Table of Contents
Toggleनींव रखने वालों का गीत
कवि — गिरिजाकुमार माथुर
1. कवि परिचय — गिरिजाकुमार माथुर
गिरिजाकुमार माथुर हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और प्रयोगवादी काव्यधारा के महत्वपूर्ण रचनाकार थे। उनका जन्म 22 अगस्त 1919 को मध्य प्रदेश के अशोकनगर में हुआ था। उनके पिता देवीचरण माथुर स्कूल शिक्षक थे और माता लक्ष्मी देवी शिक्षित एवं संस्कारवान महिला थीं। उनके परिवार में साहित्य और शिक्षा का अच्छा वातावरण था। उनके पिता स्वयं दोहा और सवैया लिखते थे। इसी कारण गिरिजाकुमार माथुर को कविता और संगीत के प्रति रुचि पारिवारिक संस्कार के रूप में मिली।
उन्होंने 1938 में लखनऊ से अंग्रेजी में एम.ए. किया और इसके बाद एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त की। उनका विवाह शकुन्त माथुर से हुआ, जो स्वयं भी कवयित्री थीं।
गिरिजाकुमार माथुर हिंदी के प्रयोगवादी और नई कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। वे ‘तार सप्तक’ के कवियों में शामिल थे। उनकी रचनाओं में आधुनिक जीवन, सामाजिक विषमता, संघर्ष, श्रम, मानवीय संवेदना, प्रेम, प्रकृति और भविष्य के प्रति आशावादी दृष्टिकोण दिखाई देता है।
माथुर जी की कविता में नवीन प्रयोग, लय, ध्वनि और भाषा की विशेषता देखने को मिलती है। उन्होंने हिंदी कविता को आधुनिक संवेदनाओं और नए विचारों से समृद्ध किया। उनकी कविताओं में व्यक्ति और समाज दोनों के संघर्षों का चित्रण मिलता है।
‘नींव रखने वालों का गीत’ में कवि ने उन मेहनतकश और संघर्षशील लोगों की भावना व्यक्त की है, जो अपने वर्तमान के सुख का त्याग करके आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर संसार का निर्माण करते हैं। कविता में श्रम, संघर्ष, त्याग, धैर्य और भविष्य-निर्माण को विशेष महत्व दिया गया है।
2. कविता का परिचय
‘नींव रखने वालों का गीत’ एक प्रेरणादायक एवं संघर्षप्रधान कविता है। इसमें कवि उन लोगों को संबोधित करता है जो किसी नए संसार की नींव रखने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।
कवि के अनुसार बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छोटी-छोटी खुशियों और तुरंत मिलने वाले आराम का त्याग करना पड़ता है। पसीना, थकान, दर्द और संघर्ष ही भविष्य के निर्माण का आधार बनते हैं।
कविता में वर्तमान पीढ़ी के संघर्ष को आने वाली नई पीढ़ी के सुंदर भविष्य की नींव बताया गया है।
3. पूरी कविता की व्याख्या
प्रथम अंश
कविता की पंक्तियाँ
“माथे पर न रखो हाथ जरा कुछ और तपने दो,
आँखों में न पलकों को उतारो रात
श्रमजा नींद के अंकुर पनपने दो,
हुई है लाल आँखें इन्हें थोड़ा और जलने दो,
दहन के खारे पानी से समय की कोर सजने दो।”
व्याख्या
कवि मेहनत करने वाले लोगों को प्रेरित करते हुए कहता है कि अभी थककर रुकने का समय नहीं आया है। माथे पर हाथ रखकर आराम मत करो और अपनी आँखों पर नींद को हावी मत होने दो। अभी कुछ और मेहनत करने की आवश्यकता है।
लगातार परिश्रम के कारण आँखें लाल हो गई हैं, फिर भी कवि उन्हें कुछ और जलने देने की बात करता है। यहाँ आँखों का जलना कठिन परिश्रम और संघर्ष का प्रतीक है।
“दहन के खारे पानी” से कवि का आशय पसीने और संघर्ष की पीड़ा से है। कवि चाहता है कि इसी पसीने और संघर्ष से समय का नया इतिहास लिखा जाए।
भाव
बड़े लक्ष्य को पाने के लिए आराम छोड़कर लगातार मेहनत करनी चाहिए।
द्वितीय अंश
कविता की पंक्तियाँ
“सहज का सुख नहीं मंजूर
छोटी तृप्तियाँ बेकार,
उठे जब तक न मिट्टी से नया संसार,
तुरत की चैन रंगीनी सभी निस्सार,”
व्याख्या
कवि को आसानी से प्राप्त होने वाला सुख स्वीकार नहीं है। वह छोटी-छोटी उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं होना चाहता। उसका लक्ष्य बहुत बड़ा है।
कवि तब तक चैन से बैठना नहीं चाहता जब तक इसी मिट्टी से एक नया संसार तैयार न हो जाए। यहाँ नया संसार एक बेहतर, सुंदर और न्यायपूर्ण भविष्य का प्रतीक है।
कवि के अनुसार थोड़े समय का आराम और बाहरी चमक स्थायी महत्व नहीं रखते।
भाव
मनुष्य को छोटे लाभों से संतुष्ट होने के बजाय बड़े लक्ष्य के लिए प्रयास करना चाहिए।
कविता की पंक्तियाँ
“मिलाना खींच छोटी डोर के दो छोर
लगाना गाँठ मुश्किल है,
किसी की पहनकर उतरन समझना पा लिया त्रिभुवन,
मुलम्मा, भुलावा, छल है,
असल सुख के लिए मेहनत।”
व्याख्या
कवि कहता है कि छोटी-सी डोर के दो सिरों को खींचकर उन्हें एक गाँठ में बाँधना भी आसान नहीं होता। उसी प्रकार जीवन में किसी बड़े उद्देश्य को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करना पड़ता है।
“किसी की पहनकर उतरन” का अर्थ है दूसरे की उपलब्धि या सफलता को अपना समझ लेना। कवि ऐसी सफलता को वास्तविक सफलता नहीं मानता।
बाहरी चमक केवल मुलम्मा है। यह मनुष्य को भ्रमित कर सकती है, लेकिन वास्तविक सुख और सफलता के लिए स्वयं मेहनत करनी पड़ती है।
भाव
दूसरों की उपलब्धियों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं परिश्रम करके सफलता प्राप्त करनी चाहिए।
तृतीय अंश
कविता की पंक्तियाँ
“पसीने से बनेगा पथ
थकन है खींचने की,
इसलिए छूट जाएगा क्या राह में ही
सूर्य निर्मित रथ।”
व्याख्या
कवि कहता है कि सफलता का रास्ता पसीना बहाकर और मेहनत करके ही तैयार होगा। इस रास्ते पर चलते समय थकान होना स्वाभाविक है।
लेकिन केवल थक जाने के कारण लक्ष्य की यात्रा बीच में नहीं छोड़ी जा सकती। मनुष्य को कठिनाइयों के बावजूद आगे बढ़ना चाहिए।
“सूर्य निर्मित रथ” उज्ज्वल भविष्य, प्रकाश और महान लक्ष्य का प्रतीक है। कवि कहना चाहता है कि लक्ष्य प्राप्त होने से पहले संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
भाव
थकान और कठिनाइयों के बावजूद लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ते रहना चाहिए।
चतुर्थ अंश
कविता की पंक्तियाँ
“इसी से जिंदगी की तिक्त
कड़वी, कटीली अनुभूति,
मन में और पचने दो
हमारे दर्द, दुख, संघर्ष की,
मज़बूत छाती पर नई पीढ़ी सँवरने दो।”
व्याख्या
कवि जीवन के कड़वे और कठिन अनुभवों से भागने की बात नहीं करता। वह चाहता है कि मनुष्य अपने जीवन के दर्द, दुख और संघर्ष को सहन करे और उनसे अनुभव प्राप्त करे।
ये कठिन अनुभव मनुष्य को मजबूत बनाते हैं। वर्तमान पीढ़ी के संघर्ष और त्याग पर ही आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर बनेगा।
“नई पीढ़ी सँवरने दो” का अर्थ है कि आज के लोगों की मेहनत और संघर्ष से आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर जीवन और बेहतर समाज प्राप्त हो।
भाव
वर्तमान पीढ़ी का संघर्ष आने वाली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनता है।
4. कविता का केंद्रीय भाव
‘नींव रखने वालों का गीत’ में गिरिजाकुमार माथुर ने श्रम, संघर्ष, त्याग और भविष्य-निर्माण की भावना को व्यक्त किया है।
कवि उन लोगों की प्रशंसा करता है जो अपने आराम और छोटी-छोटी खुशियों का त्याग करके एक नए संसार का निर्माण करना चाहते हैं। वे जानते हैं कि सफलता का रास्ता आसान नहीं है। इसके लिए पसीना बहाना पड़ेगा, थकान सहनी पड़ेगी और जीवन की कड़वी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।
कवि का मानना है कि आज की पीढ़ी के दर्द, दुख और संघर्ष ही आने वाली पीढ़ी के सुखद भविष्य की नींव रखेंगे।
मुख्य संदेश
बड़े और स्थायी परिवर्तन के लिए निरंतर मेहनत, धैर्य, त्याग और संघर्ष आवश्यक है।
5. Short Questions with Answers
प्रश्न 1. ‘नींव रखने वालों का गीत’ के कवि कौन हैं?
उत्तर: ‘नींव रखने वालों का गीत’ के कवि गिरिजाकुमार माथुर हैं।
प्रश्न 2. कविता का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: कविता का मुख्य विषय श्रम, संघर्ष, त्याग और नए भविष्य का निर्माण है।
प्रश्न 3. कवि किस सुख को स्वीकार नहीं करता?
उत्तर: कवि आसानी से मिलने वाले सुख और छोटी-छोटी तृप्तियों को स्वीकार नहीं करता।
प्रश्न 4. कवि ‘नया संसार’ कब तक चाहता है?
उत्तर: कवि तब तक संतुष्ट नहीं होना चाहता जब तक मिट्टी से नया संसार तैयार न हो जाए।
प्रश्न 5. ‘पसीने से बनेगा पथ’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि सफलता का मार्ग कठिन परिश्रम और संघर्ष से तैयार होता है।
प्रश्न 6. ‘मुलम्मा’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘मुलम्मा’ का अर्थ है ऊपरी चमक या दिखावा।
प्रश्न 7. कवि के अनुसार असल सुख कैसे प्राप्त होता है?
उत्तर: कवि के अनुसार मेहनत और संघर्ष के द्वारा असल सुख प्राप्त होता है।
प्रश्न 8. ‘सूर्य निर्मित रथ’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: ‘सूर्य निर्मित रथ’ उज्ज्वल भविष्य और महान लक्ष्य का प्रतीक है।
प्रश्न 9. कवि जीवन की कड़वी अनुभूतियों के बारे में क्या कहता है?
उत्तर: कवि कहता है कि जीवन की कड़वी अनुभूतियों और संघर्षों को सहना चाहिए, क्योंकि वे मनुष्य को मजबूत बनाते हैं।
प्रश्न 10. नई पीढ़ी किससे सँवरेगी?
उत्तर: नई पीढ़ी वर्तमान पीढ़ी के दर्द, दुख, मेहनत और संघर्ष से सँवरेगी।
प्रश्न 11. कविता में ‘पसीना’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: ‘पसीना’ परिश्रम और श्रम का प्रतीक है।
प्रश्न 12. कवि छोटी तृप्तियों को बेकार क्यों मानता है?
उत्तर: क्योंकि छोटी तृप्तियाँ मनुष्य को बड़े लक्ष्य से भटका सकती हैं और नए संसार के निर्माण के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
प्रश्न 13. कविता में ‘नई पीढ़ी’ से क्या आशय है?
उत्तर: ‘नई पीढ़ी’ से आशय आने वाली पीढ़ी और उसके उज्ज्वल भविष्य से है।
प्रश्न 14. कविता हमें क्या प्रेरणा देती है?
उत्तर: कविता हमें कठिनाइयों से न घबराकर निरंतर मेहनत करने और बेहतर भविष्य बनाने की प्रेरणा देती है।
6. Long Questions with Answers
प्रश्न 1. ‘नींव रखने वालों का गीत’ कविता का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘नींव रखने वालों का गीत’ गिरिजाकुमार माथुर की संघर्ष और श्रम की भावना से जुड़ी महत्वपूर्ण कविता है। इसमें कवि ने उन लोगों की भावना को व्यक्त किया है जो अपने वर्तमान के सुख और आराम का त्याग करके भविष्य के लिए एक नए संसार का निर्माण करते हैं।
कवि छोटी-छोटी तृप्तियों और तत्काल मिलने वाले आराम को महत्व नहीं देता। वह चाहता है कि जब तक मिट्टी से नया संसार तैयार न हो जाए, तब तक संघर्ष जारी रहना चाहिए।
कवि के अनुसार सफलता का रास्ता पसीने और मेहनत से बनता है। इस रास्ते में थकान, दर्द और कठिनाइयाँ आएँगी, लेकिन इनसे घबराकर लक्ष्य छोड़ देना उचित नहीं है।
अंत में कवि कहता है कि वर्तमान पीढ़ी के दर्द, दुख और संघर्ष पर ही नई पीढ़ी का भविष्य सँवरेगा। इस प्रकार कविता श्रम, संघर्ष, त्याग, धैर्य और भविष्य-निर्माण का संदेश देती है।
प्रश्न 2. ‘नींव रखने वालों का गीत’ में कवि ने श्रम और संघर्ष का महत्व कैसे बताया है?
उत्तर:
कवि ने श्रम और संघर्ष को जीवन की सफलता का मूल आधार माना है। उसके अनुसार बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल इच्छा करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए निरंतर मेहनत करनी पड़ती है।
कवि कहता है कि “पसीने से बनेगा पथ”। इसका अर्थ है कि सफलता की राह परिश्रम से तैयार होती है। इस राह में थकान और कठिनाइयाँ अवश्य आएँगी, लेकिन इनसे डरकर यात्रा रोकना उचित नहीं है।
कवि छोटी-छोटी तृप्तियों को महत्व नहीं देता। वह एक नए संसार के निर्माण का सपना देखता है। इसके लिए वर्तमान पीढ़ी को अपने दर्द, दुख और संघर्ष को सहना होगा।
इस प्रकार कवि के अनुसार श्रम वर्तमान का संघर्ष है, जबकि उसका परिणाम आने वाली पीढ़ी का उज्ज्वल भविष्य है।
प्रश्न 3. “हमारे दर्द, दुख, संघर्ष की मज़बूत छाती पर नई पीढ़ी सँवरने दो” का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इन पंक्तियों में कवि ने वर्तमान पीढ़ी के संघर्ष और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के संबंध को स्पष्ट किया है।
कवि का कहना है कि वर्तमान पीढ़ी को जीवन की कठिनाइयों, दुखों और संघर्षों से घबराना नहीं चाहिए। उसे इन कठिन परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना करना चाहिए।
वर्तमान पीढ़ी की मेहनत और त्याग आने वाली पीढ़ी के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा। जिस प्रकार किसी भवन की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है, उसी प्रकार नई पीढ़ी का भविष्य वर्तमान पीढ़ी के संघर्ष पर निर्भर करता है।
इसलिए कवि चाहता है कि वर्तमान पीढ़ी अपने संघर्षों को सहकर नई पीढ़ी के लिए बेहतर और सुंदर संसार का निर्माण करे।
प्रश्न 4. कविता में ‘नया संसार’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
कविता में ‘नया संसार’ केवल किसी नए स्थान या नए भवन का अर्थ नहीं देता। यह एक ऐसे बेहतर समाज और भविष्य का प्रतीक है, जिसमें मनुष्य को अधिक सुख, सम्मान, स्वतंत्रता और विकास के अवसर प्राप्त हों।
कवि पुराने और छोटे सुखों से संतुष्ट नहीं होना चाहता। वह ऐसा संसार बनाना चाहता है जो मेहनत और संघर्ष की नींव पर तैयार हो।
इस नए संसार के निर्माण के लिए वर्तमान पीढ़ी को कठिन परिश्रम करना होगा। उसका पसीना और संघर्ष आने वाली पीढ़ी के जीवन को बेहतर बनाएगा।
इस प्रकार ‘नया संसार’ बेहतर समाज और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है।
7. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| श्रमजा | श्रम से उत्पन्न |
| तृप्ति | संतोष |
| निस्सार | सारहीन / महत्वहीन |
| उतरन | दूसरे के पुराने कपड़े; यहाँ दूसरे की उपलब्धि का संकेत |
| मुलम्मा | ऊपरी चमक / दिखावा |
| भुलावा | भ्रम |
| दहन | जलना / कष्ट |
| तिक्त | कड़वा |
| कटीली अनुभूति | पीड़ादायक अनुभव |
| नींव | आधार |
| नया संसार | बेहतर भविष्य / नई व्यवस्था |
8. कविता के प्रमुख प्रतीक
पसीना → मेहनत और श्रम
नींव → मजबूत आधार
नया संसार → बेहतर भविष्य
सूर्य निर्मित रथ → उज्ज्वल लक्ष्य
दर्द-दुख-संघर्ष → सफलता की कीमत
नई पीढ़ी → आने वाला भविष्य
मुलम्मा → बाहरी दिखावा
श्रमजा नींद → मेहनत के बाद मिलने वाला विश्राम






