वंशागत लक्षणों को अनुकूलन कहते हैं।

अनुकूलन की उत्पत्ति

जीवों की आबादी में प्राकृतिक रूप से विविधताएँ पाई जाती हैं। इनमें से कुछ विविधताएँ पर्यावरण के लिए उपयोगी हो सकती हैं।

जब पर्यावरण में संघर्ष होता है, तो अनुकूल लक्षण वाले जीवों के जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना अधिक हो सकती है।

वे अपने वंशागत लक्षणों को अगली पीढ़ी में पहुँचा सकते हैं।

कई पीढ़ियों तक इस प्रकार के प्राकृतिक चयन से उपयोगी लक्षण आबादी में अधिक सामान्य हो सकते हैं।

क्रम

विविधता → पर्यावरणीय संघर्ष → प्राकृतिक चयन → योग्य जीवों की अधिक उत्तरजीविता → प्रजनन → अगली पीढ़ी में लक्षण → अनुकूलन

इस प्रकार अनुकूलन विकास और प्राकृतिक चयन से संबंधित प्रक्रिया है।


3. कैक्टस की पत्ती काँटे में क्यों रूपांतरित होती है? मछली के स्विम ब्लैडर और पक्षियों के फेफड़ों के साथ लगी वायु थैलियों की भूमिका बताइए।

उत्तर:

कैक्टस की पत्ती काँटे में क्यों बदलती है?

कैक्टस रेगिस्तानी वातावरण में रहता है जहाँ पानी बहुत कम होता है। पत्तियों का काँटों में रूपांतरण पत्ती के सतह क्षेत्र को कम करता है और वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल की हानि कम करने में सहायता करता है।

कैक्टस का हरा तना प्रकाश संश्लेषण करता है।

मछली का स्विम ब्लैडर

स्विम ब्लैडर मछली के शरीर में उछाल बनाए रखने में सहायता करता है। इससे मछली पानी में अपनी स्थिति बनाए रख सकती है।

पक्षियों की वायु थैलियाँ

पक्षियों की वायु थैलियाँ—

  • शरीर को हल्का रखने में सहायता करती हैं।
  • फेफड़ों में वायु के निरंतर प्रवाह में सहायता करती हैं।
  • उड़ान के समय प्रभावी श्वसन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस प्रकार ये तीनों संरचनाएँ अपने-अपने वातावरण में जीवों के जीवन के लिए महत्वपूर्ण अनुकूलन हैं।


4. व्यवहार अनुकूलन में किस प्रकार सहायता करता है? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

जीवों का व्यवहार उनके पर्यावरण में जीवित रहने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। किसी विशेष परिस्थिति में उपयुक्त व्यवहार जीव को भोजन प्राप्त करने, शत्रुओं से बचने और प्रजनन करने में सहायता कर सकता है।

उदाहरण 1 — मधुमक्खी

मधुमक्खी भोजन का स्रोत मिलने के बाद छत्ते में लौटकर वैगल नृत्य करती है। इस नृत्य से दूसरी मधुमक्खियों को भोजन की दिशा और दूरी की जानकारी मिलती है।

उदाहरण 2 — चिम्पैंजी

चिम्पैंजी भोजन प्राप्त करने के लिए पत्थर और टहनी जैसे उपकरणों का उपयोग करते हैं। दीमक प्राप्त करने के लिए वे पतली टहनी को बिल में डालकर दीमकों को बाहर निकाल सकते हैं।

इस प्रकार विशेष व्यवहार जीवों को भोजन प्राप्त करने और उत्तरजीविता में सहायता करता है।


5. ‘व्यवहार’ किसे कहते हैं? विकास की विधि में व्यवहार क्यों महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर:

जीव द्वारा पर्यावरण या किसी उत्तेजना के प्रति दिखाई जाने वाली क्रिया या प्रतिक्रिया को व्यवहार कहते हैं।

विकास की प्रक्रिया में व्यवहार महत्वपूर्ण है क्योंकि जीव का व्यवहार उसके वातावरण के अनुसार उसकी उत्तरजीविता को प्रभावित करता है।

उदाहरण—

  • पक्षियों का भोजन की खोज करना।
  • शिकारियों से बचने के लिए जीवों का छिपना।
  • मधुमक्खियों का वैगल नृत्य।
  • चिम्पैंजी का उपकरणों द्वारा भोजन प्राप्त करना।

यदि कोई व्यवहार जीव को भोजन प्राप्त करने, शत्रु से बचने या प्रजनन करने में सहायता करता है, तो वह उसके लिए लाभकारी हो सकता है।

इसलिए व्यवहार अनुकूलन और उत्तरजीविता की महत्वपूर्ण रणनीति है।


6. ‘अनुकूलन’ से आप क्या समझते हैं? सजीवों की आबादी में अनुकूलन की उत्पत्ति कैसे होती है?

उत्तर:

विशिष्ट पर्यावरण में जीवित रहने और प्रजनन करने में सहायता करने वाले वंशागत लक्षणों को अनुकूलन कहते हैं।

आबादी में विभिन्नताएँ होती हैं। कुछ विभिन्नताएँ वातावरण के अनुसार लाभकारी होती हैं। प्राकृतिक चयन के कारण लाभकारी लक्षण वाले जीवों के जीवित रहने और प्रजनन की संभावना अधिक हो सकती है।

इन लक्षणों के संतानों में जाने और कई पीढ़ियों तक उनके संचय से आबादी में अनुकूलन अधिक सामान्य हो सकता है।

विविधता → प्राकृतिक चयन → योग्यतम की उत्तरजीविता → प्रजनन → वंशागत लक्षणों का संचय → अनुकूलन


7. व्यवहार अनुकूलन में किस प्रकार सहायता करता है? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

व्यवहार पर्यावरण के अनुसार जीव की प्रतिक्रिया का तरीका है। उपयुक्त व्यवहार जीव को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहने में सहायता कर सकता है।

मधुमक्खी का उदाहरण

मधुमक्खी भोजन का स्रोत मिलने पर छत्ते में लौटकर वैगल नृत्य करती है। नृत्य की दिशा और पैटर्न से दूसरी मधुमक्खियों को भोजन की दिशा और दूरी की सूचना मिलती है।

चिम्पैंजी का उदाहरण

चिम्पैंजी पत्थर और टहनी जैसे उपकरणों का उपयोग करके भोजन प्राप्त करते हैं। वे टहनी को दीमक के बिल में डालकर दीमक बाहर निकाल सकते हैं।

इस प्रकार व्यवहार भोजन प्राप्त करने, सुरक्षा और उत्तरजीविता में सहायता करता है और इसलिए यह अनुकूलन की महत्वपूर्ण रणनीति है।


8. पानी के अधिक नुकसान को सहने की क्षमता ऊँटों में किस प्रकार RBC के विशिष्ट लक्षण से संबंधित है? खाद्य प्राप्त करने के लिए चिम्पैंजी द्वारा अपनाई जाने वाली समस्या-समाधान विधियों के उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

ऊँट मरुस्थलीय वातावरण के लिए अत्यधिक अनुकूलित जीव है। उसके शरीर में जल की कमी की स्थिति को सहने की विशेष क्षमता होती है।

ऊँट की लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs) सामान्य स्तनधारी RBCs की तुलना में विशेष आकार की होती हैं और जल की कमी तथा पुनः जल प्राप्त होने की स्थिति में रक्त संचार को बनाए रखने में सहायता करती हैं। ऊँट की अंडाकार RBCs निर्जलीकरण के समय भी प्रवाहित हो सकती हैं और पानी उपलब्ध होने पर तेजी से जल ग्रहण करने की स्थिति को सह सकती हैं।

चिम्पैंजी की समस्या-समाधान क्षमता

चिम्पैंजी भोजन प्राप्त करने के लिए उपकरणों का प्रयोग करते हैं।

उदाहरण 1: दीमक निकालने के लिए पतली टहनी को दीमक के बिल में डालते हैं।

उदाहरण 2: कठोर खोल वाले खाद्य को पत्थर से तोड़कर अंदर का भोजन निकालते हैं।

इस प्रकार ऊँट में शारीरिक अनुकूलन और चिम्पैंजी में व्यवहारिक अनुकूलन उत्तरजीविता में सहायता करते हैं।

notice : इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के class -12 life science की पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।

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