educatedindia786.com

Amazon

"Love Amazon? Shop through our link and help Educated India empower more students — no extra cost to you!"

गुदड़ साईं by educated india
educatedindia786.com

Flipkart

"Flipkart fan? Click our link before you buy and support quality education with every purchase!"

गुदड़ साईं

जय शंकर प्रसाद 

लेखक परिचय (जयशंकर प्रसाद):
जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1890 ई० में वाराणसी में हुआ था। उनके पिता श्री देवीप्रसाद ‘साहु’ के नाम से प्रसिद्ध थे। प्रसाद जी ने औपचारिक शिक्षा अधिक नहीं प्राप्त की, लेकिन स्वाध्याय के माध्यम से उन्होंने हिन्दी, संस्कृत, उर्दू और फारसी का गहन ज्ञान अर्जित किया। वे दर्शन, इतिहास, धर्मशास्त्र और पुरातत्व के भी विद्वान थे।

प्रसाद जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और निबंध सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट रचनाएँ कीं। उनके प्रमुख नाटक ‘अजातशत्रु’, ‘स्कंदगुप्त’, ‘चंद्रगुप्त’ और ‘ध्रुवस्वामिनी’ हैं। उपन्यासों में ‘कंकाल’, ‘तितली’ और ‘इरावती’ प्रसिद्ध हैं। उनकी भाषा संस्कृत-प्रधान, समृद्ध और भावपूर्ण है। वे आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं।


कहानी का सारांश (गुदड़ साई):
“गुदड़ साई” एक मार्मिक और प्रेरणादायक कहानी है, जिसमें मानवता, करुणा और सच्चे वैराग्य का सुंदर चित्रण किया गया है।

कहानी में साई नाम का एक वैरागी (संत जैसा व्यक्ति) है, जो संसार की मोह-माया से दूर रहता है। उसके पास कोई धन-दौलत नहीं है, केवल कुछ गंदे-पुराने कपड़े (गुदड़) ही उसकी संपत्ति हैं। वह एक साधारण जीवन जीता है और किसी से कोई अपेक्षा नहीं रखता।

एक दिन एक छोटा बालक मोहन उसे पुकारता है। मोहन साई को जानता था और उससे मित्रता कर चुका था। साई रोज दोपहर में मोहन के घर के पास आता, अपने गुदड़ बिछाकर बैठता और उससे बातें करता था। मोहन उसे दया और स्नेह से कभी-कभी खाना भी दे देता था। साई उस रोटी को बहुत प्रेम और संतोष के साथ खाता था। उसके लिए वह साधारण रोटी भी अमूल्य थी।

लेकिन मोहन के पिता को यह सब पसंद नहीं था। वे कट्टर स्वभाव के थे और फकीरों को ढोंगी समझते थे। उन्होंने मोहन को साई से दूर रहने की सख्त हिदायत दी। इसके बाद साई कई दिनों तक उस मुहल्ले में नहीं आया।

कुछ दिनों बाद साई फिर दिखा, लेकिन वह जानबूझकर मोहन के घर नहीं गया। जब मोहन ने उसे देखा, तो उसे पुकारा और फिर से आने के लिए कहा। साई ने पहले मना किया, लेकिन मोहन के आग्रह पर आने का वादा किया।

इसी बीच एक शरारती लड़के ने साई के गुदड़ (पुराने कपड़े) उठाकर भागना शुरू कर दिया। साई अपने गुदड़ को बचाने के लिए उसके पीछे दौड़ा। दौड़ते समय वह गिर पड़ा और उसके सिर से खून बहने लगा। फिर भी वह अपने गुदड़ को पाने की कोशिश करता रहा।

यह दृश्य देखकर मोहन के पिता भी वहाँ आ गए। उन्होंने शरारती लड़के को पकड़ लिया और उसे मारने लगे। लेकिन साई ने तुरंत उन्हें रोकते हुए कहा कि बच्चे को मत मारो, उसे चोट लगेगी। यह देखकर सभी हैरान रह गए कि खुद घायल होने के बावजूद साई उस लड़के की चिंता कर रहा है।

जब मोहन के पिता ने साई से पूछा कि वह इन बेकार गुदड़ों के लिए क्यों इतना परेशान हो रहा था, तो साई ने बहुत गहरी और भावपूर्ण बात कही। उसने कहा कि उसके पास और कुछ नहीं है, जिससे वह “रामरूप भगवान” (अर्थात् बच्चों) को प्रसन्न कर सके। ये बच्चे ही उसके लिए भगवान के समान हैं। वह अपने गुदड़ इसलिए रखता है, ताकि बच्चे उन्हें छीनकर खेल सकें और वह उनसे छीनने का खेल खेल सके। यही उसका आनंद है।

साई की यह बात सुनकर मोहन के पिता को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने समझा कि साई कोई साधारण भिखारी नहीं, बल्कि एक महान और दयालु व्यक्ति है। अंत में वे साई की प्रशंसा करते हुए कहते हैं—“तुम केवल गुदड़ वाले नहीं हो, बल्कि गुदड़ों में छिपे हुए अनमोल रत्न (गुदड़ी के लाल) हो।”


मुख्य संदेश:
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा संत वही है, जिसके मन में दया, प्रेम और त्याग की भावना हो। बाहरी रूप या गरीबी से किसी व्यक्ति का मूल्य नहीं आँकना चाहिए। सच्ची महानता अंदर के गुणों में होती है, न कि बाहरी वस्त्रों या धन में।

1.गुदड़ साईं का  वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

(क) गुदड़ साईं को कौन पुकार रहा था?गुदड़ साईं by educated india

(i) लेखक
(ii) मोहन
(iii) 10 वर्ष का बालक

उत्तर: (ii) मोहन

(ख) मोहन के पिता कौन थे?

(i) वेदांती
(ii) अघोरी 
(iii) आर्य समजी 

उत्तर: (iii) आर्य समजी 

(ग) “गुदड़े के लाल” किसे कहा गया है?

(i) मोहन को
(ii) 10 वर्ष के बालक को
(iii) साईं को

उत्तर: (iii) साईं को


2.गुदड़ साईं का लघुत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

(1) मोहन को गुदड़ साईं से क्यों लगाव था?

उत्तर: मोहन को साईं से प्रेम और करुणा थी क्योंकि वह उसे एक दयालु व्यक्ति मानता था और उसकी सहायता करना चाहता था।

(2) गुदड़ साईं की अक्षय दृष्टि का क्या कारण था?

उत्तर: साईं की अक्षय दृष्टि का कारण उनका आध्यात्मिक ज्ञान और सरल स्वभाव था, जिससे वे हर परिस्थिति को सहन कर सकते थे।

(3) मोहन के पिता क्यों नाराज हो गए?

उत्तर: मोहन के पिता इस बात से नाराज हुए कि उनका बेटा साईं जैसे फटेहाल व्यक्ति से लगाव रखता है और उसकी सहायता करता है।

(4) मोहन के पिता आश्चर्यचकित क्यों हुए?

उत्तर: मोहन के पिता साईं की सहनशीलता और उसके स्वभाव को देखकर चकित रह गए। उन्होंने देखा कि साईं ने अन्याय का प्रतिकार नहीं किया और धैर्य बनाए रखा।

(5) गुदड़ साईं क्यों रोने लगा?

उत्तर: साईं भावनात्मक रूप से कमजोर नहीं था, लेकिन जब उसे अपमानित किया गया और अन्याय सहना पड़ा, तब वह रो पड़ा।


Product Image

🔥 Limited Time Offer on Amazon!

Click to Check Today’s Deal

3.गुदड़ साईं का बोधमूलक प्रश्न (Comprehension Questions)

(1) साईं का स्वभाव कैसा था?

उत्तर: साईं का स्वभाव अत्यंत शांत, सहनशील और करुणामय था। वह किसी से बदला नहीं लेता था और दूसरों के कष्टों को समझता था।

(2) मोहन से रोटी मिलने के बाद साईं क्या सोचता था?

उत्तर: साईं सोचता था कि यह बच्चा कितना दयालु और निश्छल है, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की सहायता करता है।

(3) कई दिनों बाद लौटने के पश्चात साईं मोहन के घर क्यों नहीं गया?

उत्तर: साईं को यह आभास हो गया था कि मोहन के पिता उसकी उपस्थिति से नाराज हैं, इसलिए वह मोहन के घर नहीं गया।

(4) साईं ने चीथड़े छीनकर भागने वाले लड़के को मारने से क्यों रोका?

उत्तर: साईं के हृदय में दया और करुणा थी। उसने महसूस किया कि गरीबी और भूख के कारण लड़का मजबूर था, इसलिए उसने उसे क्षमा कर दिया।


4.गुदड़ साईं का निर्देशानुसार उत्तर दीजिए

(क) ‘बाबा मेरे पास दूसरी कौन प्रसन्न करता’

(i) पाठ व रचनाकार का नाम बताइए।

उत्तर: पाठ का नाम “साईं” है और रचनाकार जयशंकर प्रसाद हैं।

(ii) ‘राम रूप’ किसे कहा गया है?

उत्तर: ‘राम रूप’ साईं को कहा गया है क्योंकि वह सरल, सहनशील और करुणामय थे।

(iii) उक्त पंक्ति की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति में मोहन ने साईं से अपने स्नेह को व्यक्त किया है। वह साईं को एक दयालु व्यक्ति मानता था और उसकी सहायता कर प्रसन्नता का अनुभव करता था।


(ख) ‘पर चीथड़े पर भगवान ही दया करते हैं?’

(i) उक्त पंक्ति के वक्ता व श्रोता का नाम लिखें।

उत्तर: वक्ता मोहन के पिता हैं और श्रोता मोहन है।

(ii) उक्त पंक्ति की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति में मोहन के पिता यह कहना चाहते हैं कि दीन-हीनों और गरीबों की सहायता केवल भगवान कर सकते हैं, मनुष्य उनके लिए अधिक कुछ नहीं कर सकता।


5. मोहन के पिता के स्वभाव में हुए परिवर्तन को संक्षेप में लिखिए।

उत्तर: मोहन के पिता प्रारंभ में साईं से घृणा करते थे और मोहन को उससे दूर रहने के लिए कहते थे। लेकिन साईं की सहनशीलता और दयालुता को देखकर उनके विचार बदल गए और वे उसकी महानता को स्वीकार करने लगे।


6.गुदड़ साईं का  शब्दार्थ एवं व्याकरण

(1) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए:

  • अभिमान → घमंड, अहंकार
  • फकीर → संत, साधु
  • प्रसन्न → आनंदित, खुश
  • भगवान → ईश्वर, परमात्मा

(2) पाठ में “साईं” जैसे अन्य उद्भव शब्द लिखिए।

  • साधु
  • संन्यासी
  • वेदांती

(3) निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिवर्तन कीजिए:

  • रोटी (स्त्रीलिंग) → भोजन (पुल्लिंग)
  • वैरागी (पुल्लिंग) → वैरागिनी (स्त्रीलिंग)
  • अभिमान (पुल्लिंग) → अभिमानिनी (स्त्रीलिंग)
  • चीथड़ा (पुल्लिंग) → चीथड़ी (स्त्रीलिंग)

7.गुदड़ साईं का विचार और कल्पना (Creative Writing & Analysis)

(1) जयशंकर प्रसाद की अन्य कहानियों को पढ़िए।

  • “छोटे जादूगर”
  • “आकाशदीप”
  • “गुंडा”

(2) व्यक्ति कभी-कभी मानवीय गुणों को पहचानने में भूल करता है। इस विषय पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर: मनुष्य की प्रवृत्ति होती है कि वह बाहरी आडंबरों पर ध्यान देता है और व्यक्ति के वास्तविक गुणों को अनदेखा कर देता है। साईं का उदाहरण हमें सिखाता है कि हमें लोगों की सच्ची महानता को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।

notice : इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के साहित्य मेला पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।

 

1 thought on “गुदड़ साईं”

  1. Pingback: ऐसे-ऐसे - Educated India

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top