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अपने हाथों अपना काम
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अपने हाथों अपना काम CLASS -3 की कहानी

अपने हाथों अपना काम ” कहानी की शुरुआत एक छोटे से रेलवे स्टेशन से होती है। उस स्टेशन का नाम करमाटाँड़ था। वह स्टेशन बहुत बड़ा या व्यस्त नहीं था। वहाँ दिन भर में बहुत कम ट्रेनें रुकती थीं। ज़्यादातर गाड़ियाँ बिना रुके ही निकल जाती थीं। स्टेशन के चारों ओर शांति रहती थी। दूर-दूर तक पेड़, खेत और छोटे-छोटे घर दिखाई देते थे।

उस समय रात का समय था। चारों तरफ हल्का अँधेरा फैल गया था। आसमान में तारे चमक रहे थे। अचानक दूर से ट्रेन की सीटी की आवाज सुनाई दी। जैसे-जैसे ट्रेन पास आती गई, उसकी आवाज साफ सुनाई देने लगी। “छुक-छुक, छुक-छुक” करती हुई ट्रेन धीरे-धीरे स्टेशन की ओर बढ़ रही थी।

स्टेशन मास्टर अपने कमरे में बैठे थे। जैसे ही उन्होंने ट्रेन की आवाज सुनी, वे तुरंत बाहर आ गए। उनके हाथ में एक लालटेन थी, क्योंकि उस समय बिजली की सुविधा हर जगह नहीं होती थी। लालटेन की रोशनी से प्लेटफॉर्म हल्का-हल्का चमक रहा था।

कुछ ही देर में ट्रेन स्टेशन पर आकर रुक गई। ट्रेन के रुकते ही एक यात्री नीचे उतरा। उसके पास एक बड़ा बैग था। वह व्यक्ति इधर-उधर देखने लगा, जैसे वह इस जगह पर पहली बार आया हो। स्टेशन छोटा था, इसलिए वहाँ ज्यादा लोग भी नहीं थे।

उस आदमी को समझ नहीं आ रहा था कि अब उसे कहाँ जाना चाहिए। वह थोड़ी देर तक खड़ा रहा और आसपास का माहौल देखने लगा। इसी बीच स्टेशन के पास खड़ा एक साधारण कपड़े पहने व्यक्ति उसकी ओर बढ़ा।

अपने हाथों अपना काम कहानी में ईश्वरचन्द्र शर्मा में स्टेशन मास्टर को इशारा किया :

अपने हाथो अपना काम

जब वह आदमी स्टेशन पर उतरा, तो उसके पास रखा बैग काफी भारी था। उसी समय एक व्यक्ति उसके पास आया और बोला, “क्या आप यहाँ पहली बार आए हैं?”

यात्री ने जवाब दिया, “हाँ, मैं यहाँ पहली बार आया हूँ।”

उस साधारण कपड़े पहने व्यक्ति ने कहा, “अगर आप चाहें तो मैं आपका सामान उठा देता हूँ। मैं आपको आपके स्थान तक पहुँचा भी दूँगा।”

यात्री ने थोड़ी देर सोचा और फिर कहा, “ठीक है, जल्दी से बैग उठा लो। मुझे पहले ही बहुत देर हो गई है।”

वह आदमी तुरंत बैग उठाने लगा। स्टेशन मास्टर यह सब देख रहे थे। जैसे ही वह आदमी बैग उठाने लगा, स्टेशन मास्टर कुछ कहने ही वाले थे, लेकिन उस व्यक्ति ने हल्का सा इशारा किया।

उस संकेत को देखकर स्टेशन मास्टर चुप हो गए और कुछ नहीं बोले। उन्होंने सोचा कि शायद उस व्यक्ति के मन में कोई विशेष कारण होगा।

अब वह व्यक्ति बैग को अपने सिर पर रखकर स्टेशन से बाहर निकलने लगा। यात्री भी उसके पीछे-पीछे चलने लगा। रास्ते में चलते हुए उसने फिर पूछा, “क्या तुम यहाँ रहते हो?”

उस आदमी ने जवाब दिया, “हाँ, मैं यहीं पास में रहता हूँ।”

यात्री ने आगे पूछा, “मैं यहाँ एक विशेष व्यक्ति से मिलने आया हूँ।”

वह आदमी बोला, “किससे मिलने आए हैं?”

यात्री ने कहा, “मैं ईश्वरचन्द्र शर्मा से मिलने आया हूँ। क्या तुम उन्हें जानते हो?”

यह सुनकर वह व्यक्ति मुस्कुराया और बोला, “हाँ, मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूँ। उनका घर यहीं पास में है। आइए, मैं आपको वहाँ ले चलता हूँ।”

यह सुनकर यात्री खुश हो गया। उसे लगा कि अब उसे सही रास्ता मिल गया है। 

.अपने हाथों अपना काम कहानी में उस व्यक्ति ने घर पहुँच कर कहा मैं ही ईश्वरचन्द्र शर्मा हूँ। :

कुछ देर चलने के बाद वे दोनों एक घर के सामने पहुँचे। वह घर बहुत साधारण था, लेकिन साफ और सुंदर था। उस आदमी ने बैग को धीरे से नीचे रखा और फिर अंदर जाकर एक कुर्सी ले आया।

उसने कुर्सी सामने रखकर कहा, “आइए, आप यहाँ बैठ जाइए।”

यात्री कुर्सी पर बैठ गया। वह अभी भी सोच रहा था कि ईश्वरचन्द्र शर्मा कब आएँगे।

तभी उस आदमी ने मुस्कुराकर पूछा, “बताइए, आपको ईश्वरचन्द्र शर्मा से क्या काम है?”

यात्री ने कहा, “मैं दूर से उनके दर्शन करने आया हूँ। मैंने उनके बारे में बहुत सुना है। वे बहुत महान और विद्वान व्यक्ति हैं।”

तभी वह आदमी शांत स्वर में बोला, “मैं ही ईश्वरचन्द्र शर्मा हूँ।”

यह सुनकर वह यात्री आश्चर्य से भर गया। उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि जिसने अभी उसका बैग उठाकर लाया, वही इतने महान व्यक्ति हैं।

वह तुरंत उठकर उनके चरणों में गिर पड़ा। उसने कहा, “मेरा नाम मनमोहन है। मैं आपके दर्शन करने के लिए बहुत दूर से आया हूँ। मुझे नहीं पता था कि आप इतने सरल और विनम्र व्यक्ति हैं।”

ईश्वरचन्द्र शर्मा ने तुरंत उसे उठाया और प्यार से कहा, “उठो, बेटा! इसमें इतना आश्चर्य करने की कोई बात नहीं है।”

फिर उन्होंने बहुत ही सुंदर और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा, “जीवन में हमें अपना काम स्वयं करने में कभी शर्म या संकोच नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने समझाया कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। जो व्यक्ति अपने काम को खुद करने से नहीं हिचकिचाता, वही सच्चा और महान इंसान होता है।

मनमोहन ने उनकी बात ध्यान से सुनी और उसे बहुत प्रेरणा मिली। उसने महसूस किया कि सच्ची महानता सरलता और मेहनत में होती है।

उस दिन उसने एक बहुत महत्वपूर्ण सीख सीखी कि हमें कभी भी अपने काम से पीछे नहीं हटना चाहिए। अगर हम अपने काम खुद करेंगे तो हम आत्मनिर्भर और मजबूत बनेंगे।

ईश्वरचन्द्र शर्मा आगे चलकर पण्डित ईश्वरचन्द्र विद्यासागर के नाम से बहुत प्रसिद्ध हुए। वे भारत के महान विद्वानों में से एक थे। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया और समाज में सुधार के लिए भी अनेक काम किए।

वे हमेशा सादगी, मेहनत और सेवा का महत्व बताते थे। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि महान बनने के लिए घमंड नहीं बल्कि विनम्रता और अच्छे विचार जरूरी होते हैं।

कहानी से मिलने वाली शिक्षा

इस कहानी से हमें कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं—

  1. हमें अपना काम खुद करने में कभी शर्म नहीं करनी चाहिए।

  2. कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता।

  3. महान व्यक्ति हमेशा सरल और विनम्र होते हैं।

  4. मेहनत और सादगी ही सच्ची महानता का मार्ग है।

इस प्रकार “अपने हाथों अपना काम” कहानी हमें आत्मनिर्भर बनने और विनम्र रहने की प्रेरणा देती है।

.अपने हाथो अपना काम कहानी का importance question

उत्तर :अपने हाथो अपना काम कहानी के प्रमुख पात्र का नाम पण्डित ईश्वरचन्द्र विद्यासागर है। 

उत्तर :अपने हाथो अपना काम में करमाटांड स्टेशन का नाम आया है। 

उत्तर :अपने हाथो अपना काम कहानी में सिटी  की आवाज सुनाई  दे रही थी। 

उत्तर :“अपने हाथों अपना काम” कहानी मे आदमी (मनमोहन) ने ईश्वरचन्द्र  शर्मा के माध्यम से अपने  हाथो अपने  करना  की उचित शिक्षा पाई। 

.अपने हाथो अपना काम कहानी का short question

१.१. स्टेशन का नाम क्या था?

उत्तर :करमाटाँड़ ।

१.२. स्टेशन मास्टर के हाथ में क्या था?

उत्तर :लालटेन ।

१.३. गार्ड ने क्या दिखाया ?

उत्तर :हरी झंडी ।

१.४. किसने पूछा- क्या आप यहाँ पहली बार आये है?

उत्तर :ईश्वरचन्द्र शर्मा  ने ।

१.५. मनमोहन किनसे मिलना चाहता था ?

 उत्तर:ईश्वर चंद्र शर्मा से ।

 १.६. मनमोहन को क्या सीख मिली ?

उत्तर: यह सीख लो कि अपना काम करने में संकोच नहीं करना चाहिए ।

 १.७. पाठ के विशेष व्यक्ति कौन है?

उत्तर:  पण्डित ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ।

.अपने हाथो अपना काम कहानी का संक्षिप्त उत्तर लिखो

२.१. गाड़ी उस स्टेशन से जल्दी क्यों चल पड़ी ?

उत्तर :क्योंकि स्टेशन छोटी थी ।

 २.२. वह आदमी बार-बार ‘कुली-कुली’ क्यों चिल्ला रहा था?

उत्तर: सामान उठाने के लिए वह आदमी कुली कुली चिल्ला रहा था ।

२.३. उसका सामान उठाने वाला व्यक्ति कौन था ?

उत्तर: पण्डित ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ।

२.४. उस व्यक्ति ने बैग को क्यों उठाया ?

उत्तर:मनमोहन को सबक सिखाने के लिए की अपना काम अपने हाथों से करना चाहिए ।

२.५. उस व्यक्ति ने स्टेशन मास्टर को चुप रहने का इशारा क्यों किया ?

उत्तर:क्योंकि वहां व्यक्ति ईश्वर चंद्र विद्यासागर था ।

२.६. आगे चलकर वे किस नाम से विख्यात हुए ?

उत्तर:ईश्वरचन्द्र शर्मा ही आगे चलकर पण्डित ईश्वरचन्द्र विद्यासागर के नाम से विख्यात हुए।

notice :-अपने हाथों अपना काम class 3  की कहानी है।  इस article  लिखने के लिए हमने west  bengal  sylabus  के पाठबहार  पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना  है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में  हमारी मदद करे। 

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