Digital coaching classes for West Bengal students

educatedindia786.com

Amazon

"Love Amazon? Shop through our link and help Educated India empower more students — no extra cost to you!"

भेड़ें और भेड़िये
educatedindia786.com

Flipkart

"Flipkart fan? Click our link before you buy and support quality education with every purchase!"

Table of Contents

भेड़ें और भेड़िये

🌿 हरिशंकर परसाई — जीवन परिचय (सारांश)

हरिशंकर परसाई हिंदी के महान व्यंग्यकार थे जिन्होंने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज की कुरीतियों, भ्रष्टाचार, दिखावे और पाखंड पर करारी चोट की ।
उनका जन्म 22 अगस्त 1924 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी गांव में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में लेकर वे नागपुर आए और वहीं से हिन्दी में एम.ए. किया। उन्होंने कुछ समय अध्यापन भी किया, पर अंत में स्वतंत्र लेखन को चुन लिया।

उन्होंने वसुधा नामक साहित्यिक पत्रिका निकाली, जो बाद में आर्थिक कारणों से बंद करनी पड़ी।
उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं— विकलांग श्रद्धा का दौर, बेइमानी की परत, तट की खोज, दो नाक वाले लोग, निठल्ले की डायरी, तिरछी रेखाएँ, ठिठुरता हुआ गणतंत्र आदि।

उन्हें विकलांग श्रद्धा का दौर के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
10 अगस्त 1995 को उनका निधन हो गया।


🐑 “भेड़ें और भेड़िये” — सारांश (100% यूनिक)

कहानी एक ऐसे वन-प्रदेश की है जहाँ पशु प्रजातंत्र स्थापित करना चाहते हैं। भेड़ें, जो शांत और सरल स्वभाव की हैं, सोचती हैं कि अब न्याय और सुरक्षा का युग आएगा। परंतु भेड़ियों के लिए यह चिंता का विषय बन जाता है, क्योंकि नई व्यवस्था में वे भेड़ों को नहीं खा पाएंगे।

एक बूढ़ा सियार चाल चलता है। वह भेड़िये को संत का रूप देकर भेड़ों के बीच भेजता है और तीन रंगे सियारों (पीला–विचारक, नीला–नेता, हरा–धर्मगुरु) को उसके प्रचारक के रूप में नियुक्त करता है। ये सियार उल्टी-सीधी बातें करके भेड़ों को भरमाते हैं कि भेड़िया उनका रक्षक और भाई है।

भेड़ें भोली होती हैं, वे विश्वास कर लेती हैं। चुनाव होता है और भेड़िए भारी बहुमत से जीत जाते हैं।
लेकिन सत्ता में आते ही वे पहला कानून बनाते हैं—
हर भेड़िये को प्रतिदिन एक भेड़ का बच्चा, एक पूरी भेड़ और शाम को आधी भेड़ खाने को मिले।

इस प्रकार कहानी दिखाती है कि कैसे झूठे प्रचार, बाहरी दिखावा और पाखंड से जनता को मूर्ख बनाकर सत्ता हथियाई जाती है।


✍️ व्याख्या (Vyakha)

हरिशंकर परसाई इस व्यंनेग्य के माध्यम से समाज और राजनीति की सच्चाई को उजागर किया है।

भेड़ें—भोली जनता
भेड़िए—स्वार्थी और धूर्त नेता
सियार—चापलूस, प्रचारक, दलाल, धार्मिक ठेकेदार, झूठे पत्रकार
चुनाव—जनता को भ्रमित करने का साधन

कहानी समझाती है कि कैसे किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रचारक, धार्मिक नेता और झूठे बुद्धिजीवी मिलकर जनता को भ्रमित करते हैं और सत्ता ऐसे हाथों में चली जाती है जो जनता का ही नुकसान करते हैं।


📌 One Liner (1 अंक) प्रश्न–उत्तर (100% परीक्षा योग्य)

प्र.1 – ‘भेड़ें और भेड़िये’ के लेखक कौन हैं?
उ. – हरिशंकर परसाई।

प्र.2 – भेड़िए को संत किसने बनाया?
उ. – बूढ़े सियार ने।

प्र.3 – भेड़िया किस चीज़ की वजह से चिंतित था?
उ. – नई प्रजातंत्रीय व्यवस्था में भेड़ों को न खा पाने के डर से।

प्र.4 – कहानी में सियार किसका प्रतीक है?
उ. – चापलूस और चालबाज़ लोगों का।

प्र.5 – भेड़ों ने किसे चुना?
उ. – भेड़ियों को।


📝 2 अंक के प्रश्न–उत्तर

प्र.1 – बूढ़े सियार ने भेड़िये को संत क्यों बनाया?

उ. – भेड़ों का समर्थन पाने और चुनाव में जीत दिलाने के लिए बूढ़े सियार ने भेड़िये को संत का रूप देकर उसका प्रचार किया ताकि भेड़ें उसके छलावे में आ जाएँ।

प्र.2 – तीन रंगे सियारों की क्या भूमिका थी?

उ. – पीला सियार कवि–विचारक, नीला सियार नेता–पत्रकार और हरा सियार धर्मगुरु बनकर भेड़िये की झूठी महानता का प्रचार करते हैं। वे भेड़ों को भ्रमित कर चुनाव में भेड़िये के समर्थन के लिए प्रेरित करते हैं।

प्र.3 – भेड़ें किस गलतफहमी में फँस गईं?

उ. – भेड़ों को विश्वास हो गया कि भेड़िया अब संत बन गया है और उनका रक्षक है, जबकि भेड़िया सत्ता पाकर उन्हें ही खाने का कानून बना देता है।

प्र.4 – कहानी का राजनीतिक संदेश क्या है?

उ. – यह व्यंग्य बताता है कि कैसे झूठे प्रचार, धर्म, दिखावा और चापलूसों की मदद से भ्रष्ट नेता जनता को धोखा देकर सत्ता हासिल करते हैं।


✍️ 5 अंक का प्रश्न–उत्तर

प्र. – “भेड़ें और भेड़िये” कहानी में प्रचार तंत्र की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर (100% यूनिक):
कहानी में प्रचार तंत्र का कार्य तीन रंगे सियारों द्वारा किया जाता है—पीला सियार कवि और विचारक बनकर, नीला सियार नेता और पत्रकार बनकर तथा हरा सियार धर्मगुरु बनकर भेड़िये की छवि बदलने का काम करते हैं। वे भेड़ों के बीच भेड़िये को संत सिद्ध करते हैं

और उसके तथाकथित ‘हृदय परिवर्तन’ की झूठी कहानियाँ फैलाकर भेड़ों की सहानुभूति प्राप्त कर लेते हैं।
इन सियारों की मीठी बातें, भाषण, कवित्त और धार्मिक उपदेश भेड़ों को इतना भ्रमित कर देते हैं कि वे भेड़िये को अपना हितैषी समझ बैठती हैं।

व्यंग्यकार बताता है कि समाज में आज भी नेता, धर्मगुरु, पत्रकार और कथित बुद्धिजीवी मिलकर जनता को गुमराह करते हैं और अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए उसे इस्तेमाल करते हैं। यही इस कहानी का मुख्य राजनीतिक संदेश है।


📝 10 अंक का प्रश्न–उत्तर (Exam-Oriented, 100% Unique)

प्र. – “भेड़ें और भेड़िये” लोकतंत्र पर एक तीखा व्यंग्य है। कहानी के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर:
हरिशंकर परसाई की यह रचना लोकतंत्र की वास्तविक कमजोरियों को उजागर करती है। वन-प्रदेश में प्रजातंत्र की स्थापना होती है, लेकिन भेड़ें—जो बहुसंख्यक हैं—अपनी भोलापन, भावुकता और अंधविश्वास के कारण अपने वास्तविक शत्रु को ही अपना नेता चुन लेती हैं।

बूढ़े सियार और रंगे सियार प्रचार, धर्म, दर्शन और झूठे आदर्शों के माध्यम से भेड़ों को भरमाते हैं। भेड़िये को संत का चोला पहनाकर ऐसा दिखाया जाता है जैसे वह अब पूरी तरह बदल गया है।

यह दृश्य आज के लोकतंत्र से बिल्कुल मिलता-जुलता है। लोकतांत्रिक चुनावों में अक्सर नेता बाहरी दिखावा, धार्मिक आडंबर, झूठी बातें और प्रचार के माध्यम से जनता को प्रभावित करते हैं।
परिणाम यह होता है कि जनता अपने ही नुकसान को बढ़ावा देने वाले लोगों को सत्ता सौंप देती है।

चुनाव जीतने के बाद भेड़िए पहला कानून बनाते हैं—भेड़ों को खाने का। यह दर्शाता है कि गलत नेतृत्व चुनने का खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ता है।

इस प्रकार, पूरी कहानी लोकतंत्र की विडंबनाओं, बहुसंख्यक की नादानी, प्रचार तंत्र की शक्ति और नेताओं के छल–कपट पर करारा व्यंग्य करती है।

notice : इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के ” हिंदी साहित्य कला संस्कृति और अभिव्यक्ति ” class -11 की पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।

 

jeeodigital.com

JeeoDigital

"Dreaming of a professional website like Educated India? JeeoDigital makes it happen — reach out now!"

class.educatedindia786.com

super course for online earning

🎯 अब कमाना होगा आसान! 📱 सिर्फ मोबाइल से शुरू करें – सीखें 100+ ऑनलाइन कमाई के तरीके, वो भी हिंदी में! 🔥 "Super Course for Online Earning" – घर बैठे कमाई का सुनहरा मौका! 💰 ₹199 में पाएं ₹1,00,000 तक कमाने का फॉर्मूला! 🚀 अभी जॉइन करें 👉 class.educatedindia786.com

educatedindia786.com

free classes

"Struggling with Hindi or English? Not anymore! Join our free basic language courses today!"

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top