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Toggleनीलू — महादेवी वर्मा
1. लेखिका परिचय
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका, शिक्षाविद् और समाजसेविका थीं। उनका जन्म 1907 ई. में फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा इंदौर के मिशन स्कूल में हुई। आगे चलकर उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और हिंदी साहित्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य के छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में मानी जाती हैं। उनकी रचनाओं में करुणा, संवेदना, प्रेम, प्रकृति और मानवीय भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती है। कविता के साथ-साथ उन्होंने गद्य साहित्य में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
उन्होंने प्रयाग महिला विद्यापीठ से जुड़कर महिलाओं की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। वे साहित्य के साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहीं। उनकी रचनाओं में मनुष्य के साथ-साथ पशु-पक्षियों के प्रति भी गहरी संवेदना दिखाई देती है।
उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’, ‘सांध्यगीत’, ‘दीपशिखा’ और ‘यामा’ उल्लेखनीय हैं। गद्य रचनाओं में ‘अतीत के चलचित्र’, ‘स्मृति की रेखाएँ’, ‘पथ के साथी’ और ‘मेरा परिवार’ विशेष प्रसिद्ध हैं।
महादेवी वर्मा को उनके साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए। उन्हें पद्म भूषण तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनका निधन 1987 ई. में हुआ।
महादेवी वर्मा की विशेषता यह है कि उन्होंने पशु-पक्षियों को केवल जीव नहीं माना, बल्कि उनके भीतर छिपी भावनाओं, निष्ठा, प्रेम और संवेदना को मनुष्य के समान समझा। ‘नीलू’ इसी संवेदनशील दृष्टि से लिखा गया एक मार्मिक संस्मरण है।
2. पाठ का परिचय
‘नीलू’ महादेवी वर्मा का एक संस्मरणात्मक गद्य-लेख है। इसमें लेखिका ने अपने पालतू कुत्ते नीलू तथा उसकी माँ लूसी के जीवन से जुड़ी घटनाओं का वर्णन किया है।
इस रचना में पशु-प्रेम, स्वामिभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, परोपकार, आत्मसम्मान और संवेदनशीलता जैसे गुणों को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
3. पूरे पाठ का सारांश
महादेवी वर्मा ने अपने जीवन में अनेक पशु-पक्षियों को पाला था। नीलू उन्हीं में से एक अत्यंत प्रिय कुत्ता था। नीलू की कथा उसकी माँ लूसी से जुड़ी हुई है।
लूसी एक अल्सेशियन कुतिया थी। उसका शरीर सुंदर, मजबूत और फुर्तीला था। वह सामान्य कुत्तों से अलग स्वभाव वाली थी। अल्सेशियन कुत्ते सामान्यतः एक ही स्वामी के प्रति विशेष निष्ठा रखते हैं, लेकिन लूसी को एक निश्चित स्वामी का साथ नहीं मिल पाया था। इसलिए वह सभी लोगों के साथ सहचरी की तरह व्यवहार करती थी और उनके अनुरोधों को पूरा करने में तत्पर रहती थी।
उत्तरायण में रहने वाले लोग सर्दियों में जब बर्फ के कारण दुकान तक नहीं जा पाते थे, तब वे लूसी के गले में पैसे और सामान की सूची बाँधकर उसे दुकान भेज देते थे। लूसी बर्फीले रास्ते को पार करके दुकान तक जाती और सामान लेकर वापस आ जाती। कई बार लोग सामान लिखने में भूल भी कर जाते, फिर भी लूसी बिना शिकायत के दोबारा सामान लाने चली जाती थी।
एक दिन एक भूटिया कुत्ता बर्फ में भटकता हुआ दुकान तक आया। लूसी से उसकी मित्रता हो गई। बाद में लूसी ने दो बच्चों को जन्म दिया। उनमें से एक बच्चा ठंड के कारण मर गया, जबकि दूसरा जीवित रहा। यही बच्चा आगे चलकर नीलू कहलाया।
सर्दियों में लकड़बग्घे पर्वतीय क्षेत्रों से नीचे आ जाते थे और कुत्तों पर हमला करते थे। एक दिन लूसी शाम के समय बाहर गई और वापस नहीं लौटी। अगले दिन बर्फ पर संघर्ष के निशान देखकर पता चला कि लकड़बग्घे ने उस पर हमला किया था। लूसी ने बहुत संघर्ष किया था, लेकिन अंततः उसकी मृत्यु हो गई।
लूसी के मरने के बाद उसके छोटे बच्चे नीलू को माँ का दूध और गर्माहट नहीं मिल सकी। लेखिका ने उसे ऊन और अधबुने स्वेटर की डलिया में रखकर पाला। इस प्रकार नीलू धीरे-धीरे बड़ा हुआ।
नीलू का रूप अपनी माँ और भूटिया पिता दोनों से अलग था। उसके शरीर के रोमों में भूरे, पीले और काले रंग का मिश्रण था। उसका शरीर सुंदर, मजबूत और आकर्षक था।
नीलू का स्वभाव बहुत विशेष था। उसमें सामान्य कुत्तों जैसी लालच, अकारण भौंकने या किसी को काटने की प्रवृत्ति नहीं थी। वह आत्मसम्मानी और स्वाभिमानी था। यदि उसे भोजन भी अपमानपूर्वक दिया जाता, तो वह उसे स्वीकार नहीं करता था।
नीलू लेखिका का अत्यंत विश्वासी और आज्ञाकारी था। वह लेखिका की आवाज पहचानता था। यदि कोई बाहर से उसे कह देता कि “गुरुजी तुम्हें बुला रही थीं”, तो वह तुरंत लेखिका के पास पहुँच जाता।
नीलू में हिंसक प्रवृत्ति बिल्कुल नहीं थी। उसने कभी किसी पशु-पक्षी को नुकसान नहीं पहुँचाया। इसके विपरीत वह छोटे पक्षियों और खरगोशों की रक्षा करता था।
लेखिका के घर की गौरैयाएँ जब रोशनदानों में घोंसले बनाती थीं, तब उनके बच्चे कभी-कभी नीचे गिर जाते थे। नीलू उन पक्षी-शावकों की रक्षा करता था। वह उन्हें मुँह में बहुत सावधानी से पकड़कर लेखिका के पास ले आता, ताकि उन्हें वापस घोंसले में पहुँचाया जा सके।
एक बार खरगोशों ने सुरंग बनाकर पड़ोसी परिसर की ओर निकलने का रास्ता बना लिया। वहाँ एक जंगली बिल्ली उनका शिकार करने की प्रतीक्षा कर रही थी। नीलू ने खतरे को पहचान लिया और पूरी रात सुरंग के द्वार पर खड़ा रहा। इस कारण खरगोश बाहर नहीं निकल पाए और उनकी जान बच गई। रातभर ठंड में खड़े रहने के कारण नीलू को निमोनिया हो गया।
लेखिका के साथ नीलू का संबंध अत्यंत गहरा था। जब लेखिका एक दुर्घटना के कारण अस्पताल गईं, तो नीलू ने तीन दिनों तक खाना-पीना छोड़ दिया। बाद में उसे अस्पताल लाया गया। लेखिका को देखकर वह आश्वस्त हुआ और उनके पलंग के नीचे प्रहरी की तरह बैठ गया।
नीलू ने लगभग चौदह वर्ष का जीवन जिया। उसके जीवन में स्वाभिमान, निष्ठा, परोपकार और कर्तव्य की भावना अंत तक बनी रही। उसकी मृत्यु भी शांत और गरिमापूर्ण थी। लेखिका के लिए नीलू केवल एक पालतू कुत्ता नहीं था, बल्कि एक संवेदनशील और विश्वसनीय साथी था।
4. पाठ का मुख्य संदेश
‘नीलू’ हमें यह सिखाता है कि प्रेम, निष्ठा, परोपकार, कर्तव्य और संवेदना केवल मनुष्यों के गुण नहीं हैं। पशु भी इन भावनाओं को गहराई से अनुभव करते हैं।
नीलू के चरित्र के माध्यम से लेखिका ने बताया है कि एक पशु भी मनुष्य का सच्चा मित्र, रक्षक और सहयोगी बन सकता है।
5. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)
1. ‘नीलू’ पाठ की विधा क्या है?
(A) कहानी
(B) संस्मरण
(C) नाटक
(D) उपन्यास
उत्तर — (B) संस्मरण
2. ‘नीलू’ की लेखिका कौन हैं?
(A) सुभद्रा कुमारी चौहान
(B) महादेवी वर्मा
(C) मन्नू भंडारी
(D) कृष्णा सोबती
उत्तर — (B) महादेवी वर्मा
3. नीलू की माँ का नाम क्या था?
(A) कजली
(B) लूसी
(C) गौरा
(D) सोना
उत्तर — (B) लूसी
4. लूसी किस नस्ल की थी?
(A) देशी
(B) भूटिया
(C) अल्सेशियन
(D) लैब्राडोर
उत्तर — (C) अल्सेशियन
5. नीलू किस प्रकार का कुत्ता था?
(A) केवल अल्सेशियन
(B) केवल भूटिया
(C) अल्सेशियन-भूटिया वर्णसंकर
(D) देशी
उत्तर — (C) अल्सेशियन-भूटिया वर्णसंकर
6. लूसी को सामान लाने के लिए क्या बाँधा जाता था?
(A) रस्सी
(B) कपड़ा
(C) घंटी
(D) पट्टा
उत्तर — (B) कपड़ा
7. लूसी सामान कहाँ से लाती थी?
(A) बाजार से
(B) घर से
(C) दुकान से
(D) शहर से
उत्तर — (C) दुकान से
8. लूसी के बच्चों में से एक की मृत्यु किस कारण हुई?
(A) बीमारी से
(B) दुर्घटना से
(C) ठंड से
(D) भूख से
उत्तर — (C) ठंड से
9. लूसी की मृत्यु किसके कारण हुई?
(A) बाघ
(B) लकड़बग्घा
(C) बिल्ली
(D) भेड़िया
उत्तर — (B) लकड़बग्घा
10. लूसी की मृत्यु के बाद नीलू को किसकी गर्माहट की कमी महसूस होती थी?
(A) लेखिका की
(B) पिता की
(C) माँ की
(D) धूप की
उत्तर — (C) माँ की
11. नीलू का पालन-पोषण किसके द्वारा किया गया?
(A) दुकानदार ने
(B) लेखिका ने
(C) गाँव वालों ने
(D) उसके पिता ने
उत्तर — (B) लेखिका ने
12. नीलू का स्वभाव कैसा था?
(A) हिंसक
(B) लालची
(C) आत्मसम्मानी और परोपकारी
(D) आलसी
उत्तर — (C) आत्मसम्मानी और परोपकारी
13. नीलू भोजन कब स्वीकार नहीं करता था?
(A) जब भोजन ठंडा हो
(B) जब भोजन कम हो
(C) जब भोजन अवज्ञा या अपमान के साथ दिया जाए
(D) जब भोजन देर से मिले
उत्तर — (C) जब भोजन अवज्ञा या अपमान के साथ दिया जाए
14. नीलू लेखिका की किस बात को विशेष रूप से पहचानता था?
(A) लिखावट
(B) आवाज
(C) चाल
(D) कपड़े
उत्तर — (B) आवाज
15. नीलू किससे प्रेम करता था?
(A) केवल मनुष्यों से
(B) केवल कुत्तों से
(C) पशु-पक्षियों और अपने स्वजनों से
(D) किसी से नहीं
उत्तर — (C) पशु-पक्षियों और अपने स्वजनों से
16. गौरैया कहाँ घोंसला बनाती थीं?
(A) पेड़ों पर
(B) रोशनदानों में
(C) छत पर
(D) खिड़की पर
उत्तर — (B) रोशनदानों में
17. नीलू पक्षी-शावकों के साथ क्या करता था?
(A) उन्हें खा जाता था
(B) उन्हें भगाता था
(C) उनकी रक्षा करता था
(D) उनसे डरता था
उत्तर — (C) उनकी रक्षा करता था
18. नीलू खरगोशों की रक्षा कैसे करता था?
(A) उन्हें घर में रखकर
(B) सुरंग के द्वार पर पहरा देकर
(C) उन्हें जंगल भेजकर
(D) बिल्ली को पकड़कर
उत्तर — (B) सुरंग के द्वार पर पहरा देकर
19. खरगोशों के लिए खतरा कौन था?
(A) लकड़बग्घा
(B) जंगली बिल्ली
(C) साँप
(D) लोमड़ी
उत्तर — (B) जंगली बिल्ली
20. खरगोशों की रक्षा करते समय नीलू को कौन-सी बीमारी हुई?
(A) बुखार
(B) निमोनिया
(C) मलेरिया
(D) खाँसी
उत्तर — (B) निमोनिया
21. लेखिका के अस्पताल जाने पर नीलू ने क्या किया?
(A) घर छोड़ दिया
(B) तीन दिन तक खाना-पीना छोड़ दिया
(C) बहुत भौंका
(D) सोता रहा
उत्तर — (B) तीन दिन तक खाना-पीना छोड़ दिया
22. नीलू अस्पताल में कहाँ बैठा?
(A) दरवाजे पर
(B) डॉक्टर के पास
(C) लेखिका के पलंग के नीचे
(D) बाहर
उत्तर — (C) लेखिका के पलंग के नीचे
23. नीलू का प्रमुख गुण कौन-सा था?
(A) क्रोध
(B) स्वार्थ
(C) कर्तव्यनिष्ठा
(D) आलस्य
उत्तर — (C) कर्तव्यनिष्ठा
24. नीलू ने किसी पशु-पक्षी को मारने की प्रवृत्ति क्यों नहीं दिखाई?
(A) वह कमजोर था
(B) उसमें हिंसा की प्रवृत्ति नहीं थी
(C) वह डरता था
(D) उसे प्रशिक्षण दिया गया था
उत्तर — (B) उसमें हिंसा की प्रवृत्ति नहीं थी
25. नीलू लेखिका के लिए क्या था?
(A) केवल पालतू पशु
(B) एक सच्चा साथी
(C) बोझ
(D) पहरेदार मात्र
उत्तर — (B) एक सच्चा साथी
26. लूसी लोगों के लिए क्या करती थी?
(A) पहरा देती थी
(B) सामान लाती थी
(C) खेत में काम करती थी
(D) शिकार करती थी
उत्तर — (B) सामान लाती थी
27. लूसी किस मौसम में अधिक उपयोगी सिद्ध होती थी?
(A) गर्मी
(B) वर्षा
(C) शीतकाल
(D) वसंत
उत्तर — (C) शीतकाल
28. नीलू का रंग कैसा था?
(A) केवल काला
(B) केवल सफेद
(C) भूरे, पीले और काले रंगों का मिश्रण
(D) केवल पीला
उत्तर — (C) भूरे, पीले और काले रंगों का मिश्रण
29. नीलू किस प्रकार का स्वभाव रखता था?
(A) दर्पयुक्त और आत्मसम्मानी
(B) डरपोक
(C) क्रूर
(D) चंचल
उत्तर — (A) दर्पयुक्त और आत्मसम्मानी
30. नीलू रात में क्या करता था?
(A) सोता था
(B) पहरेदारी करता था
(C) बाहर घूमता था
(D) शिकार करता था
उत्तर — (B) पहरेदारी करता था
31. नीलू को लेखिका की किस बात का विशेष ज्ञान था?
(A) लिखने का
(B) ध्वनियों का
(C) रंगों का
(D) गंधों का
उत्तर — (B) ध्वनियों का
32. नीलू अपरिचित व्यक्ति के आने पर कैसा व्यवहार करता था?
(A) तुरंत हमला करता था
(B) निरपेक्ष रहता था और निरीक्षण करता था
(C) घर छोड़ देता था
(D) छिप जाता था
उत्तर — (B) निरपेक्ष रहता था और निरीक्षण करता था
33. नीलू ने पक्षी-शावकों को कैसे उठाया?
(A) पंजों से
(B) बहुत सावधानी से मुँह में दबाकर
(C) पूँछ से
(D) उन्हें धकेलकर
उत्तर — (B) बहुत सावधानी से मुँह में दबाकर
34. नीलू किस कारण से निमोनिया का शिकार हुआ?
(A) बारिश में घूमने से
(B) ठंड में खरगोशों की रक्षा करते हुए रातभर खड़े रहने से
(C) भोजन न मिलने से
(D) अस्पताल जाने से
उत्तर — (B)
35. नीलू कितने वर्ष के लगभग जीवित रहा?
(A) 5 वर्ष
(B) 8 वर्ष
(C) 14 वर्ष
(D) 20 वर्ष
उत्तर — (C) 14 वर्ष
36. ‘नीलू’ रचना का प्रमुख भाव क्या है?
(A) हास्य
(B) पशु-प्रेम और संवेदना
(C) वीरता
(D) राजनीति
उत्तर — (B) पशु-प्रेम और संवेदना
37. लूसी की विशेषता क्या थी?
(A) आलस्य
(B) तत्परता और सहयोग
(C) क्रोध
(D) डर
उत्तर — (B) तत्परता और सहयोग
38. नीलू किस गुण के कारण दूसरों से अलग था?
(A) हिंसा
(B) लालच
(C) आत्मसम्मान और परोपकार
(D) डर
उत्तर — (C)
39. ‘नीलू’ में लेखिका ने किस भावना को प्रमुखता दी है?
(A) घृणा
(B) पशु-पक्षियों के प्रति करुणा
(C) ईर्ष्या
(D) क्रोध
उत्तर — (B)
40. नीलू मृत्यु का सामना किस प्रकार करता है?
(A) भय के साथ
(B) दैन्य के साथ
(C) शांत और निर्लिप्त भाव से
(D) क्रोध के साथ
उत्तर — (C)
41. लूसी किसके साथ मित्र बन गई थी?
(A) जंगली बिल्ली
(B) भूटिया कुत्ते
(C) लकड़बग्घे
(D) खरगोश
उत्तर — (B)
42. नीलू की माँ की मृत्यु के बाद उसे किस चीज की सबसे अधिक कमी महसूस हुई?
(A) भोजन
(B) माँ की गर्माहट
(C) खेल
(D) बाहर घूमने की
उत्तर — (B)
43. लेखिका ने नीलू को कहाँ रखा था?
(A) लकड़ी के बक्से में
(B) ऊन और अधबुने स्वेटर की डलिया में
(C) कमरे के बाहर
(D) दुकान में
उत्तर — (B)
44. नीलू का संबंध लेखिका से कैसा था?
(A) औपचारिक
(B) गहरा और आत्मीय
(C) स्वार्थपूर्ण
(D) कमजोर
उत्तर — (B)
45. नीलू को किससे खुशी मिलती थी?
(A) हिंसा से
(B) कजली के सामीप्य से
(C) शिकार से
(D) अकेले रहने से
उत्तर — (B)
46. नीलू का एक प्रमुख कर्तव्य क्या था?
(A) शिकार करना
(B) रात में पहरा देना
(C) सामान बेचना
(D) खेती करना
उत्तर — (B)
47. ‘नीलू’ किस प्रकार की रचना है?
(A) आत्मकथा
(B) संस्मरण
(C) यात्रा-वृत्तांत
(D) नाटक
उत्तर — (B)
48. नीलू का सबसे उल्लेखनीय मानवीय गुण कौन-सा था?
(A) स्वार्थ
(B) परोपकार
(C) क्रोध
(D) ईर्ष्या
उत्तर — (B)
49. लेखिका के अनुसार नीलू की मृत्यु कैसी थी?
(A) भयपूर्ण
(B) दैन्यपूर्ण
(C) शांत और गरिमापूर्ण
(D) दुर्घटनापूर्ण
उत्तर — (C)
50. ‘नीलू’ पाठ का केंद्रीय संदेश क्या है?
(A) पशु मनुष्य से कमजोर होते हैं
(B) पशुओं में भी प्रेम, निष्ठा और संवेदना होती है
(C) पशुओं को पालना कठिन है
(D) केवल मनुष्य ही संवेदनशील होते हैं
उत्तर — (B)
6. लघुत्तरीय प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. ‘लूसी’ कौन थी?
उत्तर: लूसी एक अल्सेशियन कुतिया थी। वह नीलू की माँ थी। वह सुंदर, तेज, बुद्धिमान और अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ थी।
प्रश्न 2. उत्तरायण के लोग लूसी से सामान कैसे मँगवाते थे?
उत्तर: लोग लूसी के गले में पैसे और सामान की सूची के साथ कपड़ा या अँगोछा बाँध देते थे। लूसी बर्फीला रास्ता पार करके दुकान तक जाती और सामान लेकर वापस आती थी।
प्रश्न 3. लेखिका को मित्र के आने की सूचना नीलू से कैसे मिलती थी?
उत्तर: किसी विशेष परिचित व्यक्ति को देखकर नीलू धीरे-धीरे लेखिका के कमरे के दरवाजे तक आता और खड़ा हो जाता। उसके इस व्यवहार से लेखिका समझ जाती थीं कि कोई परिचित मित्र आया है।
प्रश्न 4. नीलू अकेला कैसे रह गया?
उत्तर: नीलू की माँ लूसी लकड़बग्घे के हमले में मारी गई थी। बाद में वह बड़ा होकर अन्य पशुओं से अलग स्वभाव के कारण अधिकतर अकेला रहता था।
प्रश्न 5. अल्सेशियन और भूटिया कुत्तों के स्वभाव में क्या अंतर होता है?
उत्तर: अल्सेशियन कुत्ते सामान्यतः एक स्वामी के प्रति विशेष निष्ठावान होते हैं, जबकि भूटिया कुत्ते अधिक उग्र और स्वतंत्र स्वभाव के माने जाते हैं। नीलू के पिता भूटिया और माँ अल्सेशियन थी।
प्रश्न 6. गौरैया कहाँ अपना घोंसला बनाती थीं?
उत्तर: गौरैया लेखिका के बंगले के रोशनदानों में तिनकों से अपना घोंसला बनाती थीं।
प्रश्न 7. क्या नीलू की मृत्यु सामान्य कुत्तों की भाँति हुई?
उत्तर: नहीं। नीलू की मृत्यु शांत, निर्लिप्त और गरिमापूर्ण ढंग से हुई। उसमें मृत्यु का भय या दैन्य दिखाई नहीं दिया।
7. बोधमूलक प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. लूसी की रूपाकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर: लूसी एक सुंदर और मजबूत अल्सेशियन कुतिया थी। उसका शरीर हिरणी के समान फुर्तीला और सुडौल था। उसके शरीर पर काले आभास वाले पीताभ रोम थे। उसकी आँखें छोटी और काली थीं तथा कान सजग खड़े रहते थे। उसकी लंबी और घनी पूँछ उसके राजसी रूप को और अधिक आकर्षक बनाती थी।
प्रश्न 2. लूसी का स्वभाव स्वच्छंद सहचरी के समान क्यों था?
उत्तर: अल्सेशियन कुत्ता सामान्यतः एक स्वामी को स्वीकार करता है। लूसी को किसी एक व्यक्ति का स्थायी स्वामित्व नहीं मिला था। इसलिए वह किसी एक व्यक्ति की आज्ञा मानने के बजाय सभी लोगों के साथ सहचरी की तरह व्यवहार करती थी और उनके स्नेहपूर्ण अनुरोधों को पूरा करने में तत्पर रहती थी।
प्रश्न 3. नीलू ने खरगोशों की प्राण-रक्षा किस प्रकार की?
उत्तर: खरगोशों ने सुरंग बनाकर दूसरे परिसर की ओर जाने का रास्ता बनाया था। वहाँ जंगली बिल्ली उनका शिकार करने की प्रतीक्षा कर रही थी। नीलू ने खतरे को पहचान लिया और सुरंग के द्वार पर पूरी रात खड़ा रहा। उसने खरगोशों को बाहर नहीं निकलने दिया। इस प्रकार उसने उनकी जान बचाई।
प्रश्न 4. नीलू की स्वभावगत विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: नीलू आत्मसम्मानी, स्वाभिमानी, कर्तव्यनिष्ठ, परोपकारी, संवेदनशील, स्वामिभक्त और शांत स्वभाव का था। उसमें हिंसा की प्रवृत्ति नहीं थी। वह पशु-पक्षियों की रक्षा करता था और लेखिका की आवाज तथा आदेश को अच्छी तरह समझता था।
प्रश्न 5. लेखिका का नीलू-प्रेम अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: लेखिका नीलू को केवल एक पालतू कुत्ता नहीं मानती थीं। उनके लिए वह एक आत्मीय साथी और परिवार के सदस्य के समान था। नीलू की निष्ठा, स्वभाव और संवेदनशीलता से लेखिका बहुत प्रभावित थीं। उसके बीमार होने या दुखी होने पर लेखिका भी चिंतित हो जाती थीं।
प्रश्न 6. लूसी के अभाव में नीलू का पालन-पोषण कैसे हुआ?
उत्तर: लूसी की मृत्यु के बाद नीलू बहुत छोटा था। उसे माँ के दूध और शरीर की गर्माहट की आवश्यकता थी। लेखिका ने दुग्ध चूर्ण से दूध बनाकर उसे पिलाया और ऊन तथा अधबुने स्वेटर की डलिया में रखकर उसे गर्माहट दी। इस प्रकार उन्होंने नीलू का पालन-पोषण किया।
प्रश्न 7. ‘जीवन के समान उसकी मृत्यु भी दैन्य से रहित थी’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसका अर्थ है कि नीलू ने अपने जीवन में कभी दीनता या हीनता स्वीकार नहीं की। वह आत्मसम्मानी और निर्भीक था। उसी प्रकार मृत्यु के समय भी उसने किसी प्रकार का भय, घबराहट या दयनीयता नहीं दिखाई। उसने शांत और गरिमापूर्ण ढंग से मृत्यु का सामना किया।
प्रश्न 8. ‘एक व्यक्ति का स्वामित्व उसे सुलभ नहीं होता, तो वह सबके साथ सहचर जैसा आचरण करने लगता है।’ आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसका अर्थ है कि अल्सेशियन कुत्ता सामान्यतः एक व्यक्ति को अपना स्वामी मानता है। लेकिन यदि उसे किसी एक व्यक्ति का स्थायी संरक्षण नहीं मिलता, तो वह किसी एक व्यक्ति का आज्ञाकारी बनने के बजाय सभी के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करता है। लूसी के साथ भी यही स्थिति थी।
8. विचार एवं कल्पना
प्रश्न: महादेवी वर्मा ने पशु-पक्षियों पर अनेक रचनाएँ लिखी हैं। उनके नाम लिखिए।
उत्तर: महादेवी वर्मा ने पशु-पक्षियों से संबंधित अनेक संस्मरण लिखे हैं। प्रमुख रचनाओं में ‘नीलकंठ’, ‘गिल्लू’, ‘गौरा’, ‘सोना’ और ‘रोजी’ आदि उल्लेखनीय हैं। इन रचनाओं में पशु-पक्षियों के प्रति लेखिका की गहरी संवेदना और आत्मीयता दिखाई देती है।
9. भाषा-बोध
1. संधि-विच्छेद और संधि का नाम
(क) उत्तरायण
उत्तर + अयन = उत्तरायण
संधि — स्वर संधि
(ख) कालान्तर
काल + अन्तर = कालान्तर
संधि — स्वर संधि
(ग) स्वभाव
सु + भाव = स्वभाव
संधि — स्वर संधि
(घ) कुहराच्छन्न
कुहरा + आच्छन्न = कुहराच्छन्न
संधि — स्वर संधि
(ङ) प्रतीक्षा
प्रति + ईक्षा = प्रतीक्षा
संधि — स्वर संधि
10. दिए गए शब्दों में उपसर्ग
परिस्थिति = परि + स्थिति
आचरण = आ + चरण
सकुशल = स + कुशल
सुडौल = सु + डौल
निर्लिप्त = निर् + लिप्त
सतर्क = सत् + अर्क/तर्क
नोट: अंतिम शब्दों में उपसर्ग-विभाजन पाठ्यपुस्तक के निर्धारित व्याकरण-पद्धति के अनुसार थोड़ा अलग दिया जा सकता है।
11. क्रिया-विशेषण
क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
पाठ से उदाहरण:
- धीरे-धीरे
- पुनः
- प्रायः
- कभी-कभी
- बहुत
- तुरंत
- आहिस्ते से
- नियमानुसार
- रातभर
12. मुहावरे — अर्थ और वाक्य प्रयोग
(क) कुत्ते की मौत मरना
अर्थ: बहुत बुरी या दयनीय मृत्यु होना।
वाक्य: हमें ऐसा जीवन जीना चाहिए कि मृत्यु के समय किसी को यह न कहना पड़े कि उसने कुत्ते की मौत मरी।
(ख) उत्तरायण होना
अर्थ: सूर्य का उत्तर दिशा की ओर बढ़ना; मकर संक्रांति के बाद का समय।
वाक्य: उत्तरायण होते ही मौसम में धीरे-धीरे परिवर्तन दिखाई देने लगा।
(ग) अवज्ञा करना
अर्थ: आज्ञा न मानना या आदेश की उपेक्षा करना।
वाक्य: हमें अपने माता-पिता और गुरुजनों की अवज्ञा नहीं करनी चाहिए।
13. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
2 अंक के संभावित प्रश्न
1. नीलू की माँ का नाम क्या था?
उत्तर: नीलू की माँ का नाम लूसी था।
2. लूसी किस नस्ल की थी?
उत्तर: लूसी अल्सेशियन नस्ल की थी।
3. नीलू ने खरगोशों की रक्षा कैसे की?
उत्तर: वह सुरंग के द्वार पर पूरी रात पहरा देकर खड़ा रहा और खरगोशों को बाहर निकलने से रोक दिया।
4. नीलू को अस्पताल क्यों ले जाया गया?
उत्तर: लेखिका के अस्पताल जाने के बाद नीलू ने खाना-पीना छोड़ दिया था। इसलिए उसे लेखिका से मिलाने के लिए अस्पताल ले जाया गया।
5. नीलू का प्रमुख गुण क्या था?
उत्तर: नीलू का प्रमुख गुण आत्मसम्मान, निष्ठा और परोपकार था।
14. 5 अंक का महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न: नीलू के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नीलू महादेवी वर्मा का अत्यंत प्रिय कुत्ता था। उसके चरित्र में अनेक मानवीय गुण दिखाई देते हैं। वह अत्यंत आत्मसम्मानी और स्वाभिमानी था। अपमानपूर्वक दिया गया प्रिय भोजन भी वह स्वीकार नहीं करता था।
नीलू बहुत कर्तव्यनिष्ठ और जिम्मेदार था। रात में वह स्वयं पहरेदारी करता था। वह छोटे पक्षी-शावकों और खरगोशों की रक्षा करता था। खरगोशों को जंगली बिल्ली से बचाने के लिए उसने पूरी रात ठंड में सुरंग के द्वार पर पहरा दिया।
वह लेखिका का अत्यंत स्वामिभक्त और संवेदनशील साथी था। लेखिका के अस्पताल जाने पर उसने तीन दिन तक खाना-पीना छोड़ दिया। अस्पताल पहुँचने पर लेखिका को देखकर ही वह शांत हुआ।
नीलू में हिंसा की प्रवृत्ति नहीं थी। उसने किसी पशु-पक्षी को नुकसान नहीं पहुँचाया। इस प्रकार नीलू के चरित्र में प्रेम, निष्ठा, परोपकार, कर्तव्य और आत्मसम्मान जैसे मानवीय गुणों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
15. 10 अंक का महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न: ‘नीलू’ संस्मरण के आधार पर नीलू और लूसी के चरित्र का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महादेवी वर्मा का ‘नीलू’ एक संवेदनशील संस्मरण है, जिसमें नीलू और उसकी माँ लूसी के माध्यम से पशु-जीवन की अनेक विशेषताओं को प्रस्तुत किया गया है।
लूसी एक सुंदर, तेज और मजबूत अल्सेशियन कुतिया थी। वह सामान्य कुत्तों से अलग थी। उसे किसी एक व्यक्ति का स्थायी स्वामित्व प्राप्त नहीं था, इसलिए वह सभी लोगों के साथ सहचरी जैसा व्यवहार करती थी। उसमें सेवा और सहयोग की भावना बहुत प्रबल थी। उत्तरायण के लोग बर्फ के दिनों में उसके गले में पैसे और सामान की सूची बाँधकर उसे दुकान भेजते थे। लूसी कठिन रास्ता पार करके सामान लेकर लौट आती थी। वह लोगों की भूलों की भी शिकायत नहीं करती थी।
लूसी का जीवन संघर्षपूर्ण था। लकड़बग्घे ने उस पर हमला किया और संघर्ष करते हुए उसकी मृत्यु हो गई। उसके छोटे बच्चे नीलू को माँ की गर्माहट से वंचित होना पड़ा।
नीलू अपनी माँ से कई गुणों में मिलता था, लेकिन उसका व्यक्तित्व और भी विशिष्ट था। वह अत्यंत आत्मसम्मानी, शांत, संवेदनशील और परोपकारी था। उसमें हिंसा का कोई भाव नहीं था। वह पक्षियों और खरगोशों की रक्षा करता था। रात में वह घर और पशु-पक्षियों की पहरेदारी करता था।
लेखिका के प्रति उसकी स्वामिभक्ति अद्भुत थी। लेखिका के अस्पताल जाने पर उसने खाना-पीना छोड़ दिया। अस्पताल पहुँचकर वह उनके पलंग के नीचे प्रहरी की तरह बैठ गया।
इस प्रकार लूसी में सेवा, तत्परता और सहयोग के गुण प्रमुख थे, जबकि नीलू में आत्मसम्मान, स्वामिभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, परोपकार और संवेदनशीलता अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं। दोनों ही लेखिका के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते थे।
16. 10 अंक का दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न: ‘नीलू’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि पशुओं में भी मानवीय संवेदनाएँ होती हैं।
उत्तर:
‘नीलू’ संस्मरण यह सिद्ध करता है कि पशु केवल स्वभाव और प्रवृत्ति से संचालित जीव नहीं हैं, बल्कि उनमें प्रेम, निष्ठा, संवेदना, कर्तव्य और परोपकार जैसी भावनाएँ भी होती हैं।
लूसी लोगों की सहायता के लिए कठिन बर्फीले रास्ते से दुकान तक सामान लाती थी। वह लोगों की भूलों पर नाराज नहीं होती थी। यह उसके सहयोगी और सेवाभावी स्वभाव को दिखाता है।
नीलू में तो मानवीय संवेदनाएँ और भी अधिक दिखाई देती हैं। वह लेखिका के प्रति अत्यंत निष्ठावान था। वह उनकी आवाज पहचानता था और उनके बुलाने पर तुरंत उनके पास पहुँच जाता था।
उसमें दूसरों की रक्षा करने की भावना भी थी। गौरैया के छोटे बच्चों को वह सुरक्षित स्थान तक पहुँचाता था। खरगोशों को जंगली बिल्ली से बचाने के लिए उसने पूरी रात सुरंग के बाहर पहरा दिया। इस कार्य के कारण उसे निमोनिया तक हो गया, फिर भी उसने अपने कर्तव्य से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।
जब लेखिका अस्पताल गईं तो नीलू ने तीन दिन तक भोजन और पानी छोड़ दिया। यह उसके गहरे प्रेम और भावनात्मक लगाव का प्रमाण है।
इस प्रकार ‘नीलू’ के माध्यम से महादेवी वर्मा ने बताया है कि पशुओं में भी मनुष्य की तरह प्रेम, ममता, निष्ठा, त्याग और परोपकार की भावनाएँ होती हैं। हमें पशुओं के प्रति भी प्रेम और करुणा का व्यवहार करना चाहिए।
17. परीक्षा में याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- रचना: नीलू
- लेखिका: महादेवी वर्मा
- विधा: संस्मरण
- नीलू की माँ: लूसी
- लूसी की नस्ल: अल्सेशियन
- नीलू: अल्सेशियन-भूटिया वर्णसंकर
- लूसी की मृत्यु: लकड़बग्घे के हमले से
- नीलू का पालन-पोषण: महादेवी वर्मा ने किया
- नीलू के प्रमुख गुण: आत्मसम्मान, स्वामिभक्ति, परोपकार, कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता
- नीलू ने किसकी रक्षा की: पक्षी-शावकों और खरगोशों की
- खरगोशों को किससे बचाया: जंगली बिल्ली से
- रक्षा करते समय बीमारी: निमोनिया
- लेखिका के अस्पताल जाने पर: नीलू ने खाना-पीना छोड़ दिया
- नीलू की मृत्यु: शांत और दैन्यरहित ढंग से






