educatedindia786.com

Amazon

"Love Amazon? Shop through our link and help Educated India empower more students — no extra cost to you!"

धानों का गीत by educated india
educatedindia786.com

Flipkart

"Flipkart fan? Click our link before you buy and support quality education with every purchase!"

धनों का गीत

                                                   (केदारनाथ सिंह)

धान उगेंगे कि प्रान उगेंगे उगेंगे हमारे खेत में, आना जी बादल जरूर !

चन्दा को बाँधेंगे कच्ची कलगियों सूरज को सूखी रेत में, आना जी बादल जरूर !

आगे पुकारेगी सूनी ङारिया पीछे झुके वन-बेंत, संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ

भोर हुए धन-खेत, आना जी बादल जरूर, धान कँपेंगे कि प्रान कँपेंगे

कैंपेंगे हमारे खेत में, आना जी बादल जरुर !

धूप ढरे तुलसी-वन झरेंगे

साँझ घिरे पर कनेर, पूजा की बेला में ज्वार झरेंगे, धान-दिये की बेर, आना जी बादल जरूर,

धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे पकेंगे हमारे खेत में, आना जी बादल जरूर !

✍️ संदर्भ

यह कविता प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह द्वारा रचित है।


📌 प्रसंग

इस कविता में किसान अपने खेतों और जीवन के लिए बादलों (वर्षा) को पुकार रहा है। वह चाहता है कि समय पर बारिश हो ताकि उसकी फसल अच्छी हो सके और उसका जीवन खुशहाल बने।


💡 व्याख्या (सरल भाषा में)

कवि कहता है कि यदि बारिश होगी तो खेतों में केवल धान ही नहीं, बल्कि जीवन (प्राण) भी उगेंगे। इसलिए वह बादलों से आग्रह करता है कि वे अवश्य आएँ।

कवि कल्पना करता है कि चाँद और सूरज भी खेतों से जुड़े हुए हैं, जिससे खेतों की सुंदरता और महत्व बढ़ जाता है। खेत किसान के लिए बहुत प्रिय हैं।

आगे कवि बताता है कि खेत, पेड़-पौधे और प्रकृति सब बादलों को बुला रहे हैं। सूखी धरती, झुके हुए पेड़ और नम आँखें वर्षा की प्रतीक्षा कर रही हैं।

जब बारिश होगी, तो धान की फसल लहराएगी और ऐसा लगेगा जैसे जीवन ही झूम रहा हो। खेतों में हरियाली छा जाएगी और चारों ओर खुशी फैल जाएगी।

कवि आगे कहता है कि बारिश से तुलसी के पौधे, कनेर के फूल और अन्य पौधे भी खिल उठेंगे। पूजा के समय खेतों में नई फसल आएगी और वातावरण पवित्र व आनंदमय हो जाएगा।

अंत में कवि दोहराता है कि जब धान पकेंगे, तो ऐसा लगेगा जैसे जीवन ही पक रहा हो। इसलिए वह बार-बार बादलों से विनती करता है कि वे जरूर आएँ।


🌟 सार (Short Summary)

यह कविता किसान के जीवन, प्रकृति के महत्व और वर्षा की आवश्यकता को दर्शाती है। इसमें बताया गया है कि बारिश ही जीवन का आधार है, और उसके बिना खेत, फसल और मानव जीवन सब अधूरा है।

धनों का गीत कविता का वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर

धनों का गीत

  1. (क) खेत में धान उगने को कवि किस रूप में देखता है?
    उत्तर: (i) प्रान उगेंगे
  2. (ख) कवि किसको आने के लिए कहता है?
    उत्तर: (iii) बादल
  3. (ग) आगे कौन पुकारेगी?
    उत्तर: (ii) छारिया

धनों का गीत कविता का लघुत्तरीय प्रश्नों के उत्तर

  1. (क) कवि चंदा को किसमें बाँधने की बात कहता है?
    उत्तर: कवि चंदा को कच्ची कलगियों में बाँधने की बात कहता है।
  2. (ख) गीली अँखड़ियाँ किसे पुकारेंगी?
    उत्तर: गीली अँखड़ियाँ बादलों को पुकारेंगी।
  3. (ग) ‘धानों का गीत’ किस प्रकार की कविता है?
    उत्तर: ‘धानों का गीत’ ग्रामीण परिवेश और प्रकृति पर आधारित गीतात्मक कविता है।

धनों का गीत कविता का निर्देशानुसार उत्तर

  1. (क) “धूप ढरे तुलसी वन झरेंगे धान दिये की बेर।”
    • (i) साँझ घिरने पर कौन झरता है?
      उत्तर: साँझ घिरने पर तुलसी वन झरता है।
    • (ii) ऊपर की पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
      उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने साँझ के समय प्रकृति की छटा का वर्णन किया है, जिसमें तुलसी और धान की महत्ता दिखाई देती है।
  2. (ख) “आगे पुकारेगी सूनी छारिया पीछे झुके वन-बेंत।”
    • (i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।
      उत्तर: पाठ का नाम – ‘धानों का गीत’, कवि – केदारनाथ सिंह।
    • (ii) ‘सूनी छारिया’ से कवि का क्या आशय है?
      उत्तर: ‘सूनी छारिया’ से कवि का आशय सूखी और खाली पड़ी जमीन से है जो बारिश की प्रतीक्षा कर रही है।

धनों का गीत कविता का भाषा-बोध

  1. तद्भव और तत्सम शब्द:
    • तद्भव: चंदा (तत्सम: चन्द्रमा), धान (तत्सम: धान्य), प्रान (तत्सम: प्राण)।
    • अन्य तद्भव: सूरज (तत्सम: सूर्य), बादल (तत्सम: वादर)।
  2. मानवीकरण के उदाहरण:
    • संझा पुकारेगी।
    • भोर हुए धन-खेत।
    • गीली अँखड़ियाँ पुकारेंगी।
  3. पर्यायवाची शब्द:
    • बादल: मेघ, घटा।
    • साँझ: सन्ध्या, गोधूलि।
    • भोर: प्रभात, प्रातःकाल।
    • वन: जंगल, अरण्य।

धनों का गीत कविता का बोधमूलक प्रश्नों के उत्तर

(क) प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किनके द्वारा किया गया है?

उत्तर: प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किसान के स्वर में किया गया है।

उत्तर: कवि ‘आना जी बादल जरूर’ कहकर इसलिए आह्वान करता है क्योंकि बारिश से खेतों में धान की फसल अच्छी होगी, जो जीवन का आधार है।

उत्तर: बादल का स्वागत किसान, गाँव के लोग, और प्रकृति (जैसे छारिया और अँखड़ियाँ) तब कर रहे हैं जब खेत सूखे हैं और बारिश की आवश्यकता है।

उत्तर: इस पंक्ति में धान को प्रान इसलिए कहा गया है क्योंकि धान किसानों और गाँव के लोगों के जीवन का मुख्य आधार है।

💭 विचार एवं कल्पना

✍️ (क) बादलों का आह्वान (महत्त्व लिखिए)

उत्तर:
बादलों का मानव जीवन में बहुत अधिक महत्व है। बादलों के कारण वर्षा होती है और वर्षा से धरती पर हरियाली आती है। खेतों में फसलें उगती हैं, जिससे किसानों का जीवन चलता है।

यदि बादल नहीं आएँगे तो सूखा पड़ जाएगा और खेती नष्ट हो जाएगी। पानी की कमी से मनुष्य, पशु-पक्षी सभी को कष्ट होगा।

इसी कारण कवि बादलों का आह्वान करता है। वह उनसे विनती करता है कि वे अवश्य आएँ और वर्षा करें, ताकि धरती हरी-भरी हो सके और जीवन सुखमय बने।


✍️ (ख) कविता का पाठ (लय के साथ)

उत्तर:
इस कविता को कंठस्थ करके कक्षा में मधुर स्वर और लय के साथ सुनाना चाहिए।
कविता पढ़ते समय भाव, गति और उतार-चढ़ाव का ध्यान रखना चाहिए, जिससे सुनने वालों को अर्थ और भाव स्पष्ट समझ में आए।

notice : धनों का गीत कविता केदारनाथ सिंह ने लिखा है। इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के साहित्य मेला पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top