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- श्रीधर पाठक
फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना, तरु की झुकी डलियों से नित सीखो शीश झुकाना।
सूरज की किरणों से सीखो जगना और जगाना, लता और वृक्षों से सीखो सबको गले लगाना।
दीपक से सीखो जितना हो सके अंधेरा हरना, पृथ्वी से सीखो जीवों की सच्ची सेवा करना।
जलधारा से सीखो आगे जीवन-पथ पर बढ़ना, और धुएं से सीखो हर दम ऊँचे ही पर चढ़ना।
सत्पुरूषों के जीवन से सीखो चरित्र निज गढ़ना, अपने गुरु से सीखो बच्चों उत्वम विद्या पढ़ना
कविता का भावार्थ / सारांश
यह सुंदर शिक्षाप्रद कविता हमें प्रकृति और महान लोगों से अच्छी बातें सीखने की प्रेरणा देती है। कवि बहुत सरल शब्दों में बताते हैं कि हमारे आसपास की हर चीज हमें कुछ न कुछ सिखाती है। यदि हम ध्यान से देखें, तो फूल, पेड़, सूरज, जल, दीपक और यहाँ तक कि धुआँ भी हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखा सकते हैं।
कविता की शुरुआत में कवि कहते हैं—
“फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना”
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हमें फूलों की तरह हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए और भौंरों की तरह खुश रहकर गुनगुनाना चाहिए। जीवन में खुशी और सकारात्मकता बहुत जरूरी है।
आगे कवि कहते हैं—
“तरु की झुकी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना”
इसका मतलब है कि जैसे पेड़ की डालियाँ फल आने पर झुक जाती हैं, वैसे ही हमें भी विनम्र बनना चाहिए। हमें कभी घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि हमेशा नम्रता से व्यवहार करना चाहिए।
इसके बाद कवि कहते हैं—
“सूरज की किरणों से सीखो जगना और जगाना”
यहाँ हमें सिखाया गया है कि हमें सूरज की तरह समय पर उठना चाहिए और दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए। सूरज जैसे पूरे संसार को प्रकाश देता है, वैसे ही हमें भी दूसरों के जीवन में रोशनी फैलानी चाहिए।
“लता और वृक्षों से सीखो सबको गले लगाना”
इन पंक्तियों में कवि हमें प्रेम और अपनापन सिखाते हैं। जैसे लताएँ और पेड़ एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, वैसे ही हमें भी सभी लोगों के साथ प्रेम और भाईचारे से रहना चाहिए।
आगे कवि कहते हैं—
“दीपक से सीखो जितना हो सके अंधेरा हरना”
दीपक अंधेरे को दूर करता है। इसी तरह हमें भी दूसरों के दुख और समस्याओं को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। हमें समाज में अच्छाई फैलानी चाहिए।
“पृथ्वी से सीखो जीवों की सच्ची सेवा करना”
पृथ्वी सभी जीवों का पालन करती है और कभी भेदभाव नहीं करती। इसी प्रकार हमें भी सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए।
“जलधारा से सीखो आगे जीवन-पथ पर बढ़ना”
जलधारा कभी रुकती नहीं, हमेशा आगे बढ़ती रहती है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें भी जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए और कभी हार नहीं माननी चाहिए।
“और धुएं से सीखो हर दम ऊँचे ही पर चढ़ना”
धुआँ हमेशा ऊपर की ओर जाता है। इससे हमें प्रेरणा मिलती है कि हमें भी जीवन में ऊँचाइयों तक पहुँचने का प्रयास करना चाहिए।
अंत में कवि कहते हैं—
“सत्पुरुषों के जीवन से सीखो चरित्र निज गढ़ना, अपने गुरु से सीखो बच्चों उत्तम विद्या पढ़ना”
इसका अर्थ है कि हमें महान लोगों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने चरित्र को अच्छा बनाना चाहिए। साथ ही हमें अपने गुरुजनों से अच्छी शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए।
निष्कर्ष / शिक्षा :
यह कविता हमें सिखाती है कि हमें अपने आसपास की हर चीज़ से कुछ न कुछ अच्छा सीखना चाहिए। हमें मुस्कुराना, विनम्र रहना, सच्चाई अपनाना, दूसरों की मदद करना और हमेशा आगे बढ़ना सीखना चाहिए।
इनसे सीखो कविता का वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) फूलों से हमें क्या सीखना चाहिये ?
Ans:-हँसना
(ख) दीपक हमें क्या सिखाते हैं?
Ans:-अँधेरा हरना
(ग) पृथ्वी से हमें क्या शिक्षा लेनी चाहिए?
Ans:-सच्ची सेवा करना
इनसे सीखो कविता का लघुत्तरीय प्रश्न
(क) पेड़ों की झुकी डालियाँ हमें क्या सिखाती हैं?
उत्तर: पेड़ों की झुकी डालियाँ हमें विनम्रता और नम्रता से रहना सिखाती हैं।
(ख) सूरज की किरणें हमें क्या शिक्षा देती हैं?
उत्तर: सूरज की किरणें हमें जगना और दूसरों को जगाने की प्रेरणा देती हैं।
(ग) अपने गुरु से हमें क्या सीखना चाहिए?
उत्तर: अपने गुरु से हमें उत्तम विद्या और नैतिक जीवन जीने की शिक्षा लेनी चाहिए।
(घ) हमारा चरित्र कौन गढ़ता है?
उत्तर: हमारा चरित्र सत्पुरुषों के जीवन और उनके आचरण से गढ़ता है।
इनसे सीखो कविता का बोधमूलक प्रश्नों के उत्तर:
(क) हमारे जीवन में सत्पुरुष और गुरु का क्या योगदान है? स्पष्ट करें।
उत्तर: हमारे जीवन में सत्पुरुष और गुरु का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सत्पुरुष हमें अपने जीवन से नैतिकता, सच्चाई और प्रेरणा प्रदान करते हैं। वहीं, गुरु हमें शिक्षा, मार्गदर्शन और जीवन में सही दिशा दिखाने का कार्य करते हैं।
(ख) दीपक की क्या विशेषता है? हमें उससे क्या शिक्षा लेनी चाहिए?
उत्तर: दीपक की विशेषता है कि वह स्वयं जलकर अंधकार को दूर करता है। हमें दीपक से यह शिक्षा लेनी चाहिए कि अपने सामर्थ्य के अनुसार दूसरों की मदद करें और अज्ञान का अंधकार दूर करें।
(ग) ‘इनसे सीखो’ कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘इनसे सीखो’ कविता का मूल भाव यह है कि प्रकृति, गुरु, और सत्पुरुषों से प्रेरणा लेकर हमें अपने जीवन को मूल्यवान बनाना चाहिए। यह कविता हमें विनम्रता, सेवा, मेहनत, और नैतिकता का महत्व समझाती है।
(घ) ‘इनसे सीखो’ कविता में किस-किस से क्या सीखने की प्रेरणा दी गई है?
उत्तर: इस कविता में फूलों से हँसना, भौरों से गाना, पेड़ों से झुकना, दीपक से अंधेरा हरना, और पृथ्वी से सेवा करने की प्रेरणा दी गई है।
इनसे सीखो कविता का निर्देशानुसार उत्तर:
(क)फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना, तरु की झुकी डलियों से नित सीखो शीश झुकाना।
(i) पाठ और कवि का नाम बताइए।
उत्तर: पाठ का नाम ‘इनसे सीखो’ और कवि का नाम ‘श्रीधर पाठक’ है।
(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि हमें फूलों की तरह विनम्र रहना चाहिए और दूसरों के प्रति आदर और सम्मान दिखाना चाहिए।
(ख) जलधारा से सीखो आगे जीवन-पथ पर बढ़ना, और धुएं से सीखो हर दम ऊँचे ही पर चढ़ना।
(i) जीवन पथ से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जीवन पथ से कवि का तात्पर्य है जीवन की यात्रा और उसमें आने वाली कठिनाइयों को पार करके निरंतर आगे बढ़ना।
(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि हमें जलधारा की तरह हर बाधा को पार करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
notice : इनसे सीखो कविता श्रीधर पाठक ने लिखा है। इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के साहित्य मेला पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।





