Table of Contents
Toggleयूरोप एंव आधुनिक युग
(A) यूरोप एंव आधुनिक युग -बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर
फ्रांस की क्रांति के समय वहाँ का शासक कौन था?
✔ (घ) लुई सोलहवाँफ्रांस की जनता से धार्मिक कर के रूप में कौन-सा कर लिया जाता था?
✔ (ख) टाइथ (Tithe)इस्टेट्स जनरल का अधिवेशन कब बुलाया गया?
✔ (क) 5 मई, 1789 ई०फ्रांस के समाज में कितने वर्ग थे?
✔ तीन वर्ग थे
✔ सही उत्तर: तीन वर्ग – पादरी, कुलीन, साधारण वर्गमांटेस्क्यू ने किस सिद्धान्त का समर्थन किया?
✔ (क) शक्ति पृथक्कीकरणजैकोबिन दल का प्रमुख नेता कौन था?
✔ (ख) रॉब्सपियरबॉस्टिल दुर्ग का पतन कब हुआ?
✔ (क) 14 जुलाई 1789 ई०‘सामाजिक समझौता’ पुस्तक किसने लिखी?
✔ (क) रूसोलुई सोलहवें को कब प्राणदण्ड दिया गया?
✔ (क) 21 जनवरी 1793 ई०आतंक के राज्य का संस्थापक कौन था?
✔ (ख) रॉब्सपियर
(B) यूरोप एंव आधुनिक युग – वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर
फ्रांस की शासन व्यवस्था को किस नाम से जाना जाता था?
✔ पुरातन व्यवस्था (Ancient Regime)फ्रांस में ‘कार्वी’ कर का क्या अभिप्राय था?
✔ राज्य के लिए जबरन मजदूरी करना“मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह जंजीरों में जकड़ा हुआ है।” — यह कथन किसका है?
✔ जीन जैक रूसोमांटेस्क्यू ने कौन-सी पुस्तक लिखी?
✔ द स्पिरिट ऑफ लॉज (The Spirit of Laws)फ्रांस के प्रमुख राजनीतिक दल कौन-कौन से थे?
✔ जैकोबिन, गिरोंदिनआतंक के राज्य का संबंध किससे है?
✔ जैकोबिन दल सेसार्वजनिक सुरक्षा समिति किसका अंग थी?
✔ राष्ट्रीय सभा काआतंक के राज्य की अवधि क्या थी?
✔ 1793 से 1794 ई०फ्रांस में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की घोषणा कब हुई?
✔ अगस्त 1789 ई०
(C) यूरोप एंव आधुनिक युग -अति संक्षिप्त प्रश्नों के उत्तर
बुर्जुआ कौन थे?
✔ व्यापारी, उद्योगपति, वकील और पढ़े-लिखे मध्यम वर्ग के लोग।फ्रांसीसी क्रांति के तीन सिद्धांत क्या थे?
✔ स्वतंत्रता, समानता, भ्रातृत्व।टेनिस कोर्ट शपथ क्या थी?
✔ 20 जून 1789 को तीसरे वर्ग ने संविधान बनने तक सभा न छोड़ने की शपथ ली।बास्तिल दुर्ग का पतन कब और क्यों हुआ?
✔ 14 जुलाई 1789 को, निरंकुशता के प्रतीक के रूप में।ब्रन्सविक घोषणा क्या थी?
✔ फ्रांस की जनता को धमकी देने वाली घोषणा।आतंक के राज्य के प्रमुख अंग कौन-से थे?
✔ सार्वजनिक सुरक्षा समिति, क्रांतिकारी न्यायालय।
(D) यूरोप एंव आधुनिक युग लघु उत्तरीय प्रश्न (3–4 अंक)
प्रश्न 1. 1789 ई० से पूर्व फ्रांस की आर्थिक दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
1789 ई० से पूर्व फ्रांस की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी। फ्रांस का शासक वर्ग अत्यधिक विलासिता में जीवन व्यतीत करता था, जिससे राज्य का खर्च बहुत बढ़ गया था। लगातार युद्धों और राजदरबार के फिजूलखर्ची के कारण देश पर भारी कर्ज़ चढ़ गया था। करों का पूरा भार साधारण वर्ग (किसान, मजदूर और कारीगर) पर था, जबकि पादरी और कुलीन वर्ग करों से मुक्त थे। किसान कर, लगान और बेगार से परेशान थे, जिससे गरीबी और असंतोष फैल गया। यही आर्थिक संकट फ्रांसीसी क्रांति का एक प्रमुख कारण बना।
प्रश्न 2. फ्रांस के साधारण वर्ग की प्रमुख समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
फ्रांस का साधारण वर्ग सबसे अधिक शोषित वर्ग था। इस वर्ग को अनेक प्रकार के कर चुकाने पड़ते थे, जैसे टैली, टाइथ और कार्वी। बेरोज़गारी और महँगाई के कारण लोगों का जीवन अत्यंत कठिन हो गया था। अनाज की कमी से भुखमरी फैल गई थी। किसानों को सामंती करों के साथ-साथ बेगार भी करनी पड़ती थी। इन समस्याओं के कारण साधारण वर्ग में असंतोष बढ़ा और उसने क्रांति में सक्रिय भाग लिया।
प्रश्न 3. दैवी सत्तात्मक राजतंत्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
दैवी सत्तात्मक राजतंत्र वह व्यवस्था थी जिसमें राजा स्वयं को ईश्वर द्वारा नियुक्त शासक मानता था। राजा का विश्वास था कि उसकी सत्ता को चुनौती देना ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध है। इस व्यवस्था में राजा निरंकुश होता था और जनता को उसके निर्णयों पर कोई अधिकार नहीं था। फ्रांस में लुई सोलहवाँ इसी प्रकार के दैवी सत्तात्मक राजतंत्र का समर्थक था, जिसके कारण जनता में असंतोष बढ़ा और क्रांति का मार्ग प्रशस्त हुआ।
प्रश्न 4. आतंक के शासन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
आतंक का शासन वह अवधि थी जब फ्रांसीसी क्रांति के दौरान रॉब्सपियर के नेतृत्व में कठोर शासन लागू किया गया। इस समय क्रांति के विरोधियों को बिना निष्पक्ष न्याय के गिरफ्तार कर मृत्युदंड दिया जाता था। क्रांतिकारी न्यायालयों द्वारा शीघ्र फैसले सुनाए जाते थे। भय और हिंसा के वातावरण के कारण इसे “आतंक का शासन” कहा गया। यह काल 1793 से 1794 ई० तक रहा।
प्रश्न 5. फ्रांसीसी क्रांति से पूर्व पादरी वर्ग की स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति से पूर्व पादरी वर्ग समाज का एक विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग था। यह वर्ग करों से पूर्णतः मुक्त था और जनता से ‘टाइथ’ नामक धार्मिक कर वसूल करता था। पादरी वर्ग के पास विशाल भूमि और धन-संपत्ति थी। उन्हें प्रशासन और राजनीति में विशेष अधिकार प्राप्त थे। आम जनता के शोषण में इस वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिससे जनता में इनके प्रति भी रोष उत्पन्न हुआ।
(E) यूरोप एंव आधुनिक युग -दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)
प्रश्न 1. फ्रांस के दार्शनिकों ने फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि किस प्रकार तैयार की?
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करने में फ्रांस के दार्शनिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इन दार्शनिकों ने अपने विचारों और रचनाओं के माध्यम से जनता को जागरूक किया और निरंकुश राजतंत्र के विरुद्ध सोच विकसित की।
जीन जैक रूसो ने अपनी पुस्तक ‘सामाजिक समझौता’ में जनता की संप्रभुता और समानता का सिद्धांत दिया। उन्होंने कहा कि सत्ता का वास्तविक स्रोत जनता होती है।
वाल्टेयर ने चर्च की अंधविश्वासी मान्यताओं, पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों और निरंकुश शासन की तीव्र आलोचना की।
मांटेस्क्यू ने ‘द स्पिरिट ऑफ लॉज’ में शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जिससे निरंकुशता पर अंकुश लगाने की बात कही गई।
इन दार्शनिकों के विचारों से जनता में स्वतंत्रता, समानता और तर्कवाद की भावना जागृत हुई। परिणामस्वरूप जनता ने निरंकुश शासन और सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध विद्रोह किया, जिससे फ्रांसीसी क्रांति का मार्ग प्रशस्त हुआ।
प्रश्न 2. फ्रांस में टेनिस कोर्ट शपथ किन परिस्थितियों में ली गई थी?
उत्तर :
1789 ई० में फ्रांस की आर्थिक संकट को दूर करने के लिए राजा लुई सोलहवें ने इस्टेट्स जनरल की सभा बुलाई। इस सभा में समाज के तीन वर्ग—पादरी, कुलीन और साधारण वर्ग—शामिल थे। साधारण वर्ग की संख्या अधिक होने के बावजूद उन्हें समान मतदान अधिकार नहीं दिए गए।
जब तीसरे वर्ग ने अपने अधिकारों की मांग की, तो राजा ने सभा कक्ष को बंद करवा दिया। इसके बाद तीसरे वर्ग के प्रतिनिधि पास के टेनिस कोर्ट में एकत्र हुए। वहाँ उन्होंने यह शपथ ली कि जब तक फ्रांस का नया संविधान नहीं बन जाएगा, वे सभा भंग नहीं करेंगे। यह शपथ 20 जून 1789 ई० को ली गई।
टेनिस कोर्ट शपथ ने निरंकुश शासन को खुली चुनौती दी और यह फ्रांसीसी क्रांति का एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुई।
प्रश्न 3. 1789 ई० की क्रांति में शहरों एवं ग्रामों की गरीब जनता तथा नारियों की भूमिका का वर्णन कीजिए। (4+4)
उत्तर :
(क) शहरों एवं ग्रामों की गरीब जनता की भूमिका (4 अंक)
फ्रांसीसी क्रांति में शहरों और गाँवों की गरीब जनता ने सक्रिय भूमिका निभाई। बढ़ती महँगाई, बेरोज़गारी और भुखमरी से परेशान होकर लोगों ने विद्रोह किए। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने सामंती करों और दस्तावेजों को नष्ट कर दिया। शहरों में जनता ने बास्तिल दुर्ग पर आक्रमण कर उसे गिरा दिया। गरीब जनता के आंदोलनों ने क्रांति को जनआंदोलन का रूप दिया।
(ख) नारियों की भूमिका (4 अंक)
फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। 1789 ई० में महिलाओं ने वर्साय मार्च किया और राजा को पेरिस आने के लिए मजबूर किया। महिलाओं ने रोटी और समान अधिकारों की मांग की। उन्होंने राजनीतिक सभाओं और आंदोलनों में भाग लिया। ओलिम्प द गूज जैसी महिलाओं ने महिलाओं के अधिकारों की घोषणा प्रस्तुत की, जिससे नारी चेतना का विकास हुआ।
प्रश्न 4. फ्रांस में मानव एवं नागरिक अधिकारों की घोषणा की प्रमुख शर्तें क्या थीं? साथ ही जनचेतना फैलाने में अफवाहों की भूमिका स्पष्ट कीजिए। (4+4)
उत्तर :
(क) मानव एवं नागरिक अधिकारों की घोषणा की प्रमुख शर्तें (4 अंक)
1789 ई० में मानव एवं नागरिक अधिकारों की घोषणा की गई। इसके अनुसार सभी नागरिक कानून के समक्ष समान थे। प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता, समानता और संपत्ति का अधिकार दिया गया। कर सभी नागरिकों से समान रूप से वसूलने की व्यवस्था की गई। विचार, भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार माना गया।
(ख) जनचेतना फैलाने में अफवाहों की भूमिका (4 अंक)
क्रांति के समय अफवाहों ने जनचेतना फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। गाँवों में यह अफवाह फैली कि सामंत किसानों पर हमला करने वाले हैं। इससे किसान एकजुट होकर सामंतों के विरुद्ध खड़े हो गए। इन अफवाहों ने भय और क्रोध को बढ़ाया, जिससे जनता ने संगठित होकर क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया।
प्रश्न 5. फ्रांस में सामंतवाद का अंत किस प्रकार हुआ? तथा नागरिकों के गणतांत्रिक अधिकारों की घोषणा का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति के दौरान सामंतवाद का अंत किया गया। 4 अगस्त 1789 ई० को राष्ट्रीय सभा ने सामंती विशेषाधिकारों और करों को समाप्त कर दिया। किसानों पर लगाए गए बेगार, लगान और अन्य कर खत्म कर दिए गए। इससे सामाजिक समानता की स्थापना हुई।
नागरिकों के गणतांत्रिक अधिकारों की घोषणा से फ्रांस में लोकतंत्र की नींव पड़ी। सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले और कानून की दृष्टि में सब बराबर माने गए। इस घोषणा ने निरंकुश राजतंत्र का अंत किया और आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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