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भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ – लता मंगेशकर
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भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ – लता मंगेशकर

लेखक – कुमार गंधर्व

1. लेखक परिचय – कुमार गंधर्व

कुमार गंधर्व भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान और प्रयोगशील गायक थे। उनका मूल नाम शिवपुत्र सिद्धरामय्या कोमकली था। उनका जन्म 8 अप्रैल 1924 को कर्नाटक के बेलगाँव ज़िले के सुलेभावी में हुआ था। बचपन से ही उनमें संगीत के प्रति असाधारण प्रतिभा दिखाई देने लगी थी। बहुत कम उम्र में उन्होंने मंच पर अपनी गायन प्रतिभा का परिचय दे दिया था।

कुमार गंधर्व ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को समझने के साथ-साथ उसमें अनेक मौलिक प्रयोग भी किए। उन्होंने लोकसंगीत और संत-कवियों की रचनाओं को भी अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया। कबीर की वाणी के उनके गायन ने विशेष प्रसिद्धि प्राप्त की।

वे केवल गायक ही नहीं, बल्कि संगीत के गहरे अध्येता और विचारक भी थे। उनकी संगीत-दृष्टि में परंपरा और नवीनता दोनों का सुंदर मेल दिखाई देता है। वे संगीत को केवल तकनीकी नियमों का विषय नहीं मानते थे, बल्कि उसमें भाव, अनुभव, मिठास और श्रोता से संवाद को भी महत्वपूर्ण मानते थे।

‘भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ – लता मंगेशकर’ पाठ में कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर की गायकी का मूल्यांकन एक महान संगीतज्ञ की दृष्टि से किया है। उन्होंने लता की आवाज़ की विशिष्टता, मधुरता, लोकप्रियता और उनकी गायकी में मौजूद ‘गानपन’ पर विशेष प्रकाश डाला है।

 


2. कहानी/पाठ का सारांश – हिंदी में

‘भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ – लता मंगेशकर’ में कुमार गंधर्व ने महान गायिका लता मंगेशकर की अद्वितीय गायन-प्रतिभा का मूल्यांकन किया है।

लेखक बताते हैं कि कई वर्ष पहले जब वे बीमार थे, तब एक दिन उन्होंने सहज ही रेडियो चलाया। अचानक उन्हें एक ऐसी आवाज़ सुनाई दी जो सामान्य आवाज़ों से बिल्कुल अलग थी। उस स्वर में ऐसी मिठास और आकर्षण था कि लेखक उसके प्रभाव में पूरी तरह डूब गए। गीत समाप्त होने पर उन्हें पता चला कि उस गीत को लता मंगेशकर ने गाया था। इस अनुभव ने लेखक को लता की गायकी की ओर विशेष रूप से आकर्षित किया।

लेखक के अनुसार लता से पहले नूरजहाँ का चित्रपट संगीत में महत्वपूर्ण स्थान था, लेकिन लता मंगेशकर ने अपनी प्रतिभा से उससे भी आगे एक नया स्थान बनाया। कुमार गंधर्व स्पष्ट रूप से मानते हैं कि भारतीय गायिकाओं में लता मंगेशकर के समान कोई दूसरी गायिका नहीं हुई।

लता की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आवाज़ की मधुरता और प्रभावशीलता है। सामान्य श्रोता को संगीत के राग और ताल की तकनीकी जानकारी भले न हो, लेकिन वह ऐसी आवाज़ पसंद करता है जो उसके मन को आनंद दे। लता की गायकी में यही सहज मिठास मौजूद है।

लेखक यह भी बताते हैं कि लता ने केवल फिल्मी संगीत को लोकप्रिय नहीं बनाया, बल्कि उनके गायन के कारण आम लोगों में संगीत के प्रति रुचि भी बढ़ी। चित्रपट संगीत के माध्यम से लोगों का ध्यान शास्त्रीय संगीत की ओर भी आकर्षित हुआ।

कुमार गंधर्व लता के प्रत्येक गीत को एक पूर्ण कलाकृति के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार गीत में स्वर, लय और शब्दार्थ का सुंदर मेल होना चाहिए। लता के गायन में इन तीनों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

लेखक यह भी मानते हैं कि किसी संगीत की श्रेष्ठता केवल इस आधार पर तय नहीं की जानी चाहिए कि वह शास्त्रीय है या चित्रपट संगीत। असली कसौटी यह है कि वह संगीत श्रोता को कितना आनंद देता है और उसके मन को कितना प्रभावित करता है।

अंत में लेखक लता मंगेशकर को अत्यंत दुर्लभ प्रतिभा का कलाकार बताते हैं। उनके अनुसार सदियों में कभी-कभी ऐसा कलाकार जन्म लेता है। अपने समय में ऐसी महान कलाकार को प्रत्यक्ष देख पाना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।


3. Summary in English

“Bhartiya Gayikaon Mein Bejod – Lata Mangeshkar” is a prose piece written by the great Indian classical singer Kumar Gandharva. In this lesson, the writer presents his assessment of Lata Mangeshkar’s extraordinary singing talent.

The writer recalls an incident from many years ago when he was ill. One day, while listening to the radio, he suddenly heard a remarkably beautiful voice. The voice was so unusual and attractive that he became completely absorbed in the song. After the song ended, he came to know that the singer was Lata Mangeshkar. This experience made him deeply interested in her singing.

According to Kumar Gandharva, Lata Mangeshkar is unmatched among Indian female singers. Before Lata, Noor Jehan had a prominent position in film music, but Lata created an even greater place for herself through her unique talent.

The greatest quality of Lata’s singing is its sweetness, purity and emotional appeal. An ordinary listener may not understand the technical details of a raga or tala, but he can easily understand and enjoy the sweetness of a beautiful voice.

The writer also explains that Lata’s contribution was not limited to film music. Her songs increased the popularity of film music and also helped ordinary people develop an interest in music, including classical music.

Kumar Gandharva considers each of Lata’s songs a complete work of art. In her singing, voice, rhythm and meaning of the words come together beautifully. For him, the real value of music lies in its ability to give joy and touch the listener’s heart.

At the end, the writer describes Lata as a rare artist who appears only once in many generations. He considers it a great privilege to live in the same age as such a remarkable singer.


4. लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. ‘भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ – लता मंगेशकर’ के लेखक कौन हैं?

उत्तर: इस पाठ के लेखक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व हैं।

प्रश्न 2. कुमार गंधर्व ने पहली बार लता मंगेशकर की आवाज़ कहाँ सुनी?

उत्तर: कुमार गंधर्व ने पहली बार लता मंगेशकर की आवाज़ रेडियो पर सुनी।

प्रश्न 3. लता की आवाज़ सुनकर लेखक की क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर: लेखक लता की आवाज़ से अत्यंत प्रभावित और आश्चर्यचकित हो गए। उन्हें लगा कि यह कोई असाधारण स्वर है।

प्रश्न 4. लता से पहले चित्रपट संगीत में किस गायिका का प्रभाव था?

उत्तर: लता से पहले नूरजहाँ का चित्रपट संगीत में विशेष प्रभाव था।

प्रश्न 5. लेखक के अनुसार सामान्य श्रोता संगीत में क्या चाहता है?

उत्तर: सामान्य श्रोता ऐसी मिठास और रंजकता चाहता है जिसे वह सहज रूप से अनुभव कर सके और जिससे उसे आनंद मिले।

प्रश्न 6. लता मंगेशकर को बेजोड़ क्यों कहा गया है?

उत्तर: उनकी मधुर आवाज़, भावपूर्ण गायकी, लोकप्रियता और स्वर-लय-शब्द के सुंदर समन्वय के कारण उन्हें बेजोड़ कहा गया है।

प्रश्न 7. लता की गायकी से चित्रपट संगीत को क्या लाभ हुआ?

उत्तर: लता की गायकी के कारण चित्रपट संगीत को असाधारण लोकप्रियता मिली और आम लोगों में संगीत के प्रति रुचि बढ़ी।

प्रश्न 8. ‘गानपन’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: ‘गानपन’ से तात्पर्य गायन के उस गुण से है जो गीत को सहज, मधुर, प्रभावशाली और आनंददायक बनाता है।

प्रश्न 9. लेखक लता के प्रत्येक गीत को क्या मानते हैं?

उत्तर: लेखक लता के प्रत्येक गीत को एक संपूर्ण कलाकृति मानते हैं।

प्रश्न 10. लता के गायन में किन तत्वों का सुंदर मेल है?

उत्तर: लता के गायन में स्वर, लय और शब्दार्थ का सुंदर मेल है।


5. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर को ‘भारतीय गायिकाओं में बेजोड़’ क्यों कहा है?

उत्तर:
कुमार गंधर्व ने लता मंगेशकर को भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ इसलिए माना है क्योंकि उनकी गायकी में अनेक असाधारण गुण एक साथ मिलते हैं। उनकी आवाज़ में मधुरता, कोमलता और भावों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने की क्षमता है।

लता की गायकी केवल संगीत के जानकारों को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि सामान्य श्रोता भी उसे सहज रूप से पसंद करता है। उनकी आवाज़ में ऐसी मिठास है जो सीधे श्रोता के मन तक पहुँचती है। लेखक के अनुसार किसी कलाकार की श्रेष्ठता केवल कठिन राग या ताल के ज्ञान से नहीं आँकी जानी चाहिए, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि उसका संगीत श्रोता को कितना आनंद देता है।

लता ने चित्रपट संगीत को अत्यधिक लोकप्रिय बनाया। उनके गायन ने आम लोगों में संगीत के प्रति रुचि पैदा की और शास्त्रीय संगीत के प्रति दृष्टिकोण को भी प्रभावित किया। लेखक के अनुसार उनके प्रत्येक गीत में स्वर, लय और शब्दार्थ का सुंदर संगम मिलता है। इसी असाधारण प्रतिभा के कारण कुमार गंधर्व उन्हें भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ मानते हैं।


प्रश्न 2. लता मंगेशकर की गायकी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:
लता मंगेशकर की गायकी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  1. उनकी आवाज़ अत्यंत मधुर और आकर्षक है।
  2. उनके स्वर में कोमलता और स्पष्टता दिखाई देती है।
  3. वे गीत के भावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
  4. उनके गायन में स्वर, लय और शब्दार्थ का सुंदर समन्वय है।
  5. उनके गीत सामान्य श्रोता को भी आसानी से प्रभावित करते हैं।
  6. उनकी गायकी में विशेष प्रकार का गानपन और रंजकता है।
  7. उनकी लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों में भी उनके गीत लोकप्रिय हुए।

प्रश्न 3. चित्रपट संगीत और शास्त्रीय संगीत के संबंध में कुमार गंधर्व की दृष्टि स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
कुमार गंधर्व संगीत को केवल शास्त्रीय और चित्रपट संगीत के अलग-अलग खाँचों में नहीं देखते। उनके अनुसार संगीत का अंतिम उद्देश्य रसिक को आनंद प्रदान करना है।

शास्त्रीय संगीत में राग, ताल और नियमों का विशेष महत्व होता है, जबकि चित्रपट संगीत सामान्य श्रोता के लिए अधिक सहज और आकर्षक होता है। सामान्य श्रोता को राग और ताल की तकनीकी जानकारी न भी हो, फिर भी वह मधुर और प्रभावशाली संगीत का आनंद ले सकता है।

लता मंगेशकर की गायकी इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उनके गीतों ने चित्रपट संगीत को लोकप्रिय बनाया और आम लोगों में संगीत के प्रति रुचि बढ़ाई। लेखक के अनुसार संगीत की वास्तविक सफलता इस बात में है कि वह श्रोता के मन को कितना आनंदित और प्रभावित करता है।


प्रश्न 4. ‘लता का एक-एक गाना एक संपूर्ण कलाकृति है’ – इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
कुमार गंधर्व के अनुसार लता मंगेशकर का प्रत्येक गीत अपने आप में पूर्ण कलाकृति है। किसी लंबी संगीत सभा में जिस प्रकार श्रोता को अनेक प्रकार के संगीत का रस मिलता है, उसी प्रकार लता के कुछ मिनट के गीत में भी संगीत का पूरा आनंद प्राप्त किया जा सकता है।

उनके गीत में स्वर, लय और शब्दार्थ का सुंदर त्रिवेणी-संगम होता है। वे केवल सही सुर में गीत नहीं गातीं, बल्कि उसके भाव और अर्थ को भी अपनी आवाज़ के माध्यम से श्रोता तक पहुँचाती हैं। यही कारण है कि उनका छोटा-सा गीत भी श्रोता को गहरे स्तर पर प्रभावित करता है।


6. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • पाठ: भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ – लता मंगेशकर
  • लेखक: कुमार गंधर्व
  • पुस्तक: वितान भाग–1
  • मुख्य विषय: लता मंगेशकर की अद्वितीय गायन प्रतिभा
  • पहली बार लता की आवाज़: रेडियो पर
  • लता से पहले प्रसिद्ध गायिका: नूरजहाँ
  • मुख्य गुण: मधुरता, रंजकता, गानपन, भाव-अभिव्यक्ति
  • गीत के तीन प्रमुख तत्व: स्वर, लय और शब्दार्थ
  • लता का योगदान: चित्रपट संगीत को लोकप्रिय बनाना और आम लोगों में संगीत के प्रति रुचि पैदा करना
  • लेखक का निष्कर्ष: लता जैसी प्रतिभा सदियों में कभी-कभी जन्म लेती है।

notice : इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के class -12 Hindi की पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।

 

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