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Toggleगुस्सैल कहानी का सारांश
१. गुस्सैल लड़की का परिचय :
यह कहानी एक ऐसी लड़की के बारे में है जो बहुत गुस्सैल और झगड़ालू स्वभाव की थी। उसे छोटी-छोटी बातों पर बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था। अगर कोई उसकी बात न माने या उसकी चीज़ को छू भी ले, तो वह तुरंत चिल्लाने लगती थी। उसकी यह आदत धीरे-धीरे घर के सभी लोगों को परेशान करने लगी थी।
लड़की की माँ उसे बार-बार समझाती थीं। वे प्यार से कहती थीं —
“बेटी, गुस्सा मत किया करो। गुस्सा करना अच्छी आदत नहीं है।”
माँ उसे समझाती थीं कि गुस्सा करने से न केवल दूसरों को दुख होता है बल्कि खुद को भी नुकसान होता है। लेकिन उस लड़की पर इन बातों का कोई खास असर नहीं पड़ता था। वह कुछ देर के लिए शांत हो जाती, पर थोड़ी ही देर बाद फिर किसी बात पर गुस्सा करने लगती।
घर के लोग भी उससे थोड़ा-थोड़ा डरने लगे थे। बच्चे उसके साथ खेलना पसंद नहीं करते थे क्योंकि वे जानते थे कि वह किसी भी समय नाराज़ हो सकती है। इस कारण लड़की धीरे-धीरे अकेली रहने लगी, पर उसे यह बात समझ में नहीं आती थी कि लोग उससे दूर क्यों रहने लगे हैं।
२. गुस्सैल लड़की गुड़िया लाई :
एक दिन लड़की बाजार गई। वहाँ उसने चीनी मिट्टी की बनी एक बहुत सुंदर गुड़िया देखी। वह गुड़िया इतनी सुंदर थी कि उसे देखते ही लड़की का मन खुश हो गया। उसने अपनी माँ से वह गुड़िया दिलाने की जिद की। माँ ने उसकी खुशी के लिए वह गुड़िया खरीद दी।
लड़की गुड़िया को बहुत प्यार से घर लेकर आई। उसने उसे बड़ी सावधानी से अपने कमरे की मेज पर रख दिया। वह बार-बार उसे देखकर खुश हो रही थी। उसे अपनी नई गुड़िया पर बहुत गर्व था।
उसका एक छोटा भाई भी था। वह अभी छोटा था और खेलते-खेलते इधर-उधर घूमता रहता था। उसी समय वह खेलते-खेलते लड़की के कमरे में आ गया। वह मेज के पास खेलने लगा।
अचानक उसका हाथ मेज पर रखी गुड़िया से टकरा गया। गुड़िया मेज से नीचे गिर गई और फर्श पर गिरते ही चकनाचूर हो गई।
यह दृश्य देखते ही लड़की का गुस्सा बहुत बढ़ गया। उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसकी आँखें तमतमा उठीं। वह अपने छोटे भाई पर बहुत जोर-जोर से चिल्लाने लगी। वह उसे डाँटने लगी और बुरा-भला कहने लगी।
छोटा भाई डर के मारे रोने लगा। उसे समझ ही नहीं आया कि उससे क्या गलती हो गई। वह तो बस खेल रहा था।
३. माँ ने शीशा लेकर गुस्सैल लड़की को दिखाया :
लड़की की माँ ने यह सब देखा। उन्होंने समझ लिया कि अब लड़की को कोई ऐसी बात समझानी होगी जिससे वह अपनी गलती को खुद समझ सके।
माँ चुपचाप कमरे में गईं और एक शीशा (दर्पण) लेकर आईं। उन्होंने वह शीशा लड़की के सामने कर दिया और कहा —
“जरा अपना चेहरा देखो।”
जब लड़की ने शीशे में अपना चेहरा देखा, तो वह चौंक गई। गुस्से के कारण उसका चेहरा बहुत बिगड़ा हुआ और भद्दा लग रहा था। उसकी आँखें लाल थीं और चेहरा गुस्से से तना हुआ था।
अपना ऐसा चेहरा देखकर वह घबरा गई। उसे बहुत बुरा लगा। उसकी आँखों में आँसू आ गए और वह रोने लगी।
तभी उसकी माँ ने प्यार से कहा —
“देखा, गुस्सा करने पर तुम्हारा चेहरा कितना खराब लगने लगता है। अगर तुम हमेशा गुस्सा करती रहोगी, तो लोग तुमसे प्यार नहीं करेंगे। कोई तुमसे बात नहीं करेगा और न ही तुम्हारे साथ खेलेगा।”
माँ ने आगे समझाया —
“गुस्सा मनुष्य की सुंदरता को भी खराब कर देता है। जो लोग शांत और प्रेम से रहते हैं, वही सभी को अच्छे लगते हैं।”
माँ की बातों में सच्चाई थी। लड़की धीरे-धीरे समझने लगी कि उसका गुस्सा ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।
४. गुस्सैल लड़की को माँ की बात समझ आ गई :
उस दिन के बाद लड़की ने अपने
व्यवहार के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया। उसे महसूस हुआ कि उसकी गुस्से वाली आदत के कारण ही लोग उससे दूर रहने लगे थे।
उसने निश्चय किया कि वह अब अपने गुस्से को कम करने की कोशिश करेगी। शुरुआत में यह उसके लिए थोड़ा कठिन था, लेकिन उसने धीरे-धीरे अपने गुस्से पर काबू करना सीख लिया।
जब भी उसे गुस्सा आता, वह कुछ देर चुप रह जाती या वहाँ से दूर चली जाती। इससे उसका गुस्सा धीरे-धीरे शांत हो जाता।
समय के साथ उसका स्वभाव बदलने लगा। अब वह पहले की तरह झगड़ालू नहीं रही। वह सबके साथ प्यार से बात करने लगी। वह अपने छोटे भाई के साथ भी अच्छे से खेलने लगी।
घर के लोग यह बदलाव देखकर बहुत खुश हुए। पड़ोस के बच्चे भी अब उसके साथ खेलने आने लगे।
५. कहानी से मिलने वाली शिक्षा :
यह कहानी हमें बहुत महत्वपूर्ण शिक्षा देती है। गुस्सा एक बहुत बुरी आदत है। गुस्सा करने से न केवल हमारा चेहरा खराब लगता है, बल्कि हमारे रिश्ते भी खराब हो जाते हैं।
जो लोग हमेशा गुस्सा करते हैं, उनसे लोग दूर रहने लगते हैं। लेकिन जो लोग शांत, धैर्यवान और प्रेम से व्यवहार करते हैं, उन्हें सभी लोग पसंद करते हैं।
इसलिए हमें अपने जीवन में धैर्य, प्रेम और शांति को अपनाना चाहिए। अगर कभी गुस्सा आए भी, तो हमें उसे नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए।
इस कहानी की लड़की ने जब अपने गुस्से को छोड़ दिया, तो उसका जीवन बदल गया। लोग उसे प्यार करने लगे और वह पहले से अधिक खुश और सुंदर दिखने लगी।
इस प्रकार यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें गुस्से पर नियंत्रण रखना चाहिए और हमेशा अच्छे व्यवहार से जीवन जीना चाहिए।

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.गुस्सैल का question /ans
१.१. लड़की का स्वभाव कैसा था?
उत्तर :लड़की का स्वभाव गुस्सैल है ।
१.२. लड़की को गुस्सा क्यों आता था?
उत्तर :गुड़िया टूटने पर लड़की को गुस्सा आता है।
१.३. गुड़िया के टूटने पर उसका चेहरा कैसा हो गया?
उत्तर :गुस्से से उसका चेहरा तमतमा उठा। उसकी आँखें लाल हो गई। वह अपने छोटे भाई पर जोर-जोर से चिल्लाने लगी।
१.४. लड़की की माँ उससे क्या कहा करती थी?
उत्तर : लड़की की मां से कई बार समझा कर कहती है, “बेटी, गुस्सा मत किया करो। यह अच्छी आदत नहीं है।
१.५. लड़की की माँ ने शीशा लेकर का क्या किया ?
उत्तर :लड़की की मां ने शीशा लेकर उसके सामने रख दिया उसे दिखाया कि देखो तुम्हारा चेहरा कितना भद्दा लगता है ।
१.६. शीशा में अपने चेहरे को देखते ही उसे क्या हो गया ?
उत्तर :जब उसने अपना चेहरा देखा तो बहुत घबरा गई, चेहरा बहुत भद्दा लग रहा था। अपना बिगड़ा चेहरा देखकर उसकी आँखें भर आई और यह रोने लगी।
१.७. उसे माँ की कौन-सी बात समझ में आ गई?
उत्तर : गुस्से में तुम्हारा चेहरा किन खराब दिखता है। अगर तुमने गुस्सा नहीं छोड़ा, हो कोई तुम्हें दुलार नहीं करेगा। तुमसे बाते नहीं करेगा। तुम्हरे साथ खेलेगा भी नहीं। इतना ही नहीं, तुम अपनी सुंदरता को भी खो दोगी।”
.गुस्सैल का importance question
उत्तर :लड़की की माँ लड़की को समझती थी।
उत्तर :लड़की के छोटे भाई से गुड़िया टूट जाती है।
notice : गुस्सैल class 3 की कहानी हैं । इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के पाठबहार पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।





