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— डॉ. रमेश उपाध्याय
1. लेखक परिचय — डॉ. रमेश उपाध्याय
डॉ. रमेश उपाध्याय हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार, उपन्यासकार, नाटककार, आलोचक, संपादक और अध्यापक थे। उनका जन्म 1 मार्च 1942 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले के बढ़ारी बैस गाँव में हुआ था। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. किया तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की। बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी का अध्यापन किया। वे साहित्यिक पत्रिका ‘कथन’ के संस्थापक-संपादक भी रहे।
रमेश उपाध्याय ने कहानी, उपन्यास, नाटक, नुक्कड़ नाटक, निबंध और आलोचना आदि अनेक विधाओं में लेखन किया। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘जमी हुई झील’, ‘शेष इतिहास’, ‘नदी के साथ’, ‘चतुर्दिक’, ‘दंडद्वीप’, ‘स्वप्नजीवी’ और ‘हरे फूल की खुशबू’ आदि शामिल हैं। उन्हें साहित्यिक योगदान के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार सहित कई सम्मान मिले।
उनकी रचनाओं में सामाजिक जीवन, मानवीय संवेदना, नैतिकता और सामाजिक सरोकारों का प्रभाव दिखाई देता है। ‘शाप-मुक्ति’ उनकी एक प्रेरणादायक कहानी है, जिसमें बचपन की एक क्रूर गलती, पश्चाताप और उसके प्रायश्चित की कथा प्रस्तुत की गई है।
डॉ. रमेश उपाध्याय का निधन 2021 में हुआ।
2. कहानी का पूरा सारांश
‘शाप-मुक्ति’ एक मार्मिक और प्रेरणादायक कहानी है। कहानी का मुख्य पात्र डॉ. प्रभात है, जिसका बचपन का नाम मंटू था।
कहानी का कथावाचक अपनी बूढ़ी दादी की आँखों का इलाज कराने उन्हें दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र-चिकित्सक डॉ. प्रभात के पास ले जाता है। बातचीत के दौरान पता चलता है कि डॉ. प्रभात और कथावाचक दोनों इलाहाबाद के रहने वाले हैं। डॉ. प्रभात कथावाचक को उसके बचपन के नाम बब्बू से पहचान लेते हैं। कथावाचक भी समझ जाता है कि डॉ. प्रभात वास्तव में उसका बचपन का मित्र मंटू है।
डॉक्टर को पहचानते ही दादी को लगभग पैंतीस वर्ष पुरानी घटना याद आ जाती है। बचपन में मंटू ने आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें खराब कर दी थीं। यह काम उसने बचपने में शरारत और अज्ञानता के कारण किया था। बाद में उसे पता चला कि आक का दूध आँखों के लिए बहुत हानिकारक होता है।
बब्बू इस घटना को याद करता है। उसे यह भी याद आता है कि जब पिल्लों की हालत खराब हो गई थी, तब उसने मंटू के पिता को सारी बात बता दी थी। इस कारण मंटू के बचपन की वह गलती सबके सामने आ गई थी।
समय बीत गया। मंटू बड़ा होकर डॉ. प्रभात, अर्थात् एक प्रसिद्ध नेत्र-चिकित्सक बन गया। उसने अपने बचपन के उस पाप को कभी नहीं भुलाया। उसके मन में उस घटना के प्रति गहरा पश्चाताप था।
दादी को जब पता चलता है कि जिस डॉक्टर के पास वह इलाज कराने आई हैं, वही बचपन का मंटू है, तो वे उससे इलाज कराने से साफ मना कर देती हैं। दादी को याद था कि मंटू ने निर्दोष पिल्लों की आँखें खराब कर दी थीं। उन्होंने बचपन में मंटू को शाप भी दिया था कि एक दिन उसकी आँखें भी फूट जाएँगी।
डॉ. प्रभात दादी को समझाने के लिए स्वयं उनके पास जाते हैं। वे स्वीकार करते हैं कि उन्होंने बचपन में बहुत बड़ी गलती की थी। वे बताते हैं कि उसी अपराध के पश्चाताप ने उन्हें नेत्र-चिकित्सक बनने की प्रेरणा दी। अब वे लोगों की आँखों का इलाज करके उनकी खोई हुई रोशनी लौटाने का प्रयास करते हैं।
डॉ. प्रभात का उद्देश्य था कि अपनी गलती का प्रायश्चित करते हुए अधिक-से-अधिक लोगों की आँखों की रोशनी बचाएँ। उनकी सच्ची पश्चाताप-भावना देखकर दादी का हृदय बदल जाता है और वे इलाज कराने के लिए तैयार हो जाती हैं।
इस प्रकार डॉ. प्रभात ने अपने बचपन के अपराध को स्वीकार करके और जीवनभर लोगों की आँखों की सेवा करके अपने अपराध का प्रायश्चित किया। यही कारण है कि कहानी का शीर्षक ‘शाप-मुक्ति’ सार्थक है।
3. वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) शाप-मुक्ति किस विधा की रचना है?
उत्तर: (ii) कहानी
(ख) डॉ. प्रभात के बचपन का नाम क्या था?
उत्तर: (iii) मंटू
(ग) डॉ. प्रभात किसके डॉक्टर थे?
उत्तर: (iii) आँखों के
(घ) डॉ. प्रभात के पास बब्बू किसका इलाज कराने आया था?
उत्तर: (ii) अपनी दादी का
(ङ) दादी किसके समझाने पर इलाज करवाने को तैयार हो गई?
उत्तर: (ii) डॉ. प्रभात
अतिरिक्त महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. ‘शाप-मुक्ति’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: डॉ. रमेश उपाध्याय।
2. डॉ. प्रभात कहाँ के रहने वाले थे?
उत्तर: इलाहाबाद के।
3. मंटू और बब्बू के बीच क्या संबंध था?
उत्तर: दोनों बचपन के मित्र थे।
4. मंटू ने कितने पिल्लों की आँखें खराब की थीं?
उत्तर: तीन पिल्लों की।
5. पिल्लों की आँखें किस चीज से खराब हुई थीं?
उत्तर: आक के दूध से।
6. मंटू बड़ा होकर क्या बना?
उत्तर: नेत्र-चिकित्सक।
7. मंटू को आक के दूध के नुकसान के बारे में किसने बताया था?
उत्तर: उसके शिक्षक ने।
8. दादी डॉ. प्रभात से इलाज क्यों नहीं करवाना चाहती थीं?
उत्तर: क्योंकि वे डॉ. प्रभात को बचपन का मंटू समझ गई थीं और उन्हें उसका पुराना अपराध याद आ गया था।
4. लघुत्तरीय प्रश्न-उत्तर
(1) डॉ. प्रभात के पास दादी क्यों गई?
उत्तर: दादी अपनी आँखों का इलाज कराने के लिए डॉ. प्रभात के पास गई थीं।
(2) डॉ. प्रभात किस प्रकार के डॉक्टर थे?
उत्तर: डॉ. प्रभात प्रसिद्ध नेत्र-चिकित्सक थे।
(3) डॉ. प्रभात कहाँ के रहने वाले थे?
उत्तर: डॉ. प्रभात इलाहाबाद के रहने वाले थे।
(4) दादी डॉक्टर के पास क्यों नहीं जाना चाहती थीं?
उत्तर: दादी को याद था कि डॉ. प्रभात बचपन में मंटू नाम के लड़के थे और उन्होंने आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें खराब कर दी थीं। इस पुरानी घटना के कारण दादी उनसे इलाज नहीं करवाना चाहती थीं।
(5) मंटू कौन था?
उत्तर: मंटू डॉ. प्रभात का बचपन का नाम था। वह बब्बू का बचपन का मित्र था।
5. बोधमूलक प्रश्न-उत्तर
(1) बब्बू ने मंटू के पाप का भेद क्यों खोल दिया?
उत्तर: बब्बू ने मंटू के पाप का भेद इसलिए खोल दिया क्योंकि तीनों पिल्लों की आँखें आक के दूध के कारण खराब हो गई थीं और उनकी हालत बहुत खराब थी। बब्बू को लगा कि पिल्लों को बचाना जरूरी है। इसलिए उसने मंटू के पिता को सारी घटना बता दी।
(2) डॉ. प्रभात ने बचपन में किए पाप का प्रायश्चित किस प्रकार किया?
उत्तर: डॉ. प्रभात ने बचपन में आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें खराब कर दी थीं। इस घटना का उन्हें जीवनभर पश्चाताप रहा। उन्होंने अपने अपराध का प्रायश्चित करने के लिए नेत्र-चिकित्सक बनने का निर्णय लिया। बाद में उन्होंने अनेक लोगों की आँखों का इलाज करके उनकी दृष्टि बचाने और लौटाने का प्रयास किया। इस प्रकार उन्होंने अपने बचपन के अपराध का प्रायश्चित किया।
(3) ‘शाप-मुक्ति’ कहानी का सारांश लिखिए।
उत्तर: ‘शाप-मुक्ति’ डॉ. रमेश उपाध्याय की प्रेरणादायक कहानी है। कथावाचक अपनी दादी की आँखों का इलाज कराने डॉ. प्रभात के पास जाता है। बातचीत में पता चलता है कि डॉ. प्रभात उसके बचपन के मित्र मंटू हैं।
दादी को बचपन की वह घटना याद आ जाती है, जब मंटू ने आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें खराब कर दी थीं। दादी उस अपराध के कारण मंटू से इलाज कराने से मना कर देती हैं। डॉ. प्रभात दादी को बताते हैं कि उन्होंने अपने उसी अपराध के प्रायश्चित के लिए नेत्र-चिकित्सक का पेशा चुना है। उनकी पश्चाताप की भावना देखकर दादी का मन बदल जाता है। इस प्रकार डॉ. प्रभात अपने अच्छे कार्यों द्वारा अपने बचपन के अपराध से शाप-मुक्त होने का प्रयास करते हैं।
(4) ‘शाप-मुक्ति’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि मनुष्य से गलती हो सकती है, लेकिन अपनी गलती को स्वीकार करना और उसका सच्चे मन से प्रायश्चित करना बहुत आवश्यक है। हमें पशु-पक्षियों और सभी जीव-जंतुओं के प्रति दया और संवेदना रखनी चाहिए। अच्छे कार्यों के द्वारा मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
(5) ‘चेहरा किसी दुखदाई स्मृति में काला-सा हो गया’ — किसका चेहरा दुखदाई स्मृति में काला हो गया था? वह दुखदाई स्मृति क्या थी?
उत्तर: डॉ. प्रभात का चेहरा दुखदाई स्मृति में काला-सा हो गया था। उन्हें अपने बचपन की वह घटना याद आ गई थी, जब उन्होंने आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें खराब कर दी थीं। उस अपराध का उन्हें जीवनभर पश्चाताप रहा।
6. विचार और कल्पना
(1) यदि आपसे भी कभी कोई अपराध-अनजाने या जानबूझकर हो गया है तो उसे अपनों से बताकर उसका प्रायश्चित पूछिए।
उत्तर: यदि मुझसे कभी कोई गलती या अपराध हो जाए, तो मैं उसे छिपाने के बजाय अपने माता-पिता या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताऊँगा। उनकी सलाह लेकर अपनी गलती सुधारने का प्रयास करूँगा। यदि मेरी गलती से किसी को नुकसान हुआ है, तो मैं उसकी भरपाई करने का प्रयास करूँगा। सच्चे मन से गलती स्वीकार करना और उसे दोबारा न दोहराना ही वास्तविक प्रायश्चित है।
(2) जीव-जंतुओं के प्रति सद्भाव रखने की प्रेरणा देने वाली कोई सूक्ति लिखिए।
उत्तर:
“जीवों पर दया करना ही सच्ची मानवता है।”
या
“जीव-जंतुओं के प्रति दया और करुणा रखना मनुष्य का धर्म है।”
7. भाषा-बोध
1. ‘पन’ प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाइए
| शब्द | पन लगाकर भाववाचक संज्ञा |
|---|---|
| लड़का | लड़कपन |
| अजनबी | अजनबीपन |
| अन्धा | अंधापन |
| अपना | अपनापन |
2. क्रियाओं के प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप
| मूल क्रिया | प्रथम प्रेरणार्थक | द्वितीय प्रेरणार्थक |
|---|---|---|
| चलना | चलाना | चलवाना |
| रंगना | रंगाना | रंगवाना |
| लिखना | लिखाना | लिखवाना |
| पढ़ना | पढ़ाना | पढ़वाना |
3. कारक पहचानिए
(क) डॉ. प्रभात ने कोई उत्तर नहीं दिया।
उत्तर: ‘ने’ — कर्ता कारक
(ख) दादी के लिए दवाई का पर्चा लिखा।
उत्तर: ‘के लिए’ — सम्प्रदान कारक
(ग) बाजार से दवा मँगवा लेना।
उत्तर: ‘से’ — अपादान कारक
(घ) दूध पिल्लों की आँखों में डाल रहा था।
उत्तर: ‘आँखों में’ — अधिकरण कारक
(ङ) सब लोगों ने मंटू को बुरा-भला कहा।
उत्तर: ‘मंटू को’ — कर्म कारक
8. समोच्चरित भिन्नार्थक शब्दों का वाक्य-प्रयोग
दिन — दीन
- दिन: आज का दिन बहुत अच्छा है।
- दीन: हमें दीन-दुखियों की सहायता करनी चाहिए।
कहा — कहाँ
- कहा: मैंने उससे सच कहा।
- कहाँ: तुम कल कहाँ गए थे?
दादी — दीदी
- दादी: मेरी दादी बहुत स्नेही हैं।
- दीदी: मेरी दीदी मेरी पढ़ाई में मदद करती हैं।
बाग — बाघ
- बाग: इस बाग में बहुत सुंदर फूल हैं।
- बाघ: जंगल में एक बाघ दिखाई दिया।
कल — काल
- कल: मैं कल स्कूल जाऊँगा।
- काल: काल किसी को नहीं छोड़ता।
बाहर — बहार
- बाहर: बच्चे बाहर खेल रहे हैं।
- बहार: वसंत में प्रकृति में बहार आ जाती है।
भला — भाला
- भला: वह बहुत भला आदमी है।
- भाला: सैनिक के हाथ में भाला था।
धुल — धूल
- धुल: कपड़े अच्छी तरह धुल गए।
- धूल: सड़क पर बहुत धूल उड़ रही है।
सुन — सुन्न
- सुन: मेरी बात ध्यान से सुन।
- सुन्न: ठंड के कारण उसके हाथ सुन्न हो गए।
9. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- पाठ: शाप-मुक्ति
- लेखक: डॉ. रमेश उपाध्याय
- विधा: कहानी
- डॉ. प्रभात का बचपन का नाम: मंटू
- बब्बू: मंटू का बचपन का मित्र
- डॉ. प्रभात: नेत्र-चिकित्सक
- डॉ. प्रभात का निवास: इलाहाबाद
- दादी: बब्बू की दादी
- पिल्लों की संख्या: तीन
- पिल्लों की आँखें: आक के दूध से खराब हुई थीं
- मंटू का अपराध: बचपन में पिल्लों की आँखें खराब करना
- प्रायश्चित: नेत्र-चिकित्सक बनकर लोगों की आँखों की सेवा करना
- मुख्य संदेश: गलती स्वीकार करना, पश्चाताप करना और अच्छे कार्यों द्वारा उसका प्रायश्चित करना।
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