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हजारी प्रसाद द्विवेदी
कवि/लेखक का परिचय (हजारी प्रसाद द्विवेदी):
हजारी प्रसाद द्विवेदी हिन्दी साहित्य के महान निबंधकार, आलोचक और विद्वान थे। उनका जन्म सन् 1907 ई० में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था (पाठ में 1900 दिया है, पर प्रचलित जानकारी 1907 है)। वे संस्कृत, हिन्दी और भारतीय संस्कृति के गहरे ज्ञाता थे। उन्होंने हिन्दी साहित्य को नई दिशा दी और अपने विचारों से समाज को जागरूक किया।
भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया। उनकी प्रमुख रचनाओं में अशोक के फूल, कल्पलता, बाणभट्ट की आत्मकथा, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा आदि शामिल हैं। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और विचारपूर्ण होती है। उनका निधन सन् 1979 ई० में हुआ।
पाठ का सारांश (क्या निराश हुआ जाए):
इस निबंध में लेखक ने समाज में फैल रही बुराइयों के बावजूद आशा और सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश दिया है। लेखक बताते हैं कि आज के समय में समाचार पत्रों में ठगी, भ्रष्टाचार, चोरी और धोखाधड़ी की खबरें अधिक देखने को मिलती हैं। इससे ऐसा लगता है कि जैसे समाज में ईमानदारी और सच्चाई समाप्त हो गई हो। लोग एक-दूसरे पर संदेह करने लगे हैं और हर व्यक्ति में दोष ही खोजे जा रहे हैं।
लेखक यह स्वीकार करते हैं कि वर्तमान समय में ईमानदार और मेहनती लोग कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जबकि बेईमान लोग तरक्की करते दिखाई देते हैं। इससे समाज में निराशा का माहौल बन जाता है। लेकिन लेखक यह भी कहते हैं कि यह स्थिति स्थायी नहीं है, बल्कि मनुष्य द्वारा बनाई गई नीतियों और व्यवस्थाओं की कुछ कमियों का परिणाम है।
लेखक भारत की महान परंपरा और आदर्शों की याद दिलाते हैं। वे कहते हैं कि भारतवर्ष ने हमेशा सच्चाई, ईमानदारी, संयम और नैतिकता को महत्व दिया है। यहाँ भौतिक सुख-सुविधाओं से अधिक आंतरिक मूल्यों को श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए यह मान लेना गलत होगा कि ये मूल्य पूरी तरह समाप्त हो गए हैं।
निबंध में लेखक अपने जीवन के कुछ अनुभवों का भी वर्णन करते हैं। एक घटना में रेलवे का एक कर्मचारी उनकी गलती से दिए गए अतिरिक्त पैसे वापस लौटा देता है। दूसरी घटना में बस खराब होने पर कंडक्टर यात्रियों के लिए दूसरी बस और बच्चों के लिए दूध-पानी की व्यवस्था करता है। ये घटनाएँ यह साबित करती हैं कि आज भी समाज में ईमानदारी, दया और मानवता जीवित है।
लेखक कहते हैं कि केवल बुराइयों पर ध्यान देना उचित नहीं है। समाज में अच्छाइयाँ भी उतनी ही मौजूद हैं, लेकिन हम उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यदि हम केवल नकारात्मक घटनाओं को ही याद रखेंगे, तो जीवन दुखद हो जाएगा। इसलिए हमें सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
अंत में लेखक यह निष्कर्ष निकालते हैं कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, हमें निराश नहीं होना चाहिए। समाज में सुधार संभव है और आशा की किरण अभी भी मौजूद है। हमें सच्चाई और ईमानदारी पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
मुख्य संदेश:
यह निबंध हमें सिखाता है कि जीवन में कठिनाइयों और बुराइयों के बावजूद आशा नहीं छोड़नी चाहिए। समाज में अच्छाई आज भी मौजूद है, बस हमें उसे पहचानने की जरूरत है।
क्या निराश हुआ जाए का वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
(क) एक बड़े आदमी ने किसे सुखी कहा है?
(i) जो कुछ करता है
(ii) जो कुछ नहीं करता ✅
(iii) इनमें से कोई नहीं
(ख) कौन सा चित्त सब समय आदर्शों द्वारा चालित नहीं होता?
(i) व्यक्ति-चित्त ✅
(ii) पशु-चित्त
(iii) इनमें से कोई नहीं
(ग) आजकल हर व्यक्ति किस दृष्टि से देखा जा रहा है?
(i) प्रेम की दृष्टि से
(ii) शक की दृष्टि से ✅
(iii) इनमें से कोई नहीं
(घ) भारतवर्ष किसे सदा धर्म के रूप में देखता आ रहा है?
(i) कानून को ✅
(ii) रंगून को
(iii) इनमें से कोई नहीं
(ङ) किस में रस लेना कुरी बात है?
(i) अच्छाई में
(ii) बुराई में ✅
(iii) इनमें से कोई नहीं
क्या निराश हुआ जाए का लघुउत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
(क) लेखक के अनुसार आज के समाज में कौन-कौन सी बुराइयाँ दिखायी देती हैं?
उत्तर: लेखक के अनुसार समाज में भ्रष्टाचार, असत्य, लालच, बेईमानी, संवेदनहीनता, और नैतिक मूल्यों में गिरावट जैसी बुराइयाँ देखने को मिलती हैं।
(ख) क्या कारण है कि आज हर आदमी में दोष अधिक दिखायी दे रहे हैं?
उत्तर: आजकल लोग दूसरों की कमियों को जल्दी पकड़ते हैं लेकिन अपने दोषों को अनदेखा करते हैं। साथ ही, नकारात्मक सोच और समाज में अविश्वास की भावना बढ़ने से दोष ज्यादा दिखते हैं।
(ग) लेखक दोषों का पर्दाफाश करते समय किस बात से बचने के लिए कहता है?
उत्तर: लेखक कहता है कि दोषों को उजागर करते समय हमें बिना किसी ठोस प्रमाण के आरोप नहीं लगाने चाहिए और सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए।
(घ) कुछ यात्री बस ड्राइवर को मारने के लिए क्यों उतारू हो गए थे?
उत्तर: यात्रीयो को बस ड्राइवर के ऊपर सक था कि बस ड्राईवर उन्हें धोका दे रहा था । यात्रियों को लग रहा था की बस ड्राईवर डाकू से मिला हुआ हैं l
(ङ) टिकट बाबू के चेहरे पर विचित्र संतोष की गरिमा लेखक को चकित क्यों कर गई?
उत्तर: लेखक को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि टिकट बाबू जैसे इमानदार लोग आज भी ईमानदारी को कायम रखे हैं ,वरना आज के जमाने में चारो तरफ बईमान लोग भरे हैं ।

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क्या निराश हुआ जाए का बोधमूलक प्रश्न (Comprehension Questions)
(क) हमारे महापुरुषों के सपनों के भारत का क्या स्वरूप था?
उत्तर: हमारे महापुरुषों ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जहाँ समानता, स्वतंत्रता, न्याय और भाईचारे की भावना हो।
(ख) भ्रष्टाचार आदि के विरुद्ध आक्रोश प्रकट करना किस बात को प्रमाणित करता है?
उत्तर: यह प्रमाणित करता है कि समाज में अभी भी नैतिकता और न्याय की भावना जीवित है। लोग अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए तैयार हैं।
(ग) जीवन के महान मूल्यों के प्रति आज हमारी आस्था क्यों हिलने लगी है?
उत्तर: समाज में बढ़ते भ्रष्टाचार, लालच और अनैतिकता के कारण लोगों का विश्वास जीवन के महान मूल्यों से हटता जा रहा है।
(घ) जो आज उथल-पुथल दिखाई दे रहा है, वह कहाँ तक मनुष्य निर्मित नीतियों की त्रुटियों की देन है?
उत्तर: यह समाज में बने गलत कानूनों, नीतियों और व्यवस्था की कमियों का परिणाम है, जिससे असमानता और अशांति बढ़ रही है।
(ङ) रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भगवान से क्या प्रार्थना की और क्यों?
उत्तर: रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने प्रार्थना की कि भारत एक जागरूक, साहसी और नैतिकता से भरा देश बने, जहाँ लोग स्वतंत्र और सत्य के मार्ग पर चलें।
(च) वर्तमान परिस्थितियों में भी हताश हो जाना ठीक नहीं है। इस कथन की पुष्टि में लेखक ने क्या-क्या उदाहरण दिए हैं?
उत्तर: लेखक ने उदाहरण दिए कि इतिहास में कई बार भारत कठिन दौर से गुजरा है, लेकिन संघर्ष और सकारात्मकता के बल पर आगे बढ़ा है।
(छ) महान भारतवर्ष को पाने की संभावना बनी हुई है और बनी रहेगी। लेखक के इस कथन से हमें क्या संदेश मिलता है?
उत्तर: यह संदेश मिलता है कि यदि हम अपने नैतिक मूल्यों और ईमानदारी पर दृढ़ रहेंगे तो भारत का भविष्य उज्ज्वल बना रहेगा।
क्या निराश हुआ जाए का विचार और कल्पना (Creative Thinking)
(क) विषम से विषम परिस्थितियों में भी मनुष्य को निराश नहीं होना चाहिए।
उत्तर: मनुष्य को जीवन में कठिनाइयों से डरकर हार नहीं माननी चाहिए। संघर्ष ही सफलता की कुंजी है।
क्या निराश हुआ जाए का भाषा-बोध (Grammar and Language Comprehension)
(क) निम्नलिखित वाक्यों में से सर्वनाम छाँटते हुए उनके प्रकार बताइए:
- मेरा मन कभी-कभी बैठ जाता है। (निजवाचक सर्वनाम)
- किसमें दोष नहीं होता? (प्रश्नवाचक सर्वनाम)
- इन दिनों कुछ ऐसा माहौल बना है। (निश्चयवाचक सर्वनाम)
- आज भी वह मनुष्य से प्रेम करता है। (पुरुषवाचक सर्वनाम)
- रात के कोई दस बजे होंगे। (अनिश्चयवाचक सर्वनाम)
(ख) विलोम शब्द लिखिए:
- ईमानदार – बेईमान
- सुखी – दुखी
- गुण – दोष
- निश्चय – अनिश्चय
- रोजगार – बेरोजगार
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