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जीव-विज्ञान एवं मानव कल्याण (Biology and Human Welfare)
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📘 कक्षा 9 – जीव-विज्ञान एवं मानव कल्याण | प्रश्नोत्तरी उत्तर सहित

(West Bengal Board | Biology and Human Welfare | Class 9)

प्रस्तावना

जीव-विज्ञान वह विज्ञान है जिसमें जीवित प्राणियों, उनके शरीर, जीवन-प्रक्रियाओं, रोगों, स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ उनके संबंधों का अध्ययन किया जाता है।

मानव जीवन को स्वस्थ और बेहतर बनाने में जीव-विज्ञान का बहुत बड़ा योगदान है। चिकित्सा, औषधि, पोषण, स्वच्छता, कृषि और रोगों की रोकथाम जैसे क्षेत्रों में जीव-विज्ञान का ज्ञान उपयोगी है।

इसीलिए जीव-विज्ञान और मानव कल्याण का आपस में गहरा संबंध है।


1. जीव-विज्ञान क्या है?

जीवित प्राणियों के अध्ययन से संबंधित विज्ञान को जीव-विज्ञान (Biology) कहते हैं।

इसमें मुख्य रूप से निम्न विषयों का अध्ययन किया जाता है:

  • पौधों का अध्ययन
  • जन्तुओं का अध्ययन
  • मानव शरीर
  • कोशिका
  • सूक्ष्मजीव
  • जीवन-प्रक्रियाएँ
  • रोग और स्वास्थ्य
  • पर्यावरण
  • जैव विविधता

2. मानव कल्याण क्या है?

मानव का स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर जीवन मानव कल्याण कहलाता है।

मानव कल्याण के लिए आवश्यक हैं:

  • अच्छा स्वास्थ्य
  • पौष्टिक भोजन
  • स्वच्छ वातावरण
  • स्वच्छ पेयजल
  • उचित चिकित्सा
  • रोगों की रोकथाम
  • स्वच्छता
  • मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य

जीव-विज्ञान इन सभी क्षेत्रों को समझने और सुधारने में सहायता करता है।


3. जीव-विज्ञान और स्वास्थ्य

स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी का न होना नहीं है। स्वस्थ व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से बेहतर स्थिति में रहता है।

जीव-विज्ञान हमें यह समझने में सहायता करता है कि:

  • हमारा शरीर कैसे काम करता है।
  • रोग कैसे उत्पन्न होते हैं।
  • रोगाणु शरीर में कैसे प्रवेश करते हैं।
  • रोगों से बचाव कैसे किया जा सकता है।
  • शरीर की प्रतिरक्षा कैसे काम करती है।
  • दवाएँ किस प्रकार रोगों के उपचार में सहायता करती हैं।

4. रोग क्या है?

शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में किसी प्रकार की गड़बड़ी को सामान्य रूप से रोग कहा जाता है।

रोग के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

रोगों के प्रमुख कारण

  • रोगजनक सूक्ष्मजीव
  • असंतुलित आहार
  • पोषक तत्वों की कमी
  • आनुवंशिक कारण
  • प्रदूषण
  • अस्वच्छता
  • जीवनशैली से जुड़े कारण

5. संक्रामक और असंक्रामक रोग

रोगों को सामान्य रूप से दो प्रमुख समूहों में समझा जा सकता है:

5.1 संक्रामक रोग

जो रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से फैल सकते हैं, उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं।

उदाहरण

  • हैजा
  • टाइफाइड
  • तपेदिक (TB)
  • मलेरिया
  • डेंगू
  • सामान्य सर्दी-जुकाम

इनमें से कुछ रोग संक्रमित व्यक्ति से फैल सकते हैं और कुछ रोगों के प्रसार में मच्छर जैसे वाहक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


6. असंक्रामक रोग

जो रोग सामान्यतः एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण के रूप में नहीं फैलते, उन्हें असंक्रामक रोग कहा जाता है।

उदाहरण

  • मधुमेह
  • उच्च रक्तचाप
  • कुछ हृदय रोग
  • कुछ आनुवंशिक रोग
  • कैंसर

इन रोगों के कारण अलग-अलग हो सकते हैं और कई बार इनमें आनुवंशिकता, खान-पान तथा जीवनशैली की भूमिका होती है।


7. रोगजनक

जो जीव या जैविक एजेंट रोग उत्पन्न कर सकते हैं, उन्हें रोगजनक कहा जाता है।

प्रमुख रोगजनक

  • बैक्टीरिया
  • वायरस
  • प्रोटोजोआ
  • कवक
  • कुछ परजीवी

उदाहरण

मलेरिया — प्लास्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है।


8. बैक्टीरिया से होने वाले रोग

कुछ बैक्टीरिया मनुष्यों में रोग उत्पन्न कर सकते हैं।

उदाहरण

टाइफाइड:
यह Salmonella typhi नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।

तपेदिक (TB):
यह मुख्य रूप से Mycobacterium tuberculosis नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।

बैक्टीरियल रोगों की रोकथाम के लिए स्वच्छता, सुरक्षित पानी और उचित चिकित्सा महत्वपूर्ण हैं।


9. वायरस से होने वाले रोग

वायरस बहुत छोटे संक्रामक एजेंट होते हैं जो जीवित कोशिकाओं के अंदर अपनी संख्या बढ़ाते हैं।

उदाहरण

  • सामान्य सर्दी-जुकाम
  • इन्फ्लुएंजा
  • खसरा
  • कुछ प्रकार के हेपेटाइटिस

वायरस से होने वाले कई रोगों की रोकथाम में टीकाकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


10. प्रोटोजोआ से होने वाले रोग

कुछ प्रोटोजोआ मनुष्यों में रोग उत्पन्न करते हैं।

उदाहरण

मलेरिया — Plasmodium परजीवी के कारण होता है।

मलेरिया का प्रसार संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है।

बचाव

  • मच्छरों से बचाव
  • घर के आसपास पानी जमा न होने देना
  • मच्छरदानी का उपयोग
  • आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य सेवाओं से सहायता लेना

11. कृमि और परजीवी

कुछ परजीवी मनुष्य के शरीर में रहकर पोषण प्राप्त करते हैं और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए कुछ कृमि संक्रमण आंतों को प्रभावित कर सकते हैं।

इससे बचने के लिए:

  • हाथों को अच्छी तरह धोना
  • स्वच्छ भोजन खाना
  • साफ पानी पीना
  • शौचालय का उपयोग करना
  • व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना

आवश्यक है।


12. रोग फैलने के माध्यम

संक्रामक रोग अलग-अलग माध्यमों से फैल सकते हैं।

1. वायु द्वारा

खाँसी और छींक से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से कुछ रोग फैल सकते हैं।

2. दूषित जल द्वारा

दूषित पानी पीने से कुछ रोग हो सकते हैं।

3. दूषित भोजन द्वारा

अस्वच्छ या दूषित भोजन से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

4. वाहकों द्वारा

मच्छर जैसे जीव कुछ रोगजनकों को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचा सकते हैं।

5. सीधे संपर्क द्वारा

कुछ संक्रमण संक्रमित व्यक्ति या वस्तु के संपर्क से फैल सकते हैं।


13. रोगों से बचाव

रोगों की रोकथाम उपचार से अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

प्रमुख उपाय

  • हाथों को साबुन से धोना
  • स्वच्छ पानी पीना
  • पौष्टिक भोजन लेना
  • भोजन को ढककर रखना
  • आसपास सफाई रखना
  • मच्छरों से बचाव करना
  • समय पर टीकाकरण कराना
  • बीमार होने पर उचित चिकित्सा लेना

14. प्रतिरक्षा

हमारे शरीर में रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों से लड़ने की क्षमता होती है। इसे प्रतिरक्षा कहते हैं।

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में विभिन्न कोशिकाएँ और पदार्थ मिलकर रोगजनकों से रक्षा करते हैं।

प्रतिरक्षा का महत्व

  • रोगजनकों की पहचान
  • उनसे लड़ना
  • शरीर की रक्षा करना
  • कुछ संक्रमणों के विरुद्ध स्मृति विकसित करना

15. टीकाकरण

टीकाकरण रोगों से बचाव का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

टीके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को किसी विशेष रोगजनक के विरुद्ध सुरक्षा विकसित करने के लिए तैयार करते हैं।

टीकाकरण के लाभ

  • कई संक्रामक रोगों से बचाव
  • रोग के गंभीर प्रभाव का जोखिम कम करना
  • समुदाय में संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहायता

बच्चों के लिए निर्धारित टीकाकरण समय पर कराना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।


16. एंटीबायोटिक क्या हैं?

कुछ दवाएँ विशेष रूप से बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमणों के उपचार में उपयोग की जाती हैं। इन्हें एंटीबायोटिक कहा जाता है।

उदाहरण के रूप में डॉक्टर कुछ बैक्टीरियल संक्रमणों में उपयुक्त एंटीबायोटिक लिख सकते हैं।

महत्वपूर्ण बात

एंटीबायोटिक वायरस से होने वाले सामान्य संक्रमणों पर प्रभावी नहीं होते।

इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं करना चाहिए।


17. स्वच्छता का महत्व

स्वच्छता मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता से कई संक्रामक रोगों के प्रसार को कम करने में सहायता मिलती है।

व्यक्तिगत स्वच्छता

  • नियमित स्नान
  • हाथ धोना
  • साफ कपड़े पहनना
  • दाँतों की सफाई
  • साफ भोजन करना

सामुदायिक स्वच्छता

  • कचरे का उचित निपटान
  • साफ सड़कें और सार्वजनिक स्थान
  • स्वच्छ पेयजल
  • उचित सीवेज व्यवस्था
  • मच्छरों के प्रजनन को रोकना

18. पोषण और मानव स्वास्थ्य

स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित आहार आवश्यक है।

हमारे भोजन में प्रमुख पोषक तत्व होते हैं:

  • कार्बोहाइड्रेट
  • प्रोटीन
  • वसा
  • विटामिन
  • खनिज लवण
  • जल
  • रेशे

इनसे शरीर को ऊर्जा, वृद्धि और विभिन्न शारीरिक क्रियाओं के लिए आवश्यक पदार्थ मिलते हैं।


19. कुपोषण

जब शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते, तो कुपोषण की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कुपोषण के कारण:

  • कमजोरी
  • वृद्धि में रुकावट
  • रोगों के प्रति संवेदनशीलता
  • कार्यक्षमता में कमी

जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना आवश्यक है।


20. औषधियों में जीव-विज्ञान का योगदान

जीव-विज्ञान ने चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वैज्ञानिकों ने विभिन्न रोगों के कारणों को समझकर उनके निदान, रोकथाम और उपचार के तरीके विकसित किए हैं।

प्रमुख योगदान

  • टीकों का विकास
  • एंटीबायोटिक दवाओं की खोज
  • रोगों की पहचान
  • प्रयोगशाला जाँच
  • आधुनिक चिकित्सा तकनीक
  • प्रतिरक्षा विज्ञान

21. सूक्ष्मजीव और मानव कल्याण

सभी सूक्ष्मजीव हानिकारक नहीं होते।

कुछ सूक्ष्मजीव मानव जीवन के लिए उपयोगी हैं।

उपयोगी सूक्ष्मजीव

  • दही बनाने में
  • ब्रेड बनाने में
  • कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में
  • जैविक अपघटन में
  • कुछ औषधियों के निर्माण में

इसलिए सूक्ष्मजीवों को केवल रोग फैलाने वाले जीवों के रूप में नहीं समझना चाहिए।


22. जीव-विज्ञान और कृषि

जीव-विज्ञान कृषि के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण है।

इससे:

  • फसलों की बेहतर किस्में विकसित करने
  • पौधों के रोगों को समझने
  • कीट नियंत्रण
  • मिट्टी की जैविक गुणवत्ता समझने
  • पशुपालन में सुधार

में सहायता मिलती है।


23. जीव-विज्ञान और पर्यावरण

मानव जीवन स्वस्थ पर्यावरण पर निर्भर करता है।

पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन और भोजन प्रदान करते हैं। जल, वायु और मिट्टी भी जीवन के लिए आवश्यक हैं।

जीव-विज्ञान हमें पर्यावरण में जीवों के बीच संबंधों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को समझने में सहायता करता है।


24. जैव विविधता और मानव कल्याण

पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।

जैव विविधता मानव के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमें:

  • भोजन
  • औषधियाँ
  • कच्चा माल
  • पारिस्थितिक सेवाएँ
  • प्राकृतिक संसाधन

प्राप्त होते हैं।

इसलिए जैव विविधता का संरक्षण मानव कल्याण के लिए भी आवश्यक है।


25. आधुनिक जीवन में जीव-विज्ञान का महत्व

आज जीव-विज्ञान का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है:

स्वास्थ्य

रोगों की पहचान, रोकथाम और उपचार।

कृषि

फसल उत्पादन और पौध संरक्षण।

खाद्य उद्योग

दही, पनीर, ब्रेड आदि के उत्पादन में जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग।

पर्यावरण

प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण।

अनुसंधान

नई दवाओं, टीकों और जैव-प्रौद्योगिकी के विकास में।


26. मानव कल्याण में जीव-विज्ञान की भूमिका

जीव-विज्ञान ने मानव जीवन को अनेक प्रकार से प्रभावित किया है।

जीव-विज्ञान → स्वास्थ्य → रोगों की रोकथाम → चिकित्सा → बेहतर जीवन

इसी प्रकार:

जीव-विज्ञान → कृषि → बेहतर उत्पादन → खाद्य सुरक्षा → मानव कल्याण


27. स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक बातें

स्वस्थ रहने के लिए हमें:

  1. संतुलित आहार लेना चाहिए।
  2. नियमित शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए।
  3. पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।
  4. व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए।
  5. स्वच्छ पानी पीना चाहिए।
  6. भोजन को साफ और सुरक्षित रखना चाहिए।
  7. आवश्यक टीकाकरण कराना चाहिए।
  8. नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए।
  9. पर्यावरण को स्वच्छ रखना चाहिए।
  10. बीमारी होने पर योग्य स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लेनी चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्दावली

शब्दअर्थ
जीव-विज्ञानजीवित प्राणियों के अध्ययन का विज्ञान
स्वास्थ्यशरीर और मन की अच्छी कार्यशील अवस्था
रोगशरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में विकार
रोगजनकरोग उत्पन्न करने वाला जैविक एजेंट
संक्रामक रोगसंक्रमण के कारण फैलने वाला रोग
असंक्रामक रोगजो सामान्यतः एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण के रूप में नहीं फैलता
प्रतिरक्षारोगजनकों से शरीर की रक्षा करने की क्षमता
टीकाकरणरोगों से बचाव के लिए प्रतिरक्षा विकसित करने की प्रक्रिया
पोषणशरीर को आवश्यक पोषक पदार्थ प्राप्त होने की प्रक्रिया
जैव विविधताविभिन्न प्रकार के जीवों की विविधता

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. जीव-विज्ञान क्या है?

उत्तर: जीवित प्राणियों और उनकी जीवन-प्रक्रियाओं के अध्ययन को जीव-विज्ञान कहते हैं।

प्रश्न 2. मानव कल्याण में जीव-विज्ञान का क्या महत्व है?

उत्तर: जीव-विज्ञान रोगों की पहचान, रोकथाम और उपचार, टीकों के विकास, पोषण, कृषि तथा पर्यावरण संरक्षण में सहायता करता है। इसलिए यह मानव कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 3. संक्रामक रोग क्या हैं?

उत्तर: ऐसे रोग जो रोगजनकों के कारण होते हैं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फैल सकते हैं, संक्रामक रोग कहलाते हैं।

प्रश्न 4. रोगजनक क्या होते हैं?

उत्तर: ऐसे जीव या जैविक एजेंट जो रोग उत्पन्न कर सकते हैं, रोगजनक कहलाते हैं।

प्रश्न 5. प्रतिरक्षा क्या है?

उत्तर: शरीर की रोगजनकों से लड़ने और उनसे अपनी रक्षा करने की क्षमता को प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 6. टीकाकरण क्यों आवश्यक है?

उत्तर: टीकाकरण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को विशेष रोगों के विरुद्ध सुरक्षा विकसित करने के लिए तैयार करता है और कई संक्रामक रोगों से बचाव में सहायता करता है।

प्रश्न 7. एंटीबायोटिक क्या हैं?

उत्तर: एंटीबायोटिक ऐसी दवाएँ हैं जिनका उपयोग कुछ बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में किया जाता है। इनका उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

प्रश्न 8. मलेरिया किसके कारण होता है?

उत्तर: मलेरिया Plasmodium नामक परजीवी के कारण होता है और इसका प्रसार संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है।

प्रश्न 9. संतुलित आहार क्यों आवश्यक है?

उत्तर: संतुलित आहार शरीर को ऊर्जा, वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत और विभिन्न शारीरिक क्रियाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है।

प्रश्न 10. स्वच्छता का क्या महत्व है?

उत्तर: स्वच्छता से रोगजनकों के प्रसार को कम करने और संक्रामक रोगों से बचाव में सहायता मिलती है।


Quick Revision

जीव-विज्ञान के प्रमुख क्षेत्र

जीव → शरीर → जीवन-प्रक्रियाएँ → रोग → स्वास्थ्य → पर्यावरण

मानव कल्याण में प्रमुख योगदान

जीव-विज्ञान → रोगों की समझ → टीकाकरण → चिकित्सा → स्वास्थ्य सुधार

रोगों से बचाव

स्वच्छता + संतुलित आहार + टीकाकरण + स्वच्छ पानी + सुरक्षित भोजन + उचित चिकित्सा


निष्कर्ष

जीव-विज्ञान केवल पौधों और जन्तुओं का अध्ययन करने वाला विषय नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और स्वास्थ्य को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रोगों के कारणों को समझने, उनसे बचाव करने, टीकों और दवाओं के विकास, पोषण, कृषि तथा पर्यावरण संरक्षण में जीव-विज्ञान का महत्वपूर्ण योगदान है।

इसलिए कहा जा सकता है कि जीव-विज्ञान का ज्ञान स्वस्थ जीवन और मानव कल्याण की आधारभूत आवश्यकताओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


🔷 Group-A (MCQs – सही विकल्प चुनिए)

  1. एक स्वस्थ व्यक्ति को होना चाहिए
    ➡️ (d) शारीरिक तथा मानसिक तनाव से मुक्त

  2. ‘फादर ऑफ इम्यूनोलॉजी’ कहे जाते हैं
    ➡️ (a) एडवर्ड जेनर

  3. पेचिश का कारण होता है
    ➡️ (b) जीवाणु तथा प्रोटोजोआ

  4. इनमें से कौन संक्रामक बीमारी नहीं है
    ➡️ (d) हीमोफीलिया

  5. विषाणु तथा जीवाणु हमारे शरीर को देते हैं
    ➡️ (a) एण्टीजेन

  6. एण्टीबॉडी का निर्माण होता है
    ➡️ (c) लिम्फोसाइट्स द्वारा

  7. एण्टीजेन के विरुद्ध शरीर बनाता है
    ➡️ (b) एण्टीबॉडी

  8. एण्टीबॉयोटिक्स कार्य करती हैं
    ➡️ (b) जीवाणु पर

  9. सर्दी-खाँसी होती है
    ➡️ (a) बाइरस द्वारा

  10. जीवाणु होते हैं
    ➡️ (b) एक कोशिकीय

  11. संक्रमित पेय जल से फैलने वाला रोग है
    ➡️ (d) हैजा

  12. AIDS का कारण है
    ➡️ (b) HIV

  13. खाने से पहले एवं बाद में धोना चाहिए
    ➡️ (a) हाथों को

  14. बहुत लम्बे समय तक बने रहने वाले रोग होते हैं
    ➡️ (b) दीर्घकालिक

  15. संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलने वाला रोग है
    ➡️ (d) मलेरिया


🔷 Group-B

(I) रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:

  1. टीका के आविष्कारक हैं – एडवर्ड जेनर

  2. T.B. से सुरक्षा के लिए शिशुओं को – BCG का टीका लगवाना चाहिए।

  3. टायफाइड नामक रोग – साल्मोनेला टाइफी जीवाणु के कारण होता है।

  4. चेचक का कारण होता है – वायरस

  5. पेनिसिलिन का स्रोत है – फफूंद (Penicillium)

  6. लेक्टोबैसिलस नामक जीवाणु द्वारा दूध से – दही का निर्माण होता है।

  7. HIV द्वारा होने वाला रोग है – एड्स

  8. विषाणु को सजीव तथा निर्जीव के बीच की कड़ी कहा जाता है।

  9. वायरस का शाब्दिक अर्थ है – विष

  10. पल्स पोलियो कार्यक्रम – पोलियो के विरुद्ध है।


(II) सत्य/असत्य (True/False):

  1. राइजोबियम का जैव नियंत्रक के रूप में उपयोग होता है। ✔️ सही

  2. साल्क टीके का उपयोग पोलियो की रोकथाम में होता है। ✔️ सही

  3. पेचिश जल जनित रोग है। ✔️ सही

  4. AIDS का रोकथाम WASH से होता है। ❌ गलत

  5. निमोनिया विषाणु जनित रोग है। ❌ गलत

  6. एडवर्ड जेनर को इम्यूनिटी का जनक कहा जाता है। ✔️ सही

  7. BCG, T.B. का टीका है। ✔️ सही


(III) मिलान कीजिए:

स्तम्भ Aस्तम्भ Bउत्तर
(i) राइजोबियम(c) सहजीवी जीवाणु1 – c
(ii) पोलिओ(d) वायरस2 – d
(iii) नाइट्रोजन स्थिरीकरण(a) एजोटोबैक्टर3 – a
(iv) साल्मोनेला टाइफी(e) टायफाइड4 – e
(v) HIV(b) एड्स5 – b
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