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बादल चले गये वे
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बादल चले गये वे 

– त्रिलोचन

बना-बनाकर

चित्र  सलोने

यह सूना आकाश सजाया राग दिखाया

रंग दिखाया

क्षण-क्षण छवि से चित्र चुराया 

बादल चले गये वे।

आसमान अब 

नीला -नीला

एक रंग रस श्याम सजीला  धरती  पिली 

हरी-रसीली

शिशिर प्रभात समुज्क्ल गीला बादल चले गये वे।

दो दिन दुःख का

दो दिन सुख का

दुख-सुख दोनों संगी जग में कभी हास है

कभी अश्रु  है

जीवन नक्ल तरंगी जग में बादल चले गये वे

दो दिन पाहुन जैसे रहकर ॥

बादल चले गये वे का वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

(क) किसने अपने चित्रों से आकाश सजाया?
(i) वर्षा ने
(ii) सूर्य ने
(iii) तारों ने
(iv) बादल ने ✅

(ख) बादल के जाने के बाद आसमान कैसा दिखाई देता है?
(i) हरा
(ii) सफेद
(iii) काला
(iv) नीला ✅

(ग) इस जग में मनुष्य के संगी कौन हैं?
(i) सुख
(ii) दुःख
(iii) सुख और दुःख दोनों ✅
(iv) कोई नहीं



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बादल चले गये वे का लघुत्तरीय प्रश्न

(क) कौन अपने छवि से चित्त चुरा लेता है?
उत्तर: बादल अपने सुंदर रंगों और छवियों से चित्त चुरा लेते हैं।

(ख) बादलों ने आकाश को कैसे सजाया?
उत्तर: बादलों ने अपने सुंदर चित्र, रंग और छवियों से आकाश को सजाया।

(ग) पाहुन किसे कहा गया है?
उत्तर: बादलों को पाहुन (मेहमान) कहा गया है क्योंकि वे कुछ समय के लिए ही रहते हैं।

(घ) शिशिर ऋतु का प्रभात कैसा होता है?
उत्तर: शिशिर ऋतु का प्रभात चमकीला और गीला होता है।


बादल चले गये वे का बोधमूलक प्रश्न

(क) आसमान अब नीला-नीला क्यों दिखाई देने लगा है?
उत्तर: बादलों के चले जाने के बाद आसमान साफ़ और नीला दिखाई देने लगा है।

(ख) बादलों ने सूने आकाश को किस प्रकार सजाया?
उत्तर: बादलों ने आकाश को अपने सुंदर रंगों, आकृतियों और छवियों से सजाया।

(ग) सुख-दुख जीवन के संगी क्यों कहे गए हैं?
उत्तर: सुख और दुःख दोनों ही जीवन में आते-जाते रहते हैं, इसलिए वे जीवन के संगी कहे गए हैं।

(घ) “बादल चले गये वे” कविता का मूल भाव लिखिए।
उत्तर: इस कविता का मूल भाव यह है कि बादल जीवन की नश्वरता का प्रतीक हैं। वे सुख-दुख के समान कुछ समय के लिए आते हैं और चले जाते हैं।


बादल चले गये वे का निर्देशानुसार उत्तर दीजिए

(क) “बना-बना कर चित्र सलोने, यह सूना आकाश सजाया।”

(i) पाठ और कवि का नाम बताइए।
उत्तर: पाठ का नाम “बादल चले गये वे” और कवि का नाम त्रिलोचन है।

(ii) उपर्युक्त पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति में बताया गया है कि बादलों ने अपनी सुंदर आकृतियों से आकाश को सजा दिया।

(ख) “शिशिर प्रभात समुज्ज्वल गीला बादल चले गये वे।”

(i) ‘शिशिर प्रभात’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिशिर ऋतु की सुबह ठंडी, ताजगी भरी और ओस से गीली होती है।

(ii) उपर्युक्त पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति में बताया गया है कि शीत ऋतु की सुबह ठंडी, चमकीली और नमी भरी होती है।


बादल चले गये वे का भाषा-बोध

(क) निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए।

  • आसमान: गगन, नभ, व्योम
  • बादल: मेघ, जलद, पयोधर
  • धरती: भूमि, वसुंधरा, पृथ्वी
  • अश्रु: आँसू, नयनजल, जलधारा
  • सुख: आनंद, हर्ष, प्रसन्नता

(ख) निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए।

  • राग: विराग
  • एक: अनेक
  • दिन: रात
  • जीवन: मृत्यु
  • श्याम: श्वेत

बादल चले गये वे का विचार एवं कल्पना

(क) कल्पना कीजिए कि जब बादल आकाश में होते हैं तो किस प्रकार के चित्र बनते हैं?
उत्तर: जब बादल आकाश में होते हैं, तो वे विभिन्न आकृतियों जैसे हाथी, घोड़ा, पक्षी, पर्वत, और वृक्ष के समान दिखाई देते हैं।

(ख) वर्षा ऋतु के बाद किस ऋतु का आगमन होता है?
उत्तर: वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु का आगमन होता है। इस ऋतु में आसमान साफ़ हो जाता है और मौसम सुहावना रहता है।

notice :बादल चले गये वे कविता  त्रिलोचन ने लिखा है। इस article लिखने के लिए हमने west bengal sylabus के साहित्य मेला पुस्तक का help लिए। हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षित करना है। Google से गुजारिश है हमारे post को रैंक करे और छात्रों को शिक्षित करने में हमारी मदद करे।

 

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